टीवी जर्नलिस्ट अश्विनी के पिताजी गए तो छह माह बाद उसी राह मां भी चल पड़ीं

Ashwini Sharma : माँ ने भी परिवार का साथ छोड़ दिया… 6 महीने पहले पिता का निधन हुआ था और आज माँ भी चली गई.. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें.. विगत ढाई सालों से मां अपने असीम आत्मबल की दम पर ही जीवित थीं.. अनगिनत बार डायलेसिस हुई.. जाने कितनी सूइयां शरीर में घोपी गईं तो जाने कितना खून शरीर से टेस्ट के नाम पर निकाला गया लेकिन हर पीड़ा को माँ सहती गईं..

अस्पताल का एक कमरा तो जैसे माँ के लिए बुक रहता.. कई बार हालत उनकी सीरियस हुई.. लेकिन हर बार माँ मौत को मात देकर परिवार में लौटती रहीं.. यही नहीं हर बार पहले से दूने उत्साह से जीने की वो ललक दिखाती.. हालत ये होती कि महीने में दो दो बार डायलेसिस की जाती उस दौरान खून की आवश्यकता भी पड़ती लेकिन कभी भी खून की कमी नहीं हुई.. एक आवाज पर माँ के लिए अंजाने मित्र, रिश्तेदार, परिवार के सदस्य रक्तदान करने आ जाते.. माँ ने तीन बेटों को जन्म दिया था लेकिन जाने कितने बेटों ने मां की पीड़ा को अपना समझा..

डॉ. एम जी राय, डॉ. त्रिभुवन गुप्ता, डॉ. ओ पी सिंह, डॉ अरुण सिंह मामा जी समेत माँ की सेवा करने वाले उन तमाम नर्स, कंपाउंडर, डॉक्टरों के साथ वाराणसी के पूर्व कमिश्नर नितिन गोकर्ण, सीएमओ बी बी सिंह, के के पिल्लई, विशाल राव जी को भी नमन करता हूं जिन्होने माँ की भरपूर सेवा की.. यहां मैं अपने परिवार के सदस्यों की माँ के प्रति सेवाभाव का भी जिक्र करना चाहता हूं..

आप सभी ने माँ की जिस तरह सेवा की वो वाकई अवर्णनीय है.. मुझे लगता है हर बच्चे को माता-पिता को लेकर यही भाव रखना चाहिए.. बाकी इंसान के जीवन की डोर ईश्वर की ही हाथ में है.. जीवन मृत्यु ही एकमात्र सत्य है बाकी सब मिथ्या या छलावा है.. माँ अब नहीं हैं लेकिन निश्चित तौर से माँ का आशीर्वाद परिवार के प्रत्येक सदस्य और उन सभी लोगों के साथ है जो किसी न किसी रूप में उनसे जुड़े रहे..

बनारस के रहने वाले पत्रकार अश्विनी शर्मा कई न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं.



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