Date: 2015-03-26 14:56 GMT+05:30
Subject: COMPLAIN
सर
हिंदुस्तान बरेली में 14 march शनिवार की क्यू सी मीटिंग में जो कुछ हुआ, उसकी ओर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूँ।
1. संपादक श्री अभिमन्यु कुमार सिंह ने कुछ साथियों को कॉलर पकड़ कर बाहर निकालने की धमकी दी।कहा कि कुत्ता बना दूंगा। हरामखोरों की यहाँ जगह नहीं है। यह भी कहा कि यहाँ गद्दार भरे हुए हैं।
2. इस घटना के बाद से तमाम साथियों में गुस्सा है। यह शब्द किसी गाली से कम नहीं हैं। कुछ लोगों ने पूरा मामला वेस्ट यूपी हेड श्री अनिल भास्कर के सामने भी मेल के जरिये रखा। 11 दिन हो गए हैं, लेकिन किसी ने पूछा तक नहीं है।
3. एक साथी चीफ रिपोर्टर पंकज मिश्र इन्हीं सब तनाव की वजह से कल से बीमार भी हो गए। उन्होंने इसकी सूचना भी भास्कर जी को दे दी है। इससे पहले भी पंकज मिश्र को इन्ही संपादक जी की प्रताड़ना से तंग आकर हार्ट अटैक पड़ा था, जो आपकी जानकारी में भी है।
सर, सभी निराश हैं और गुस्से में भी। कोई इनके साथ काम नहीं करना चाहता है। गाली गलौज इनका प्रिय शगल है, जिसके ये बहाने तलाशते रहते हैं।तमाम बार अपने से पहले के साथियों को पुराने संपादको का ‘पाप’ ढोना बताते रहते हैं।
ऑफिस में काम का कोई माहौल नहीं है। गाली खाकर कौन काम करना चाहेगा। अगर इस मामले को निपटाया नहीं गया तो कोई भी अप्रिय हालात पैदा हो सकते हैं। इस मामले की जाँच वेस्ट यूपी हेड श्री अनिल भास्कर को छोड़कर किसी अन्य या HR Department के किसी व्यक्ति से करा ली जाये।
सादर
हिंदुस्तान परिवार के कुछ कर्मचारी
बरेली
6 Comments
Leave a Reply
Cancel reply
Leave a Reply
भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team
भड़ास मेल: [email protected]
Latest 100 भड़ास
- दिल्ली प्रदर्शन के बाद ट्रोल हो रहे धर्मेंद्र प्रधान की बेटी को अपना इंस्टाग्राम बंद करना पड़ा!
- एनडीटीवी की डिजिटल टीम से जुड़े युवा पत्रकार सुधांशु शुभम!
- जंतर-मंतर में ट्रोल का शिकार हुए एबीपी न्यूज़ के रिपोर्टर का पक्ष, टाइम्स नाउ के रिपोर्टर की पिटाई पर जनता का रिएक्शन भी पढ़िए!
- न्यूज़ नेशन से जुड़े एंकर अभिषेक पांडेय, नैयर आजम की इस मंच से नई पारी!
- एनडीटीवी के वरिष्ठ संवाददाता रवीश रंजन शुक्ला को तो बख्श दीजिए!
- आज के अखबार : राहुल गांधी पहले पन्ने पर, प्रधान मंत्री जमीन पर और मांग बदलने के आरोप का ‘घूंघट’ बनाना
- दिल्ली में पहली बार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन और शॉक बैटन का इस्तेमाल!
- जंतर-मंतर पर ट्रोल हुए एनडीटीवी के रवीश रंजन के लिए यशवंत सिंह, रवीश कुमार और कादंबिनी शर्मा ने क्या कहा? पढ़ें
- पेपर लीक, टूटी सड़कें, मिलावटी पेट्रोल, धार्मिक स्थलों पर लूट, पुलिस की बर्बरता से लोगों में गुस्सा है!
- क्या राहुल गांधी की अचानक एंट्री से बदला आंदोलन का समीकरण?
- शाह और मोदी जी का प्यारा दुलारा प्रधान, अब उनके गले की हड्डी बन चुका है!
- जंतर-मंतर पर टाइम्स नाउ के पत्रकार को मार-पीटकर घड़ी-फोन भी छीन लिया!
- इतनी बड़ी खबर को विजुअल समेत ब्लैकआउट कर दिया!
- न्यूज़ चैनलों के संपादकों/एंकरों की चाटुकारिता का भुगतान फील्ड पर रिपोर्टर कर रहे हैं!
- अजीत अंजुम को देखकर लगा कोई पत्रकार युद्ध के मैदान से रिपोर्टिंग कर रहा हो!
- मोदीकाल में पत्रकारिता करने का गुनाह कर रहे राहुल कोटियाल को दिल्ली पुलिस ने मारी लाठियां!
- दस ग्राम बायस्ड सोच के चलते हम अभिनव के 100 किलो एफर्ट्स को इग्नोर नहीं कर सकते!
- काक्रोच जनता पार्टी के समर्थक हैं भड़ास वाले यशवंत? राहुल और कांग्रेस से चिढ़ की वजह क्या है??
- राहुल गांधी को पीएम आवास से उठा फेंका, पुलिस के हाथों घसीटे जाने पर नाक से खून निकला! देखें तस्वीरें
- दिल्ली पुलिस का छात्रों को इलेक्ट्रिक शॉक, कांग्रेस सांसद ने धर्मेंद्र प्रधान को मुंह पर कहा राक्षस, देखें वीडियो
- रजत, चित्रा, रूबिका, सुशांत, नविका, सुधीर, अमन, राहुल, अंजना वगैरह-वगैरह से एक जरूरी अपील!
- विपक्षी सांसदों ने घेरा पीएम आवास, मोदी शाह के इस्तीफे की मांग, देखें वीडियो
- ये मोदी शाह फोर्स (MSF) कब बनी, इनकी भर्ती कहां से होती है, इनका काम क्या है?
- सत्ता वही गलती दोहरा रही है जिसकी कीमत पहले कांग्रेस चुका चुकी है!
- लल्लनटॉप की इस रिपोर्टर ने अपनी जान पर खेलकर भी रिपोर्टिंग जारी रखी!
- व्यापम से NEET तक: कुछ सालों बाद संस्थानों में न सिर्फ सीट की, बल्कि प्रश्न-पत्र की भी बोलियाँ लगेगी!
- सिविल ड्रेस में छात्रों को पीटने वाला दिल्ली पुलिस का ये सिपाही हो रहा ट्रोल!
- आज के अखबार : लुटियन की दिल्ली में लठैती को ‘झड़प’ और ‘मार्च की कोशिश’ बताने की बेशर्मी
- दिल्ली प्रदर्शन: एथनॉल मंत्री खुश हैं, उनकी मुसीबत अब महामानव की तरफ शिफ्ट हो गई!
- छात्रों के साथ किसानों ने भी खोला मोर्चा, शंभू बॉर्डर सील, देखें वीडियो
- टीआरपी के लिए दूसरे के कपड़े फाड़ देने वाले टीवी संपादकों ने कल दिल्ली प्रोटेस्ट क्यों नहीं ताना?
- कॉरपोरेट मीडिया ने बरसों तक भारतीय समाज की राजनीतिक स्मृतियां खुरच-खुरचकर मिटाई थीं लेकिन दिल्ली पुलिस की लाठियों ने उन्हें पुनर्जीवित कर दिया!
- संसद मार्च में मीडिया के खिलाफ भी नाराजगी, आपस में ही भिड़े पत्रकार!
- संसद प्रोटेस्ट की ग्राउंड रिपोर्टिंग में भास्कर और टेलीग्राफ की कवरेज चर्चा में!
- फंसता है रिपोर्टर, कैमरामैन और टेक्निकल टीम!
- दिल्ली प्रोटेस्ट की कवरेज कर रहे Molitics के संपादक नीरज झा को उठा ले गई पुलिस!
- पीएमओ से तय होती अखबारों की हेडलाइंस का इससे बड़ा कोई प्रूफ नहीं हो सकता!
- आउटलुक से जिनित परमार, टीवी9 से जसप्रीत और दूरदर्शन से यश शर्मा के बारे में सूचनाएं!
- नरेंद्र मोदी शक्ति और अलोकप्रियता के दो अतिवादी ध्रुवों पर खड़े हैं!
- गोदी मीडिया वालों को म्यूजिकल गाली के साथ वायरल ये इंस्टा वीडियो बेहद निंदनीय!
- मोदी सरकार ने पिछले 12 साल से डर की जो सत्ता कायम की थी उसकी चिंदियां आज जंतर-मंतर के पास उड़ती नज़र आईं!
- न्यूज़ चैनलों के अच्छे रिपोर्टरों ने दलाल एंकरों और संपादकों को दे दिया टका-सा जवाब- “हम रिपोर्टिंग करने जंतर मंतर नहीं जाएँगे!”
- मुद्दा मुद्दी कुछ नहीं है, लोग बेरोजगारी कुशासन लूट घूसखोरी से अकबकाए हुए हैं… लेकिन कांग्रेसी अलगे दुनिया में सोए हुए हैं!
- जो काम कांग्रेस नहीं कर पाई, वो अभिजीत दीपके ने कर दिखाया!
- शेयर बाज़ार की पस्ती दे रही आर्थिक सुनामी का संकेत!
- आज के अखबार : नीट के नतीजों में गड़बड़ी की सूचना नहीं, तृणमूल के गद्दारों को निमंत्रण और सफाई ‘खबर’
- मेनस्ट्रीम मीडिया आईसीयू में है और एंबुलेंस में पत्रकार, देखें वीडियो
- रिपोर्टर के सवाल पर धर्मेंद्र प्रधान ने भक्ति की आड़ ले ली, देखें वीडियो
- टीवी9 के असिस्टेंट एडिटर संजीव श्रीवास्तव को मिला नेशनल अवार्ड
- छात्रों को रोकने में जितना जोर लगाया जा रहा है उतना जोर पेपर लीक रोकने में लगाया होता तो आज ये नौबत नहीं आती!
- नार्वे की पत्रकार हेले ल्यिंग ने सुधीर चौधरी की नाक में दम कर रखा है!
- आईएएस रिंकू सिंह राही ने मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधायक गौरी शंकर वर्मा के खिलाफ फोड़ा लेटर बम!
- भारत एक्सप्रेस में सुधीर गेरा की वापसी, सीनियर पद पर संभाली जिम्मेदारी!
- भाजपा नेताओं की ‘लैंड बैंकिंग’ का सबसे बड़ा केंद्र बन रहा है गुजरात?
- युवा ड्रोन इनोवेटर राहुल सिंह की संदिग्ध मौत में पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा पर बड़ा आरोप!
- अमर उजाला से वरिष्ठ संपादक इंदु शेखर पंचोली कार्यमुक्त, इस प्लेटफार्म से कर सकते हैं नई पारी का आगाज़
- आज के अखबार : सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पहले पन्ने पर होना गोदी पत्रकारिता की मुश्किल तो नहीं?
- संघ कैसे चलता है? ONGC के करोड़ों के दान से!
- GeM टेंडरों में मिलीभगत का बड़ा खुलासा: HP इंडिया पर ₹126.87 करोड़ का जुर्माना, पांच अधिकृत रीसेलर भी दोषी
- नेहरू से मोदी तक 16 प्रधानमंत्रियों के कामकाज पर अपनी बेबाक कलम चलाने वाले वरिष्ठ पत्रकार विजय संघवी नहीं रहे!
- पाञ्चजन्य के एसोसिएट एडिटर आलोक गोस्वामी का निधन!
- बंगाल का नया ‘डीमोक्रेसी’
- इंडिया टीवी की इस एंकर के साथ खेला हो गया, बीजेपी आईटी सेल द्वारा भेजा फेक कंटेंट पोस्ट और डिलीट कर फंस गई!
- दैनिक भास्कर, इंडिया न्यूज, भारत समाचार में कार्यरत रहीं श्रुति शुक्ला का नया अध्याय!
- आज के अखबार : कंप्रोमाइज्ड तंत्र का खेल; दैनिक भास्कर में पहले पन्ने पर तीन खबरें, तीनों सरकारी प्रचार
- दैनिक भास्कर को स्पेशल रिपोर्टिंग टीम के लिए पत्रकारों की तलाश!
- प्रिंट, टीवी, डिजिटल, रेडियो समेत कई सेक्टर्स में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है नीति आयोग!
- रंगदारी मांगने के आरोप में राजस्थान और यूपी के पाँच पत्रकारों पर मुकदमा!
- दैनिक भास्कर में राहुल गांधी के कार्यक्रम की ख़बर दीदे फाड़कर ढूंढी तब मिली!
- 1977 में कांग्रेसी सत्ता पर बाबूजी भारी पड़े थे, कल सत्ताधारी भाजपा पर राहुल गांधी भारी पड़ गए!
- मगरमच्छ के मुँह में बालक : क्या जीवन वास्तव में उतना न्यायपूर्ण है, जितना हमारा मन उसे मान लेना चाहता है?
- लंदन जाकर आमिर ख़ान ने जो झूठ बोला है, उसका पर्दाफ़ाश वरिष्ठ पत्रकार पंकज शुक्ला की ये पोस्ट करती है!
- मुख्यमंत्री योगी के आने से पहले कांग्रेस जिलाध्यक्ष देर रात हुए हाउस अरेस्ट, देखें वीडियो
- आखिर क्यों मोदी राज में एकाएक बदल गया देश का पूरा तंत्र?
- गोदी मीडिया सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा उठा ले जाने का समर्थन कर रहा है!
- भाजपाई राजनीति का स्तर: धामी सरकार ने परेड ग्राउंड में राहुल गांधी का कार्यक्रम रद्द करवाकर एक नचनिया के प्रोग्राम को इजाजत दे दी!
- हाइड्रोजन ट्रेन के उद्घाटन में दिल्ली मीडिया को रोहतक बुलाया गया, सरकारी खर्चे पर होटल बुक हुए, अब शिकायतों के स्क्रीनशॉट देखिए!
- अमृत विचार प्रबंधन मेरा मात्र 15,000 पीकर अमीर हो जाएगा, मरा हुआ अखबार फिर चल पड़ेगा!
- पहली बार किसी रिपोर्टर को ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ जैसे नारे पर एतराज हुआ, देखें वीडियो
- भाजपाई सरकारें जनता का पैसा जमकर फूंक रहीं मीडिया मैनेजमेंट पर, छत्तीसगढ़ की विष्णु सरकार की अंधेरगर्दी देखिए!
- दिल्ली के सीपी सतीश गोलचा क्या कॉकरोचों का अनशन ठीक ढंग से नहीं संभालने के कारण हटाए गए?
- भारत में रिटायरमेंट या आफिस से विदाई पर सूटकेस ही क्यों देते हैं!
- मोबाइल लेकर हर कोई पत्रकार बन गया है; मीडिया के लिए कानून बनाने को कहा हाईकोर्ट ने!
- आज के अखबार : सरकार के खिलाफ आमरण अनशन की रिपोर्टिंग में ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ घुसा हुआ है
- धीरेंद्र शास्त्री के अपराधी भाई को जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट, पत्रकारों की जेलर से बहस, देखें वीडियो
- दैनिक भास्कर समूह ने पहली तिमाही में ठीक-ठाक मुनाफा कूटा है!
- मेरी पत्रकारिता यात्रा (5) : मुझे लगा कि जनसत्ता में मेरे दिन पूरे हो गए हैं और अब मुझे यहां से मुक्त हो जाना चाहिए!
- सीनियर एंकर दीपेश बरगले का विस्तार न्यूज़ में प्रमोशन!
- सांसद प्रिया सरोज ने समाचार प्लस OTT को भेजा 10 करोड़ का कानूनी नोटिस!
- सीतापुर में तैनात ये IPS जिसके हाथ की बनी रोटी खाता था, उसे इतना मारा की बेचारे ने जान दे दी!
- MP-CG के रीजनल चैनल विस्तार न्यूज़ में बड़ा फेरबदल; श्वेता राय समेत चार पत्रकारों को नई जिम्मेदारी!
- आज के अखबार : ED, CBI और सॉलिसिटर जनरल विपक्ष के पीछे लगे रहे, जज साब गैस एजेंसी चलाते रहे
- जैसे प्रो. जी. डी. अग्रवाल मर गए वैसे ही आप भी मर जाएँगे सोनम वांगचुक साहब, आमरण अनशन से महाभ्रष्ट सिस्टम नहीं जागता!
- सोनम वांगचुक का अनशन गांधीवादी नहीं है : गुरदीप सिंह सप्पल (कांग्रेस नेता)
- हिंदुस्तान अखबार के रिपोर्टर ने सीएम योगी को लिखा पत्र, विधायक के गुर्गों पर धमकी का आरोप!
- E20 विवाद: मनीष कश्यप समेत चार यूट्यूबर्स पर नागपुर में मुकदमा
- नितिन गडकरी फंस जाने पर कहते हैं कि वे परिवहन मंत्री हैं, पेट्रोलियम मंत्री से पूछिए… लेकिन वे अगर पेट्रोलियम मंत्री नहीं हैं तो ई20 का बचाव क्यों कर रहे हैं?
- मेघा प्रसाद के सवाल गडकरी के जवाब : वरिष्ठ पत्रकार संजय सिन्हा का एक विश्लेषण!
- इंडियन एक्सप्रेस में सौरभ द्विवेदी की टीम से जुड़े पत्रकार आयुष प्रजापति!
- ई20 प्रकरण: रायपुर के इस डॉक्टर को मारूति कंपनी 20,50,494 रुपये देगी या नई कार!



Sanjeev Sharma
March 26, 2015 at 7:42 pm
शशि जी के साथ एक गजब की दिक्कत शुरू से ही है. ये किसी भी नई टीम के साथ कभी नहीं खेल सकते. हर समय-हर जगह हुजूर के हुजरे में चतुर चाटुकारों की चाह रहती है. दरबार में वही दरबान बना रह सकता है, जो वही देखे जो शशि दादा दिखाना चाहते हैं और ऐसी ही रवायत चेलों की भी हो गई है, वे भी वही दिखाते हैं जो दादा देखना चाहते हैं. मेरी पीढ़ा इसलिए भी मौजूं है क्योंकि मैं बरेली की बोली पिछले 20 बरस से बोल रहा हूं. रुहेलखंड की भाषाई रूह आज भी, अच्छे से महसूस करती है कि कैसे ये युवा अखबार कभी बरेली में शीर्ष पर जा जमा था, और फिर कैसे कामचोरों की करतूत ने इसे कोडि़यों के मोल में ला खड़ा किया. फर्श पर लाने या आने की बहस के केंद्र में हैं मौजूदा संपादक अभिमन्यु. ये क्यों ऐसे हैं, ये कब तक ऐसे रहेंगे, इसका इल्म खुदा को भी नहीं होगा. लेकिन, हम चौंक इसलिए जाते हैं कि आंख वाले शशि कुमार शेखर को क्यों ये दिखाई नहीं दे रहा. बरेली में हिन्दुस्तान कब तक नंबर 01 था, अभिमन्यु ने ऐसा क्या चक्रव्यूह बनाया जिसमें आंख वाले शशि कुमार शेखर फंस गए. भगवान भला करे श्री अमित चोपड़ा जी का जिन्होंने हिन्दुस्तान छोड़ दिया नहीं तो बरेली की दुर्दशा पर आज आंख वाले शशि कुमार शेखर को हिन्दुस्तान छोड़ना पड़ता, क्योंकि नए मेनेजमेंट को तो पता नहीं है लेकिन आज अगर अमित जी होते तो मेरठ से बरेली तक सबकुछ मथ देते. मेरठ में अजेय राज कर रहे अरोड़ा जी आप भी तो कुछ करो, एक तुलनात्मक रिपोर्ट ही बना लो. भाई शशि जी ने अब हिन्दुस्तान का खेल समझ लिया है अपने चेलों को बचाने में वे जी-जान लगा देंगे, अब इस कीमत पर अगर अखबार गर्त में चला जाए तो उनकी बला से. वैसे भी आंख वाले शशि कुमार शेखर को गधों को पालने, चापलूसी के टेस्ट में पास होने के बाद उन्हें खच्चर बनाने और फिर कोई माने या ना माने लेकिन उन्हें घोड़ा साबित करने में महारत हासिल है. इनकी प्रयोगशाला में तैयार ऐसे कई जंतु आगरा से पटना होकर अब लखनउ के नवाब बन बैठे हैं. आंख वाले अब जाग, गधे मत पाल. अगर आजमाए अरबी घोड़े पालोगे तो वे आपको भी पार लगा देंगे. और वैसे आपके लाड़ले नवाब की नई कहानी जल्द सामने आ रही है आप तो अभी से पूरी ताकत उसे बचाने में लगाओ क्योंकि हो सकता है इस बार तीर निशाने पर लगे.
mithilesh
March 27, 2015 at 5:39 pm
abhimnyu sir ko mai 2009 se janta hu. ve apne karmchari kya kisi anjan ko bhi gali nahi de sakate hai.yah sab unki salin chhabi ko kharab karne ke liye kiya ja raha hai…
सुमित
March 27, 2015 at 5:39 pm
गाज़ियाबाद के ब्लैक लिस्टेड लोगों को दो दो प्रमोशन देकर अपने साथ लाये थे अभिमन्यु कुमार । सपना दिखाया था अखबार को फिर से नयम्बर वन बना देंगे पर हुआ क्या सर्कुलेशन और गिर गया। ऐसा संपादक मिला जिसको न बोलने की तमीज है न लिखने की। कभी कोई अभियान चलाया भी तो कमाने के लिए।खनन के खिलाफ अभियान छाप। अच्छा था पर डील के साथ ख़त्म। दुबारा तब शुरू हुआ जब सिटी चीफ के बन रहे मकान के लिए रेत मुफ़्त नहीं मिली। यहाँ आते ही गैंग ऑफ़ गाज़ियाबाद के कुछ सदस्य तो 20 लाख के प्लाट ले लिए तो कई लोगों के घर ‘उपहारों’ से भर गए। इन तीन साल में इन सभी के इनकम की जाँच होनी चाहिए।
raj
March 27, 2015 at 10:55 pm
अभिमन्यु की तारीफ में कसीदे पढने वाले तू भी इसी गिरोह का लगता है तुझे पता होना चाहिए जो आदमी चपरासी की जेब से पैसे निकलवाकर समोसा खा ले, वह कितना ईमानदार होगा
Sandeep
March 27, 2015 at 11:19 pm
सोमवार 23 मार्च को बरेली के संपादक श्री अभिमन्यु कुमार सिंह ने प्रेस नोट न छपने पर जानकारी लेने आए पी आर कंपनी के प्रतिनिधि को पीट दिया। इसमें उनका साथ सिटी इंचार्ज अनुरोध भारद्वाज ने दिया।
दरअसल दो दिन पहले दुर्गेश नाम का यह युवक वीएलसीसी का एक प्रेस नोट दे गया था। इसकी जानकारी करने वह सुबह की मीटिंग के दौरान आया था। कुछ बातचीत के दौरान संपादक जी उसे पीटने लगे। फिर सिटी इंचार्ज ने भी उसे पीटा और स्टाफ रिपोर्टर अखिलेश अवस्थी ने भी। इस दौरान वहां विज्ञापन समेत तमाम लोग थे। सभी यह देखकर चौंक गए।
इतने पर भी गुस्सा शांत नहीं हुआ तो संपादक जी ने पुलिस बुलवाकर उस बेचारे को थाने भिजवा दिया। जहाँ से वह शाम के बाद में किसी तरह छूट सका।
इस तरह से बेमतलब में ऑफिस में पुलिस का आना अशोभनीय है। अंदाज लगाया जा सकता है कि प्रेस नोट लेकर आये आदमी को पीटने वाले संपादक का क्या मानसिक स्तर होगा और इनका ऑफिस में अपने अधीनस्थों से क्या व्यव्हार रहता होगा। वीएलसीसी से बात करके दुर्गेश के बारे में पता किया जा सकता है, जो अपने साथ हुई मारपीट की जानकारी दे देगा। सिटी ऑफिस के गार्ड से पता किया जा सकता है।सवाल यह है कि सिटी ऑफिस में बैठकर हर काम में दखल देने वाले संपादक जी अपनी मर्यादा कैसे भूल गए। अपने पद की गरिमा तो रखी होती।
Sudeep Sharma
March 28, 2015 at 12:13 pm
भाइयों मजमून अब भी मुकम्मल नहीं है. आप लोग जड़ में जमी जकड़न पर जोर क्यों नहीं लगा रहे हैं. क्यों नहीं असली परेशानी समझ रहे हैं. आंख वाले शशि शेखर जी क्यों पूरी अराजकता को लेकर अंधे बनने का नाटक कर रहे हैं. जैसे सर्वर बंद होते ही सिस्टम बंद हो जाते हैं ठीक वैसे ही आंख वाले शशि शेखर जी का समर्थन हटते ही ऐसे तमाम जंतु अपने आप जंगल में लौट जाएंगे. आप सभी वर्तमान में हो रहे दर्द-दिक्कतों से रूबरू हैं लिहाजा बार-बार वही-वही बताया और दोहराया जा रहा है. जबकि मूल मसले में जो मूली फंसी है तमाम दुर्गंध की असली वजह वही है. सीधी सी बात है दो साल से ये गुंडाराज चल रहा है, बार-बार खुलेआम सभी को बताया जा रहा है, फिर क्यों अभिमन्यु और उसका अभिमान कायम है. आंख वाले शशि शेखर जी को अपने सूचना तंत्र पर बड़ा गुमान रहता है, यदि ये सच है तो जरा पता तो लगाइए कि लखनउ के नवाब साहब कैसे अभिमन्यु के आंख और … में मिर्च डलवा रहे हैं. आंख वाले शशि शेखर जी उठो, अपनी आंख पानी से धो लो, अपना मुंह खोलो, फिर गधों को बोलो – बड़े भइया बहुत हो गया, अब बाहर जाएं.