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सुख-दुख

अजीत अंजुम की बढ़ती लोकप्रियता

अंबरीश कुमार-

रामनगर (उत्तराखंड) : महेशखान के जंगल की ओर जाने वाली सड़क एक जगह यू टर्न लेती है .मुड़ने वाले ही थे कि गाड़ी धीमी होते ही सामने एक छोटे से ढाबे वाले ने हाथ से इशारा करते हुए आवाज दी ,अजीत सर चाय पीते जायें .अजीत ने गाडी रोकी और कहा बस आधे घंटे में आते है .लौटे तो भूख भी लगी थी .मैगी और बंद मक्खन आमलेट के लिए बोल दिया गया .

यह सड़क घने जंगल के बीच से गुजरती है पर कई लोग चाय पानी के लिए रुक जाते हैं .एक जोड़ा वहीँ गाडी खड़ा कर जोर से गाना लगा कर चाय और बंद मक्खन खा रहा था .उनसे कहा गया कि आवाज थोड़ी धीमी कर दें तो वे पांच मिनट में चले ही गए .खैर तभी अचानक दो गाडियां रुकी .एक अधेड़ से सज्जन पास आये और अजीत से बोले ,आप अजीत अंजुम ही हैं न मैं आपको रोज यू ट्यूब पर देखता हूं .

कुछ देर बात की तब तक मैगी बन गई .इस बीच मोटर साइकिल से सवार एक सरदार युवक आया और बोला ,अजित अंजुम सर हम आपको रोज सुनते हैं .वह आम आदमी पार्टी का कार्यकर्त्ता था .ऐसे कई लोग मिले जो उन्हें देख कर रुके भी .कुछ ने अजीत के साथ फोटो खिंचवाई .

मैंने प्रभाष जोशी ,अरुण शोरी ,शेखर गुप्ता से लेकर राज कमल झा जैसे पत्रकारों के साथ काम किया है ,एक्सप्रेस और जनसत्ता दोनों में .न्यू डेल्ही टाइम्स में अरुण शौरी का कोई संदर्भ आते ही तालियां बजते देखा है .प्रभाष जोशी के साथ बीएचयू के मंच पर खुद भी बोलने का मौका मिला और तालियां भी मिली पर वह जनसत्ता का स्वर्ण काल था .वैसा जलवा फिर किसी पत्रकार का नहीं दिखा .पर यू ट्यूब कितना लोकप्रिय हो रहा है और इसके एंकर कितने लोकप्रिय हो रहे हैं यह पहली बार देखा.

दीपू कल से फोन कर रहा था कि अजीत अंजुम सर आयें है भटेलिया के किसी रिसार्ट में रुके हैं उनसे मिलवा दें .मैंने कहा उनके पास समय रहा तो वे आज ही मिल पाएंगे .मेरे सामने डंपी के सिडार लाज में रुके हैं .पर उन्हें शुक्रवार को निकलना है क्योंकि हर दिन नुकसान हो रहा है कार्यक्रम न होने से इसलिए जाना बेहतर है .

दरअसल एक साल के भीतर सत्ता विरोधी कवरेज के चलते यह लोकप्रियता अजीत अंजुम को मिली है जिसमें किसान आंदोलन प्रमुख है .वे पहले भी आते रहे हैं इंडिया टीवी से लेकर टीवी 9 आदि में भी रहे हैं पर लोकप्रियता तो अब मिली है .दिल्ली से आते हुए वे जिस ढाबे पर बैठे उन्हें लोगों ने घेर लिया .

इससे पत्रकार मित्रों को प्रेरणा लेनी चाहिए .सत्ता का बाजा बनकर आपको वह नहीं मिल सकता जो सत्ता से सवाल पूछने पर मिल सकता है ,जमीनी पत्रकारिता से जो मिल सकता है ..इसलिए सरोकार की पत्रकारिता करनी चाहिए .और यू ट्यूब से भी आप इतने लोकप्रिय हो सकते है अगर ढंग की पत्रकारिता करें .

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1 Comment

1 Comment

  1. Jp singh

    July 16, 2021 at 4:31 pm

    अजित अंजुम को भी समझ में आ गया होगा कि इसके पहले नौकरी की पत्रकारिता करते हुए सत्ता की दलाली और निष्पक्ष पत्रकारिता में क्या अंतर है

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