यशवंत ने यूट्यूब के सबसे महाबकवास वीडियो का निर्माण कर दिया, देखें

ये दौर ‘यूट्यूब पत्रकारिता’ का है. मुझे अक्सर लगता है कि गूगल वालों ने यूट्यूब शब्द जानबूझ कर इजाद किया. यूट्यूब का मतलब यू ट्यूब यानि तुम ट्यूब हो. तुम्हारे दिमाग रूपी ट्यूब में जो हवा भरा है उसे निकालो मत, फुलाते जाओ. हवा भरते जाओ. ऐसे करते करते एक रोज पग धरती से उठ जाएंगे और शीष आसमान की ओर रवाना होने लगेगा. ये मोक्ष की यात्रा होती है. ऐसी स्थिति में यूट्यूबर स्थितप्रज्ञ हो जाता है. वह भांति भांति के विचार दर्शन थिंकिंग आदि को थिंक करने लगता है. वह बाकियों के आइडियाज को सिंक में प्रवाहित करने लायक मानने लगता है.

ऐसे विद्वानों के यूट्यूबर बनने से इन दिनों यूट्यूब बेहद गंभीर हो चला है. जिसे देखो वो विमर्श में लगा है. जिसे देखो वो समाचार विचार देश दुनिया की कहानी खबर बता रहा है. सबने टक्कर के लोगो, हेडिंग, एडिटिंग, साउंड आदि तैयार किए हैं. देखकर लगता है कि बंदा अगर यूट्यूबर न होता तो बड़े पर्दे के पीछे का बड़ा कलाकार होता.

महान पत्रकारों के यूट्यूबर बनने से हम जैसे निठल्ले-आलसी यूट्यूबरों की बुद्धि हेरा गई है. बाप रे, अब हम किस टापिक पर वीडियो बनाएं जिससे थोड़ा मोड़ा धन डालर खींच लाएं. कई दिनों तक सोचता रहा. कुछ नहीं सूझता रहा. पव्वा पीकर भी सोचा पर कुछ नहीं बुझाया. आखिर में रास्ता पव्वे ने ही दिखाया. श्रीमती जी की नजरों से छिपाने के लिए हमने पव्वे को घर के भीतर एक कमंडल में डाल रखा है. कमंडल ये स्टील वाला है. वैसे भी दौर बदल गया तो कोहड़ा वाला कमंडल भी स्टील का हो गया. तो इस कमंडल को हमने पव्वे रखने के वास्ते चयनित किया. श्रीमती जो को बता दिया कि इस कमंडल में ड्राई फ्रूट्स रख रहा हूं ताकि भड़ास के संडास में ठोंकपीट कार्य करते समय भूख लगने पर कुछ दानें चुग सकूं. श्रीमती जो को भरोसा हो गया. आदमी ड्राई फ्रूट खाएगा तो बदन बुद्धि गलेगा नहीं. वो खुश हो गईं. हमने कमंडल में तीन पव्वे छिपा दिए.

ये तीन पव्वे और कमंडल को देर तक तकता रहा. अचानक दिमाग का बल्ब जल गया.

नतीजा हाजिर है भइया…

देखें-

कोई मुझे प्लीज ये न कहना कि ये आदमी तो यूट्यूब जर्नलिज्म की सीरियसनेस को बेहद घटिया स्तर पर लेकर आ गया है. जंता को समझाने बुझाने की बजाय ये दारू छिपाने की जगह बता रहा है… हद है पतन की… अब इससे बड़ा पराकाष्ठा क्या होगा…

मेरा वर्जन ये रहेगा- कूल कुक्कुर कसिये चल जइहनत गंउवा का हंड़िया के चाटी… यानि जब सारे कुत्ते काशी चले जाएंगे तो गांव में हांड़ी चांटने का कार्य कौन करेगा… इसलिए हे बंधु…. आप लोग पुण्य कमाएं… हमें पाप में नहाने दीजिए…

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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