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आईआईएमसी से पढ़े सूरज कुमार की फिल्म ‘पिपलांत्री : ए टेल ऑफ इको-फेमिनिज्म’ की स्पेशल स्क्रीनिंग में जुटे कई साथी पत्रकार!

Poster titled Piplantri: a tale of eco feminism, showing a smiling girl sitting among rocks in a rocky quarry landscape.

विकास मिश्र-

नाम ही जब सूरज हो तो चमकना और प्रकाश देना स्वाभाविक है। ऐसे ही हैं हमारे मित्र सूरज कुमार। आईआईएमसी के हमारे सहपाठी। सूरज की फिल्म ‘पिपलांत्री : ए टेल ऑफ इको-फेमिनिज्म’ की विशेष स्क्रीनिंग का मौका था, सूरज ने इस अवसर पर बुलाया था तो सपरिवार पहुंच गया। कलियुगी कहावत भी है कि दोस्त बुलाए और दोस्त न जाए तो समझो बुढ़ापा आ गया है।

सूरज की इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ गैर फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। 22 सितंबर 2026 को को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने फिल्म के निर्देशक सूरज कुमार को यह पुरस्कार प्रदान किया था।

पिपलांत्री राजस्थान का एक गांव है। कभी खनन माफिया के चंगुल में आकर यह गांव उजाड़ और बंजर हो चुका था। चारों तरफ कंक्रीट या फिर संगमरमर का मलबा। ग्राउंड वाटर 900 फीट के नीचे चला गया था। इस बीच गांव के प्रधान ने इस गांव के कायाकल्प का वीणा उठाया।

एक मुहिम चलाई, जिसके तहत गांव वालों ने शपथ ली कि जिसके घर बेटी होगी, उस घर के लोग 111 पौधे लगाएंगे। किसी भी त्योहार में पौधे लगाए जाएंगे। बच्चों के जन्मदिन पर पौधे लगाए जाएंगे। ये मुहिम रंग लाई और आज यह राजस्थान का सबसे हरियाली वाला इलाका है।

पूरा इलाका हरे पेड़ों से आच्छादित है। लड़कियां यहां पेड़ों को भाई मानकर राखी बांधती हैं। यहां हरे पेड़ नहीं काटे जाते। ग्राउंड वाटर का लेवल 30-40 फीट तक आ गया है। अब यहां पानी पर्याप्त से ज्यादा मात्रा में है।

सूरज ने इसी गांव पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई है। जो पूरी दुनिया को संदेश देती है कि अगर मकसद सही है तो कुछ भी असंभव नहीं। वैसे भी दुनिया की सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण और प्रदूषण की ही है। फिल्म देखते हुए मेरा मन भी किया कि सब कुछ छोड़कर गांव चला जाऊं और इसी तरह की मुहिम में जुटकर गांव को ऐसे ही हरा भरा कर दूं। हालांकि हमारे गांव में हरियाली की कमी नहीं है।

इस जबरदस्त फिल्म में सूरज ने कमाल तो किया ही है। हमारी क्लास मेट अमृता मौर्या ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। कॉन्सेप्ट से लेकर परदे के सामने रहने तक। अमृता ने बहुत अच्छी तरह से इस गांव की कहानी और संघर्ष का बयान किया है।
इस अवसर पर कई मित्रों और प्रियजनों से मिलने का मौका मिल गया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक केजी सुरेश जी से भेंट हो गई।

फिल्म पत्रकार प्रदीप सरदाना, आईआईएमसी की हमारी सीनियर वर्तिका नंदा, सहपाठी और मित्र पवन जिंदल, राजेश भाई, मिहिर रंजन और सौभाग्य से भी मुलाकात हो गई। सूरज कई फिल्में बना चुके हैं और उन्हें खूब सराहना भी मिली है। उनकी आने वाली फिल्म चंडीगढ़ शहर पर है। हम सबको बेसब्री से उसकी प्रतीक्षा है। सूरज भाई को फिल्म पिपलांत्री की स्पेशल स्क्रीनिंग के लिए बहुत बहुत बधाई।

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