
गिरीश मालवीय-
कल रात देश की जनता ने न्यूज चैनलों पर कुछ अजीब से दृश्य देखे, राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर इंडिया गेट पर बड़े प्रदर्शन हुए और कैमरामैन को कुछ डिफरेंट विजुअल और फोटोग्राफर्स को अच्छे शॉट खींचने को मिले …. इस साल दिल्ली में वायु प्रदूषण अपने चरम पर है जहरीली हवा दिल्ली NRC की सांस घोंट रही है।
लेकिन कमाल की बात है कि हर साल न्यूज चैनलों ओर अखबारों में दिल्ली में जहरीली हवा ओर वायु प्रदूषण का जिसे सबसे बड़ा दोषी बताया जाता रहा है वो इस बार हेडलाइनों ओर ब्रेकिंग न्यूज़ से गायब ही रहा है हम बात कर रहे हैं दिल्ली के आसपास के किसानों की पराली जलाने की।
इस साल पंजाब राजस्थान हरियाणा में बेहिसाब बारिश हुई है पंजाब की सारी नदियों में एक साथ बाढ़ आई और किसानों के खेत में पानी भर गया जो महीनों तक सूख नहीं पाया तो बड़े पैमाने पर पराली जलेगी कैसे????
तब भी इस साल दिल्ली की आबोहवा में वहीं दमघोंटू प्रदूषण महसूस किया गया तो फिर ये प्रदूषण आया कहा से?…..क्योंकि एक वक्त तो सरकारी एजेंसी ये कहा करती थी कि प्रदूषण में 48 प्रतिशत हिस्सा पराली का रहता है।
अगर पराली जली नहीं या बहुत कम जली तो इतना प्रदूषण आया कहा से? ये लाख रुपए का सवाल है जिसे मीडिया बिलकुल हजम कर गया।
किसानों को दोष देना बहुत आसान है लेकिन प्रदूषण के असली दोषी है उद्योग खासकर के पॉवर सेक्टर… दरअसल ऊर्जा उत्पादन प्रदूषण रैंकिंग में शीर्ष पर बना हुआ है। बिजली और ऊष्मा उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधन के दहन से वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 75% हिस्सा बनता है।
आज भारत में अडानी देश में सबसे अधिक कोयला-आधारित बिजली घरों के मालिक हैं और कोयला उत्खनन में देसी और अंतरराष्ट्रीय व्यवसायी भी है लेकिन कभी मीडिया हमें इस एंगल से ख़बर बताता है? कि अदानी का ऐसे वायु प्रदूषण बहुत बड़ा हिस्सा है।
मोदी सरकार भी खुलकर इनके साथ है 2019 में देश के पर्यावरण मंत्रालय ने कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट्स से होने वाले वायु प्रदूषण के तय मानकों को घटाने के बजाए बढाने की मंजूरी दे दी ओर यह मंजूरी सिर्फ इसलिए दी गयी कि यह थर्मल पावर प्लांट अडानी के है। 2019 में मोदी सरकार ने थर्मल पावर प्लांट्स से निकलने वाली जहरीली गैस नाइट्रोजन ऑक्साइड की सीमा 300 से बढ़ाकर 450 mg/Normal Cubic Meter कर दी।
मई 2019 को मंत्रालय को चार थर्मल पावर प्लांट के सात इकाइयों पर की गई एक मॉनिटरिंग रिपोर्ट भेजी गयी थी, जिसमें ये पाया गया था कि सात में से सिर्फ दो इकाइयां ही 300 mg/Nm³ के मानक से ज्यादा उत्सर्जन कर रही हैं। ये दोनों इकाइयां अडानी पावर राजस्थान लिमिटेड की हैं। सीपीसीबी और सीईए द्वारा की गई मॉनिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक अडानी पावर प्लांट की दोनों इकाइयों से नाइट्रोजन ऑक्साइड्स का उत्सर्जन 509 mg/Nm³ और 584 mg/Nm³ था, जो कि निर्धारित 300 mg/Nm³ से काफी ज्यादा है।
इससे अडानी साहब को कोई कष्ट न हो इसलिए पर्यावरण मंत्रालय ने थर्मल पावर प्लांट्स से निकलने वाली जहरीली गैस नाइट्रोजन ऑक्साइड की सीमा 300 से बढ़ाकर 450 mg/Normal Cubic Meter कर दी, जबकि पर्यावरण मंत्रालय ने सात दिसंबर 2015 को ही नोटिफिकेशन जारी कर थर्मल पावर प्लांट के लिए वायु प्रदूषण मानक 300 mg तय किया था।
दरअसल मई 2019 को मंत्रालय को चार थर्मल पावर प्लांट के सात इकाइयों पर की गई एक मॉनिटरिंग रिपोर्ट भेजी गयी थी, जिसमें ये पाया गया था कि सात में से सिर्फ दो इकाइयां ही 300 mg/Nm³ के मानक से ज्यादा उत्सर्जन कर रही हैं. ये दोनों इकाइयां अडानी पावर राजस्थान लिमिटेड की हैं……… अब अडानी जी तो प्रधान सेवक के परममित्र उद्योगपति ठहरे इसलिए उन्हें क्यों कष्ट दिया जाए लिहाजा सरकार ने ही अपने मानक बदल लिए ताकि उन्हें कोई तकलीफ न होने पाए……..
तो प्रदूषण फैलाने के हिस्सेदार तो अडानी भी है लेकिन कोई हमें ये बात बताता नहीं है बस सब मूल बात छुपाने में लग जाते हैं।


