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टेक्नोलॉजी क्रांति के दौर में आज इंटरनेट मीडिया कमाई का बड़ा अवसर : यशवंत सिंह

गोरखपुर : गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब व लेंस मैन के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को प्रेस क्लब सभागार में भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ने ’वेब मीडिया कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप’ में यूट्यूब चैनल, न्यूज पोर्टल, ब्लाग, फेसबुक, के जरिए पैसे कमाने के तरीके बताए। 

शुक्रवार को गोरखपुर प्रेस क्लब सभागार में वर्कशॉप के बाद भड़ास4मीडिया के संस्थापक संपादक यशवंत सिंह (बीच में) के साथ सहभागी मीडिया कर्मी

गोरखपुर : गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब व लेंस मैन के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को प्रेस क्लब सभागार में भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ने ’वेब मीडिया कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप’ में यूट्यूब चैनल, न्यूज पोर्टल, ब्लाग, फेसबुक, के जरिए पैसे कमाने के तरीके बताए। 

शुक्रवार को गोरखपुर प्रेस क्लब सभागार में वर्कशॉप के बाद भड़ास4मीडिया के संस्थापक संपादक यशवंत सिंह (बीच में) के साथ सहभागी मीडिया कर्मी

उन्होंने बताया कि इंटनेट मीडिया प्रभावी माध्यम बन गया है। इंटरनेट में स्पेस है। मगर हमारे पास मेधा व स्किल होन के बावजूद हम उस रास्ते से अनजान है। आज के दौर में विचारधारा नहीं टेक्नोलॉजी क्रांति लाएगी। आज जब हम इंटरनेट पर लिखते है तो वह ग्लोबल हो जाता हैं। हमें पता ही नहीं चलता। गूगल पत्रकारों के लेख, फोटो, वीडियों के जरिए खूब कमायी कर रहा है और हमे कमायी करने का मौका भी दे रहा है। इंटरनेट पूरी दुनिया पढ़ती है। मुख्यधारा मीडिया में बढ़ते व्यवसायिक हस्तक्षेप के मद्देनजर एक विकल्प के रूप में इंटरनेट मीडिया बेहद प्रभावशाली है। अपनी बात निष्पक्षता से रखने के लिए इंटरनेट मीडिया सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

उन्होंने इंटरनेट मीडिया के बढ़ते हुए प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि आज विज्ञापनदाता कम्पनियां भी इलैक्ट्रानिक चैनल और समाचार पत्रों की तुलना में इंटरनेट मीडिया को प्रचार का ज्यादा सशक्त माध्यम मानने लगे है क्योंकि यह निर्धारित उपभोक्ता तक पहुंचने का सीधा माध्यम है। इसमें हर वह व्यक्ति प्रकाशक हैं जो वीडियो, लेख या फोटो यूट्यूब, ब्लाग पर डालता है। 

उन्होंने निशा मधुलिका का उदहारण दिया। जो यूट्यूब चैनल के माध्यम से शाकाहारी व्यंजनों की पाक विधि से लोगों तक पहुंचाती है। उनके इस चैनल की दर्शक संख्या लाखांे में है। गूगल द्वारा उन्हें हर माह अच्छी आय प्राप्त होती है। हिन्दी पट्टी में उनका कोई प्रतिद्वंदी भी नहीं है। उन्होंने संजय चैहान  ब्लागर का भी उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि हर जिले में पत्रकार से लेकर पढ़े-लिखे वयक्ति तक अपने अपने न्यूज पोर्टल, ब्लाग, फेसबुक, यूट्यूब चैनल आदि पर सक्रिय हैं और खुद द्वारा क्रिएट जनरेट कंटेंट अपलोड कर रहे हैं। फिलहाल ज्यादातर लोग यह काम शौकिया करते हैं. लेकिन अब इस दौर में जब गूगल जैसा बड़ा ग्रुप हिंदी में कंटेंट रचने वालों को, वीडियो डालने वालों को जमकर डालर दे रहा है, गूगल एडसेंस व कंटेंट मानेटाइजेशन के जरिए, हिंदी पट्टी के अधिकतर लोग अनजान हैं। 

वर्कशाप में उन्होंने बताया कि यूट्यूब चैनल पर एकाउंट खोलने के लिए एक ईमेल की आवश्यकता पड़ती है। जब एकाउंट बन जाएं तो स्क्रीन के दाहिनें तरफ ऊपर की तरफ एप्स का ऑप्शन होता है। वहां क्लिक करें। क्लिक करते ही पॉप अप मीनू खुलेगा। वहां यूट्यूब के आइकान पर क्लिक करें। स्क्रीन के दायीं तरफ अपलोड का आप्शन होगा। इस तरह आप अपना वीडियो अपलोड कर सकते है। इसके बाद मानेटाइजेशन करना होगा। लोडिंग के बाद गूगल एकाउंट सत्यापित करेगा। इसी तरह आप लिखित सामग्री व फोटो डालनी होगी। इसके लिए यूट्यूब की जगह ब्लागर पर क्लिक कर बाकी की प्रक्रिया को अंजाम दे सकते है। छह माह तक ब्लाग चलने के बाद ही पैसा कमाया जा सकता है। वहीं यूट्यूब में शुरू से ही पैसा कमाया जा सकता है। इस प्रक्रिया द्वारा अपने दम पर, अकेले के बल पर महीने में पांच से पचास हजार रुपये तक कमा सकते हैं।

इस दौरान लोगों के सवालात के जवाब देकर जिज्ञासाओं को शांत कराया गया।

इस मौके पर प्रेस क्लब अध्यक्ष अशोक चैधरी, महामंत्री पंकज श्रीवास्वत, पुस्तकालय मंत्री विनय कुमार शर्मा, संयुक्त मंत्री चन्दन निषाद, कोषाध्यक्ष हेमंत तिवारी, उपाध्यक्ष कुंदन उपाध्याय, मनोज कुमार सिंह, अर्जुमंद बानो, मनोज यादव, अब्दुल जदीद, मुर्तजा हुसैन रहमानी, सैयद फरहान अहमद, ओंकार धर द्विवेदी,, मारकण्डेय मणि त्रिपाठी, सुशील राय, सफी, सेराज, हरिकेश सिंह, फैयाज अहमद, अविनाश, महेश्वर मिश्र, राजीव राय, महेश्वर मिश्र, इब्राहीम सिद्दीकी, चेतना पाण्डेय, धनेस, महेश, संजय, सफीक, मुन्ना, शैलेन्द्र शुक्ला, राजेश, संगम दूबे, दीपक पाण्डेय, दीपक श्रीवास्तव, प्रदीप सहित तमाम लोग मौजूद रहे। 

श्री  सिंह ने बताया कि जब भड़ास ब्लाग हम लोगों ने शुरू किया था तो 2007 में गूगल के मानेटाइजेशन प्रोग्राम को एडाप्ट कर गूगल एडसेंस के विज्ञापन कोड लगाने से पहली दफे पांच हजार रुपये का चेक अमेरिका से आया तो मुझे अजीब-सी खुशी हुई। तभी लगने लगा था कि यही काम आगे करते हुए कमाया जा सकता है। तब भड़ास ब्लाग गूगल के ही ब्लागस्पाट पर था। 

उन्होंने बताया कि बिना खुद की आर्थिक निर्भरता के ब्लाग, वेबसाइट, पत्रकारिता लंबे समय तक संभव नहीं है. इसलिए इन्हीं सब चीजों को ध्यान में रखते हुए वर्कशाप का आयोजन किया गया। आज हर जिले में दो चार वेबसाइट्स वहां के स्थानीय पत्रकारों द्वारा चलाई जा रही है. हर जिले में वीडियो जर्नलिस्ट और कैमरामैन हैं जो रोजाना वीडियो शूट करते हैं. ये लोग अगर गूगल मानेटाइजेशन के तौर-तरीके को समझ कर अपना लें तो हर महीने एक अच्छी रकम घर बैठे कमा सकते हैं। कुल मिलाकर यह वर्कशाप उन लोगों के लिए है जो सीखना चाहते हैं, अपनी आज की स्थिति से आगे बढ़ना चाहते हैं, अपने आनलाइन कामकाज को मानेटाइज करना चाहते हैं।  को नौकरी करने की जगह खुद का काम करने को प्रेरित करना भी है।

आज खोला जाएगा एकाउंट

गोरखपुर। वर्कशाप में भाग लेने वाले प्रशिक्षुओं का 16 मई को पूर्वाह्न 11.00 बजे कंटेंट मानेटाइजेशन एकाउंट खोला जाएगा।

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