
वेद रत्न शुक्ला-
इस समय अमर उजाला गोरखपुर यूनिट में संपादकीय विभाग में उथल-पुथल है। विनीत सक्सेना के गोरखपुर यूनिट का संपादक बनते ही उथल-पुथल होने लगी है। अभी कुछ ही माह पहले कानपुर से गोरखपुर आए न्यूज एडिटर प्रदीप अवस्थी का स्थानांतरण बरेली हो गया।
अब समाचार संपादक ओमप्रकाश तिवारी अपने संपादक जी के साथ मिलकर अधीनस्थों की बैंड बजा रहे है। कुछ को छोड़कर बाकी कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। बताया जाता है कि कर्मचारियों को छुट्टी नहीं मिल पा रही। साप्ताहिक अवकाश पर भी रोक है। दफ्तर आने का टाइम तय है लेकिन जाने का नहीं। इन वजहों से कर्मचारी बीमार पड़ रहे हैं।
तीन माह पहले पैरालिसिस के अटैक के बाद से पीटीएस के युवा साथी अजय गौड़ का अभी उपचार चल ही रहा था कि इस बीच सिटी डेस्क पर काम करने वाले अश्वनी प्रधान के हाथ में भी पैरालिसिस जैसे लक्षण आ गए। उन्हें भी कई हफ्ते उपचार कराना पड़ा। अब तो बीमार होने पर भी किसी को छुट्टी नहीं मिल रही।
बीमार होने के चलते जूनियर सब एडिटर रवि सिंह लंबी छुट्टी चले गए। उनका तबादला धर्मशाला कर दिया गया। उसके बाद रवि सिंह ने नोटिस दे दिया है।
बीमार होने के बाद डेस्क पर तैनात ज्ञानप्रकाश गिरि भी कई सप्ताह से छुट्टी पर हैं। एक सप्ताह पहले इनका तबादला हिसार हो गया है। चर्चा है कि ज्ञानप्रकाश अभी मेडिकल लीव पर हैं। बीमार होने की वजह से प्रशासन बीट के रिपोर्टर अरुण चंद भी लंबी छुट्टी चले गए हैं। कई साथी दवा लेकर ऑफिस आ रहे हैं।
इन सब के अलावा कुशीनगर के ब्यूरो प्रभारी अरुण कुमार मुन्ना को गोरखपुर यूनिट में वापस बुला लिया गया है। देवरिया के ब्यूरो प्रभारी अमित श्रीवास्तव भी तीन हफ्ते से ऑफिस नहीं जा रहे हैं।
बताया जाता है कि बीते दो माह में बाहर से चार लोगों का स्थानांतरण गोरखपुर के लिए हुआ, लेकिन यहां का माहौल जानकर कोई गोरखपुर आने को तैयार नहीं है। एक को छोड़कर बाकी कोई आया ही नहीं। जो आया, वह भी दो दिन बाद ही अमर उजाला से रिजाइन करके कानपुर में दैनिक जागरण में ज्वाइन कर लिया।


