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उत्तर प्रदेश

झांसी महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने पत्रकार को बंधक बना पीटा

उत्तर प्रदेश के झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में समाचार संकलन करने और अपने पत्रकार साथी का उपचार कराने पहुंचे पत्रकारों के साथ जूनियर डॉक्टरों ने अभद्रता करनी शुरू कर दी. जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वे पत्रकारों को पकड़ने लगे. इसी दौरान एक पत्रकार अपनी जान बचाकर मेडिकल कॉलेज से भागकर बाहर आया जबकि दूसरे पत्रकार को डॉक्टरों ने पकड़ लिया और कमरे में बन्धक बनाकर बेरहमी से पिटाई की, यह देख भागे पत्रकार ने इसकी सूचना सम्बधित थाने की पुलिस व मेडिकल प्रशासनिक अधिकारियों को दी, जिस पर उन्होनें किसी प्रकार बन्धक बने पत्रकार को बचाया.

उत्तर प्रदेश के झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में समाचार संकलन करने और अपने पत्रकार साथी का उपचार कराने पहुंचे पत्रकारों के साथ जूनियर डॉक्टरों ने अभद्रता करनी शुरू कर दी. जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वे पत्रकारों को पकड़ने लगे. इसी दौरान एक पत्रकार अपनी जान बचाकर मेडिकल कॉलेज से भागकर बाहर आया जबकि दूसरे पत्रकार को डॉक्टरों ने पकड़ लिया और कमरे में बन्धक बनाकर बेरहमी से पिटाई की, यह देख भागे पत्रकार ने इसकी सूचना सम्बधित थाने की पुलिस व मेडिकल प्रशासनिक अधिकारियों को दी, जिस पर उन्होनें किसी प्रकार बन्धक बने पत्रकार को बचाया.

झांसी के एक हिन्दी दैनिक अखबार के पत्रकार प्रशान्त शर्मा अपने पत्रकार साथी मुकेश साहू के साथ समाचार संकल्न करने व उसका उपचार के लिये महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में पहुंचे. प्रशान्त शर्मा ने आरोप लगाते हुये बताया कि जब वह अपने साथी पत्रकार मुकेश साहू के उपचार के लिये चिकित्सक के पास पहुंचे और सीनियर डॉक्टर की जानकारी करने लगे, तभी उनमें कहासुनी हो गयी। कहासुनी इतनी बढ की कि जूनियर डॉक्टरों ने कानून को अपने हाथ में लेकर उनके साथ गाली गलौज करते हुये अभद्रता करनी शुरू कर दी. जिसका उन्होनें विरोध किया तो वे उनके साथ मारपीट करने लगे, किसी प्रकार उनका साथी मुकेश साहू अपनी जान बचाकर वहां से बाहर निकलने में सफल हो गये, जबकि जूनियर डॉक्टरों ने उसे पकड़ लिया, इससे पहले वे कुछ समझते उन्हे एक कमरे में ले जाकर बन्धक बनाया और फिर उसकी बेरहमी से पिटाई करनी शुरू कर दी. जान बचाने के लिये वह चीखते-चिल्लाते रहे लेकिन जूनियर डॉक्टरों की गुण्डई के आगे किसी ने भी हिम्मत जुटाकर उन्हें बचाने का प्रयास नहीं किया, लगभग आधा घंटे उन्हे बन्धक बनाये रखा.

वहीं दूसरे पत्रकार मुकेश साहू ने बताया कि मामले को बढते देख उन्होनें इसकी सूचना सम्बधित थाने की पुलिस व अधिकारियों और अपने साथियों को दी, तो आनन-फानन में सभी मोके पर पहुंचे और बन्धक पत्रकार प्रशान्त को जूनियर डॉक्टरों के चंगुल से बचाया है. यदि प्रशासन समय पर नही आता तो बड़ी घटना को सकती थी. जब इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी ली गयी तो उन्होनें बताया कि पीड़ित पत्रकार की शिकायत पर मामला दर्ज कराया जायेगा.

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