ग्रामीण पत्रकारों पर बढ़ रहे हमले, आंचलिक पत्रकारिता की मुश्किलें भी बढ़ रहीं : पी साईनाथ

वाराणसी। देश के जाने-माने पत्रकार पी.सानाथ ने कहा कि आंचलिक पत्रकारों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले पत्रकार सही मायने में काम कर रहे हैं। हमले भी इन्हीं पत्रकारों पर हो रहे हैं। हाल के सालों में जितने में पत्रकारों की हत्याएं हुईं उनमें सभी ग्रामीण पत्रकार थे और वो क्षेत्रीय भाषाओं में काम करते थे। अंग्रेजी अखबारों में काम करने वाले पत्रकारों पर हमले होते ही नहीं।

ग्रामीण इलाकों में पत्रकारिता के बुनियादी सवालों को उठाते हुए आंचलिक इलाकों के पत्रकारों की समस्याओं को रेखांकित किया और कहा कि देश में ऐसा कोई भी आंकड़ा मौजूद नहीं है। सियासी दल और माफिया गिरोह अंचलों में काम करने वाले पत्रकारों को ही निशाना बनाते रहे है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

पत्रकारों को सतर्क रहने की बात कहते हुए कहा कि ग्रामीण पत्रकारों पर हमले की घटनाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया और पत्रकारिता में अंतर है। मीडिया कारपोरेट घरानों के लिए काम करती है और पत्रकारिता आम आदमी के लिए। दोनों के फर्क को समझना अब बेहद जरूरी है।

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