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आज के अखबार : प्रचार कर रहे हैं कि अभिनेता टाइगर श्रॉफ के शूटर कोटा में ट्रेन से गिरफ्तार कर लिए गए!

Front-page newspaper with a large headline about CCTV showing shooters came for an actor; byline reads Manish Kumar Pathak, Mumbai, October 19, with INSIDE teaser box on the right.

इंडियन एक्सप्रेस ने लीड के साथ छपी एक खबर में बताया है कि सीसीटीवी के अनुसार, शूटर गए हफ्ते भी आए थे। अब आप समझिए कि कितने निश्चिन्त थे और क्यों पकड़ लिए गए होंगे।  

संजय कुमार सिंह

दिन-दहाड़े मुंबई जैसे शहर में एक लोकप्रिय अभिनेता पर हमला करने वाले अगर कैमरे में कैद हो गए तो उनकी गिरफ्तारी की खबर बहुत बड़ी नहीं है। वैसे भी जो गिरफ्तार किए गए वे हमलावर हैं कि नहीं – निश्चित रूप से तय करने का कोई तरीका नहीं है। अदालती प्रक्रिया खासी लंबी है और तमाम मामलों में ऐसे पकड़े गए अपराधी छूट जाते हैं। कहा जा सकता है कि ऐसे मामलों में जनता का गुस्सा शांत करने के लिए गिरफ्तारी का प्रचार किया जाता है और फिर सब वैसे ही हो जाता है। कितने ही मामले हैं जिसमें अपराधी कह कर गिरफ्तार किए गए अभियुक्त अदालत से बरी हो गए और यह पता ही नहीं चला कि अपराध किसने किया।

लोयालुहान देश में संदिग्ध मौत की जांच नहीं कराने के लिए प्रभावशाली लोग परेशान होते देखे गए हैं। इसलिए टाइगर श्रॉफ के शूटर को कोटा में गिरफ्तार किया जाना खबर जरूर है लेकिन इतनी बड़ी भी नहीं। इसके बावजूद यह दि इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स में लीड या सेकेंड लीड है। हि्दुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया में मणिपुर की खबर लीड या सेकेंड लीड है लेकिन इंडियन एक्सप्रेस में मणिपुर की खबर नीचे है। लीड अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की खबर है। पूर्व सूचना के अनुसार, द हिन्दू आज नहीं आया है।

कलकत्ता के द टेलीग्राफ की आज की लीड चोरबगान पूजा समिति में पूजा से पहले के बदलाव हैं। टाइगर श्रॉफ पर हमला और हत्या की कोशिश के बारे में द टेलीग्राफ ने लिखा है कि इस मामले में जेल में बंद डॉन पर नजर है। पेश है दोनों खबरों के शुरुआती अंश। पहले टाइगर श्रॉफ पर हमले की खबर –  रविवार शाम को बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए जानलेवा हमले ने एक बार फिर ‘हिंदू डॉन‘ लॉरेंस बिश्नोई (33) को चर्चा में ला दिया है। बिश्नोई, भाजपा शासित गुजरात की साबरमती जेल से अपना नेटवर्क चला रहा है।

मुंबई के जुहू इलाके में, बाइक पर सवार तीन हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ की BMW कार पर कई राउंड फायरिंग की। अभिनेता तो सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर फिरदौस और एक ऑटो-रिक्शा चालक चौहान को गोली लगी है। इसके कुछ ही समय बाद, अमेरिका में रहने वाले गैंगस्टर और बिश्नोई के साथी अनिल पंडित ने ऑडियो मैसेज और ऑनलाइन पोस्ट के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस मामले में इस गैंग के शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। एक ऑडियो मैसेज में बॉलीवुड हस्तियों को चेतावनी दी गई कि वे अभिनेता सलमान खान के साथ काम न करें। मैसेज भेजने वाले ने कहा, “सबका नंबर आएगा।”

भगदड़ वाली पूजा समिति के बारे में खबर है, …. पुरानी पूजा समिति के कई सदस्यों ने बताया कि भगदड़ प्रभावित चोरबगान में एक महीने के भीतर दो बार पूजा समिति का गठन किया गया। कई सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया, जिससे नए लोगों को शामिल होने का मौका मिला। इनमें भाजपा से जुड़े कई लोग शामिल हैं। नई समिति के सदस्यों में भाजपा के जोरासांको विधायक विजय ओझा, सुवेंदु अधिकारी के भतीजे देबदीप अधिकारी और पार्टी के उत्तर कलकत्ता जिला अध्यक्ष तमाघना घोष शामिल हैं। पुरानी समिति के सदस्यों के अनुसार, एक महीने के भीतर दो बार ‘खूंट पूजा‘ (पूजा की शुरुआत) भी की गई—एक बार पुरानी समिति द्वारा और दूसरी बार नई समिति द्वारा।

शनिवार को मची भगदड़ में 19 लोगों की जान गई। इस मामले में नई पूजा समिति के चार सदस्यों समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। लेकिन, भाजपा के किसी भी बड़े नेता पर कोई आंच नहीं आई है। स्थानीय लोगों और इस हादसे में बचे लोगों का कहना है कि भगदड़ खराब इंतजामों और भीड़ को नियंत्रित करने में नाकामी के कारण हुई। उन्होंने बताया कि बाहर निकलने का रास्ता संकरा और घुमावदार था, रोशनी की व्यवस्था बहुत खराब थी, और ‘ढांचा गिरने‘ की घोषणा ने लोगों के बीच अफरा-तफरी (पैनिक) पैदा कर दी।

आज अमर उजाला के साथ दैनिक भास्कर में भी यह खबर लीड है। हालांकि शीर्षक में बताया गया है कि हत्या की सुपरी सिर्फ 34 हजार रुपए की थी और लॉरेंस गैंग ने उन्हें विदेश में बसाने की पेशकश की थी। कहने की जरूरत नहीं थी कि इससे पता चलता है कि बेरोजगारी और खराब आर्थिक स्थिति के कारण देश के युवा किस स्थिति में पहुंच गए हैं। खबर अगर होनी थी तो आज इसपर हो सकती थी। यह खबर उन लोगों की आंख खोल सकती है जो अपने आगे नहीं सोचते हैं और सिर्फ अपने लिए सुविधाएं जुटाते हैं। समझते हैं कि उनके पास पैसे होंगे तो वे चैन से जी लेंगे। दूसरों की परवाह करने की जरूरत नहीं है। सच्चाई यह है कि अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी होने के बाद हर किसी को उसके लिए काम करना चाहिए जो खुद अपना भला नहीं कर सकता है। यह काम सरकार, गैर सरकारी संगठन भी कर सकते हैं लेकिन इन दिनों उनकी कहानी अलग है। 

आज देशबन्धु की लीड है, कॉक्रोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत बढ़ी। पार्टी ने रिहाई में जान-बूझकर देरी करने का आरोप लगाया है। आज एक खबर यह भी है कि नेहा बोरा पीस बांड साइन करने के लिए दबाव दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि उत्तराखंड की धामी सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगी। मणिपुर हिन्सा में चार लोगों की हत्या हुई। आज एक दिलचस्प खबर, हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा पर हाईकोर्ट की रोक से संबंधित है। अमर उजाला की खबर के अनुसार, आजीविका के हक से कम नहीं है चुनाव लड़ने का अधिकार। अगर ऐसा है तो ऐसे-वैसे कारणों से पर्ची खारिज किए जाने, जीते हुए उम्मीदवार की सदस्यता खत्म कर दिए जाने जैसे तमाम मामले हैं और पिछले कई वर्षों में ऐसे उदाहरण हैं जिसमें भाजपा के पक्ष में फैसला हुआ है। ऐसा एक खास विचारधारा के लोगों के कारण हो सकता है। मीडिया का काम है कि इनका खुलासा करे या कम से कम इनकी चर्चा करे। पहले मीडिया में ऐसे विषयों पर चर्चा होती थी अब नहीं होती।

अमर उजाला में एक खबर दिल्ली एनसीआर की हवा खराब होने और एक्यूआई 200 पार होने की भी है। यह हर साल का रोना है और सरकार इस मामले में कुछ ठोस नहीं कर पा रही है। इस लिहाज से यह खबर भी महत्वपूर्ण है लेकिन प्रमुखता सरकारी प्रचार को दी गई है। दैनिक भास्कर की सेकेंड लीड है, हवाई किराये पर सीधे नियंत्रण नहीं करेगी केंद्र सरकार। दिलचस्प यह है कि आपात स्थितियों में किराए की सीमा तय करेगी। मोटे तौर पर इसका मतलब हुआ कि सरकार जनहित की परवाह नहीं करेगी लेकिन अपना नियंत्रण भी बनाए रखना चाहती है। विमान सेवाओं को अपनी नीति, जरूरत या सुविधा के अनुसार काम करने की आजादी नहीं दे रही है। और आजादी तो सोशल मीडिया कंपनियों को भी नहीं है। देशबन्धु की एक खबर के अनुसार, सरकार ने सोशल मीडिया पर सख्त की निगरानी। अपने अनुभव से मैं कह सकता हूं कि सरकार ने ऐसा कानून बना लिया है कि वह अपने खिलाफ सही पोस्ट को भी हटवा देती है और तमाम आपत्तिजनक पोस्ट (या खबरों) पर भी कार्रवाई नहीं होती है। तथ्यात्मक रूप से सही पोस्ट को हटवाने का कोई मतलब नहीं है और अगर वह जनहित के खिलाफ है तो पोस्ट करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अभी ऐसा कुछ नहीं है। सरकार (असल में लाभार्थियों की) मनमानी चल रही है। 

आज जब मेरे ज्यादातर अखबारों में यह प्रचार प्रमुखता से है कि टाइगर श्रॉफ के शूटर कोटा में गिरफ्तार कर लिए गए। इससे पहले कोलकाता के पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 मौत की खबर थी तो बता रहे थे कि बारिश के कारण भीड़ हो गई, आयोजकों ने व्यवस्था ठीक नहीं की थी इसलिए भगदड़ मची या मौतें हुईं या उन्हें टाला नहीं जा सका। फिर प्रचार हुआ कि सात लोग गिरफ्तार किए गए हैं। 25 लाख रुपए देने की घोषणा राज्य सरकार और दो लाख रुपए देने की घोषणा प्रधानमंत्री कर चुके हैं। कम अखबारों ने लिखा कि सरकार बदलने के साथ पूजा आयोजित करने वाली समिति के लोग बदल गए हैं और हादसे के लिए जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उनमें भाजपा से जुड़े लोग नहीं हैं। यही भाजपा और मीडिया की प्रचार नीति है। सरकार, उसके सहयोगी संगठन वेतन भोगी और सहयोगी प्रचारक यही सुनिश्चित करते हैं कि सरकार की बदनामी नहीं हो। ऐसी खबरें न छपें जिससे लगे कि सरकार कहीं चूक रही है।

दूसरी ओर, 2014 से पहले जो कुछ भी होता था उसके लिए सरकार जिम्मेदार होती थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो उस समय विपक्ष के नेता थे सरकार की आलोचना का कोई मौका नहीं चूकते थे। अखबारों में इसे प्रमुखता से छापा जाता था। निर्भया की मौत पर जो आंदोलन हुआ उसे किसी ने देश विरोधी नहीं कहा, किसी ने रोकने की कोशिश नहीं की और गिरफ्तारियां मुझे याद नहीं है। अब तिरंगा फहराने पर गिरफ्तारी ही नहीं हुई, जेल भी हो गई। इसे सही भी ठहराया जा रहा है और बताया जा रहा है कि कहां क्या गलती हुई। अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हमले की कोशिश का जिम्मा जेल में बंद गैंगस्टर के गिरोह ने लिया है और मुद्दा है कि जेल से कोई गिरोह कैसे काम कर पा रहा है और सरकार उसपर कुछ बोल रही है या नहीं। खबरों से इसका पता नहीं चल रहा है।

जहां तक कार्रवाई होने, संदिग्धों के पकड़े जाने की बात है, कई मामलों में कुछ नहीं हुआ। काफी समय होने के बाद भी कुछ नहीं हुआ है। उसका ना फॉलोअप है ना उसकी याद है। कश्मीर से आतंकवाद खत्म करने का दावा किया जा चुका है लेकिन एक पुलिस अफसर को आतंकियों का साथ देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, क्या हुआ, कोई फॉलो अप नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े होने का दावा करके एक फर्जी अधिकारी कश्मीर सरकार की सेवा लेता था और कश्मीर के कई दौरे कर चुका था। अखबारों ने अभी तक नहीं बताया कि दिल्ली का उसका पता सरकारी घर का था या निजी। सरकार सिर्फ नैरेटिव बनाती है। कोई मुद्दा खिलाफ हो तो दूसरा मामला खड़ा कर दो।

चुनाव चोरी से संबंधित तमाम मामलों में कोई खबर नहीं है। राहुल गांधी के आरोपों का जवाब नहीं है। वर्षों बाद चुनाव आयोग ने मशीन से पढ़ने योग्य मतदाता सूची देने की घोषणा की है। अपनी कई गलतियों और मनमानियों को सुधारने की घोषणा कर चुका है लेकिन ये गलतियां हुई क्यों, किसी जवाबदेही है और उसके खिलाफ कार्रवाई के मामले में पूरी तरह सन्नाटा है और सरकार ऐसे ही चलती रही है। आगे भी शायद ऐसे ही चले। अंग्रेजी अखबारों में दि एशियन एज की लीड, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के हवाले से है कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार करार करने के करीब है। यहां सीजेपी के आशुतोष रांका और सौरव दास की जेल अवधि बढ़ाने की खबर सेकेंड लीज है जबकि टाइगर श्रॉफ मामले में संदिग्धों को पकड़े जाने की खबर पहले पन्ने पर नीचे दो कॉलम में है। हालांकि, मणिपुर में तीन लोगों की हत्या की खबर इससे भी नीचे लेकिन तीन कॉलम में है।   

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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