सुप्रीम कोर्ट को समझ में आ गया है कि मीडियाकर्मियों का हित क्या है और अखबार मालिकों की बेईमानी का इलाज क्या है।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मीडियाकर्मियों की हर हाल में मदद करना चाहता है सुप्रीम कोर्ट : सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर को हुई सुनवाई में मजीठिया वेज बोर्ड मामले को जल्दी निपटाने की दिशा में एक पहल की गई। यह तय किया गया है कि एक समिति या एक एसआईटी या एक मानीटरिंग कमेटी बना दिया जाए जो सारे मामले को अंजाम तक पहुंचाए। साथ ही राज्यों के लेबर कमिश्नरों की रिपोर्ट पर अब चर्चा न होकर सीधे मजीठिया मामले की कानूनी पहलुओं पर चर्चा करने का दौर शुरू होगा। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट 23 अगस्त की सुनवाई के बाद इस मामले के सबसे विवादित और महत्वपूर्ण पहलू 20(जे) तथा अनुबंध पर रखे गए कर्माचारियों के मुद्दे पर चर्चा करने के आदेश दिए थे लेकिन 4 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के वकीलों की दलीलों के कारण स्थिति गड्डमड हो गई।

इसका असर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी देखा गया और फिर कर्मचारियों के वकीलों ने इस ओर कोर्ट का ध्यान 8 नवंबर की सुनवाई के दौरान भी खींचने की कोई कोशिश नहीं की। लेकिन कोर्ट के अब फिर से राज्यों की रिपोर्ट पर चर्चा न कर मामले के कानूनी पहलू पर विचार करने निर्णय से मामले के जल्दी निपटने के संकेत मिले हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि इसके बाद कर्मचारियों को लाभ दिलाने के लिए एक समिति जैसी व्यवस्था स्थापित की जा सकती है। यह रुख दिखाता है कि कोर्ट मामले को शीघ्र निपटाने के लिए तत्पर है। कोर्ट के इस रुख से अखबार मालिकों के लिए नई परेशानी पैदा हो सकती है क्योंकि अब तक की सुनवाई से कोर्ट को समझ में आ गया है कि कर्मचारियों का हित क्या है और अखबार मालिकों की बेईमानी का इलाज क्या है।

फेसबुक पर बने मजीठिया मंच नामक पेज से साभार.

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