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उत्तर प्रदेश

यूपी विधानसभा में पत्रकारों पर हमले का मामला जोर-शोर से उठा, तीन पार्टियों ने सदन से किया बहिर्गमन

लखनऊ : विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान पत्रकारों पर चौतरफा हो रहे हमलों का मामला जोर-शोर से उठा। मुख्य विपक्षी दल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस ने शुरुआत में ही प्रश्नकाल स्थगित कर इस मसले पर चर्चा कराये जाने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह शून्यकाल में इस विषय पर चर्चा कराने को तैयार हैं। बावजूद इसके बसपा अपनी मांग पर अड़ी रही। इस मामले में बसपा, कांग्रेस व रालोद ने सदन से बहिर्गमन किया।

लखनऊ : विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान पत्रकारों पर चौतरफा हो रहे हमलों का मामला जोर-शोर से उठा। मुख्य विपक्षी दल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस ने शुरुआत में ही प्रश्नकाल स्थगित कर इस मसले पर चर्चा कराये जाने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह शून्यकाल में इस विषय पर चर्चा कराने को तैयार हैं। बावजूद इसके बसपा अपनी मांग पर अड़ी रही। इस मामले में बसपा, कांग्रेस व रालोद ने सदन से बहिर्गमन किया।

पूर्वान्ह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई वैसे ही बसपा और कांग्रेस के सदस्य अपने-अपने स्थानों पर खडे होकर पत्रकारों पर हो रहे चौतरफा हमले को लेकर चर्चा कराये जाने की मांग करने लगे। उन्होंने कहा कि आज मीडिया को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। पत्रकारों पर हमला दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए मौर्य ने कहा कि इसको लेकर कोई सख्त नियम बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पत्रकारों को इंसाफ मिलना चाहिए।

कांग्रेस के नेता विधान मण्डल दल प्रदीप माथुर ने भी पत्रकारों पर हो रहे हमलों को सरकार को गंभीरता से लेने की बात करते हुए कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आज समाज की बुराइयों पर नजर रखने और उसे आईना रूप में हमारे सामने पेश करने वाले पत्रकारों के खिलाफ हमलों का एक अभियान सा चल रखा है। उन्होंने भी कहा कि पत्रकारों पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर इन्हें इंसाफ देना चाहिए। उन्होंने कहा इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष के प्रश्नकाल में चर्चा स्वीकार न कराये जाने से असंतुष्ट बसपा ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया। कांग्रेस सदस्य अपने-अपने स्थानों पर खडे रहे। वहीं भाजपा के नेता विधानमण्डल दल सुरेश खन्ना ने भी अपनी बात कही। इस पर सरकार की ओर से मंत्री अम्बिका चौधरी ने कहा कि यह सब ढकोसला है। यह लोग घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। बसपा की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग यह सवाल उठा रहे हैं उन्होंने ही अपनी सरकार में पत्रकारों के लिए दरवाजे बन्द कर रखे थे।

शून्य काल में समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने लोक महत्व के प्रश्न को नियम 301 में उठाते हुए कहा कि 18 अगस्त को लखनऊ में हिन्दुस्तान समाचार पत्र के कार्यालय पर अराजक तत्वों ने हमला कर दिया और पत्रकारों और कर्मचारियों को बुरी तरह घायल कर दिया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर हमला है इसलिए इस घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिये जिससे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कांग्रेस के सदस्य पंकज मलिक ने ही लोक महत्व के नियम 301 में कैराना में दैनिक जागरण कार्यालय के पत्रकारों और कर्मचारियों पर हमला किये जाने का मामला उठाया और कहा कि यह पत्रकारिता का गला घोटने की कार्यवाही है। इसलिए दैनिक जागरण कार्यालय पर हमला करने वालों को दंडित किया जाना चाहिये। इस मामले में अध्यक्ष ने कहा कि सरकार आवश्यक कार्यवाही करेगी।

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