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‘अर्द्ध सत्य’ के इस शानदार एपिसोड के लिए राणा यशवंत बधाई के पात्र हैं

भड़ास4मीडिया के कामकाज की व्यस्तता और यहां-वहां की यात्राओं-भागदौड़ के कारण न्यूज चैनल देखने का कम ही मौका मिल पाता है. लेकिन जब भी देखता हूं तो ज्यादातर निराश होता हूं और तुरंत डिस्कवरी, डिस्कवरी साइंस, एनजीसी, हिस्ट्री आदि चैनलों पर जाकर टिक जाता हूं. बकवास की चीख पुकार की जगह धरती ब्रह्मांड समुद्र जीव जंतु आदि के बारे में जानना सुनना समझना श्रेयस्कर है. दो रोज पहले ऐसे ही हिंदी न्यूज चैनलों पर भटक रहा था तो इंडिया न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत का शो ‘अर्द्ध सत्य’ देखने लगा. शो अभी शुरू ही हुआ था. कंटेंट प्रभावित करता गया. रुक कर देखने को बाध्य हुआ.

भड़ास4मीडिया के कामकाज की व्यस्तता और यहां-वहां की यात्राओं-भागदौड़ के कारण न्यूज चैनल देखने का कम ही मौका मिल पाता है. लेकिन जब भी देखता हूं तो ज्यादातर निराश होता हूं और तुरंत डिस्कवरी, डिस्कवरी साइंस, एनजीसी, हिस्ट्री आदि चैनलों पर जाकर टिक जाता हूं. बकवास की चीख पुकार की जगह धरती ब्रह्मांड समुद्र जीव जंतु आदि के बारे में जानना सुनना समझना श्रेयस्कर है.

दो रोज पहले ऐसे ही हिंदी न्यूज चैनलों पर भटक रहा था तो इंडिया न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत का शो ‘अर्द्ध सत्य’ देखने लगा. शो अभी शुरू ही हुआ था. कंटेंट प्रभावित करता गया. रुक कर देखने को बाध्य हुआ.

बहुत अरसे बाद लगा कि किसी हिंदी न्यूज चैनल पर किसी सोशल एक्टिविस्ट ने कोई प्रोग्राम तैयार किया हो. बेहद साफ सरल शब्दों में बाजार और ताकतवरों के खेल का खुलासा कर दिया. बेहद शांति और साफगोई के साथ किसानों मध्यवर्गीयों गरीबों बच्चों के साथ किए जा रहे छल साजिश का भंडाफोड़ कर दिया.

आलू बनाम चिप्स का महाखेल, कोल्ड ड्रिंक्स यानि लूट का अंतरराष्ट्रीय कारोबार, बेबी प्रोडक्ट्स यानि बचपन के साथ विश्वासघात, बोतलबंद पानी बनाम गरीबों की मजबूर प्यास… ऐसे मसलों के जरिए राणा यशवंत ने बहुत सरलता सहजता से समझा दिया कि ये जो सत्ता बाजार है, मिलजुल कर लूट का एक ऐसा संगठित गिरोह चला रहे हैं जिसका हमको आपको एहसास तक नहीं होता और हम रोज हंसते मुस्कराते रोते लुटते नष्ट होते रहते हैं.

इसे देखने के फौरन बाद मैंने तय किया कि इस शो को अन्य लोगों को भी दिखाया जाए ताकि वे भंगियाए हुए इनकी उनकी जय जय गान करने की जगह सच्चे तथ्यों आंकड़ों तर्कों पक्षों को अपने भीतर इजाद कर सकें और इनके जरिए पैदा हो रहे सवालों को लेकर इस क्रूरतम समय के महारथियों से मुठभेड़ का माद्दा पैदा कर सकें.

इस शानदार शो के लिए राणा यशवंत बधाई के पात्र हैं. बिना बौद्धिक बाजीगरी के और बिना लफ्फाजी के से आतंकित किए, राणा यशवंत सरलता से वह सारी बातें कह बता जाते हैं जिसको सुनने के बाद व्यवस्था सत्ता बाजार के खिलाफ मन में गुस्सा नफरत भर जाता है.

इस शो के बीच में सत्ता सिस्टम से सवाल पूछने के दौरान नरेंद्र मोदी के कुछ फुटेज दिखाए जाने से यकीनन ये संदेश दर्शकों में गया कि मोदी सरकार भी लुटेरों को समर्थन देने के मामले में बकिया पूर्ववर्ती सरकारों से अलग नहीं है.

राणा यशवंत कवि हृदय संपादक हैं और कविताएं लिखते रहते हैं. इसकी छाप उनके इस शो में भी दिखती है. गद्य और गुस्सा को बजाय भोंड़े व तीखे तरीके से पेश करने के, वे पद्यात्मक और स्तब्ध कर देने वाले अंदाज में संप्रेषित करते हैं जो सीधे दिल में उतर जाता है.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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3 Comments

3 Comments

  1. Chitra

    May 13, 2015 at 6:45 am

    Rana sir bahut achhe insan bhi hain

  2. umesh shukla

    May 13, 2015 at 9:08 am

    Ranaji apne naam ko sarthak kar rahe hain patrkaarita jagat men. badhai.

  3. sakil

    May 14, 2015 at 7:56 am

    The most dirtiest t person in media industry, yeh vo insaan hai jo apne chamcho se apne ghar ke kaam karvata hai aur inko shoshan karta hai. Anchoring to itni kharaab hai ki bolna tak nahi aata.

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