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नहीं रहे पटना के प्रखर पत्रकार अवधेश ओझा

पटना के प्रखर पत्रकार अवधेश कुमार ओझा नहीं रहे। चालीस साल से अधिक समय तक जम कर पत्रकारिता की पारी खेलने के बाद कल रात उन्होंने लगभग 70 वर्ष की उम्र में सदा-सदा के लिए आंखे मूद ली। क्राइम रिपोर्टिग के विविध आयामों को सलीके से अखबार में परोसने के कारण इन्हें प्यार से पत्रकारिता क्षेत्र में  ‘क्रिमिनल रिपोर्टर’ भी कहा जाता था। पटना के दैनिक आर्यावर्त से अपना पत्रकार जीवन प्रारंभ करने वाले अवधेश ओझा सन 1979 में ‘आज’ से जुड़े और अस्सी के दशक में हिन्दुस्तान के साथी बन गये।

पटना के प्रखर पत्रकार अवधेश कुमार ओझा नहीं रहे। चालीस साल से अधिक समय तक जम कर पत्रकारिता की पारी खेलने के बाद कल रात उन्होंने लगभग 70 वर्ष की उम्र में सदा-सदा के लिए आंखे मूद ली। क्राइम रिपोर्टिग के विविध आयामों को सलीके से अखबार में परोसने के कारण इन्हें प्यार से पत्रकारिता क्षेत्र में  ‘क्रिमिनल रिपोर्टर’ भी कहा जाता था। पटना के दैनिक आर्यावर्त से अपना पत्रकार जीवन प्रारंभ करने वाले अवधेश ओझा सन 1979 में ‘आज’ से जुड़े और अस्सी के दशक में हिन्दुस्तान के साथी बन गये।

सन अस्सी के दशक में बहुचर्चित बाबी हत्याकांड के उजागर होने के बाद जिस तरीके से इन्होंने रिपोर्टिंग कर दूसरे अखबारों को पछाड़ा उसे आज भी ससम्मान याद किया जाता है। इनके अनुज अमिताभ कुमार ओझा एक राष्ट्रीय चैनल के बिहार प्रमुख है। इनके पुत्र राजेश ओझा भी पत्रकारिता में ही हैं। अवधेष कुमार ओझा के निधन पर रामजी मिश्र मनोहर मीडिया फाउंडेशन के ज्ञानवर्द्धन मिश्र ने गहरा शोक व्यक्त किया है। श्री मिश्र ने कहा कि अपराध की दुनिया में शामिल सफेदपोशों को बेनकाब करने में भी ओझाजी नही हिचकते थे। उनकी कलम की यही खूबी थी।

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