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आज के अखबारों में प्रधानमंत्री का चुनाव प्रचार, भूल सुधार और श्रेय लेना (देना) और उसका सच

संजय कुमार सिंह

आज के अखबारों की सबसे बड़ी खबर बनारस से प्रधानमंत्री का नामांकन दाखिल होने की है। इस खबर की शानदार प्रस्तुति के साथ अखबारों ने उनका प्रचार किया है, उन्हें भूल सुधार का मौका दिया है। यही नहीं, अमित शाह ने एक इंटरव्यू में 370 हटाने को सही ठहराया है उसके फायदे बताये हैं और भाजपा की ओर से उसका श्रेय लिया है। कश्मीर से चुनाव नहीं लड़ने का कारण यह बताया है कि घाटी में उम्मीदवार खड़े करने से पहले भाजपा ने जमीन पर संगठन बनाने का निर्णय किया है। दूसरी ओर, द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार घाटी में मतदान ज्यादा होने का कारण 370 हटाने के खिलाफ लोगों की नाराजगी है। जहां तक कश्मीर में आधार बनाने की बात है, मुझे लगता है कि यही काम आम आदमी पार्टी कर रही है (संभव है उसका काम राष्ट्रीय स्तर पर हो) तो उसके नेताओं को जेल में रखा गया है।

असंवैधानिक इलेक्टोरल बांड के बावजूद भाजपा के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत नहीं है और उत्पाद शुल्क मामले में आम आदमी पार्टी को भी आरोपी बनाने का निर्णय ईडी ने किया है और आज यह भी खबर है। हालांकि, यह कानून का मामला है और मेरा विषय नहीं है। लेकिन यह विरोधियों को खत्म करने के मोदी सरकार के प्रयास या रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इस क्रम में व्हाट्सऐप्प पर यह ‘खबर’ घूम रही है कि पार्टी ने अधिवक्ता, अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा में भेजने का आश्वासन दिया है। भले ही यह किसी वकील को राज्यसभा में भेजने का पहला मामला नहीं होगा और कई उदाहरण मौजूद हों लेकिन किसी पार्टी को अभियुक्त बनाने का यह पहला मौका है। इस लिहाज से पहले आज की प्रमुख खबरें  देख लीजिये फिर हेडलाइन मैनेजमेंट (अगर है) को समझने की कोशिश कीजिये। आम आदमी पार्टी को व्हाट्सऐप्प की खबरों से बदनाम करने की कोशिशें अपनी जगह हैं।  

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1. दिल्ली के आयकर भवन (सीआर बिल्डिंग) में आग लगी, अधिकारी की मौत

2. आबकारी मामले में आम आदमी पार्टी को आरोपी बनायगा प्रवर्तन निदेशालय

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3. ममता बनर्जी सीएए नहीं रोक सकतीं – अमित शाह

4. जनसहयोग से बच्चे को लगा 17.5 करोड़ का इंजेक्शन

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5. सुप्रीम कोर्ट में आईएमए प्रमुख पर अवमानना मामला … माफी नामंजूर

6. रामदेव मामले में फैसला सुरक्षित, जनता में प्रभाव का सही इस्तेमाल करना चाहिये

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7. मुंबई में बिलबोर्ड गिरने से 14 मरे 14 महीने की ‘कार्रवाई’ भी जान नहीं बचा पाई

8. इंदौर की एक लाइब्रेरी में किताबें होने के लिए एफआईआर, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की

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9. नोएडा में 26 साल के अमन को पीट कर मारा, दो गिरफ्तार

10. 2023 की गर्मी 2000 साल में सबसे ज्यादा थी    

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11. गाजा में पहली भारतीय मौत हुई है और इसपर भारत सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं है।

इंडियन एक्सप्रेस ने बनारस से प्रधानमंत्री के नामाकंन के साथ रंग बदलने की खबर को सबसे ज्यादा जगह दी है। छह कॉलम में दो लाइन के मुख्य शीर्षक के साथ एक फ्लैग शीर्षक, इंट्रो और इसके साथ चुनाव आयोग को भाजपा का जवाब एक अलग खबर है। इसका भी फ्लैग शीर्षक है और दो कॉलम की इस खबर का शीर्षक चार लाइनों में है। मुख्य खबर का इंट्रो चार लाइनों में है। तीन कॉलम की एक फोटो भी है जिसका कैप्शन है, वाराणसी में मंगलवार को नामांकन दाखिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और अन्य एनडीएन नेताओं के साथ। फोटो क्रेडिट एएनआई। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, बांसवाड़ा में मंगलसूत्र वाले भाषण के तीन हफ्ते बाद (मुख्य शीर्षक है), “प्रधानमंत्री ने कहा : जिस दिन मैं हिंदू-मुस्लिम करूंगा, सार्वजनिक जीवन के लिए अयोग्य हो जाऊंगा… मैं ऐसा नहीं करूंगा, यह मेरा संकल्प है”। 

आज की खबरों में नवोदय टाइम्स का यह शीर्षक भी दिलचस्प है, तीसरे कार्यकाल में करूंगा नई ऊर्जा से काम : मोदी। आप जानते हैं कि 2014 में नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने थे तो उन्होंने खुद नियम बनाया था कि 75 साल से ऊपर के लोग सक्रिय नहीं रहेंगे। इस लिहाज से अगले साल 17 सितंबर को वे 75 के पूरे हो जायेंगे और अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि भाजपा को वोट देने का मतलब अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाना होगा। ऐसे मोदी की बहुप्रचारित गारंटी और पुराने जुमलों के हित में प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिये कि अपने मामले में वे अपना ही बनाया नियम तोड़ देगे और उसपर नहीं चलेंगे। लेकिन अखबार वालों ने इसपर कोई सवाल नहीं किया है। ना जनता और मतदाताओं को इसका जवाब मिला है। इस लिहाज से यह महत्वपूर्ण है कि 2014 में ‘फकीर आदमी हूं’, ‘झोला उठाकर चल दूंगा’ कहने वाले के पास आज 3 करोड़ की संपत्ति है। इसी खबर को एक अखबार ने छापा है, प्रधानमंत्री के पास न घर न गाड़ी, 52 हजार रुपये नकद।   

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आज अखबारों में जब मैंने उनका यह दावा पढ़ा कि जिस दिन मैं हिंदू-मुस्लिम करूंगा, सार्वजनिक जीवन के लिए अयोग्य हो जाऊंगा… मैं ऐसा नहीं करूंगा, यह मेरा संकल्प है” तो मुझे ध्यान आया कि कल नामांकन दायर करते हुए उनसे साथ का व्यक्ति कौन था। आज इससे संबंधित एक खबर द टेलीग्राफ में मिली। इसका शीर्षक है, प्रधानमंत्री के प्रस्तावकों से संकेत। लखनऊ डेटलाइन से पीयूष श्रीवास्तव की बाईलाइन वाली इस खबर में कहा गया है, “…. उनके साथ एक स्थानीय ब्राह्मण वैदिक विद्वान गणेश्वर शास्त्री भी मौजूद थे। इन्होंने राम मंदिर के अभिषेक का समय तय किया था। तीन अन्य में ओबीसी समुदाय के आरएसएस सदस्य बैजनाथ पटेल और लालचंद कुशवाह और भाजपा कार्यकर्ता संजय सोनकर थे जो अनुसूचित जाति के हैं। खबर के अनुसार, वाराणसी में 6.5 लाख ओबीसी मतदाता और 3.5 लाख एससी मतदाता हैं। वाराणसी के 19 लाख मतदाताओं में से लगभग 2.5 मुस्लिम हैं। लेकिन मोदी ने यहां से तीन बार नामांकन दाखिल किया है पर कभी भी इस समुदाय से कोई प्रस्तावक नहीं रहा।” एक हिन्दी अखबार का शीर्षक है, मोदी ने पुष्य नक्षत्र, सवार्थ सिद्धि व रवि योग में भरा पर्चा। एक अखबार ने पहले ही छाप दिया था कि वे 14 मई को कितने बजे नामांकन दाखिल करगें। दूसरी ओर खबर यह भी है कि श्याम रंगीला को नामांकन दाखिल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी और वह जब (या जिस दिन) नामांकन दाखिल करना चाहता था उस दिन नहीं कर पाया।

मुझे लगता है कि जब उन्होंने कहा है कि वे हिन्दू मुस्लिम करेंगे तो सार्वजनिक जीवन के अयोग्य हो जायेंगे तो उन्हें और उनके समर्थकों को यह याद दिलाया जाना चाहिये कि वे यही करते रहे हैं। आपको याद होगा, बांसवाड़ा में 21 अप्रैल को उन्होंने कहा था, “पहले जब उनकी सरकार थी, उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इसका मतलब, ये सम्पत्ति इकट्ठी करके किसको बांटेंगे? जिनके ज्यादा बच्चे हैं उनको बांटेंगे, घुसपैठियों को बांटेंगे। क्या आपकी मेहनत की कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा? आपको मंजूर है ये? इंडियन एक्सप्रेस ने आज हिन्दी में दिया गया उनका ये भाषण बिना अनुवाद किये छापा है। खबर में याद दिलाया है, इस भाषण में उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस का घोषणापत्र कहता है कि वे माताओं और बेटियों के सोने का हिसाब लेंगे और फिर उस संपत्ति को बांट देंगे। और इसे उन लोगों के बीच बांटेंगे जिन्हें मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था, (देश की) संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। भाइयों और बहनों, यह अर्बन नक्सल सोच माताओं और बहनों के मंगलसूत्र को भी नहीं छोड़ेगी।

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इस भाषण की आलोचना हुई थी। कांग्रेस के साथ भाकपा, माकपा (एमएल) ने भी इसकी आलोचना की थी और चुनाव आयोग से शिकायत की गई थी। चुनाव आयोग ने इस संबंध में प्रधान प्रचारक की बजाय पार्टी अध्यक्ष को नोटिस जारी किया था और पार्टी अध्यक्ष जवाब देने की बजाय समय मांगते रहे। आज इस खबर के साथ पार्टी का जवाब भी है। उसपर आने से पहले प्रधानमंत्री ने बनारस में नामांकन दाखिल करने पर जो कहा है वह शीर्षक है। आज अमर उजाला में प्रधानमंत्री का यह स्पष्टीकरण लीड नहीं है और (पहले पन्ने पर) शीर्षक में भी नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया में भी लीड का शीर्षक लगभग वही है और इंट्रो है, जिनके ज्यादा बच्चे होते हैं से उनका मतलब भारत के गरीबों से है। यहां यह उल्लेखनीय है कि वे खुद कितने भाई-बहन हैं और कितने गरीब (या अमीर हैं) यह भी कि मल्लिकर्जुन खडगे सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उनके पांच बच्चे हैं। यही नहीं, लालू यादव पर वे ज्यादा बच्चों के लिए तंज कसते रहे हैं जवाब भी सुना है और बदले में 2019 के चौकीदार की तरह इस बार परिवार बना चुके हैं पर खबरों में क्या-क्या याद दिलाया जाये। 

यह दिलचस्प हेडलाइन मैनेजमेंट है कि चुनाव आयोग को भाजपा का जवाब आज ही खबर है। इंडियन एक्सप्रेस में इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, “कांग्रेस की शिकायत पर नड्डा का जवाब”। मुख्य शीर्षक है, “इस बीच भाजपा ने ईसी से कहा प्रधानमंत्री के भाषण ठीक हैं, हिन्दू विरोधी होने के लिए कांग्रेस के खिलाफ कार्रवाई कीजिये”। द हिन्दू में नामांकन की खबर लीड नहीं है और लीड के बराबर में तीन कॉलम में छपी है। इसका शीर्षक है, “लगातार तीसरी बार जीतने की कोशिश में मोदी ने वाराणसी से नामांकन दाखिल किया”द हिन्दू में लीड अमितशाह का इंटरव्यू है और इसका शीर्षक है, (कश्मीर में ज्यादा) “मतदान से पता चलता है कि अनुच्छेद 370 हटाना सही था : शाह”। उपशीर्षक है, “केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, श्रीनगर में 37 प्रतिशत मतदान निर्णय के सही होने का सबसे बड़ा सबूत है।

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द टेलीग्राफ की खबर इसके उलट है। इस खबर का शीर्षक है, “370 के गुस्से ने घाटी में मतदान बढ़ाया”। श्रीनगर डेटलाइन से मुजफ्फर रैना की खबर के अनुसार घाटी के राजनेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और  भाजपा के अन्य मंत्रियों के इस दावे का विरोध किया है कि श्रीनगर लोकसभा सीट पर ज्यादा मतदान का संबंध अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से जुड़ा है। कश्मीरी राजनेताओं ने तर्क दिया कि विवादास्पद कदम के खिलाफ गुस्से ने संख्या बढ़ा दी है। श्रीनगर लोकसभा सीट पर 38.3 प्रतिशत मतदान हुआ, जो आतंकवाद की शुरुआत के बाद से दूसरा सबसे बड़ा मतदान है। इससे मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसका श्रेय लेने के लिए प्रेरित हुए। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर में संवाददाताओं से बातचीत में सोमवार के मतदान को “अच्छा” बताया, लेकिन कहा कि लोग 2019 से घुटन महसूस कर रहे थे। “लोग दिल्ली को संदेश भेजना चाहते थे कि 2019 में आपका निर्णय, या उसके बाद अन्य निर्णय हमारी भूमि, राज्य के विषय से संबंधित हैं (स्थिति), नौकरियां जम्मू-कश्मीर, राजौरी-पुंछ और जम्मू के लोगों को स्वीकार्य नहीं हैं”। महबूबा ने शिकायत की कि मतदान अधिक होता लेकिन कई स्थानों पर मतदान प्रक्रिया धीमी हो गई।

उन्होंने आगे कहा, “जहां कहीं भीड़ अधिक थी, जानबूझकर मतदान धीमा कर दिया गया क्योंकि यह संकेत था कि लोग पीडीपी (उनकी पार्टी) के लिए वोट डाल रहे थे।” उन्होंने अनंतनाग-राजौरी निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं से कहा कि वे मतदान किए बिना न जायें, भले ही उन्हें 10 घंटे तक खड़ा रहना पड़े। उन्होंने कहा, “वे (लोग) मतपत्रों के माध्यम से अपनी आवाज संसद तक पहुंचाना चाहते हैं और उन्हें बताना चाहते हैं कि हम पर अत्याचार किया जा रहा है, हमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।” अखबार ने एक चुनावी रैली की फोटो छापी है जिसका कैप्शन है, जेल में बंद राजनेता और बारामूला के उम्मीदवार शेख अब्दुल रशीद उर्फ ​​इंजीनियर रशीद के समर्थक बांदीपोरा में उनके बेटे अबरार रशीद के नेतृत्व में एक रैली में। अबरार की रैलियां हजारों लोगों को आकर्षित कर रही हैं और इसने चुनाव को इंजीनियर राशिद, उमर अब्दुल्ला और सज्जाद लोन के बीच त्रिकोणीय लड़ाई में बदल दिया है। “तिहाड़ का बदला वोट से देंगे” उनका नारा है। पूर्व विधायक इंजीनियर राशिद पर आतंकवाद का मामला दर्ज है और वह तिहाड़ जेल में बंद हैं।

द हिन्दू की खबर के अनुसार अमित शाह ने कहा है,… भाजपा ने घाटी में उम्मीदवार खड़ा करने से पहले जमीन पर संगठन बनाना तय किया है”लाइव हिन्दुस्तान डॉट कॉम की एक खबर के अनुसार 11 मई को उन्होंने कहा था, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आज ही के दिन 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था और देश को परमाणु शक्ति बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास सर्जिकल स्ट्राइक और हवाई हमले करने का साहस नहीं है। गृह मंत्री ने कहा कि देश पर पाकिस्तानी आतंकवादियों के हमले के दस दिन के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक एवं हवाई हमले किए और उनका (आतंकवादियों का) खात्मा कर दिया। हम पीओके लेकर रहेंगे – कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर एवं नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान के पास परमाणु बम होने संबंधी बयान का जिक्र करते हुए शाह ने रैली में कहा कि वह राहुल गांधी से पूछना चाहते हैं कि पाकिस्तान के पास परमाणु बम है, इसलिए क्या पाक के कब्जे वाले कश्मीर को पड़ोसी देश को दे देना चाहिए। उन्होंने कहा, जब तक यहां भाजपा है, ऐसा कभी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का है और हम उसे लेकर रहेंगे। कह सकते हैं कि यह सब कश्मीर में भाजपा संगठन मजबूत करने के प्रयास में कहा गया है।

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