काश कि बीबीसी अच्युता जी की इस किताब को भी देख लेता

भारतीय जनसंचार संस्थान में हमारे सहपाठी रहे टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार अक्षय मुकुल ने गीता प्रेस पर किताब लिखी है. ‘गीता प्रेस एंड द मेकिंग ऑफ़ हिंदू इंडिया’….उसके आधार पर गीता प्रेस को बीबीसी ने उग्र हिंदुत्व का पैरोकार संस्थान बताया है… बीबीसी की रिपोर्ट में गीता प्रेस को गांधी का विरोधी भी बताया गया है… हालांकि हाल के दिनों में वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र के संपादन में गीता प्रेस के व्यवस्थापक-संपादक रहे हनुमान प्रसाद पोद्दार के पत्रों का संग्रह निकला है-पत्रों में समय-संस्कृति… उसमें शामिल पत्र कुछ और ही कहानी कहते हैं…

हनुमान प्रसाद पोद्दार को गांधी ने ही सुझाव दिया था कि विज्ञापन ना लेना… कल्याण में कभी विज्ञापन नहीं लिया गया… कल्याण के ईश्वर अंक के लिए गांधी ने भी लिखा… प्रेमचंद प्रगतिशील थे… फिर भी उन्होंने कल्याण के लिए कई लेख लिखे… लेकिन बीबीसी का ध्यान इस पर नहीं है… आखिर सिर्फ उग्र हिंदुत्व के पक्ष को ही क्यों उभारा जा रहा है… काश कि बीबीसी अच्युता जी की इस किताब को भी देख लेता…ऐसी रिपोर्ट बीबीसी की साख के अनुरूप नहीं है.

बीबीसी संवाददाता विनीत खरे की रिपोर्ट पढ़ने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें:

एक छापाख़ाना, और हिंदू इंडिया बनाने की मुहिम

वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी के फेसबुक वॉल से.

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‘गीता प्रेस’ बंद नहीं हुआ, चैनल गलत दिखा रहा, सिर्फ हड़ताल के कारण काम बंद है : प्रबंधन

गोरखपुर के गीताप्रेस प्रबंधन ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि एक टीवी न्यूज चैनल में दिखाए गए समाचार ‘गीताप्रेस बंद होने के कगार पर’ भ्रामक व असत्य है। गीताप्रेस न तो बंद होने की स्थिति में है और न ही इसे बंद होने दिया जाएगा। प्रेस बंद नहीं हुआ है, केवल कर्मचारियों की हड़ताल के कारण काम बंद है। कर्मचारियों की उद्दंडता के कारण कुछ कर्मचारियों को निलंबित किए जाने से कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की हड़ताल का भी आशय यह नहीं है कि गीताप्रेस बंद कर दिया जाए। गीताप्रेस में किसी तरह की कोई आर्थिक समस्या नहीं है। प्रबंध तंत्र यह बताना चाहता है कि गीताप्रेस किसी तरह का कोई चंदा नहीं लेता है। प्रेस के नाम पर किसी को चंदा न दें। यदि कोई गीताप्रेस के नाम पर चंदा मांगता है तो वह ठगी करता है।

दुनिया को धर्म और अध्यात्म की रोशनी दिखाने वाला गीता प्रेस संकट में है। कारण है वेतन वृद्धि और सहायक प्रबंधक के साथ अभद्रता करने वाले 17 कर्मचारियों की वापसी की मांग को लेकर जारी कर्मचारी हड़ताल जिसका अंत नहीं दिख रहा और जिसके कारण आठ अगस्त से छपाई बंद है। गीता प्रेस का जो परिसर सद्भाव और सहकार के लिए जाना जाता था, आज वहां अशांति है। धर्म और अध्यात्म में रुचि रखने वाले चिंतित हैं। बुद्धिजीवी सोशल मीडिया पर गीता प्रेस बचाने का अभियान चला रहे हैं, पाठक दुखी हैं पर धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन का रिकार्ड बनाने वाला गीता प्रेस बर्बादी की ओर है। 1923 में स्थापित गीता प्रेस से अब तक 55 करोड़ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। 11 भाषाओं में गीता प्रकाशित होती है। प्रेस के 92 साल के इतिहास में कर्मचारी आंदोलन की यह पहली घटना है।

गीता प्रेस में कुल 525 कर्मचारी हैं, जिनमें 200 स्थायी हैं जबकि 325 ठेके पर काम करते हैं। समझौते के तहत प्रबंधन द्वारा पिछली जुलाई से तीन स्तर के कर्मचारियों-अकुशल, अद्र्धकुशल व कुशल को क्रमश: 600, 750 व 900 रुपये की वेतन वृद्धि दी जानी थी। प्रबंधन ने इस शर्त पर वेतन वृद्धि की हामी भरी कि कर्मचारी पिछले सभी विवाद समाप्त कर दें और पांच वर्ष तक कोई नई मांग न रखें। इस शर्त के बाद कर्मचारियों ने सात अगस्त को सहायक प्रबंधक मेघ सिंह चौहान को धक्के देकर गेट से बाहर कर दिया। दूसरे दिन प्रबंधन ने 12 स्थायी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया और पांच संविदा कर्मचारियों को निकाल दिया। तब से कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

गीताप्रेस हमारी रोजी-रोटी है। हम क्यों चाहेंगे गीताप्रेस बंद हो जाए। दोष प्रबंधतंत्र का है। वे वेतन वृद्धि एवं 12 कर्मचारियों के अलावा अस्थायी कहकर निकाले गए पांच कर्मचारियों को वापस लें, हम काम करने को तैयार हैं। -रमन श्रीवास्तव, अध्यक्ष, गीताप्रेस कर्मचारी संघ

सहायक प्रबंधक के साथ कर्मचारियों ने अभद्रता की। इस वजह से उन्हें निलंबित किया गया। आरोपों की जांच की जाएगी। दोषमुक्त होने पर उन्हें बहाल कर दिया जाएगा, लेकिन कर्मचारी अभद्रता भी करें और कार्रवाई हो तो आंदोलन करके दबाव बनाएं, यह जायज नहीं। -ईश्वर प्रसाद पटवारी, प्रबंधक

फेसबुक और ट्विटर पर ‘सेव गीता प्रेस’ हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। गीता प्रेस से जुड़ी आस्था के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने आर्थिक सहयोग की पेशकश की है। गीता प्रेस की किताबें खरीदकर उन्हें उपहार स्वरूप देने का आग्रह है। आइएएस संजय दीक्षित ने ट्विटर पर मुहिम छेड़ रखी है। कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सांसद योगी आदित्यनाथ और विधायक डा.आरएमडी अग्रवाल को ट्वीट कर गीता प्रेस बचाने की गुहार लगा रहे हैं।

दैनिक जागरण में प्रकाशित संजय मिश्र की रिपोर्ट.

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गोरखपुर आइ-नेक्स्ट के संपादकीय प्रभारी अश्वनी पांडेय का पटना तबादला

उत्पीड़नात्मक हरकतों के लिए चर्चित रहे गोरखपुर आइनेक्स्ट के संपादकीय प्रभारी अश्वनी पांडेय का पटना तबादला कर दिया गया है। उनके कार्यकाल में दो सब एडिटर नौकरी छोड़कर चले गए थे। बाद में सीनियर रिपोर्टर अभिषेक सिंह का जमशेदपुर ट्रांसफर कर दिया गया। पांडेय की प्रताड़नात्मक रवैये को प्रबंधन ने गंभीरता से लिया। उनके जाने से गोरखपुर आइनेक्स्ट के पत्रकारों ने राहत की सांस ली है।

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गीताप्रेस के कर्मचारियों का हंगामा, सहायक प्रबंधक को धक्का मारकर बाहर किया

गोरखपुर : आश्वासन के बावजूद वेतन में बढ़ोतरी नहीं होने से नाराज गीताप्रेस के कर्मचारियों ने गत दिनो जमकर हंगामा किया। इससे करीब एक घंटे तक काम ठप रहा। 

वार्ता के लिए मौके पर पहुंचे सहायक प्रबंधक द्वारा टालमटोल किए जाने पर कर्मचारियों ने उन्हें धक्का देते हुए गीताप्रेस कैंपस से बाहर निकाल दिया। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें मानने के एवज में प्रबंधतंत्र ने उनके सामने जो शर्तें रखीं, उन्हें पूरा करना मुमकिन नहीं है।

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अमर उजाला गोरखपुर से तीन गए, चार और के जाने की अटकलें

गोरखपुर अमर उजाला के संपादकीय विभाग से तीन पत्रकारों ने नाता तोड़ लिया है। सीनियर सब एडिटर सुनील सिंह ने हिंदुस्तान मुजफ्फरपुर और सब एडिटर दिलीप जायसवाल ने दैनिक जागरण मुजफ्फरपुर ज्वाइन कर लिया है। सब एडिटर मुकेश सिंह ने भी संस्थान को बॉय-बॉय कह दिया है। वह पहले नोयडा स्थित एक न्यूज चैनल में कार्यरत थे। 

उन्होंने कहां नौकरी तलाशी है, इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। सुनील सिंह सदैव संपादक प्रभात सिंह के खिलाफ मुखर रहते थे। मीटिंग के बहिष्कार का उनका निर्णय अंत तक कायम रहा। पता चला है कि जल्द ही गोरखपुर अमर उजाला से चार और लोग जाने वाले हैं। यह लोग सात तारीख तक सैलरी पाने का इंतजार कर रहे बताए जाते हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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गोरखपुर आइ-नेक्स्ट इंचार्ज ने अपनी शिकायत होने पर रिपोर्टर का ट्रांसफर कर दिया

आइ-नेक्स्ट गोरखपुर के सीनियर रिपोर्टर अभिषेकI सिंह का मैनेजमेंट ने जमशेदपुर ट्रांसफर कर दिया है। बताया जा रहा है कि ये ट्रांसफर आइ-नेक्स्ट इडिटोरियल इंचार्ज अश्विनी पांडेय ने किया है। अभिषेक सिंह ने संपादकीय प्रबंधन से अपने तबादले की वजह जाननी चाही है। पांडेय ने इस संबंध में उन्हें जानकारी देने से साफ मना कर दिया है। 

दिन प्रतिदिन गोरखपुर आइ-नेक्स्ट में गिर रहे विकेट से लखनऊ में बैठे अधिकारियों के भी माथे पर पसीने छूट रहे हैं। शर्मिष्ठा शर्मा ने भी अभिषेक के ट्रांसफर को ठीक नहीं माना है। अभिषेक पिछले पांच साल से आइनेक्स्ट गोकरखपुर में सेवारत रहे हैं। ट्रांसफर की मुख्य वजह एक शिकायती पत्र को माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक शिकायत अश्विनी पांडेय के खिलाफ हुई है। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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मजीठिया : गोरखपुर में 10 अखबारों को श्रम विभाग का नोटिस, पांच बिंदुओं पर जवाब तलब

गोरखपुर : मजीठिया वेज की संस्तुतियों को लागू कराने के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिए गोरखपुर जर्नलिस्टस प्रेस क्लब द्वारा बनाए गए दबाव के बाद गोरखपुर का श्रम विभाग हरकत में आ गया है। यहां से प्रकाशित होने वाले दस अखबारों के प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियां लागू करने के सबंध में पांच बिंदुओं पर नोटिस से जवाब तलब किया गया है। इस नोटिस के बाद अखबार प्रबंधकों के होश उड गए हैं। सबसे ज्यादा मुसीबत एचआर के गले आ पड़ी है। उन्हें सूझ नहीं रहा है कि क्या जवाब दें। लिहाजा नोटिस की अवधि लगभग समाप्त होने को है। मात्र तीन अखबारों ने आधा-अधूरा जवाब भेजा है। श्रम विभाग का कहना है कि यदि तय अवधि में जवाब नहीं आते हैं तो अगली कार्रवाई की जाएगी। इसमें औचक छापे पड़ेंगे और जानकारी ली जाएगी। इस दौरान कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने मई माह में देश के सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों को विशेष श्रम अधिकारी नियुक्त कर मीडिया संस्थानों  में मजीठिया वेज बोर्ड लागू होने के संबंध में जांच पड़ताल कराकर रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया था। 28 जून तक श्रम अधिकारियों की नियुक्ति हो जानी थी। 24 जून को गोरखपुर में जर्नलिस्टस प्रेस क्लब के अध्यक्ष अशोक चौधरी की अगुआई में पत्रकारों के एक दल ने उप श्रमायुक्त को सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश की प्रति सौंपकर पत्रकारों व प्रेसकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप वेतन दिलाने की मांग की थी। 

वार्ता के दौरान अधिकारी ने बताया था कि अभी उनके पास शासन से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं आया है। ज्ञापन को शासन को भेजकर निर्देश लेंगे। इसके बाद इस ज्ञापन को श्रमायुक्त को भेजा गया। ज्ञापन मिलने के बाद 28 जून को श्रमायुक्त ने पूरे प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में सभी उप श्रमायुक्तों को मीडिया हाउसों की जांच करने का निर्देश दिया। मालूम हो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही इस जांच पडताल में श्रम विभाग को डीएम की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। वे सीधे बिना किसी सूचना के मीडिया संस्थानों का औचक निरीक्षण कर सकेंगे।

पता चला है कि नोटिस मिलने के बाद अखबारों के प्रबंधन ने पूर्व की भांति श्रम निरीक्षकों की सेटिग करने की कोशिश की। उनसे मनुहार की गयी कि वे प्रबंधन के मनोनुकूल रिपोर्ट भेज दें। एक अखबार के प्रबंधन ने तो इसके एवज में बड़ी रिश्वत की भी अपने वकील के माध्यम से पेशकश कर दी लेकिन निरीक्षकों ने हाथ खड़े कर दिये और साफ कहा कि वे इस मामले में कोई मदद नहीं कर पाएंगे। मामला सुप्रीम कोर्ट का है, लिहाजा वे अपनी नौकरी के साथ खिलवाड़ नहीं करेंगे। 

सेटिंग के सभी प्रयास विफल हो जाने के बाद प्रबंधन ने अपने संस्थानों के भीतर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। स्ट्रिंगरों की हाजिरी बंद है। सारे रिकार्ड छिपा लिए गए हैं। एचआर विभाग के कमरे में कर्मियों के प्रवेश पर निगरानी रखी जा रही है। जिला कार्यालयों पर जांच में गए श्रम अधिकारियों को गलत सूचनाएं दी गयीं। उन्हें दिन में 11 बजे बुलाया गया। जब कोई कर्मी आफिस में होता ही नहीं लेकिन कर्मियों ने भी मजीठिया लेने के लिए कमर कस ली है। जिलों से उपश्रमायुक्त कार्यालय पर अभिलेखों के साथ पत्रकारों के शिकायती पत्र पहुंच रहे हैं। बस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, देवरिया, पडरौना के दो बड़े राष्ट्रीय अखबारों के पत्रकारों ने श्रम निरीक्षकों से सायं 6 से 7 के बीच में अखबारों के आफिस में आने को कहा है ताकि प्रबंधन के फर्जीवाड़े का असली नजारा मिल सके।

सूत्रों के अनुसार गोरखपुर के दो राष्ट्रीय अखबारों की कथित फ्रेंचाइजी कंपनियों को भी नोटिस भेजा गया है। टेक्नो वे और कंचन नाम की इन कंपनियों से उक्त दोनों अखबारों के प्रोडक्शन, विज्ञापन, डीपीटी आदि विभागों के कर्मियों को जुड़ा बताया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि यह फर्जीवाड़ा मजीठिया से बचने के लिए किया गया लगता है क्योंकि पिछले तीन साल में होने वाली सारी भर्तियां इन्हीं कंपनियों में दिखाई गयी हैं।

इधर मीडियाकर्मियों में भी एकजुटता दिख रही है। दैनिक जागरण के 17 पूर्व कर्मियों ने मजीठिया वेज बोर्ड के नवंबर 2011 से बकाया एरियर की मांग करते हुए प्रबंधन और श्रम विभाग को ज्ञापन भेजा है। इस ज्ञापन में उप श्रमायुक्त से बताया गया है कि जागरण प्रबंधन ने दूर के स्थानों पर उनका स्थानांतरण कर त्यागपत्र देने के लिए विवश किया। उनकी उम्र 54 से 56 के बीच पहुंच चुकी थी। ऐसे में उनकी सेवामुक्ति को बीआरएस का लाभ मिलना चाहिए।

पत्रकार अशोक चौधरी से संपर्क : gkp.ashok@gmail.com

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गोरखपुर आइनेक्स्ट में एक और विकेट गिरा

गोरखपुर आइनेक्स्ट में सब एडिटर रहे रासेख कुमार ने दैनिक भास्कर रेवाड़ी (हरियाणा) ज्वॉइन कर लिया है। इससे पहले सीनियर सब एडिटर रवि प्रकाश ने भी एडिटोरियल इंचार्ज अश्विनी पांडेय की प्रताड़ना से आजिज आकर संस्थान छोड़ दिया था। बताते हैं कि राकेश कुमार के जाने की वजह भी पांडेय का रवैया रहा है। उन्हें नौकरी से अलग किया जाता, उससे पहले ही वह निकल लिए। इन दिनो डेस्क पर काम करने वाले कर्मचारियों की कमी से आइनेक्स्ट गोरखपुर में मुश्किल बढ़ गई है। आने वाले दिनों में ऐसी संभावना है कि कई और कर्मचारी संस्थान को नमस्ते करने वाले हैं। लखनऊ में बैठे अधिकारियों के भी हाथपांव फूलने लगे हैं। 

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गोरखपुर अमर उजाला में एडिटर और एनई के आतंक से भगदड़

गोरखपुर अमर उजाला में इन दिनो संपादक प्रभात सिंह और न्यूज एडिटर मृगांक सिंह के आतंक से मीडिया कर्मियों में भगदड़ सी मची हुई है। कई लोग तीन से छह महीने तक की मेडिकल छुट्टी पर चले गए हैं। कई पत्रकार अन्य अखबारों में चुपचाप नौकरियां खोजने में लगे हुए हैं। ब्यूरो स्तर पर कई जिलों में स्ट्रिंगरों में भी असंतोष बताया जाता है। मेन पॉवर डिस्टर्व होने से कार्यरत लोगों के जरूरी अवकाश भी मंजूर नहीं किए जा रहे हैं।  

बताया गया है कि संपादकीय विभाग में कार्यरत कासिफ अली छह माह से मेडिकल अवकाश पर हैं। दंडात्मक रूप से उन्हें सिटी रिपोर्टिंग से से डेस्क पर लगा दिया गया था। इसी तरह हरिकेश शाही के बारे में सूचना है कि वह भी तीन माह से मेडिकल छुट्टी पर हैं। विजयकांत मिश्रा भी तीन माह से मेडिकल छुट्टी लेकर घर बैठे हुए हैं। बताया जाता है कि खबरों में खामख्वाह रौब गांठने के लिए रोजाना देर रात तक मीन-मेष निकाल कर परेशान किया जाता रहा है। 

इसी तरह गोरखपुर अमर उजाला मुख्यालय से जुड़े कई जिलों में स्ट्रिंगरों में भारी असंतोष है। ब्यूरो स्तर पर स्ट्रिंगरों का अभाव पैदा हो गया है। इससे दैनिक कामकाज प्रभावित होने की सूचना है। पिछले कुछ महीनो में कई स्ट्रिंगर काम छोड़ कर चुपचाप खिसक लिए हैं। बताया जाता है कि संपादक और न्यूज एडिटर की मनमानी से हर कर्मचारी खौफ खाए हुए है। नौकरी जाने के डर से कोई जुबान नहीं खोल रहा है। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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गोरखपुर आइनेक्स्ट में रवि प्रकाश की जगह उपेंद्र की तैनाती

गोरखपुर आइनेक्स्ट में सीनियर सब एडिटर रवि प्रकाश त्रिपाठी की जगह उपेंद्र शुक्ला ने ज्वॉइन कर लिया है। शुक्ला मुरादाबाद HT ग्रुप से आए हैं। 

बतौर सीनियर सब एडिटर आगे उपेंद्र शुक्ला की आइनेक्स्ट एडिटोरियल हेड अश्विनी पांडेय के साथ निभ पाती है या नहीं, ये तो वक्त बताएगा, फिलहाल,  न्यूज को सनसनीखेज बनाने की कला तो उपेंद्र को सीखनी ही पड़ेगी।    

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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आईनेक्स्ट के प्रोग्राम में विधायक की तौहीन, संपादक पर बरसे

गोरखपुर (उ.प्र.) : दैनिक जागरण के बच्चा अखबार ‘आईनेक्स्ट’ द्वारा यहां पिछले दिनों आयोजित प्रोग्राम में नगर विधायक डॉ.राधामोहनदास अग्रवाल बदइंतजामी से काफी भड़क गए। पुलिस वाले ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। किसी तरह वह अंदर पहुंचे भी तो डीएम-एसएसपी को एक साथ देख उनकी संपादक अश्विनी पांडे से झड़प हो गई। नगर विधायक का आरोप था कि कार्यक्रम में बुलाकर उन्हें बेइज्जत किया गया है। इस घटना के बाद तो अखबार के प्रोग्राम की धज्जियां उड़ गईं। 

विधायक जब कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे तो पहले तो गेट पर एक पुलिसकर्मी ने उन्हें रोक दिया। उससे विधायक की खूब कहासुनी हुई। जब वह किसी तरह अंदर प्रोग्राम में पहुंचे तो वहां जिलाधिकारी रंजन कुमार और एसएसपी प्रदीप कुमार को देखकर और गुस्से से लाल हो गए। गौरतलब है कि इस समय विधायक की डीएम से मोरचेबंदी चल रही है। 

जब डीएम, एसएसपी दोनो को एक साथ विधायक ने देखा तो उनके दिमाग में एक साथ तमाम तरह के खयाल घूम गए। पुलिस कर्मी से टोके जाने के बाद वह गुस्से में तो पहले से ही थे, मिजाज बिगड़ा होने से वह तुरंत अखबार के एडिटोरियल हेड अश्विनी पांडेय से भिड़ गए। उन्होंन कहा कि मुझे बुलाकर आपने अपमानित किया है। इसके बाद वह कार्यक्रम में शामिल हुए बिना उल्टे पांव लौट गए। 

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मजीठिया वेतनमान : गोरखपुर के पत्रकारों ने थमाया उपश्रमायुक्त को मांगपत्र, जवाबदेही भी तलब

गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के अध्यक्ष अशोक चौधरी के नेतृत्व में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों में कार्य करने वाले कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 19 मई को उप श्रमायुक्त को ज्ञापन देकर मीडिया संस्थानों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार मजीठिया वेतनमान लागू कराने की कार्यवाही की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने उपश्रमायुक्त से कहा कि वह मीडिया संस्थानों का निरीक्षण कर मजीठिया वेतनमान के क्रियान्वयन की वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त करें और पत्रकारों और उनके प्रतिनिधि संगठनों से उसका सत्यापन कर रिपोर्ट सरकार और सुप्रीम कोर्ट को दें। प्रतिनिधिमंडल ने उनसे सरकार द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियां सरकार द्वारा लागू किए जाने के बाद श्रम विभाग द्वारा की गई कार्यवाही का ब्योरा भी मांगा।

उपश्रमायुक्त ने बताया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सम्बन्ध में सरकार से अभी कोई निर्देश नहीं मिला है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वह जल्द ही मीडिया संस्थानों का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से इस कार्यवाही में सहयोग का भी अनुरोध किया। प्रतिनिधिमंडल में चौधरी के अलावा देशदीपक पाठक, योगेश श्रीवास्तव, वीरेन्द्र प्रसाद मिश्र, राजा चतुर्वेदी, शैलेश कुमार मिश्र आदि शामिल थे।

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मजीठिया मुद्दे पर सीएम और मुख्य सचिव को पत्र लिखेंगे पत्रकार, आज उपश्रमायुक्त से मिलेंगे

गोरखपुर : मजीठिया वेज बोर्ड द्वारा निर्धारित वेतनमान व अन्य सुविधाओं का मीडिया घरानों द्वारा पालन न करने के सम्बन्ध में गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब द्वारा अपने सभागार में बुलायी गयी बैठक में कई निर्णय लिए गए। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के 28 अप्रैल के आदेश के दो हफ्ते बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष श्रम अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने पर क्षोभ प्रकट करते हुए इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, श्रम मंत्री और श्रम आयुक्त को पत्र भेजने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा गोरखपुर के पत्रकारों और न्यूज पेपर कर्मचारी 19 मई को गोरखपुर के उपश्रमायुक्त से मिलकर एक ज्ञापन देंगे।

मुकेश प्रभुदास पांडेय का कार्टून ‎मजीठिया मंच एफबी वॉल से साभार

बैठक में उपस्थित विभिन्न समाचार पत्रों से जुड़े पत्रकारों ने बताया कि मजीठिया वेज बोर्ड द्वारा निर्धारित वेतन मान व अन्य सुविधाएं उनके संस्थान नहीं दे रहे हैं। पिछले तीन वर्ष के एरियर का भी भुगतान नहीं किया गया है। यहीं नहीं मजीठिया वेतन बोर्ड की रिपोर्ट लागू होने के बाद पिछले वर्ष से तमाम पत्रकारों ने पदनाम बदल दिए गए हैं। संस्थान में पत्रकारों की जबर्दस्त निगरानी की जा रही है और उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड के मुद्दे पर पत्रकार संगठनों की बैठक में न जाने और इस सम्बन्ध में मुंह बंद रखने की चेतावनी दी जा रही है। बैठक में शामिल कुछ पत्रकारों ने बताया कि मजीठिया वेतन आयोग के मुताबिक वेतनमान नहीं देने के लिए एक संस्थान में दो दर्जन लोगों का दूरस्थ स्थानान्तरण कर दिया गया और उन्हें संस्थान की नौकरी छोड़ने पर मजबूर किया गया। उनका हिसाब करते हुए एरियर का भुगतान नहीं किया गया।

बैठक में पत्रकारों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 28 अप्रैल को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को चार सप्ताह में विशेष श्रम अधिकारी नियुक्त कर उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड द्वारा निर्धारित वेतनमान दिए जाने के सम्बन्ध में तीन महीने में रिपोर्ट दिए जाने का आदेश दिया गया है। इस सम्बन्ध में दिल्ली व कुछ अन्य राज्यों में श्रम अधिकारी नियुक्त किया गया है लेकिन उत्तर प्रदेश में अभी तक श्रम अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, श्रम मंत्री, श्रम आयुक्त को पत्र भेजकर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अवगत कराते हुए तत्काल विशेष श्रम अधिकारी नियुक्त कर उसे कार्यवाही शुरू करने का आदेश जारी करने की मांग की जाए। साथ ही 19 मई केा गोरखपुर के उप श्रमायुक्त से मिलकर उन्हें ज्ञापन दिया जाए और उनसे जानकारी प्राप्त की जाए कि उन्होंने अब तक मजीठिया वेज बोर्ड दावरा निर्धारित वेतनमान को लागू कराने के लिए क्या कार्यवाही की है ? बैठक में पत्रकारों और न्यूजपेपर कर्मचारियों की यूनियन बनाने पर भी चर्चा हुई और इसकी प्रक्रिया आज से ही शुरू करने का निर्णय लिया गया। बैठक में 19 पत्रकारों और कर्मचारियों ने मजीठिया वेतनमान और एरियर नहीं मिलने का लिखित प्रतिवेदन देने की सहमति जाहिर की। शेष पत्राकरों और कर्मचारियों ने अपना नाम न सार्वजनिक करने का अनुरोध करते हुए हर संघर्ष में साथ देने का वचन दिया।

बैठक में गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के अध्यक्ष अशोक चौधरी, मनोज कुमार सिंह, वीरेन्द्र प्रसाद मिश्र, राजा चतुर्वेदी, शैलेष त्रिपाठी, देशदीपक पाठक, मनोज मिश्र, धर्मेन्द्र पांडेय, योगेश श्रीवास्तव, मनोज त्रिपाठी, सुरेन्द्र मिश्र, इकबाल अहमद, वीरेन्द्र तिवारी, त्रिलोकी पांडेय, विजय उपाध्याय, वेद प्रकाश पाठक, राकेश सारस्वत, विजेन्द्र तिवारी आदि उपस्थित थे।

मजीठिया मंच एफबी वॉल से

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हमने चलना सिखाया, रफ्तार आपको पकड़नी है : यशवंत सिंह

वर्कशाप आगाज है मंजिल तक पहुंचने का: अशोक : वेब मीडिया कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप के दूसरे दिन यूट्यूब चैनल, ब्लाग पर एकाउंट बनाने के तरीके बताए

 

गोरखपुर : हमने चलना सिखाया है, रफ्तार आपको पकड़नी है। वर्कशाप उन लोगों के लिए तरक्की का जरिया बन सकता है, जो सीखना चाहते हैं, मुस्तकबिल संवारना चाहते हैं। अपने ऑनलाइन कामकाज को मानेटाइज करना चाहते हैं। 

वर्कशॉप में शामिल पत्रकार

 

आभार प्रकट करते हुए गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब अध्यक्ष अशोक चौधरी 

यह बातें गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब व लेंस मैन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को प्रेस क्लब सभागार में भड़ास4मीडिया के संस्थापक संपादक यशवंत सिंह ने ’वेब मीडिया कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप’ के दूसरे दिन कहीं। उन्होंने विभिन्न फीचर्स की मदद से इंटरनेट मीडिया के बढ़ते प्रभाव से पत्रकारों को रूबरू कराया। 

उन्होंने बताया कि मीडिया तीन तरह का है। नाउ, न्यू, नेक्सट। इंटरनेट मीडिया 20 साल का है। भारत में 2 बिलियन इंटरनेट यूजर हैं। द रिपब्लिक ऑफ सोशल मीडिया नामक नया गणराज्य बनता जा रहा है। यह नेक्सट मीडिया की श्रेणी में आता है। इसका नारा है – ”बाई द नेटीजन्स, फॉर द नेटीजन्स, एंड टू द नेटीजन्स’’। इस सम्बन्ध में यशवंत ने मीडिया एनालिस्ट ए एस रघुनाथ के नए मीडिया सर्वे पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन को दिखाया और ढेर सारे आंकड़े पेश किए।  

उन्होंने बताया कि इंटरनेट को आप अपना माध्यम बनाते हैं तो दिन प्रतिदिन इसका लाभ बढ़ता जायेगा। 250 ऐसी चीजें हैं, जो आदमी के जन्म से लेकर मृत्यु तक जुड़ी रहती हैं, जिस पर पारम्परिक मीडिया ध्यान नहीं देता लेकिन इन श्रेणियों पर इंटरनेट मीडिया में काम करके नयी ऊंचाई हासिल की जा सकती है। नया बहुत सारा काम सोशल मीडिया इंटरनेट मीडिया पर किया जा सकता है, जिससे अच्छी आमदनी हो सकती है। आज इंटरनेट बिजनेस का सबसे तेजी से बढ़ता माध्यम है। तमाम कंपनियां ऑनलाइन हैं, जो ऐसे लोगों को तलाश करती हैं, जो घर बैठे ऑनलाइन रहकर काम कर सकते हैं। 

उन्होंने ब्लॉगिंग के फील्ड में सक्रिय कई ऐसे लोगों का नाम गिनाया, जो अब नौकरी छोड़ कर अच्छा ख़ासा पैसा वेब ब्लॉग पर गूगल का एडसेंस लगाकर कमा रहे हैं। भोपाल के रवि रतलामी समेत कई लोगों की सफलता का उन्होंने उदाहण दिया। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से यूट्यूब व ब्लागर एकाउंट खोलने के तरीके बताए। साथ ही यह भी बताया कि किस तरह से हम वीडियों, कंटेंट, फोटो , लोगो वगैरह डाल सकते हैं। उन्होंने कई पत्रकारों के यूट्यूब व ब्लागस्पॉट पर एकाउंट खोले गए। पत्रकारों द्वारा किए गए सवालों के जवाब आसान तरीके से सोदाहरण दिए।  

प्रेस क्लब अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि यह वर्कशॉप एक अच्छा आगाज है, जिसे मंजिल तक पहुंचाना है। पत्रकारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्कशॉप किसी वरदान से कम नहीं है। इस मौके पर प्रेस क्लब महामंत्री पंकज श्रीवास्वत, पुस्तकालय मंत्री विनय कुमार शर्मा, संयुक्त मंत्री चन्दन निषाद, उपाध्यक्ष कुंदन उपाध्याय, मनोज कुमार सिंह, अर्जुमंद बानो,, अब्दुल जदीद, मनोज यादव, सैयद फरहान अहमद, ओंकार धर द्विवेदी,, मारकण्डेय मणि त्रिपाठी, सुशील राय, सफी, सेराज, हरिकेश सिंह, फैयाज अहमद, अविनाश, महेश्वर मिश्र, महेश्वर मिश्र, इब्राहीम सिद्दीकी, महेश, सफी, शैलेन्द्र शुक्ला, दीपक पाण्डेय, अरूण सिन्हा, अरविन्द पाण्डेय, संजय त्रिपाठी, नसीम सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। 

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टेक्नोलॉजी क्रांति के दौर में आज इंटरनेट मीडिया कमाई का बड़ा अवसर : यशवंत सिंह

गोरखपुर : गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब व लेंस मैन के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को प्रेस क्लब सभागार में भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ने ’वेब मीडिया कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप’ में यूट्यूब चैनल, न्यूज पोर्टल, ब्लाग, फेसबुक, के जरिए पैसे कमाने के तरीके बताए। 

शुक्रवार को गोरखपुर प्रेस क्लब सभागार में वर्कशॉप के बाद भड़ास4मीडिया के संस्थापक संपादक यशवंत सिंह (बीच में) के साथ सहभागी मीडिया कर्मी

उन्होंने बताया कि इंटनेट मीडिया प्रभावी माध्यम बन गया है। इंटरनेट में स्पेस है। मगर हमारे पास मेधा व स्किल होन के बावजूद हम उस रास्ते से अनजान है। आज के दौर में विचारधारा नहीं टेक्नोलॉजी क्रांति लाएगी। आज जब हम इंटरनेट पर लिखते है तो वह ग्लोबल हो जाता हैं। हमें पता ही नहीं चलता। गूगल पत्रकारों के लेख, फोटो, वीडियों के जरिए खूब कमायी कर रहा है और हमे कमायी करने का मौका भी दे रहा है। इंटरनेट पूरी दुनिया पढ़ती है। मुख्यधारा मीडिया में बढ़ते व्यवसायिक हस्तक्षेप के मद्देनजर एक विकल्प के रूप में इंटरनेट मीडिया बेहद प्रभावशाली है। अपनी बात निष्पक्षता से रखने के लिए इंटरनेट मीडिया सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

उन्होंने इंटरनेट मीडिया के बढ़ते हुए प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि आज विज्ञापनदाता कम्पनियां भी इलैक्ट्रानिक चैनल और समाचार पत्रों की तुलना में इंटरनेट मीडिया को प्रचार का ज्यादा सशक्त माध्यम मानने लगे है क्योंकि यह निर्धारित उपभोक्ता तक पहुंचने का सीधा माध्यम है। इसमें हर वह व्यक्ति प्रकाशक हैं जो वीडियो, लेख या फोटो यूट्यूब, ब्लाग पर डालता है। 

उन्होंने निशा मधुलिका का उदहारण दिया। जो यूट्यूब चैनल के माध्यम से शाकाहारी व्यंजनों की पाक विधि से लोगों तक पहुंचाती है। उनके इस चैनल की दर्शक संख्या लाखांे में है। गूगल द्वारा उन्हें हर माह अच्छी आय प्राप्त होती है। हिन्दी पट्टी में उनका कोई प्रतिद्वंदी भी नहीं है। उन्होंने संजय चैहान  ब्लागर का भी उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि हर जिले में पत्रकार से लेकर पढ़े-लिखे वयक्ति तक अपने अपने न्यूज पोर्टल, ब्लाग, फेसबुक, यूट्यूब चैनल आदि पर सक्रिय हैं और खुद द्वारा क्रिएट जनरेट कंटेंट अपलोड कर रहे हैं। फिलहाल ज्यादातर लोग यह काम शौकिया करते हैं. लेकिन अब इस दौर में जब गूगल जैसा बड़ा ग्रुप हिंदी में कंटेंट रचने वालों को, वीडियो डालने वालों को जमकर डालर दे रहा है, गूगल एडसेंस व कंटेंट मानेटाइजेशन के जरिए, हिंदी पट्टी के अधिकतर लोग अनजान हैं। 

वर्कशाप में उन्होंने बताया कि यूट्यूब चैनल पर एकाउंट खोलने के लिए एक ईमेल की आवश्यकता पड़ती है। जब एकाउंट बन जाएं तो स्क्रीन के दाहिनें तरफ ऊपर की तरफ एप्स का ऑप्शन होता है। वहां क्लिक करें। क्लिक करते ही पॉप अप मीनू खुलेगा। वहां यूट्यूब के आइकान पर क्लिक करें। स्क्रीन के दायीं तरफ अपलोड का आप्शन होगा। इस तरह आप अपना वीडियो अपलोड कर सकते है। इसके बाद मानेटाइजेशन करना होगा। लोडिंग के बाद गूगल एकाउंट सत्यापित करेगा। इसी तरह आप लिखित सामग्री व फोटो डालनी होगी। इसके लिए यूट्यूब की जगह ब्लागर पर क्लिक कर बाकी की प्रक्रिया को अंजाम दे सकते है। छह माह तक ब्लाग चलने के बाद ही पैसा कमाया जा सकता है। वहीं यूट्यूब में शुरू से ही पैसा कमाया जा सकता है। इस प्रक्रिया द्वारा अपने दम पर, अकेले के बल पर महीने में पांच से पचास हजार रुपये तक कमा सकते हैं।

इस दौरान लोगों के सवालात के जवाब देकर जिज्ञासाओं को शांत कराया गया।

इस मौके पर प्रेस क्लब अध्यक्ष अशोक चैधरी, महामंत्री पंकज श्रीवास्वत, पुस्तकालय मंत्री विनय कुमार शर्मा, संयुक्त मंत्री चन्दन निषाद, कोषाध्यक्ष हेमंत तिवारी, उपाध्यक्ष कुंदन उपाध्याय, मनोज कुमार सिंह, अर्जुमंद बानो, मनोज यादव, अब्दुल जदीद, मुर्तजा हुसैन रहमानी, सैयद फरहान अहमद, ओंकार धर द्विवेदी,, मारकण्डेय मणि त्रिपाठी, सुशील राय, सफी, सेराज, हरिकेश सिंह, फैयाज अहमद, अविनाश, महेश्वर मिश्र, राजीव राय, महेश्वर मिश्र, इब्राहीम सिद्दीकी, चेतना पाण्डेय, धनेस, महेश, संजय, सफीक, मुन्ना, शैलेन्द्र शुक्ला, राजेश, संगम दूबे, दीपक पाण्डेय, दीपक श्रीवास्तव, प्रदीप सहित तमाम लोग मौजूद रहे। 

श्री  सिंह ने बताया कि जब भड़ास ब्लाग हम लोगों ने शुरू किया था तो 2007 में गूगल के मानेटाइजेशन प्रोग्राम को एडाप्ट कर गूगल एडसेंस के विज्ञापन कोड लगाने से पहली दफे पांच हजार रुपये का चेक अमेरिका से आया तो मुझे अजीब-सी खुशी हुई। तभी लगने लगा था कि यही काम आगे करते हुए कमाया जा सकता है। तब भड़ास ब्लाग गूगल के ही ब्लागस्पाट पर था। 

उन्होंने बताया कि बिना खुद की आर्थिक निर्भरता के ब्लाग, वेबसाइट, पत्रकारिता लंबे समय तक संभव नहीं है. इसलिए इन्हीं सब चीजों को ध्यान में रखते हुए वर्कशाप का आयोजन किया गया। आज हर जिले में दो चार वेबसाइट्स वहां के स्थानीय पत्रकारों द्वारा चलाई जा रही है. हर जिले में वीडियो जर्नलिस्ट और कैमरामैन हैं जो रोजाना वीडियो शूट करते हैं. ये लोग अगर गूगल मानेटाइजेशन के तौर-तरीके को समझ कर अपना लें तो हर महीने एक अच्छी रकम घर बैठे कमा सकते हैं। कुल मिलाकर यह वर्कशाप उन लोगों के लिए है जो सीखना चाहते हैं, अपनी आज की स्थिति से आगे बढ़ना चाहते हैं, अपने आनलाइन कामकाज को मानेटाइज करना चाहते हैं।  को नौकरी करने की जगह खुद का काम करने को प्रेरित करना भी है।

आज खोला जाएगा एकाउंट

गोरखपुर। वर्कशाप में भाग लेने वाले प्रशिक्षुओं का 16 मई को पूर्वाह्न 11.00 बजे कंटेंट मानेटाइजेशन एकाउंट खोला जाएगा।

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रवि प्रकाश आईनेक्स्ट गोरखपुर से इस्तीफा देकर लाइव इंडिया नोएडा पहुंचे

आईनेक्स्ट गोरखपुर के सीनियर सब इडिटर रवि प्रकाश त्रिपाठी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपनी नई पारी की शुरुआत नोएडा के लाइव इंडिया वेब पोर्टल से की है। 

पिछले दिनो रवि प्रकाश को आईनेक्स्ट गोरखपुर के प्रभारी अश्विनी पांडेय ने अखबार से निकाल देने का अल्टीमेटम दिया था। इससे पहले ही वह नौकरी को ठोकर मारकर निकल लिए। वही आजकल वाराणसी यूनिट की तरह गोरखपुर आईनेक्स्ट भी हिंदुस्तान की खबरें चुरा चुरा कर छाप रहा है। रविवार को आज आईनेक्स्ट ने जो लीड खबर लगाई है, उसे हिंदुस्तान कल ही छाप चुका है।

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‘अब भारत में ब्राह्मणों और बनियों के मीडिया की भूमिका तय होनी चाहिए’

गोरखपुर : फिल्म फेस्टिवल में भारतीय मीडिया पर उठे सवालों ने पहली बार इतनी गंभीरता से लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है। पहले दिन अरुंधति रॉय ने भारतीय मीडिया को ब्राह्मणों और बनियों का मीडिया कहा तो दूसरे दिन सेंसरशिप और मीडिया पर गंभीर बहस में कई नामचीन फिल्मकारों, पत्रकारों  का कहना था कि आधुनिक मीडिया हमसे बहुत कुछ छिपा रहा है। इसमें सरकारें भी शामिल हैं। सच कहने से रोका जा रहा है। सजा दी जा रही है। दूसरे देशों की तरह भारतीय मीडिया की भूमिका तय होनी चाहिए। 

गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल में अरुंधति राय और तरुण भारती

गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल की एक झलक

गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल में शिरकत करते लोग

फेस्टिवल के पहले दिन लेखिका और एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय का कहना था कि इस देश के पहले कॉरपोरेट प्रायोजित एनजीओ मोहनदास करमचंद गाँधी थे और वो कॉरपोरेट बिरला थे. कॉरपोरेट घरानों की इस देश की राजनीति, समाज और कला साहित्य को प्रभावित करने की कोशिश कोई नयी बात नहीं है. जो काम आज अंबानी, वेदान्ता, जिंदल या अडानी कर रहे हैं, वो पहले भी बिरला या टाटा जैसे घराने करते ही थे.

गोरखपुर फ़िल्म फ़ेस्टिवल को संबोधित करते हुए लेखिका और एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय ने मीडिया, साहित्य और कला के क्षेत्र में कॉरपोरेट की बढ़ती घुसपैठ पर जम कर हमला बोला. उन्होंने कहा कि जो काम बरसों से फ़ोर्ड और रॉकफ़ेलर फ़ाउंडेशन कर रहे थे, वही काम अब भारतीय कॉरपोरेट घराने करने लगे हैं. जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल में सलमान रश्दी की अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बहुत बहस होती है लेकिन छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के अधिकारों पर कोई बात नहीं होती क्योंकि ऐसे उत्सवों के प्रायोजक यही कॉरपोरेट हैं, जो उन ग़रीबों के हितों पर डाका डाल रहे हैं.

अरुंधति ने जातिवाद को पूंजीवाद जितना ही ख़तरनाक बताते हुए कहा की 90 प्रतिशत कॉरपोरेट बनियों के नियंत्रण में हैं और मीडिया में ब्राह्मणों और बनियों का ही वर्चस्व है. गाँधी को ‘जातिवादी’ बताने वाले अपने पुराने बयान को फिर से दोहराते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की अंध भक्ति ठीक नहीं. उन्होंने कहा की उनके ये विचार 1909 से 1946 तक के ख़ुद गाँधी जी के लेखन के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष हैं. समाज से लेकर राजनीति तक हर कहीं ऐसे ही जाति समूह दिखाई देते हैं. समाज को विभाजित करने वाली इस ताक़त के ख़िलाफ़ भी प्रतिरोध की लड़ाई लड़नी होगी.

प्रतिरोध का सिनेमा अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय जोशी ने कहा कि जिन सच्चाइयों को कॉरपोरेट और उसका समर्थक सूचना तंत्र दबाने और छिपाने में लगा है, उसे प्रतिरोध के सिनेमा ने मंच दिया है. फ़िल्मकार संजय काक ने कहा कि डॉ़क्यूमेंट्री फ़िल्मों के लिए ये बेहतर दौर है. इस फ़ेस्टिवल ने साबित किया है कि बेहतर फ़िल्मों के लिए एक पब्लिक स्फ़ेयर मौजूद है जो पब्लिक डोनेशन की ताक़त से कामयाब भी हो सकता है.

दस साल पहले एक प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ गोरखपुर फ़िल्म फ़ेस्टिवल अब राष्ट्रीय स्तर पर एक अभियान बन चुका है. हालांकि शुरुआत से ही नियमित तौर पर शिरकत कर रहे एक दर्शक वर्ग का ये भी मानना है की जन संस्कृति मंच के जुड़ाव के साथ जबसे इस फ़िल्म फ़ेस्टिवल की तासीर बदली तबसे आम लोगों की दिलचस्पी घटी है. 

फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन सेंसरशिप और मीडिया पर गंभीर बहस में फिल्मकार संजय काक, अजय टीजी, तरुण भारतीय, बिक्रमजित गुप्ता, पंकज श्रीवास्तव, नकुल सिंह साहनी आदि ने विचारोत्तेजक बातों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर केंद्रित रखा। उनका कहना था कि आज के दौर का मीडिया हमसे बहुत कुछ छिपा रहा है। जो दिखाया, बताया जा रहा है, वह पूरा सच नहीं है। इसमें सभी सरकारें भी शामिल हैं। हमे सच कहने से रोका जा रहा है, सजा दी जा रही है। क्या सच बोलना गुनाह है। दूसरे देशों की तरह भारत में भी मीडिया की भूमिका तय होनी चाहिए। सरकारें अपने हिसाब से राय तय करने के लिए मजबूर कर रही हैं। साम्राज्यवाद के इस दौर में नाम रखने में भी सोचना पड़ रहा है। यह असहनीय है। रविवार को बच्चों को पवन श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित भोजपुरी फिल्म ‘नया पता’ दिखाई गई। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा पर बनी अजय टीजी की ‘पहली आवाज’ को दर्शकों ने खूब सराहा। 

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