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सेंसर बोर्ड के पूर्व मुखिया ने काटछांट का भय दिखा ‘सिंघम रिटर्न्स’ के निर्माता रोहित शेट्टी से दो लाख रुपये झटके थे

केंद्रीय जांच ब्यूरो की मुंबई शाखा ने सिंघम रिटर्न्स के निर्माताओं के खिलाफ घूसखोरी का मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। इन पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व मुखिया राकेश कुमार को रिश्वत देने का आरोप है। जांच शाखा ने यह सिफारिश इस साल जनवरी में सीबीआइ मुख्यालय दिल्ली को भेजी थी। इस बारे में संपर्क करने पर सीबीआइ के एक प्रवक्ता ने बताया कि हम मामले की पड़ताल कर रहे हैं और जांच जारी है। फिल्म के निर्माता रोहित शेट्टी और उनके प्रवक्ता को इस बाबत विस्तृत प्रश्नावली भेजी गई, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। फोन का भी जवाब नहीं दिया गया।

केंद्रीय जांच ब्यूरो की मुंबई शाखा ने सिंघम रिटर्न्स के निर्माताओं के खिलाफ घूसखोरी का मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। इन पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व मुखिया राकेश कुमार को रिश्वत देने का आरोप है। जांच शाखा ने यह सिफारिश इस साल जनवरी में सीबीआइ मुख्यालय दिल्ली को भेजी थी। इस बारे में संपर्क करने पर सीबीआइ के एक प्रवक्ता ने बताया कि हम मामले की पड़ताल कर रहे हैं और जांच जारी है। फिल्म के निर्माता रोहित शेट्टी और उनके प्रवक्ता को इस बाबत विस्तृत प्रश्नावली भेजी गई, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। फोन का भी जवाब नहीं दिया गया।

इस फिल्म को 8 अगस्त 2014 को सेंसर प्रमाणपत्र (सीसी) मिला था। इसके छह दिन बाद संयुक्तअरब अमीरात में इसका प्रीमियर 14 अगस्त को हुआ। इसके कुछ दिनों बाद ही सीबीआई ने कुमार, उनके एजंट श्रीपति मिश्रा और सीबीएफसी सलाहकार समिति के सदस्य सर्वेश जायसवाल को घूसखोरी के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया। सूत्रों के अनुसार, सिंघम रिटर्न्स की एक स्क्रीनिंगसात अगस्त 2014 को हुई थी, जब कुमार ने कथित तौर पर बोर्ड के दो सदस्यों पर खाली फार्म भरने के लिए जोर डाला। ये तीनों उस स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य थे जिसे सेंसर प्रमाणपत्र जारी करना था। रोहित शेट्टी और प्रोडक्शन हाउस के एक अधिकृत एजंट किशन पिल्लई भी स्क्रीनिंग के समय मौजूद थे। सीबीआई ने उन दो बोर्ड सदस्यों के बयान लिए जिन्होंने अपने दस्तखत पहचाने और आरोप लगाया कि कुमार ने ‘जबरदस्ती’ खाली फार्मों पर उनके दस्तखत लिए।

सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि इन फार्मों को सदस्यों की ओर से भरा जाना था। सेंसरशिप के विभिन्न बिंदुओं पर उनके सुझाव की जरूरत थी। इन्हें सीलबंद लिफाफे में बंद कर भेजा जाना चाहिए था। इसके बजाय कुमार ने दबाव डालकर दो सदस्यों से खाली फार्म पर दस्तखत करा लिए। अपने बयान में पिल्लई ने कहा कि शेट्टी ने सीसी प्राप्त करने के लिए दो लाख की रिश्वत दी। सीबीआई ने बताया कि सीबीएफसी में से 15-20 अधिकृत एजंट जुड़े हुए हैं। कुमार ने चार-पांच एजेंट की मदद की और वे उन्हीं फिल्मों को मंजूरी देते थे, जो इन खास एजेंटों के जरिए उनके पास आती थीं। पिल्लई भी उनमें से एक था।

पिल्लई के बयान के अनुसार, कुमार ने फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान 12 कट के सुझाव दिए थे। उन्होंने शेट्टी से कहा कि उन पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से काफी दबाव है कि फिल्म को प्रमाणपत्र (सीसी) न दिया जाए। पिल्लई ने अपने बयान में कहा कि कुमार ने शेट्टी से कहा कि चूंकि इस फिल्म से कुछ लोगों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंच सकती है, इसलिए मंत्रालय की ओर से दबाव है कि इसे मंजूरी न दी जाए। कुमार ने उस गाने में भी काटछांट का सुझाव दिया जो एक मशहूर दरगाह के सामने फिल्माय गया था। लेकिन शेट्टी ने कहा कि यह काटछांट नहीं की जाए और इसके एवज में यानी प्रमाणपत्र पाने के लिए कुमार को दो लाख की घूस दी गई।

एक अधिकारी ने बताया कि कुमार के काल-डाटा खंगालने के बाद पता चला कि मंत्रालय के किसी अधिकारी ने उन पर फिल्म रोकने के लिए दबाव नहीं डाला। किसी ऐसे अधिकारी का नंबर नहीं मिला जो फिल्म में कुछ बदलाव चाहता हो। अधिकारी ने बताया कि 14 अगस्त 2014 को फिल्म अमीरात में रिलीज होने वाली थी। इसलिए प्रमाणपत्र को लेकर रोहित शेट्टी काफी चिंतित थे। नौ अगस्त को सीसी के साथ फिल्म की सीडी भेजी जानी थी। लेकिन कुमार को घूस मिलने के बाद शेट्टी को आठ अगस्त को प्रमाणपत्र मिल गया। सूत्रों ने बताया कि पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद कुमार और शेट्टी के खिलाफ मामला दर्ज करने की रपट भेजी गई। सीबीआइ ने बताया कि केस दर्ज करने के बारे में विधि अधिकारियों की राय ली गई है। कार्रवाई के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को फैसला करना है।

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