वरिष्ठ पत्रकार बच्चन सिंह नहीं रहे

वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार बच्चन का 75 साल की आयु में सोमवार को अपराह्न करीब एक बजे हृदयाघात से निधन हो गया। वाराणसी के चोलापुर के अमरपट्टी गांव के मूल निवासी श्री सिंह अपने पुत्र विनय सिंह (आईबीएन-7 के पत्रकार) के साथ दिल्ली के मयूर विहार में रह रहे थे। बच्चन सिंह अपने पीछे तीन पुत्र और दो पुत्रियां छोड़ गए हैं। पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार मंगलवार को मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा।

बच्चन सिंह दैनिक जागरण और स्वतंत्र भारत समेत कई अखबारों में संपादक के रूप में भी काम कर चुके थे। कई सम्मान और पुरस्कारों से भी वह सम्मानित किए जा चुके थे। इनके उपन्यास कीरतराम पर दूरदर्शन ने सीरियल प्रसारित किया था। 

बच्चन सिंह ने 70 के आसपास वाराणसी से प्रकाशित सांध्य दैनिक गांडीव से पत्रकारिता शुरू की। जो तीस वर्षों तक अनवरत चली। इस दौरान देशदूत, अमृत प्रभात (इलाहाबाद), दैनिक जागरण (इलाहाबाद, वाराणसी, बरेली), स्वतंत्र भारत (वाराणसी) और संवाद केसरी (बरेली) में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। रिटायर होने के बाद स्वतंत्र लेखन कर रहे थे। 

बच्चन सिंह की कई कृतियां काफी चर्चित रहीं। इनमें कविता/गीत-तबतक के लिए, गूंजने दो उसे, तिनका तिनका घोसला उपन्यास-ननकी, कीरतराम पत्रकार, संपादक कीरतराम, खबर की औकात, फांसी से पूर्व ( शहीद रामप्रसाद बिस्मिल पर उपन्यास), शहीद ए आजम ( शहीद भगत सिंह पर उपन्यास), शहादत (शहीद चंद्रशेखर आजाद पर उपन्यास), बंजर, कीचकाच, एक थी रूचि, कहानी- पांच लंबी कहानियां, सपाट चेहरे वाला आदमी, धर्मयुद्ध पत्रकारिता पर पुस्तकें- हिंदी पत्रकारिता के नए प्रतिमान, पराड़कर और हिंदी पत्रकारिता की चुनौतियां, हिंदी पत्रकारिता का नया स्वरुप, आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और पत्रकारिता, पत्रकारिता का कृष्णपक्ष वैचारिकी- भारत में जातिप्रथा और दलित ब्राह्मणवाद, विश्वनाथ प्रताप सिंहः कैसे पहुंचे वोट की राजनीति तक को काफी सराहना मिली।

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