अडानी हार गया ‘ईपीडब्ल्यू’ और ‘द वायर’ के खिलाफ अवमानना का केस

अडानी ग्रुप के घपलों-घोटालों के खिलाफ इकानामिक एंड पोलिटिकल वीकली (ईपीडब्ल्यू) ने खबर छापी थी. इसी खबर के आधार पर द वायर ने भी एक खबर प्रकाशित की. ये खबर जाने माने पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने लिखी थी. साथ ही इसे तीन अन्य पत्रकारों ने भी लिखा. इससे नाराज अडानी समूह ने सभी पत्रकारों और उनके मीडिया घरानों पर मानहानि का केस ठोंक दिया था. Continue reading

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अडानी के खदानों पर रिपोर्टिंग करने आई आस्ट्रेलियाई पत्रकारों की टीम को गुजरात पुलिस ने भगाया

आस्ट्रेलिया से ‘4कॉर्नर’ मीडिया हाउस की एक टीम अडानी के खदानों पर रिपोर्टिंग करने के लिए गुजरात आई थी. दरअसल आस्ट्रेलिया में सबसे बड़ी कोयला खदान परियोजना पर अडानी ग्रुप काम कर रहा है. इसी परियोजना के लिए पर्यावरण तथा अन्य ट्रैक रिकॉर्ड की जांच करने आस्ट्रेलिया की मीडिया टीम भारत आई थी. Continue reading

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अडानी के खिलाफ खबर छापने पर हुए विवाद के बाद परंजॉय गुहा ठाकुरता ने EPW के संपादक पद से इस्तीफा दिया

एक बड़ी खबर ईपीडब्ल्यू (इकनॉमिक एंड पोलिटिकल वीकली) से आ रही है। कुछ महीनों पहले इस मैग्जीन के संपादक बनाए गए जाने माने पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि अडानी ग्रुप केे गड़बड़ घोटाले से जुड़ी एक बड़ी खबर छापे जाने और इस खबर पर अडानी ग्रुप द्वारा नोटिस भेजे जाने को लेकर परंजॉय के साथ EPW के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज का मतभेद चल रहा था। Continue reading

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मोदी राज का सच : अडाणी का मुनाफा छह गुना और वोडाफोन पर सरकारी खजाने का 3000 करोड़ रुपये उड़ा

Navin Kumar : इस तिमाही में अडाणी का मुनाफा छह गुना हो जाना, वोडाफोन पर सरकारी खजाने का 3 हजार करोड़ रुपया उड़ा दिया जाना और परधान जी के नौलखे कोट के बीच क्या कोई रिश्ता है? गौर कीजिएगा जेटली जी ने कहा है कि हमने भारत की गरीब जनता के 3 हजार करोड़ से जो वोडाफोन की आरती उतारी है उससे ‘निवेश’ का माहौल बेहतर होगा.. पूछना चाहता हूं कि नौलखा ‘कोट’ को निवेश मान सकते हैं कि नहीं?

Mukesh Kumar : दोस्त से दगा… भाईयों भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट से ओबामा की स्पीच के वे अंश हटा दिए गए जिसमें उन्होंने सभी धर्मों से बराबर का व्यवहार करने की बात कही थी। मज़े की बात ये है कि भारतीय मीडिया इस मुद्दे पर चुप रहा जबकि अमेरिकी मीडिया में इस सेंसरशिप को लेकर अच्छी-खासी चर्चा हुई। सवाल उठता है कि आख़िर जिस व्यक्ति को मोदी अपना जिगरी दोस्त बताते हैं, उसकी बात को वे सेंसर क्यों कर रहे हैं? क्या उनके मन में चोर है जो वे ओबामा की बातों को लोगों तक पहुँचने से रोकना चाहते हैं? लेकिन क्या सचाई छिप सकती है बनावट के उसूलों से…

Om Thanvi : किसी पार्टी या विचारधारा से मेरी जकड़बंदी नहीं है। मैं केजरीवाल और आप पार्टी की खामियां भी जानता हूँ। उन पर टीका भी की है। फिर भी फिलहाल उनमें सरोकार दिखाई देता है। वे प्रगतिशील नजर आते हैं। कांग्रेस के भ्रष्टाचार और भाजपा की समाज-तोड़ू राजनीति से उनमें दूरी दिखाई देती है। उनकी पार्टी को पहाड़-से घोटालों और बेगुनाहों के कत्ले-आम से नहीं जोड़ा जा सकता। ऐयाशी और लाल-बत्ती वाली वीआइपी राजनीति में भी उन्होंने अरुचि दिखाई है। बाकी किरण-विकिरण, खांसी-मफलर, जंगल-नक्सल, गाड़ी-बंगला, बोतल-गोदाम आदि सब चुनावी फुलझड़ियाँ हैं, उनसे कुछ बनता-बिगड़ता नहीं।

पत्रकार त्रयी नवीन कुमार, मुकेश कुमार और ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.

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Suspected money laundering by the Adani Group!

Yogendra Yadav : Here is a letter written by former IAS officer (former secretary to government of India) and noted anti-corruption crusader Mr EAS Sarma to various central investigating agencies about the suspected money laundering by the Adani Group. Mr Sarma has pointed out that the Supreme Court appointed Special Investigation Team on black money is investigating the matter and the State Bank of India should not have signed the MoU with the group under investigation for money laundering. Read the letter for yourself and please give a thought on what our Modi Sarkar is up to.

 

From: EAS Sarma <eassarma@gmail.com>
Date: 24 November 2014 7:37:57 am IST
To: rsecy@nic.in, jmg.vc@nic.in, r.sri_kumar@nic.in, cvc <cvc@nic.in>, dcbi@cbi.gov.in, ed-del-rev@nic.in, bjp <ajaitley@sansad.nic.in>, secy-dea <secy-dea@nic.in>, secy-fs@nic.in, cabinetsy@nic.in, drihqrs@nic.in, dridzu@rediffmail.com,adgri@yahoo.com, driazu@nic.in, drikzu@nic.in, driczu@nic.in, ratanpw@yahoo.com, nmisra@rediffmail.com

Subject: Ongoing investigation into suspected money-laundering by Adani Group

To

The CVC,
Directorate of Revenue Intelligence
Govt of India
Director, Enforcement Directorate
Director, CBI

Sir,

Subject:- Ongoing investigation into suspected money-laundering by Adani Group

The enclosed news reporst (Indian Express dated 23-11-2014: “Business SIT, CBI to look into Adani Group case”) indicates that SIT is conducting an investigation into Adani Group’s suspected money laundering case. It appears that the company has over-invoiced imports to the tune of Rs.5,468 Crores and “siphoned off” the amount, apparently to some unknown account.

From the ICIJ website (http://offshoreleaks.icij.org/search country=&q=adani&ppl=on&ent=on&adr=on), it appears that some of the sharehoders of the Adani Group have offshore accounts which could have been in existence without RBI’s knowledge. I enclose extracts of the relevant pages of that website for your information. Also, I enclose an extract of the shareholding pattern of Adani Group to show the link between the holders of the offshore accounts and the group.

I request Directorate of Revenue Intelligence (DRI) to investigate these accounts as a part of the main investigation.

It is ironic that SBI should impromptu announce a huge loan of $1 billion to Adanis in the presence of the Prime Minister for the Group’s Carmichael coal mining project in Australia, without looking at the implications of the ongoing investigation. The loan amount committed approximately equals the amount laundered according to the news reports!

I am confident that you will take these circumstances into account and place all the facts before the apex court appointed SIT.

I request you to inform the Finance Minister and the PMO urgently of the status of the investigation. I hope that each one of you will carry out the investigation expeditiously and fearlessly so that the the facts of the case may be established and the culprits, if any, brought to book.

I am marking a copy of this mail to MOF and the Cabinet Secretary for their information.

Yours sincerely,

E A S Sarma

14-40-4/1 Gokhale Road
Maharanipeta
Visakhapatnam 530002

आम आदमी पार्टी के नेता योगेंद्र यादव के फेसबुक वॉल से.

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370 एकड़ वन जमीन सौंपकर उद्योगपति अडानी का कुछ एहसान चुका दिया मोदी जी ने

Yashwant Singh : मुंबई मिरर में आज खबर है कि मोदी की सरकार ने अपने प्रिय उद्योगपति मिस्टर अदानी के गोंडिया पावर प्रोजेक्ट के लिए 370 एकड़ वन जमीन की स्वीकृति दे दी है. यानि 370 एकड़ जंगल की जमीन पर अब अदानी का अधिकार होगा और उनका पावर प्रोजेक्ट चलेगा. अदानी को इस प्रस्ताव पर स्वीकृति पूरे छह साल तक इंतजार के बाद मिली है. Continue reading

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