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लखनऊ के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत, परिवार ने उठाए गंभीर सवाल; 51 का बिल पहुंचा 17 लाख रुपये

कंचन गुप्ता की मौत के बाद परिवार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, ERCP प्रक्रिया के बाद आंत में छेद होने से बिगड़ी हालत; अस्पताल का अंतिम बिल शुरुआती अनुमान से 33 गुना अधिक…

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान 43 वर्षीय कंचन गुप्ता की मौत का मामला सामने आया है। परिवार की ओर से जारी एक विस्तृत विवरण में इलाज के दौरान कथित लापरवाही, जांच में देरी, बार-बार असफल चिकित्सकीय हस्तक्षेप और अस्पताल के बढ़ते बिल पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। परिवार का दावा है कि एक सामान्य प्रक्रिया के लिए अस्पताल में भर्ती कराई गईं कंचन की हालत बिगड़ती चली गई और करीब एक महीने बाद उनकी मौत हो गई। हालांकि, इन आरोपों पर अस्पताल का पक्ष सामने आना बाकी है।

परिवार के मुताबिक, कंचन गुप्ता को अप्रैल 2026 में पित्त की नली में पथरी होने के संदेह पर अपोलोमेडिक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी पित्त की नली में पथरी का संदेह एमआरसीपी (MRCP) स्कैन में सामने आया था। इसके बाद डॉक्टरों ने ईआरसीपी (ERCP) प्रक्रिया करने का फैसला किया। परिवार का कहना है कि इस प्रक्रिया से पहले कंचन को फिट घोषित किया गया था और उन्हें कुछ ही घंटों में प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद थी।

ERCP के बाद आंत में छेद होने का दावा

परिवार द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, 21 अप्रैल को ईआरसीपी प्रक्रिया के दौरान पित्त की नली में पथरी नहीं मिली। इसी दौरान कंचन की आंत की दीवार में छेद (परफोरेशन) हो गया। परिवार का आरोप है कि इलाज कर रहे डॉक्टरों ने इस जटिलता को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें आश्वस्त किया कि स्थिति संभाली जा सकती है।

परिवार का दावा है कि इसके बाद कंचन को जनरल वार्ड में एंटीबायोटिक्स पर रखा गया। अगले दो दिनों तक उनकी हालत बिगड़ती रही, लेकिन 48 घंटे तक सीटी स्कैन नहीं कराया गया। परिवार के मुताबिक, 23 अप्रैल को जब सीटी स्कैन हुआ, तब तक संक्रमण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका था। उस समय उनके शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़कर 41,000 हो गई थी। इसके बाद उन्हें आईसीयू में स्थानांतरित किया गया।

परिवार का कहना है कि संक्रमण के कारण पेट में जमा द्रव निकालने के लिए ड्रेन लगाए गए, लेकिन आंत में हुआ छेद बंद नहीं हो पाया। 25 अप्रैल को छेद बंद करने के लिए मेटल स्टेंट के जरिए एक और एंडोस्कोपिक प्रयास किया गया, लेकिन वह भी सफल नहीं हुआ।

सात दिन बाद हुई इमरजेंसी सर्जरी

परिवार के विवरण के अनुसार, 28 अप्रैल को कंचन की आपातकालीन ओपन सर्जरी की गई। आरोप है कि तब तक आंत की दीवार गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और उसकी मरम्मत संभव नहीं रह गई थी। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने संक्रमण से हुए नुकसान को रोकने की कोशिश की, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

कंचन की हालत लगातार बिगड़ती रही। परिवार के मुताबिक, 20 मई को लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में उनका निधन हो गया। परिवार की ओर से साझा किए गए मृत्यु प्रमाणपत्र में मौत का कारण “Post-ERCP Duodenal Perforation leading to Multiple Organ Failure” बताया गया है। इसका अर्थ है कि ईआरसीपी के बाद ग्रहणी में हुए छेद के कारण कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया।

51 हजार का शुरुआती अनुमान, अंतिम बिल 17 लाख से अधिक

इस मामले में अस्पताल के बिल को लेकर भी परिवार ने सवाल उठाए हैं। परिवार के मुताबिक, ईआरसीपी प्रक्रिया का शुरुआती अनुमान करीब 51 हजार रुपये था। लेकिन इलाज के दौरान बिल बढ़ता गया और 5-6 मई तक यह लगभग 17 लाख रुपये पहुंच गया।

परिवार का दावा है कि अस्पताल ने उन्हें आईसीयू में तीन से चार सप्ताह तक रखने की संभावना बताई थी और प्रतिदिन का खर्च डेढ़ से दो लाख रुपये के बीच बताया गया था। परिवार के अनुसार, कंचन की जान बचने की उम्मीद कम होने के बावजूद इलाज जारी रहा और खर्च बढ़ता गया। बाद में उन्हें दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने की बात कही गई।

परिवार द्वारा साझा किए गए विवरण में अपोलोमेडिक्स अस्पताल का अंतिम बिल 17,04,252 रुपये बताया गया है। यह राशि शुरुआती अनुमान 51 हजार रुपये से लगभग 33 गुना अधिक है।

परिवार ने मांगा जवाब और जवाबदेही

परिवार के मुताबिक, कंचन अपने घर की इकलौती महिला सदस्य थीं, जो परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रही थीं। वह 21 और 13 वर्ष के अपने दो बच्चों की देखभाल करती थीं और 82 वर्षीय ससुर की भी जिम्मेदारी उठाती थीं। परिवार का कहना है कि वह एक सामान्य प्रक्रिया के लिए अस्पताल गई थीं, लेकिन वापस घर नहीं लौट सकीं।

परिवार अब इलाज के दौरान हुई घटनाओं, आंत में छेद का समय पर पता लगाने में कथित देरी, असफल उपचार प्रक्रियाओं और बढ़ते खर्च को लेकर स्पष्ट जवाब चाहता है।

इस मामले में परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अस्पताल का पक्ष सामने आना जरूरी है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आंत में छेद किन परिस्थितियों में हुआ, जटिलता का पता लगाने और उसका उपचार करने में क्या कदम उठाए गए तथा इलाज के दौरान बिल किस आधार पर बढ़ा। अस्पताल की प्रतिक्रिया और किसी स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

देखें वीडियो…

पत्र भी पढ़िए…

Hindi newspaper article detailing events at Apollo Hospitals, Lucknow, about a medical case involving Kanchan Gupta; includes procedures, patient story and outcomes.
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