दैनिक जागरण जौनपुर के विज्ञापन प्रभारी शीतला प्रसाद मौर्य पर हमला

पत्रकार पर हुए हमले से पत्रकार संघ आक्रोशित… जौनपुर। जौनपुर पत्रकार संघ ने दैनिक जागरण के जिला विज्ञापन प्रभारी शीतला प्रसाद मौर्य पर हमले की निंदा कर आक्रोश व्यक्त किया है। संघ ने  दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्यवाही की मांग किया है। इस सम्बंध में आयोजित संघ की बैठक अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि कतिपय अराजक तत्वों ने रविवार की रात को श्री मौर्य को लाठी डंडे और लोहे के रॉड मारपीट कर घायल कर दिया था। पुलिस ने अभी तक घटना के दोषियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नही किया। जिससे पत्रकारों में आक्रोश है। बैठक का संचालन  महामंत्री डॉ मधुकर तिवारी ने किया।

बैठक में मौजूद सभी पत्रकारों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए एसपी से मांग किया कि घटना को गंभीरता से लेकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करें।  इस घटना की संघ के तरफ़ से  राजेंद्र सिंह,विनोद तिवारी, कपिलदेव मौर्य, लोलारक दुबे, शशिमोहन सिंह,  मनोज वत्स, अखिलेश अकेला,  शम्भू सिंह, राकेशकान्त पांडेय, मनोज उपाध्याय सुशील स्वामी, वीरेंद्र सिंह वीरेंद्र पाण्डे आदि लोगो ने घटना की कड़ी निंदा की।

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भाजपाई गुंडों ने दो टीवी पत्रकारों के साथ ये क्या कर दिया.. सुनिए पूरी कहानी…

Chander Mauli Sharma :  शायद अब मैं हिमाचल कभी जाऊँ…. जी हां, हम और हमारी टीम लगातार पिछले एक महीनें से डीपीआर से आज्ञा लेकर चुनावी कवरेज पर थे. सब कुछ अच्छा जा रहा था हिमाचल को बेहद करीब से देखा, जैसा सुना वैसा लगा भी. पर शायद मैं किसी भ्रम में ही था, या शायद कोई बुरा सपना जो परसों रात टूट गया. हम पावंटा साहिब में राहूल की रैली कवर कर के नाहन के लिए निकलें, क्यूँकि वहा भी सीएम राजा वीरभद्र की रैली थी. बहुत अच्छा जा रहा था और हम निकलनें वाले थे कि स्थानिय लोगों से पता चला यहां रात को शराब बंटती हैं. एक गज़ब की स्टोरी हमारे सामने थी, और हम सुबह से उस स्टोरी पर काम करना शुरू भी कर चुके थे।

चूंकि हम बाहरी थे तो हमारे चैनल के वहा के रिपोर्टर का साथ हमें चाहिए था, जो कि मिला भी। दिन में मैंने मेरे हरियाणा के कुछ मंत्री और एमएलए वहा मिलें जिनकी मैंने बाईट भी ली. चुनावी माहौल पर चर्चा भी की. पर हमें वहा कुछ ऐसा नहीं लगा जो सुत्रों से पता लगता. पर लगता हैं ये मेरे जीवन की सबसे काली रात में से एक थी 7 नवंम्बर को 5 बजे तक प्रचार थमने वाला था, जैसे शाम हुई वाकई शरेआम चुनाव आयोग की धज्जियां उड़ी मिली. भाजपा कार्यलय में शराब का वितरण हो रहा था. और ग्रामीण लोगो को पर्जी दी जा रहीं थी जो किसी निजी होटल में दिखा शराब लें सकतें थे ।

मैं और मेरे सर चंद्र मौली शर्मा ने जैसे पुरा माहौल देखा और कुछ हिला देने वाले विजूवल हाथ लगें तो हम भी हिल गयें की शराब की इतनी खेप । हमारे हाथ इतना मैटिरियल लग चुका था कि हम चैनल पर चला सकें । उसके साथ हमें भाजपा प्रत्याशी नाहन का पक्ष भी जानना था तो हम स्थानिय पत्रकार को काॅल की, पर उस समय वो बाहर थे तो हमने भाजपा के मीडिया सलाहकार से समय मांगा की एक बाईट चाहिए तो भाजपा प्रत्यासी ने हमारी टीम को ऑफिस में बाईट लेने का समय दिया. जैसै ही हमनें बिंदल जी को बाहर ही पार्टी के ऑफिस के बाईट लेनी चाही और बताया की आपके यहां के कुछ दृश्य भी हाथ लगें हैं तो भाजपा प्रत्याशी वहां से निकल पड़े और उनके जाने के करीब 2-3 मिनट बाद सभी पार्टी कार्यकर्ता हम पर टूट पड़े.

Mob lynching को अभी तक सिर्फ टीवी पर देखा था. शिकार पहली बार हुए थे । जैसे ही हमारे साथ छीना-झपटी हुई तो उन्होंने सबसे पहलें कैमरा छीना और मुझे अंदर खींचने लगे. जैसे ही मेरे सर चंद्र मौली जी बीच बचाव को आये तो उनको वे भाजपा कार्यालय में ले जा रहे थे.. तभी सर ने कहा भाग और S.P. को फोन करो…  मैंने फोन किया लेकिन पुलिस 1 घंटे बाद आकर उल्टा हमें ही थाने ले जाती है. युद्धवीर सिंह थाना प्रभारी गुन्नूघाट (नाहन) थाने ले जाकर कहते हैं “तुम साले पत्रकार हो जुत्ती खाने लायक” और भी न जाने क्या-क्या… मेडिकल में जान बूझ कर रात से अगले दिन की शाम करना, ताकि बिना मेडिकल के बात रुक जाये..

सहन बहुत किया पर कुछ लोकल पत्रकारों की वज़ह से बहुत सहायता मिली.. सर का फोन नहीं था.. सिर्फ मेरा फोन था. किस-किस प्रकार का दबाव झेला, फोन पर फोन…. एफआईआर वापस लेने का.. मैं टूट चुका था, पर सर की हिम्मत से संघी और भाजपा के गुंडों से लड़ाई जारी है…. जो सहा सब लिखना चाहता हूँ पर हिम्मत नहीं अब…

JK 24X7 NEWS चैनल के रेजीडेंट एडिटर चंद्रमौली शर्मा उर्फ पंकज शर्मा की एफबी वॉल से.

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इन खबरों के कारण भड़ास संपादक यशवंत पर हमला किया भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी ने!

साढ़े छह साल पुरानी ये वो खबरें है जिसको छापे जाने की पुरानी खुन्नस में शराब के नशे में डूबे आपराधिक मानसिकता वाले भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी ने किया था भड़ास संपादक यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब आफ इंडिया में हमला… इसमें सबसे आखिरी खबर में दूसरे हमलावर अनुराग त्रिपाठी द्वारा स्ट्रिंगरों को भेजे गए पत्र का स्क्रीनशाट है जिसके आखिर में उसका खुद का हस्ताक्षर है… ये दोनों महुआ में साथ-साथ थे और इनकी कारस्तानियों की खबरें भड़ास में छपा करती थीं… बाद में दोनों को निकाल दिया गया था…

इन दोनों से भड़ास एडिटर यशवंत की कभी कोई मुलाकात नहीं हुई थी, सिवाय कभी किसी कार्यक्रम या किसी जगह देखा-देखी के अलावा. इनके मन में इस बात की खुन्नस थी कि वैसे तो ये खुद को तीसमारखां पत्रकार समझते थे लेकिन इनका असली चेहरा सबके सामने लाया गया तो इन्हें चक्कर आने लगे. इनकी सारी दलाली-लायजनिंग की पोलपट्टी भड़ास पर लगातार खुलती रही जिसके चलते इनका पत्रकार का आवरण धारण कर दलाली करने का असली करतब दुनिया के सामने उदघाटित हो गया. इससे इनके लिए मुंह दिखाना मुश्किल हो गया होगा…

सोचिए, मीडिया के लोग वैसे तो पूरे देश समाज सत्ता की पोल खोलने के लिए जाने जाते हैं लेकिन जब इनकी पोल खुलती है तो ये कैसे पागल होकर हिंसक हो उठते हैं… जिसका पेशा कलम के जरिए दूसरों की पोल खोलना और आलोचना करना हो, वह खुद की सही-सही आलोचना छापे जाने से तिलमिलाकर कलम छोड़ बाहुबल पर उतर जाता हो, उसे क्या कहेंगे? पत्रकार के वेश में अपराधी या पत्रकार के वेश में पशु या पत्रकार के वेश में लंपट?

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत का कहना है कि ऐसे हमलों, पुलिस-थानों, मुकदमों और जेल से वे लोग डरने वाले नहीं… मीडिया के अंदरखाने का असल सच सामने लाते रहेंगे, चाहें इसके लिए जो भी कुर्बानी देनी पड़े… भुप्पी और अनुराग से संबंधित कुछ प्रमुख खबरों का लिंक, जो भड़ास पर साढ़े छह साल पहले छपीं, नीचे दिया जा रहा है… इन  खबरों पर एक-एक कर क्लिक करें और पढ़ें…


आजतक के ब्यूरो चीफ का हुआ स्टिंग?
http://old.bhadas4media.com/tv/8998-2011-02-03-04-47-10.html

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आजतक प्रबंधन ने अपने ब्यूरो चीफ को बर्खास्त किया?
http://old.bhadas4media.com/buzz/9130-2011-02-08-16-14-47.html

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ब्लैकमेलिंग के आरोपों में आजतक न्यूज चैनल से निकाले गए भुप्पी
http://old.bhadas4media.com/tv/9172-2011-02-10-19-01-06.html

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महुआ न्यूज चैनल के हिस्से हो गए भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी!
http://old.bhadas4media.com/edhar-udhar/10121-2011-03-27-13-50-04.html

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आजतक से हटाए गए भुप्पी अब तिवारी जी की सेवा में जुटे
http://old.bhadas4media.com/tv/10769-2011-04-26-07-15-30.html

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महुआ न्यूज़ से भी विदाई हुई भूपेंद्र नारायण भुप्पी की
http://old1.bhadas4media.com/edhar-udhar/6062-bhuppi-out-from-mahua.html

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पैसे की जगह स्ट्रिंगरों को धमकी भरा पत्र भेज रहे हैं महुआ वाले
http://old1.bhadas4media.com/print/4507-2012-05-19-18-21-08.html


पूरे प्रकरण का अपनी तरफ से पटाक्षेप करते हुए यशवंत ने फेसबुक पर जो लिखा है, वह इस प्रकार है-

”मेरे पर हमला करने वाले भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी को लेकर ये मेरी लास्ट पोस्ट है. इसमें उन खबरों का जिक्र और लिंक है जिसके कारण इन दोनों के मन में हिंसक भड़ास भरी पड़ी थी और उसका प्राकट्य प्रेस क्लब आफ इंडिया में इनने किया. मैंने अपनी तरफ से रिएक्ट नहीं किया या यूं कहें कि धोखे से इनके द्वारा किए गए वार से उपजे अप्रत्याशित हालात से मैं भौचक था क्योंकि मुझे कभी अंदेशा न था कि कलम धारण करने वाला कोई शख्स बाहुबल के माध्यम से रिएक्ट करेगा. मैं शायद अवाक था, अचंभित था, किंकर्त्व्यविमूढ़ था. इस स्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं था. अंदर प्रेस क्लब में तारीफ और बाहर गेट पर हमला, इस उलटबांसी, इस धोखेबाजी से सन्न हो गया था शायद. आज के दिन मैं मानता हूं कि जो हुआ अच्छा हुआ.  हर चीज में कई सबक होते हैं. मैंने इस घटनाक्रम से भी बहुत कुछ लर्न किया. मेरे मन में इनके प्रति कोई द्वेष या दुश्मनी नहीं है. मैं जिस तरह का काम एक दशक से कर रहा हूं, वह ऐसी स्थितियां ला खड़ा कर देता है जिसमें हम लोगों को जेल से लेकर पुलिस, थाना, कचहरी तक देखना पड़ता है. एक हमला होना बाकी था, ये भी हो गया. अब शायद आगे मर्डर वाला ही एक काम बाकी रह गया है, जिसे कौन कराता है, यह देखने के लिए शायद मैं न रहूं 🙂

मैंने अपने इन दोनों हमलावरों को माफ कर दिया है क्योंकि मैं खुद की उर्जा इनसे लड़ने में नहीं लगाना चाहता. दूसरा, अगर इनकी तरह मैं भी बाहुबल पर उतर गया तो फिर इनमें और मेरे में फर्क क्या रहा?  मैं इन्हें अपना दुश्मन नहीं मानता. मेरा काम मीडिया जगत के अंदर के स्याह-सफेद को बाहर लाना है, वो एक दशक से हम लोग कर रहे हैं और करते रहेंगे. ऐसे हमले और जेल-मुकदमें हम लोगों का हौसला तोड़ने के लिए आते-जाते रहते हैं, पर हम लोग पहले से ज्यादा मजबूत हो जाते हैं. लोग मुझसे भले ही दुश्मनी मानते-पालते हों पर मेरा कोई निजी दुश्मन नहीं है. मैं एक सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी, ज्यादा लोकतांत्रिक और ज्यादा सरोकारी बनाने के लिए लड़ रहा हूं और लड़ता रहूंगा. मैं पहले भी सहज था, आज भी हूं और कल भी रहूंगा. हां, इन घटनाओं से ये जरूर पता चल जाता है कि मुश्किल वक्त में कौन साथ देता है और कौन नहीं. पर इसका भी कोई मतलब नहीं क्योंकि चार पुराने परिचित साथ छोड़ देते हैं तो इसी दरम्यान दस नए लोग जुड़ जाते हैं और परिचित बन जाते हैं. बदलाव हर ओर है, हर पल है, इसे महसूस करने वाला कर लेता है.  मैं नेचर / सुपर पावर / अदृश्य नियंता पर भरोसा करता हूं, बहुत शिद्दत के साथ, इसलिए मुझे कतई एहसास है कि हर कोई अपनी सजाएं, अपनी मौज हासिल करता रहता है. इसलिए मैं अपने हमलावर साथियों को यही कहूंगा कि उनने जो किया उसका फल उन्हें ये नेचर देगा जिसके दरम्यान उनका अस्तित्व है. जैजै”


पूरे मामले को समझने के लिए इन खबरों / टिप्पणियों / आलेखों को भी पढ़ें…

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यशवंत हजारों पीड़ितों को स्वर दे रहे हैं, भगवान उन्हें दीर्घायु दें

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह पर हमले की खबर पढ़कर मन बहुत व्यथित हुआ। साथ ही इससे बहुत खिन्नता भी उपजी, आज के पत्रकारिता जगत के स्वरूप को लेकर। यशवंत सिंह पर हमला करने वाले निश्चित रूप से मानसिक रूप से दिवालिया हैं। यह बात भी तय है कि वे तर्क और सोचविहीन हैं।

निश्चित तौर पर वे पत्रकारिता जगत के लिए बदनुमा दाग हैं। उन्हें यह नहीं पता है कि यशवंत सिंह कितना बड़ा योगदान पत्रकारिता जगत के मूल्यों को समाज में बचाए रखने के लिए कर रहे हैं। यशवंत वो काम कर रहे हैं जिसे मीडिया जगत में बड़े नाम के रूप में स्थापित समूह भी नहीं कर सकते हैं। वे हजारों पीड़ितों को स्वर दे रहे हैं। भगवान उन्हें दीर्घायु दें।

उमेश शुक्ल
सीनियर जर्नलिस्ट
झांसी
umeshsukul@gmail.com

ये हैं दोनों हमलावर…

इसे भी पढ़ें…

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पत्रकार कहे जाने वालों का यशवंत जैसे एक निर्भीक पत्रकार पर हमला बेहद शोचनीय है : अविकल थपलियाल

Avikal Thapliyal : कोहरा घना है… बेबाक और निडर पत्रकारों पर हमले का अंदेशा जिंदगी भर बना रहता है। भाई यशवंत को भी एक दिन ऐसे घृणित हमले का शिकार होना ही था। बीते वर्षों में हुई मुलाकात के दौरान मैंने यशवंत का ध्यान इस ओर खींचा भी था। लेकिन मुझे ऐसा लगता था कि कई बार फकीराना अंदाज में सभी को गरियाने वाले यशवंत किसी अपराधी या फिर विशेष विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले हिंसक लोगों के कोप का भाजन बनेंगे। लेकिन पत्रकार कहलाये जाने वाले ही अपने बिरादर भाई यशवंत की नाक पर दिल्ली प्रेस क्लब में हमला कर देंगे, यह नहीं सोचा था।

यशवंत ने अपने पोर्टल के जरिये हिंदुस्तान के मीडिया जगत की खबरों के अलावा कई रचनात्मक प्रयोग किये, जिसकी प्रशंसा सभी करते हैं। साथ ही बतौर पत्रकार अपने को भी गरियाने में यशवंत कोई कोर कसर नही छोड़ते। जेल जाने पर ‘जानेमन जेल’ किताब लिख मारी। वह किताब भी एक जेल याफ्ता पत्रकार की स्वीकारोक्ति स्वागत योग्य थी। बहरहाल, यशवंत पर हुए हमले की निंदा की जानी चाहिए और हमले के आरोपी को सजा मिलनी चाहिए। पत्रकार कहे जाने वालों का एक निर्भीक पत्रकार पर हमला बेहद शोचनीय है। यशवंत की धाकड़ लेखनी सच उगलती रहे, और ये घना कोहरा छंटे…. आमीन!

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार अविकल थपलियाल की एफबी वॉल से.

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विकास सिंह डागर : कई दिनों पहले भड़ास वाले यशवंत जी पर दो मानसिक दिवालिया तथाकथित पत्रकारों ने दिल्ली प्रेस क्लब में हमला कर दिया था।  हमला तो अकेले यशवंत जी पर हुआ लेकिन उसकी चोट शायद उन तमाम पत्रकारों को लगी जो मेहनत और ईमानदारी से अपने पेट का गुजारा कर रहे हैं। लेकिन इस घटना पर दुःख जताने वाले कम हैं, दिवाली मनाने वाले ज्यादा। कारण है यशवंत सिंह की कलम, जो आये दिन मीडिया में बैठे दलालों पर वार करती रहती है। किसी बड़े चैनल का सम्पादक हो, कोई जिले का उगाहीबाज स्टिंगर हो या रात दिन मेहनत करने वाले पत्रकारों की तनख्वाह मारने वाले मालिक। यशवंत लगातार ऐसे लोगों की पोल भड़ास डॉट कॉम के जरिये खोलते रहे हैंं और यही कारण है कुछेक पत्रकारों को छोड़कर बाकी सभी इस शर्मनाक कांड पर चुप्पी साधे हुए हैं।

मौजूदा समय मे पत्रकारिता में कुछेक ही लोग हैं जो अपने ही पेशे में फैल रही कुरूतियों के खिलाफ लिखते बोलते हैं। अगर ऐसे में सबसे बड़े भड़ासी और भड़ासियों की आवाज़ यशवंत जी पर हमला होता है तो कहीं ना कहीं हम जैसे लोग जो अपने घर की कुरूतियो से लड़ रहे हैं, उन्हें झटका लगना लाजमी है। ऐसे समय में यशवंत सिंह का साथ देना और आरोपियों का बहिष्कार कर उन्हें सजा दिलवाना हमारा कर्तव्य है। साथ ही मैं उन लोगों को सलाह दूँगा जो इस कायराना काँड पर खुशी जता रहे हैं कि यशवंत सिंह की दुश्मनी आप लोगों से नहीं थी, उन्होंने आपकी कुरूतियों को उजागर किया, जिसकी खुन्नस तुम लोग दिमाग मे लिए बैठे हो।

लेखक विकास सिंह डागर एक टीवी चैनल के रिपोर्टर हैं.

ये हैं दोनों हमलावर…

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हमलावर लोग कायर होते हैं, इसलिए हारना अंततः उन्हें ही होता है…

Anoop Gupta : पत्रकार यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर हमला किया गया और पुलिस की चुप्पी तो समझ आती है, प्रेस क्लब की चुप्पी के मायने क्या हैं। अगर यशवंत का विरोध करना ही है तो लिख कर कीजिये, बोल कर कीजिए, हमला करके क्या साबित किया जा रहा है। मेरा दोस्त है यशवंत, कई बार मेरे मत एक नहीं होते, ये जरूरी भी नहीं है लेकिन हम आज भी दोस्त हैं। चुनी हुई चुप्पियों और चुने हुए विरोध से बाहर निकलने की जरूरत है।

यशवंत अपने सीमित संसाधनों में भड़ास4 मीडिया चलाते रहे हैं और मीडिया की दुनिया के कई गलत कारनामे निर्भीकता के साथ सामने लाते रहे हैं। एक ऐसे समय में जबकि पूरा मीडिया कॉर्पोरेट घरानों के कब्ज़े में है, इस तरह के सूचना माध्यम काफी अहमियत रखते हैं। काबिलेतारीफ बात यह रही कि यशवंत ने हिम्मत के साथ इस हमले को बेनकाब किया और अभी भी अपनी उसी प्रतिबद्धता के साथ मीडिया मैदान में डटे हुए हैं।

ये हैं दोनों हमलावर…

हम सब आपके साथ हैं। हमलावर लोग कायर होते हैं, इसलिए हारना अंततः उन्हें ही होता है… देश के सभी बागी पत्रकारों से मेरी अपील है की यशवंत सिंह पर हुए हमले के विरोध में दिल्ली के प्रेस क्लब पर सब लोग एक साथ आये और हमलावरों के खिलाफ मोर्चा खोले जिससे कभी कोई और यशवंत सिंह पर हमला करने की जुर्रत ना कर सके. में अनूप गुप्ता संपादक दृष्टान्त लखनऊ हर तरह से यशवंत सिंह के साथ थे, है और रहेंगे.

लेखक अनूप गुप्ता लखनऊ से प्रकाशित चर्चित मैग्जीन दृष्टांत के प्रधान संपादक हैं.

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हे ईश्वर, हमलावर भुप्पी और अनुराग को क्षमा करना, वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं..

Shrikant Asthana : प्रेस क्लब आफ इंडिया परिसर में यशवंत पर हमला हुए कई दिन बीत चुके हैं। अपराधियों की पहचान भी सबके सामने है। फिर भी न पुलिस कार्रवाई का कुछ पता है, न ही इनके संस्थानों की ओर से। क्या हम बड़ी दुर्घटनाओं पर ही चेतेंगे? कौन लोग इन अपराधियों को बचा रहे हैं? वैसे भी, कथित मेनस्ट्रीम मीडिया के बहुत सारे कर्ता-धर्ता तो चाहते ही हैं कि वे यशवंत की चटनी बना कर चाट जाएं। इस श्रेणी से ऊपर के मित्रों-शुभचिंतकों से जरूर आग्रह किया जा सकता है कि वे उचित कार्रवाई के लिए दबाव बनाएं। अपनी फक्कड़ी में यशवंत किसी को अनावश्यक भाव देता नहीं। लगभग ‘कबीर’ हो जाना उसे यह भी नहीं समझने देता कि यह 15वीं-16वीं शती का भारत नहीं है। First hand account of attack on Yashwant Singh : https://www.youtube.com/watch?v=MgGks6Tv2W4 I’m very thankful to friends who have shown deep concern about the incident and are likely to help create due pressure.

Surendra Grover : पत्रकारों के साथ आये दिन होने वाली #मारपीट और उनकी हत्याओं से कई दिनों से सदमे की स्थिति में हूँ.. पिछले दिनों तो गज़ब हुआ जब पत्रकारिता का लबादा ओढ़े दो लोगों ने छोटे छोटे पत्रकारों की तकलीफ सबके सामने रखने वाले पत्रकार Yashwant Singh पर हमला कर दिया.. यानी कि अब पत्रकारिता लायजनिंग से होते हुए गुण्डागर्दी तक पहुंच गई है.. हे ईश्वर, उन्हें क्षमा करना, वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं…

ये हैं दोनों हमलावर…

Sanjay Yadav : कलम के धनी Yashwant Singh भाई साहब पर हमला हुए कई दिन हो गए. यशवंत भाई को पिछले दो साल से पढ रहा हूँ और देख ऱहा हूँ. उनका संघर्ष अपनी पत्रकार बिरादरी के लिए है. मैं कोई पत्रकार नहीं हूँ. दिल्ली में अकेला रहकर नौकरी करता हूँ और yashwant भाई साहब से कभी मिला नहीं. पर मुझे पता नही क्यों ये लगता है कि कभी जरूरत पड़ी तो ये बंदा आधी रात को भी मेरे साथ खडा होगा. जबसे भाई साहब पर हमला हुआ, मैं बहुत परेशान था. अच्छा लगा कि लोग इनके साथ खडे हैं. पर कुछ लोग लिखते हैं कि yashwant की विचारधारा अलग है. ज़हां तक मैँ यशवंत भाई को समझा हूँ, इनकी एक ही विचारधारा है, और वो है इंसानियत. यशवंत भाई यारों के यार हैं. जब ये किसी के साथ खडे होते हैं तो ना तो उसकी विचारधारा देखते हैं और ना ही उसका कद-पद.

चन्द्रहाश कुमार शर्मा : यशवंत सिंह किसी राजनीतिक पार्टी का चोला पहने होते, तो न आवाज़ बुलंद होती? साथियों, आज मैं बात कर रहा हूं एक ऐसे निडर, निर्भीक व धारदार कलम के धनी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से निकले देश के नामी पत्रकार जो देश के हरएक नागरिक, यहाँ तक की मीडियाकर्मियों पर भी जब-जब जुल्म होते हैं, वह बड़ी प्रमुखता से अपने लोकप्रिय न्यूज़ पोर्टल भड़ास फ़ॉर मीडिया में प्रकाशित करते हैं। हुआ कुछ यूं कि… एक सप्ताह पहले वह प्रेस क्लब ऑफ इंडिया पहुंचे। वहां दो संकीर्ण विचारधारा के पत्रकार भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी उनकी तारीफ में पुल बांधें। जब यशवंत बाहर निकलने लगे, तब उसी भुप्पी और त्रिपाठी ने उन पर हमला बोल दिया। यशवंत सिंह काफी चोटिल हुए। जब सोशल मीडिया पर उन्होंने अपना दर्द बयां किया, तो सभी हिल गए। इस घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी न सरकार सख्त है, न पत्रकार। यशवंत सर में एक खूबी रही है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी को सपोर्ट नहीं करते और न ही उनके एहसान तले दबते हैं। यदि वह ऐसा किये होते तो लगातार टीवी पर खबरें चलती और यह मामला तूल पकड़ लिया होता। (चंद्रहाश कुमार शर्मा, यूपी व बिहार प्रभारी- भोजपुरिया बयार न्यूज़ पोर्टल)

वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत अस्थाना, सुरेंद्र ग्रोवर, संजय यादव और चंद्रहाश कुमार शर्मा की एफबी वॉल से.

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पत्रकारिता में ‘सुपारी किलर’ और ‘शार्प शूटर’ घुस आए हैं, इनकी रोकथाम न हुई तो सबके चश्मे टूटेंगे!

Rajiv Nayan Bahuguna : दिल्ली प्रेस क्लब ऑफ इंडिया परिसर में एक उद्दाम पत्रकार यशवंत सिंह को दो “पत्रकारों” द्वारा पीटा जाना कर्नाटक में पत्रकार मेध से कम चिंताजनक और भयावह नहीं है। दरअसल जब से पत्रकारिता में लिखने, पढ़ने और गुनने की अनिवार्यता समाप्त हुई है, तबसे तरह तरह के सुपारी किलर और शार्प शूटर इस पेशे में घुस आए हैं। वह न सिर्फ अपने कम्प्यूटर, मोबाइल और कैमरे से अपने शिकार को निशाना बनाते हैं, बल्कि हाथ, लात, चाकू और तमंचे का भी बेहिचक इस्तेमाल करते हैं।

इस पेशे में इनकी उपस्थिति वास्तविक श्रम जीवी पत्रकारों के लिए राजनैतिक और आर्थिक धन पशुओं से अधिक भयावह है। इनकी रोकथाम न हुई, तो बारी बारी सबके हाथ, पाँव चश्मे तथा नाक तोड़ेंगे, जैसे यशवंत की तोड़ी है। इनका मुक़ाबला लिख कर, बोल कर तथा जूतिया कर करना अपरिहार्य है।

उत्तराखंड के वरिष्ठ और चर्चित पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा की एफबी वॉल से.

भड़ास संपादक यशवंत पर हमले को लेकर धीरेंद्र गिरी, पंकज कुमार झा और शैलेंद्र शुक्ला की प्रतिक्रियाएं कुछ यूं हैं…

Dhirendra Giri : बेबाक शख्सियत है Yashwant Singh जी…. फ़र्ज़ी लोग इस वज़न को सह नही पाते… खैर उन्होंने कई दफा टुच्चो को सहा है। आगे भी वह हमेशा की तरह मज़बूत ही दिखाई देंगे । इस आक्रमण की घोर निंदा पढ़ने लिखने और चिंतन करने वाली पूरी बिरादरी को करनी चाहिए।

पंकज कुमार झा : मीडिया के एजेंडा आक्रमण के हमलोग भी ऐसे शिकार हो जाते हैं कि कोई घोषित अपराधी की हत्या पर पिल पड़ते हैं जबकि अपने निजी सम्पर्क के लोगों, मित्रों तक के साथ हुए किसी आक्रमण तक पर ध्यान नही जाता. गौरी लंकेश की हत्या पर होते वाम दुकानदारी के बीच ही मित्र Yashwant Singh पर प्रेस क्लब में आक्रमण की ख़बर आयी. कोई भुप्पी और किसी त्रिपाठी ने दारू के नशे में इस करतूत को अंजाम दिया. दोनों शायद किसी ख़बर के भड़ास पर छापे जाने से नाराज़ थे. आइए इस हरकत की भर्त्सना करें और अगर कर पायें तो दोषियों को दंडित कराने की कोशिश हो. सभ्य समाज में ऐसा कोई कृत्य बिल्कुल भी सहन करने लायक नही होनी चाहिए.

ये हैं दोनों हमलावर…

Shailendra Shukla : यशवंत भाई पर हमला यानी लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के चौथे स्तम्भ पर हमला..  भारत वर्ष में ऐसा माना जाता है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। अगर ये सही है तो यशवंत भाई और भड़ास चौथे स्तम्भ के स्तम्भ है। भाई के ऊपर कुछ तथाकथित पत्रकारों ने हमला किया और वह भी भरोसे में लेकर। यशवंत भाई… यानी अगर मीडिया आपके साथ गलत कर रहा है तो उसके खिलाफ खड़ा होने वाला एकमात्र इंसान… कुछ छुटभैये किश्म के तथाकथित फर्जी पत्रकारों ने उनके साथ जो गुस्ताखी की है उसकी सजा उन्हें कानून पता नहीं कब देगा लेकिन अगर मुझे भविष्य में ऐसा अवसर मिलता है जिसमें उन सज्जनों से मुलाकात होती है तो उनकी खातिरदारी मैं जरूर करूँगा… उसके बदले इस देश का कानून जो भी सजा मेरे लिए तय करेगा मैं उसे सत्य नारायण भगवान का प्रसाद समझकर ग्रहण कर लूंगा। अब बात यशवंत भाई और उन तथाकथित पापी किश्म के पत्रकारों की… अगर उन्हें लग रहा है कि उन्होंने यशवंत भाई को धोखा दिया तो वे गलत हैं… उन्हें लग रहा है कि उन्होंने यशवंत भाई पर हमला किया तो भी वो गलत हैं … किसी दीवार पर मैंने लिखा हुआ एक वाक्य पढ़ा था ….

“अगर आप किसी को धोखा देने में कामयाब हो जाते हो तो ये आपकी जीत नहीं है… बल्कि ये सोचो सामने वाले को आप पर कितना भरोसा था जिसे आपने तोड़ दिया”

खैर यशवंत भाई से बात की मैन भावुक होकर बदले की भावना प्रकट की और मैं आज नहीं तो कल उस चूहे तक जरूर पहुँच जाऊंगा… लेकिन भैया हो सकता है आप राम हो पर मैं नहीं…. मैंने लक्ष्मण जी की एक बात बिलकुल गाँठ बांध रखी है….

“जो ज्यादा मीठा होता है.. वह अपना नाश कराता है।
देखो तो मीठे गन्ने को.. कोल्हू में पेरा जाता है।।”

मैं यशवंत भाई पर हुए हमले की निंदा नहीं करूंगा… भर्तसना नहीं करूँगा… लेकिन अगर मौका मिला तो “जैसे को तैसा” वाला मुहावरा हमलावरों के साथ जरूर चरित्रार्थ करूँगा। अगर मेरे फेसबुक वॉल या किसी अन्य माध्यम से ये मैसेज उन दुर्जनों तक पहुचता है तो वो खुलकर मेरे सामने आ सकते है। वह इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अगर वो धूर्त हैं… ठग हैं… मीठी मीठी बातों में मुझे फंसा लेंगे जैसे यशवंत भाई के साथ उन्होंने किया तो ऐसे मत सोचें… क्योंकि मैं वाकई में महाधूर्त… हूँ खासकर उन दुर्जनों से तो ज्यादा… पता नहीं मेरे इस पत्र को भड़ास अपने पास जगह देगा कि नहीं लेकिन अगर देता है तो अच्छा लगेगा… मेरा मैसेज दुर्जनों तक जल्दी पहुचेंगे.…. क्योंकि सफाई कर्मचारी से लेकर मुख्य संपादक तक सब भड़ास पढ़ते हैं… अगर हमलावर जरा सा भी मीडिया से जुड़े होंगे तो भड़ास जरूर पढ़ते होंगे…

पूरे मामले को समझने के लिए ये भी पढ़ें…

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यशवंत की गुरिल्ला छापामार पत्रकारिता और प्रेस क्लब में दो दलाल/भक्तनुमा पत्रकारों का हमला करना…

Anil Jain : गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित सभा में कुछ वामपंथी नेताओं के आ जाने पर कुछ ‘राष्ट्रवादी’ पत्रकार मित्रों के पेट में काफी दर्द हुआ, जिसका इजहार करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रेस क्लब वामपंथियों और नक्सलियों का अड्डा बनता जा रहा है। लेकिन उसी सभा के दो दिन पहले प्रेस क्लब में न्यूज पोर्टल भडास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर हुए हमले को लेकर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों सहित किसी ने कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की। प्रेस क्लब के ‘नक्सलियों का अड्डा’ बन जाने की काल्पनिक चिंता में दुबले हुए पत्रकार मित्रों की संवेदना भी पता नहीं कहां चली गई दक्ष-आरम और ध्वज प्रणाम करने!

सब जानते हैं कि यशवंत सिंह गुरिल्ला छापामार की तरह काम करते हुए अपने पोर्टल के माध्यम से दुर्दांत मीडिया घरानों के मालिकों और उनके पाले हुए दलालनुमा संपादकों तथा पत्रकारों की गुंडागर्दी को आक्रामक तरीके से जब-तब उजागर करते रहते हैं। इसीलिए कई बार उन पर हिंसक हमले हो चुके हैं और एक बार तो वे लंबी जेल यात्रा भी कर चुके हैं। पिछले दिनों प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में भी दो दलाल और भक्तनुमा पत्रकारों ने यशवंत पर उनकी लिखी किसी पुरानी खबर को लेकर उनके साथ मारपीट की जिसमें उन्हें गंभीर चोंटे आईं और उनका चश्मा भी टूट गया।

ये हैं दोनों हमलावर…

हालांकि इस घटना के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि प्रेस क्लब भक्तनुमा पत्रकारों या शाखा बटुकों का अड्डा बन गया है लेकिन ऐसी घटनाओं की निंदा तो होनी ही चाहिए। मैं घटना का चश्मदीद नहीं हूँ। कुछ लोग इस घटना में दोनों पक्षों की गलती बता रहे हैं। अगर ऐसा है तो प्रेस क्लब को अपने स्तर पर इस घटना की जांच करके जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए।

पत्रकार अब दलाल ही नहीं बल्कि कातिल भी हो गए हैं….

Chaman Mishra : भड़ास4मीडिया के संपादक Yashwant Singh सर, पर दिल्ली में हमला हुआ। ये हमला किसी और ने नहीं पत्रकारों ने ही किया। अब भी आपको लगता है, कि पत्रकार ‘दलाल’ हैं, नहीं अब वो ‘क़ातिल’ भी हैं। पूरी हिंदी न्यूज़ इंडस्ट्री में ऐसा कौन है जो भड़ास को नहीं पढ़ता। बड़े से बड़ा, छोटे से छोटा और अदना पत्रकार या फिर पत्रकार बनने की प्रक्रिया में जो हैं, वो भी भड़ास को पढ़ते हैं, और हर दिन पढ़ते हैं। फिर भी मीडिया इंडस्ट्री भड़ास के संपादक के साथ उस तरह नहीं खड़ी है जैसे होना चाहिए। कोई नहीं ‘जेल जानेमन’ ऐसे ही गर्दिश के दिनों की उपलब्धि थी। हमें कुछ और रचानात्मक मिलेगा। लेकिन मैं तो कहता हूं, सर उन हमलावर गधों को जेल में जरूर डलवाइए, और उनका जेल वाला फ़ोटो भड़ास पर लगाइए। उसे Sponser भी कराइए।
इससे पहले-
गौरी लंकेश को मार दिया।
पंकज मिश्रा पर गोली चला दी।
इंडिया टीवी के रिपोर्टर सुनील को खूब पीटा।
फिर भी सब-सरकारें चुप्प हैं।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन और युवा पत्रकार चमन मिश्रा की एफबी वॉल से.

इसे भी पढ़ें…

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खबर छापे जाने की नाराजगी में फिर एक पत्रकार हुआ जानलेवा हमले का शिकार

हमले के शिकार लखनऊ के पत्रकार राजेंद्र.

लखनऊ से जानकारी मिली है कि खबर छापने की कीमत एक वरिष्ठ पत्रकार को चुकाना पड़ा है. आरटीओ आफिस में करप्शन की खबर छापे जाने से नाराज़ आरटीओ कर्मियों ने वरिष्ठ पत्रकार पर लाठी, डंडों और ईंट से जानलेवा हमला कर दिया. पीड़ित पत्रकार हैं राजेन्द्र राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं. उन पर आरटीओ कार्यालय परिसर में हुआ हमला. पत्रकार राजेंद्र गंभीर रूप से घायल हैं. थाना सरोजनीनगर इलाके में है आरटीओ कार्यालय.

ज्ञात हो कि दिल्ली के प्रेस क्लब आफ इंडिया में भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर हमला दो उन लोगों ने किया जो खुद के बारे में भड़ास पर छपी पोलखोल खबरों से नाराज थे. ये दोनों हमलावर पहले पत्रकार थे लेकिन इनकी दलाली-ब्लैकमेलिंग की घटनाओं के भड़ास पर खुलासे के बाद उन्हें अब काफी समय से नौकरी नहीं मिल रही है.

मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के उपाघ्यक्ष संजय शर्मा ने कहा- ”हमको उम्मीद है एफआईआर होने के बाद पत्रकार पर हमला करने वाले आरटीओ को सरकार तत्काल गिरफ़्तार करायेगी और उनको मुख्यालय से अटैच करेगी”।

उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकार राजेंद्र पर आरटीओ कार्यालय में हुए हमले की निंदा करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार सुधीर कुमार सिंह ने आरोपी कर्मचारियों को बर्खास्त किए जाने की मांग की. साथ ही पत्रकार की सुरक्षा के साथ हमलावर कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही किए जाने की मांग की है.

बिहार प्रेस मेंस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष एस.एन.श्याम ने कहा- ”लखनऊ में पत्रकार राजेंद्र पर प्राणघातक हमला. हमलावरों के पीछे पड़िए योगी सरकार. मोदी जी, बनाइये पत्रकार सुरक्षा कानून. कब तक बहेगा पत्रकारों का खून”.

फेसबुक पर Shashank Srivastava लिखते हैं : ”योगी जी जरा ध्यान इधर भी। रामराज में पत्रकार को अधिकारी बना रहे है अपना शिकार। क्या भाजपा सरकार में अब सच लिखने का ये परिणाम होगा। राजधानी में सच लिखना एक और वरिष्ठ पत्रकार को पड़ा भारी। सत्ता के मद में चूर आरटीओ ने खबर लिखने वाले प्रहरी मीमांसा के संपादक राजेंद्र पर अपने गुर्गों द्वारा करवाया हमला। लोकतंत्र में अब सच कहने की यही कीमत चुकानी होगी क्या।”

युवा पत्रकार Nishant Chaurasiya फेसबुक पर लिखते हैं : ”फिर मारा गया पत्रकार… राजधानी लखनऊ में… शुक्र है जान से नहीं गया… खून बहा और हड्डी टूटी… अब साबित कर दो दल्लों कि दलाली करने गए थे वहां पर, क्योंकि पत्रकारों को डर गुंडों बदमाशों से ज्यादा मठाधीशों से है! लेखनी से अपनी पहचान बना चुके राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार राजेन्द्र (प्रहरी मीमांसा) पर आज RTO कार्यालय में भ्रष्टाचार की खबर लिखने पर जान लेवा हमला हुआ… मामला सरोजिनी नगर थाना क्षेत्र का है…. थाने से मेडिकल करवाने पहुचे राजेंद्र जी… फोन से बात करने के बाद पता चला कि सर पर काफी चोट आई है! राजेन्द्र जी से संपर्क 9415054807 के जरिए किया जा सकता है.”

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Probe police attack on journalists in Amaravati

Based on reports reaching here, the Mumbai Press Club demands an impartial inquiry into the arrest of Prashant Kamble, an award winning journalist, and Abhijit Tiwari, a local scribe. The two have alleged that they were beaten and arrested while reporting a suicide of a local girl in Chandur Railway in Amravati district early this week.

The Amravati Union Of Working Journalists has petitioned the district police and state government in this case and demanded that cases against both journalists be withdrawn immediately because they were doing their job and did not disturb law and order.

Mumbai Press Club reiterates its resolve for protecting journalists and appeals to the state government to ensure a free and fair inquiry in the case. When asked, Amaravati SP Abhinash Kumar told Mumbai Press Club on Tuesday that he would direct his additional SP to record statements of victims immediately.

Dharmendra Jore

Secretary

Mumbai Press Club

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इलाहाबाद में वरिष्ठ पत्रकार पर जानलेवा हमला, स्टूडियो संचालक ने की मारपीट

दी पायनियर न्यूज़ पेपर इलाहाबाद के ब्यूरो चीफ और शहर के वरिष्ठतम पत्रकार अभिलाष नारायण को उनके तथाकथित मकान मालिक (स्टूडियो संचालक) राजीव वाष्णेय और उसकी पत्नी गीता ने मंगलवार रात बुरी तरह मारा पीटा। श्री अभिलाष नारायण के साथ ही उनकी पत्नी को मारा और उनसे बदतमीजी भी की। यही नहीं, कथित मालिक स्टूडियो संचालक ने श्री नारायण के कमरे में घुस कर मारा और दोनों को भद्दी भद्दी गालियां दी। उनसे अभद्र व्यवहार भी किया। उनके चेहरे पर कई बार किये। पत्थर से भी मारने का प्रयास किया।

वरिष्ठ पत्रकार की तरफ से तहरीर कर्नलगंज कोतवाली में दी गयी है। इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. विपिन टांडा, सीओ कर्नलगंज से की गयी है। एसपी सिटी के आदेश पर मौके 100 डायल और थाने से पुलिस फोर्स गयी और दोनों पार्टियों को थाने पर बुलाया। देर रात तक पीड़ित पत्रकार की तरफ से दी गयी तहरीर पर मुकदमा नहीं दर्ज हो सका था। उधर पुलिस ने दूसरे तरफ से भी लिखित तहरीर ले ली है। वरिष्ठ पत्रकार की तरफ से कई पत्रकार घटना स्थल और थाने पर भी पहुंचे लेकिन पुलिस ने अभी कोई कार्यवाई नहीं की। पत्रकारों ने कर्नलगंज पुलिस पर कार्यवाही न करने का आरोप लगाते हुए स्टूडियो संचालक से साठ-गांठ का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि इस स्टूडियो संचालक के सम्बन्ध कई पत्रकारों से भी है जो इनकी रात में जाम की व्यवस्था करता है।

इस घटनाक्रम के दूसरे पक्ष की तरफ ध्यान दिला रहे हैं इलाहाबाद के पत्रकार मुमताज अहमद… इसे भी पढ़ें…

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भाजपा नेता को पत्रकारिता पसंद न आई तो पत्रकार पर कर दिया तलवार से हमला

ये भाजपा वाले जन्मजात मीडिया विरोधी होते हैं.. या तो पटा लेते हैं या फिर हमला कर देते हैं.. इन्हें डेमोक्रेसी कतई पसंद नहीं… मध्य प्रदेश में एक भाजपा नेता को पत्रकारिता पसंद न आई तो पत्रकार पर कर दिया तलवार से हमला.. मध्य प्रदेश में जगह जगह पत्रकार भाजपा नेताओं के हाथों पीटे जाते हैं… कइयों की जान तक ले ली गई..

घटना मध्य प्रदेश की. खबर छापे जाने से नाराज था बीजेपी का नेता.. पत्रकार को तलवार मारी… जबलपुर में भाजपा नेता और पार्षद पति ने पत्रकार आशीष विश्वकर्मा को घर बुलाकर तलवार से जानलेवा हमला किया. पत्रकार को गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है. बताया जा रहा है कि एक खबर छापे जाने से नाराज होकर भाजपा नेता ने जानलेवा हमला किया. स्थानीय हिंदी दैनिक के पत्रकार आशीष विश्वकर्मा पर शुक्रवार रात को भाजपा गढ़ा जोन अध्यक्ष और पार्षद रीना राजपूत के पति हृदयेश और उसके भाई नीरज ने घर बुलाकर जानलेवा हमला कर दिया.

बताया जा रहा है कि आरोपियों ने आशीष को बर्थडे पर शुभकामनाएं देने के बहाने घर पर बुलाकर तलवार और बेसबॉल के डंडे से हमला कर दिया. हमले में आशीष को गंभीर चोटे आई हैं. आशीष ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि दो दिन पहले एक खबर को लेकर पार्षद पति ने आपत्ति जताई थी. हालांकि, बाद में मामला शांत हो गया था. शुक्रवार रात को आशीष जैसे ही पार्षद के घर पर पहुंचा, तो ह्रदयेश और नीरज ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल आशीष ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई. बाद में परिचितों को फोन कर उसने हमले की जानकारी दी. आशीष को पहले इलाज के लिए मेडिकल अस्पताल भर्ती किया गया. हालत बिगड़ने पर आशीष को जबलपुर अस्पताल रेफर किया गया.

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आतंकवादी गरीब नहीं होते!

सुनील संवेदी

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के सबसे सुरक्षित इलाके में आतंकी हमले के बाद दुनिया को आतंकवाद से बचाने और दोषी कौन पर बहस फिर शुरू हो गई। अब भारत की बारी पर भी चर्चायें हो रही हैं। इन सबमें शायद एक चीज पहली बार हुई है कि प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया, समाजशास्त्रियों से लेकर राजनीतिज्ञों ने इन आतंवादियों के ठाट-बाट पर कई दिनों तक अच्छी खासी चर्चा की। ढाका हमले में लिप्त आतंकवादी काफी धनिक परिवारों से थे। मतलब उन्होंने पैसे के लिए मानवता की हत्या कर खुद को मौत के मुंह में नहीं धकेला। इससे एक बात और साबित हुई कि गरीबी और अशिक्षा के चलते लोग आतंकवाद के रास्ते पर चल रहे हैं, ये सिद्धांत झूठा था। सिर्फ मुद्दे की दिशा बदलने के लिए इस सिद्धांत को गढ़ा गया था।

इससे एक बात और साबित हुई कि आतंकवाद का संबन्ध सिर्फ धार्मिक कट्टरता से है। जिसे जितना अधिक धार्मिक रूप से कट्टर बनाया जा सकता है उसे दूसरे की जान लेने और अपनी जान देने के लिए उतनी ही आसानी से तैयार किया जा सकता है। पिछले कुछ सालों से दुनिया के सभी आतंकी संगठनों में धनिक वर्गों के युवाओं और अच्छे भले पढ़े लिखे मसलन आईटी, कैमिकल इंजीनियर्स, प्रोफेसर्स, डॉक्टर्स आदि प्रोफेसनल्स का दखल तेजी से बढ़ा है। दुनिया के सबसे क्रूर आतंकी सरगनाओं में एक अल कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन इंजीनियर था। हाफिज सईद अच्छा भला पढ़ा लिखा है।

यूरोपीय और अमेरिकी देशों में बेहद खुलेपन वाले कल्चर और आधुनिकतम शिक्षा ग्रहण करने वाले तमाम युवा दुर्दांत आतंकी संगठन आईएस में शामिल होकर कत्लेआम कर रहे हैं। इन युवाओं के पास न पैसे की कमी है, न बेहतरीन जीवन यापन के लिए अवसरों का अकाल लेकिन सिर्फ धार्मिक कट्टरता से प्रभावित होकर ये युवा आतंकवाद का रास्ता चुन रहे हैं। ये सब देखकर ये बहस बहुत पीछे छूट गई है कि गरीबी के चलते युवा आतंकवाद की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

कहा जा रहा है कि ढाका हमले का एक आतंकवादी इस्लाम की बहावी शाखा के मुंबई निवासी एक उपदेशक के विचारों से बेहद प्रभावित था। इस उपदेशक पर बैन लगाने की भी मांग हो रही है। तो क्या इस्लाम के अन्य उदार धर्मोपदेशकों के विचार प्रभावहीन होने लगे हैं या उन विचारों को वक्त के खांचे में न ढालने की कोशिशों का खामियाजा पूरी कौम और दुनिया भुगत रही है। कुछ दिनों पहले अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान ने बेहद दुःखी होकर कहा था कि अगर ढाका में हमला करने वाले आतंकवादी मुसलमान थे तो मैं मुसलमान नहीं हूं।

अभिनेता इरफान खान ने भी धर्मोपदेशकों को अपने विचारों का तरीका बदल लेने का सुझाव दिया था। इन दोनों ही जाने-माने लोगों का साफ मतलब है कि युवाओं को बेहद सरल, सौम्य, लचीले और आधुनिक विचारों की जरूरत है न कि छल्लेदार चासनी में लिपटे हुये धार्मिक मुहावरों की। असल में इन धार्मिक मुहावरों को या तो युवा समझ नहीं पाते या फिर जिंदगी की भागदौड़ में समझना नहीं चाहते। ऐसे में उदार विचारों के मुकाबले कट्टर विचार उन तक अधिक तेजी और आसानी से पहुंचते हैं।

दूसरी बात ये भी हुई कि इस्लाम को दुनिया के अन्य धर्मो के मुकाबले खड़ा कर दिया गया है न कि समानांतर। इस्लाम के अंदर भी दो धर्म खड़े हो गये। हालांकि अन्य धर्मों के अंदर भी कई धर्म हो सकते हैं लेकिन वे उदारता को लेकर एक दूसरे का मुकाबला करते दिखते हैं धार्मिक अंधता को लेकर नहीं।  कुछ सालों पहले तक आतंकवाद से प्रभावित युवा आर्थिक निराशा और धार्मिक कट्टरता से संचालित हो रहे थे लेकिन अब ऐसा कहना वास्तविकता से मुंह चुराना होगा। अब सिर्फ धार्मिक कट्टरता प्रभावी तत्व है, वरना इंजीनियर्स, प्रोफेसर्स, डॉक्टर्स और उद्योगपति आतंकवादी नहीं होते।

ये मान लेना बेहद जरूरी है कि धार्मिक उपदेशक अपने विचारों के प्रस्तुतिकरण, शब्दों के चयन और वक्त की मांग में एकरूपता लाएं। आधुनिकतम शिक्षा भी अप्रभावी हो जाएगी अगर धार्मिक उदारता के संस्कार न हों। अथाह धन भी युवाओं को आंतकवाद की राह पर चलने से नहीं रोक सकेगा अगर उनका धर्म अन्य धर्मो के लिए मित्रता के दरवाजे नहीं खोलेगा।

लेखक सुनील संवेदी से संपर्क उनके मोबाइल नंबर 9897459072 के जरिए किया जा सकता है.

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पत्रकार को शराब ठेकेदार और आबकारी विभाग के लोगों ने पीटा

बिलासपुर में शराब ठेकेदार के पंडों का आतंक…. पत्रकार भी सुरक्षित नहीं…… छत्तीसगढ़ प्रदेश में आतंक का पर्याय बन चुके शराब ठेकेदार के पंडों के हौसले इस कदर बुलन्द हैं कि पत्रकार की पिटाई करने में भी उन्हें कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं रह गया है। मिली जानकारी के अनुसार पंडो ने बुधवार सरकंडा बिलासपुर स्थित देशी शराब भट्टी में “पत्रिका” से संबद्ध एक पत्रकार संदीप के साथ अकारण झुमाझपटी और मारपीट की है। इसमें आबकारी उपनिरीक्षक नितिन शुक्ला भी संलिप्त था।

इससे पूर्व महामाया नगरी रतनपुर में शराब ठेकेदार के पंडो द्वारा महिलाओं की बेदम पिटाई की गयी थी और इसी शराब ठेकेदार के पंडो का कहर पिछले दिनों कवर्धा जिले में एक अन्य शराब ठेकेदार के एक कर्मचारी पर बरपा बरपा था जिस पर पंडो के खिलाफ हत्या के प्रयास का अपराध भी दर्ज किया गया था। पत्रकार संघ के विरोध के बाद गुरूवार को आबकारी विभाग के मुखिया अशोक अग्रवाल के निर्देश पर जिला कलेक्टर अन्बलगन पी के आदेश पर आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त पी सी अग्रवाल ने आबकारी उपनिरीक्षक नितिन शुक्ला को सस्पेंड कर दिया है पर पंडों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

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BHU में हॉस्टल मांगने वाले मेडिकल छात्र की सुरक्षाकर्मियों ने टांग तोड़ी (देखें वीडियो)

बीएचयू के PRO राजेश सिंह आधिकारिक बयान दे रहे हैं कि मेडिकल के बच्चों पर लाठीचार्ज हुआ ही नहीं है। लेकिन एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसमें सुरक्षीकर्मी एक छात्र को पीट रहे हैं और बाद में टांग टूटने से छात्र जमीन पर लेटकर बुरी तरह चिल्ला रहा है. इन दिनों B.H.U प्रशासन पूरी तरह छात्र विरोधी रवैया अपनाए हुए है. एक तरफ़ जहां वो मेडिकल छात्रों पे लाठियां भांज रही थी वहीं रात को जब BIRLA और LBS के छात्र आपस मे भिड़े हुए थे तब तक कोई PROCTORIAL नहीं आयी, जब तक बनारस प्रशासन ने मोर्चा नहीं सम्भाल लिया.

ठीक यही हुआ था पिछली बार बिरला और ब्रोचा HOSTEL के मामले में. लड़के फोन करते रह गये लेकिन कोई नहीं आया और बनारस प्रशासन को मामला दे दिया गया. क्यों बनारस प्रशासन को ही मामला शांत कराना पड़ता है हर बार? अब समझ में नही आ रहा ई ससुरी PROCTORIAL है काहे के लिये. मेडिकल छात्रों को पीटने के लिये या मधुवन मे बैठे लड़के-लड़कियों को पकड़ने के लिये.  BHU में हॉस्टल मांगने वाले मेडिकल छात्र को बदले में मिली लाठी.

नीचे दिए गए वीडियो में देखिए, किस तरह मेडिकल छात्रों पर अपनी लाठियाँ तोड़ रहे हैं सुरक्षाकर्मी.

https://www.youtube.com/watch?v=RCdRh6gDr4o

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मुजफ्फरपुर में ‘JNU Speaks’ कार्यक्रम पर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने किया हमला, देखें वीडियो

बिहार के मुजफ्फरपुर से खबर है कि ‘जेएनयू स्पीक्स’ नामक कार्यक्रम पर भाजपा के छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया. इसके कार्यक्रम में शामिल कई लोगों को चोटें आई हैं. जेएनयू से जुड़ी रहीं महिलावादी और भाकपा माले नेता कविता कृष्णन ने इस बारे में जानकारी अपने फेसबुक वॉल पर दी है. उन्होंने बोलने के अधिकार पर लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे कार्यक्रम पर हमला करने की संघी गुंडों की हरकत को बेहद शर्मनाक करार दिया. 

कविता ने फेसबुक पर लिखा है कि पत्थरबाजी और हमले से कार्यक्रम में शामिल एक बुजुर्ग व्यक्ति के सिर पर चोट आई है और वह घायल हुए हैं. प्रबीर पुरकायस्थ और खुद कविता कृष्णन को भी चोटें आई हैं. इस हमले के बावजूद कार्यक्रम में शामिल लोग डटे रहे और एकजुट होकर मुकाबला किया. बाद में सभी लोगों ने इस हमले के विरोध में जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया. कविता कृष्णन ने मौके से कई वीडियो अपने एफबी वॉल पर पोस्ट किए हैं.

एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा हमले के वीडियो को देखने के लिए नीचे दिए गए यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें :

ABVP throwing stones at JNU Speaks program in Muzaffarpur

https://www.youtube.com/watch?v=Q3SsNwHogqg

हमले के विरोध में किए गए प्रदर्शन के वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए यूट्यूब लिंक्स पर क्लिक करें :

‘JNU will speak’ program : march against Sanghi goons (1)

https://www.youtube.com/watch?v=3JwaEvQTm3g

संबंधित अन्य वीडियोज देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/bhadas4media

इस प्रकरण पर कविता ने अपने वॉल पर जो कुछ लिखा है, वह इस प्रकार है….

Kavita Krishnan : ABVP throwing stones at JNU Speaks program in Muzaffarpur, yet they could not disperse the crowd. JNU will speak! One person using a helmet to avoid the huge stones being flung. Ashutosh could speak and I too spoke when stones, small bombs were being thrown. One old man injured in the head. Several of us, including Prabir Purkayastha and I got stone injuries on our arms, hands. But we haven’t dispersed!

We marched in protest against Sanghi goons, getting support from Muzaffarpur streets.. Videos of the March below. Comrade Ashutosh and the voice of JNU and HCU was heard on the streets of Muzaffarpur, calling to free Umar, Anirban, Geelani, calling for azaadi… The Nitish Laloo Grand Alliance Govt showed less courage in the face of Sanghi goons than the women and men of Muzaffarpur did, as you can see.

Shame on Bihar Govt, permission for JNU Speaks program in Muzaffarpur cancelled in last minute by Admin under VHP pressure. But JNU will speak to the people of Muzaffarpur nevertheless. Several alumni and students and teachers of JNU are here from many generations – including Kanhaiya’s guide SN Malakar, Prabir Purkayastha, who was picked up during Emergency, Ashutosh Kumar the ex JNUSU President and one of the targeted JNU students, Ish Mishra, Qaiser Shamim and several others are here, and I’m glad to be here with them all. I’m so glad that so many people are here in spite of the Admin cowardliness, and saying they will ensure that JNU Speaks.

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संजय दत्त के कार्यक्रम को कवर करने गए पत्रकारों की पिटाई

मुंबई : शीना वोरा मर्डर केस में हुई दुनिया भर की फजीहत झेल रही मुंबई पुलिस ने संजय दत्त के कार्यकम को कवर करने गए पत्रकारों की पिटाई की है। ताजा मामला सिद्धि विनायक मंदिर कैंपस की है, जहां मुंबई पुलिस ने आधे दर्जन पत्रकारों और कैमरामैनों पर लाठियां चलाई हैं। उन्हें गन्दी गन्दी गलियां दी हैं। यहां तक की अपनी वर्दी के रौब में आकर उन पर जोर-जबरदस्ती कर उनकी रोजी रोटी छीनने की कोशिश की है।

देर शाम जब मामला पत्रकार संगठनो के जरिये मुंबई पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंची तो उन्होंने आनन-फानन में आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ जाँच करने का निर्देश जारी कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली। मुंबई पुलिस के मुखिया ने चुप्पी साध ली, जबकि आईजी (कानून-व्यबस्था) देवेन भारती ने डीसीपी जोन पांच डॉ. महेश पाटील से मामले की जांच करवाने का भरोसा पत्रकारों को दिया।

मुंबई से शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क: ९३२२४११३३५

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पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम पर जगदलपुर में हुए हमले की डीयूजे ने निंदा की

DUJ CONDEMNS ATTACK ON SCROLL.IN CONTRIBUTOR

The DUJ condemns the attack on the residence of Scroll.in contributor Malini Subramaniam in Jagdalpur, Chhattisgargh in the early hours of Sunday. From reports it is clear that the local police failed to act and nab the culprits. It is shocking that even a FIR on Ms. Subramaniam’s complaint has not been lodged till now.

Over and above this, the police instead of acting against the culprits have questioned the victim repeatedly. The DUJ calls upon the Chhattisgharh Chief Minister, Shri Raman Singh to institute an immediate enquiry and also take urgent steps for her protection and that of the journalist community in the state.

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IIMC Alumni Association Condemns attack on Journalist and IIMCian Kishan Barai

Bhubaneswar : IIMC Alumni Association strongly condemns the attack on Mr. Kishan Barai, a journalist with leading TV Channel News7 and alumnus of IIMC, by some miscreants today in Bhubaneswar.

“This attack is totally unacceptable, threatens freedom of media”, said Mr. Jyotiprakash Mohapatra, General Secretary of the Association’s Odisha Chapter. “This incident is a matter of grave concern and must be swiftly investigated. The authorities should ensure that the attackers are arrested by prosecuted as quickly as possible”, he demanded.

Mr. Barai was attacked by some miscreants during a press conference in Bhubaneswar. He is presently Treasurer of IIMC Alumni Association, Odisha Chapter.

Few pics of Mr. Barai and Journalists Protest against the attack in Bhubaneswar…

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दिल्ली में आरएसएस मुख्यालय पर छात्रों के प्रदर्शन को कवर कर रहे मीडियाकर्मियों पर पुलिस का हमला

January 31, 2016 : The Delhi Union of Journalists (DUJ) condemns the unprovoked and unjustifiable assault by the police on a photojournalist covering the students’ march to the RSS headquarters in Delhi on January 30. Photojournalist Jiji Pillai working for the Mathrubhumi news channel has suffered injuries.

Jiji Pillai and other journalists were attacked by the police while they were engaged in collecting footage of the lathicharge on students by the Delhi Police, who were prevented from marching towards the RSS headquarters at Jhandewalan. While one policeman snatched the camera of Pillai and attempted to break it, another policeman assaulted him from behind. Equipment of a few other photojournalists were also badly damaged.

It seemed as though it was a pre-planned attack by the police which was hell bent on foiling the attempt of the journalists to film the brutal lathi charge on students protesting against Rohit Vemula’s death. This is yet another attempt to muzzle the freedom of the press, which the DUJ strongly denounces in uncertain terms.

Press Release

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बिहार के जहानाबाद में आईबीएन7 संवाददाता पर प्राणघातक हमला

जिला युवा राजद अध्यक्ष धर्मपाल यादव पर हमले का आरोप

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद यूं तो अपराध में बढ़ोतरी हुई ही, अब पत्रकारों की भी जान सुरक्षित नहीं दिख रही। बुधवार को जहानाबाद नगर थाना क्षेत्र के टेनीबिगहा गांव में आईबीएन-7 के जिला संवाददाता मुकेश कुमार पर जानलेवा हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल मुकेश ने हमले का आरोप अपने गांव टेनीबिगहा के ही रहने जिला युवा राजद के अध्यक्ष धर्मपाल यादव और उसके एक करीबी अनिल यादव पर लगाते हुए नगर थाना में भादवि की धारा 307, 341 व 323 के तहत प्राथमिकी (32/16) दर्ज करायी है।

मुकेश ने दोनों आरोपितों पर राइफल के कुंदे से प्रहार करने का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद इस गांव में एक ही जाति के दो गुटों के बीच तनाव गहरा गया है। इधर आरोपितों ने भी नगर थाना में पत्रकार मुकेश के खिलाफ एक आवेदन देकर उसपर अपने साथियों के साथ घर पर चहड़कर गाली-गलौज और जान से मार देने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए थाने में एक शिकायत दर्ज कराई है।

जहानाबाद नगर थानाध्यक्ष नागेन्द्र कुमार ने बताया कि पत्रकार पर हमले के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए देर रात टेनी बिगहा गांव में छापेमारी की गई पर दोनों आरोपित फरार निकले। इस घटना के विरोध में राजधानी पटना के पत्रकारों का एक दल आज शाम 3 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर उनसे हमलावरों की अविलम्ब गिरफ्तारी की मांग करने वाले हैं। सूत्र बताते हैं कि गांव की ही एक छात्रा जो आरोपित अनिल की बेटी है से संबंधित समाचार के प्रसारण से दोनों मुकेश से खफा थे और पूर्व में भी मुकेश को मोबाइल पर धमकी मिली थी।

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार विनायक विजेता की रिपोर्ट.

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बलिया के तहसील बेल्थरा रोड के एसडीएम प्रवरशील बरनवाल पर वकीलों ने किया हमला (देखें वीडियो)

बलिया के तहसील बेल्थरा रोड के एसडीएम प्रवरशील बरनवाल पर वकीलों ने हमला कर दिया. बेल्थरा रोड तहसील के वकीलों का एसडीएम पर आरोप है कि एसडीएम साहब बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करते. वकीलों का आरोप यह भी था कि हर केस पर एसडीएम साहब पैसा लेने के लिए एजेंट रखे हुए हैं. इस सबको लेकर आज वकील काफ़ी गुस्से में थे.

इन लोगों ने आजमगढ़ अधिवक्ता हत्या कांड को लेकर कार्य का बहिष्कार कर रखा था. फिर भी एस डी एम साहब सुनवाईं में लगे थे. इससे नाराज होकर अधिवक्ताओं की टीम ने एस डी एम कोर्ट में आकर तोड़फोड़ की. जब अधिवक्ता संघ अध्यक्ष दुर्गेश से पूछा गया तो उन्होंने कहाँ कि यह तोड़फोड़ खुद एसडीएम ने करवाया है. 

वकीलों के हमले से एक बहादुर होमगार्ड ने एसडीएम की जान बचाई. जब अधिवक्ता एसडीएम साहब के पास आये तब ये होमगार्ड अपने मालिक का डण्डा लेकर अधिवक्ताओं को पीछे धकेलने लगा और उन्हें बचा लिया. फिर भी एक पत्थर एसडीएम के सिर पर लग गया. उधर, एसडीएम की मानें तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश हैं कि कोई भी न्यायिक सुनवायी नहीं रोक सकता. जो अधिवक्ताओं ने किया है वह गलत किया है.

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें>

sdm attack one

sdm attack two

बलिया से संजीव कुमार की रिपोर्ट.

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यूपी के देवरिया में एसओ ने पत्रकार के सिर पर रिवाल्वर की बट से मारा

खाकी की गुंडई का शिकार बना पत्रकार

उत्तर प्रदेश पुलिस की खुलेआम गुंडई एक बार फिर सामने आयी है. देवरिया जिले के खुखुन्दु थाने के एसओ अंशुमान यदुवन्शी ने एक पत्रकार पर कातिलाना हमला करते हुए उसे फर्जी मुकदमें में फसांने की धमकी दे डाली. इतना ही नहीं शिकायत करने गये लोगों पर जमकर लाठिया भी बरसाई. खुखुन्दु थाना क्षेत्र के पडरी गांव मे वारावफात का जुलूस निकलना था जो पत्रकार अरविन्द पाण्डेय के घर के सामने से होकर जाना था.

जब वारावफात का जुलूस जा रहा था तो कुछ लोगों ने इस बात का विरोध किया. इस पर गुस्साए एसओ अंशुमान ने अपनी सरकारी सर्विस रिवालवर पत्रकार पर तान दिया और रिवालवर की बट से पत्रकार के सिर को फोड़ दिया. हालांकि गंभीर अवस्था मे पत्रकार को अस्पताल मे भर्ती कराया गया है. जब इसकी शिकायत लोगों ने किया तो एसओ ने एक बार फिर गुंडई करते हुए लाठियां बरसा दी. जिससे कई लोग घायल हो गए. इस मामलें पर डीम से लेकर एसपी तक मौन धारण किए हुए हैं. वहीं देखना होगा जिले के बड़े अधिकारियों की चुप्पी कब टूटती है.

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सहारा मीडिया की महिला पत्रकार रमणिका को अज्ञात युवक ने चाकू मारा

ये तस्वीर पत्रकार रमणिका राठी की है जिन्हें चाकू मारकर घायल कर दिया गया. वारदात नोएडा के सेक्टर-24 में हुई. रमणिका सहारा मीडिया के समय न्यूज नेटवर्क में कार्यरत हैं. महिला पत्रकार को एक युवक ने चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया. महिला पत्रकार दफ्तर से घर जाने के लिए निकली थीं. शुक्रवार शाम सेक्टर-24 कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-12 में चाकू से हमले की वारदात हुई. उन्हें गंभीर हालत में सेक्टर-35 स्थित सुरभि अस्पताल में भर्ती कराया गया.

पीड़ित महिला पत्रकार का नाम रमणिका राठी (32) है. वह दिल्ली के बदरपुर स्थित सौरभ विहार में रहती हैं और सेक्टर-11 स्थित न्यूज चैनल सहारा समय में कार्यरत हैं. रमणिका ने बताया कि वह शुक्रवार शाम करीब 7 बजे घर जाने के लिए निकलीं. वह स्टेडियम के पास स्थित बस स्टैंड की तरफ जा रही थीं. जब वह सेक्टर-12 स्थित सरस्वती बाल मंदिर से आगे बढ़ीं तभी एक युवक ने उन पर पीछे से हमला कर दिया.

उन्होंने हिम्मत दिखा युवक का हाथ पकड़ लिया. खुद को पकड़े जाने के डर से युवक ने चाकू से पहले उनके पेट के बाई तरफ वार किया. इसके बाद उनके सिर पर वार कर दिया जिससे वह गिर पड़ीं. पीछे से कुछ लोग आ रहे थे जिन्हें देख युवक भाग निकला. उन लोगों ने रमणिका को उठाया. उनके पेट व सिर से खून निकल रहा था. इस बीच वहां बाइक पर पहुंचे अमन नाम के युवक ने बाइक पर बैठाकर सेक्टर-35 स्थित सुरभि अस्पताल में भर्ती कराया. अमन ने ही रमणिका के परिजनों को फोन से वारदात के बारे में सूचित किया.

इसके बाद घटना की जानकारी सेक्टर-24 पुलिस को दी गई. सुरभि अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक रमणिका के पेट व सिर में गहरे जख्म हैं जो किसी धारदार हथियार के वार से लगे हुए हैं. फिलहाल उनकी हालत स्थिर है. परिजनों के कहने पर सुरभि अस्पताल के डॉक्टरों ने रमणिका को दिल्ली के होली फैमिली अस्पताल रेफर कर दिया है. सूचना पाकर सीओ द्वितीय अनूप सिंह सुरभि अस्पताल पहुंचे. उन्होंने रमणिका से घटना के बारे में पूछताछ की.

रमणिका ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि हमलावर युवक काले रंग की जैकेट पहने हुए था. उसकी उम्र 18-19 साल के बीच थी. अंधेरे की वजह से वह उसका चेहरा नहीं देख पाई. पूछताछ में रमणिका ने किसी पारिवारिक विवाद या रंजिश से इनकार किया है. रमणिका का बैग व अन्य सामान सुरक्षित मिला है. फिलहाल पुलिस लूट के प्रयास समेत अन्य एंगल से जांच कर रही है.

घायल रमणिका की मदद अमन नामक बाइक सवार युवक ने की. अमन सेक्टर-73 में रहता है. शुक्रवार को वह सेक्टर-10 स्थित किसी कम्पनी से इंटरव्यू देकर लौट रहा था तभी उसने रमणिका को घायल हालत में देखा. कुछ लोग रमणिका को लेकर खड़े थे. अमन अपनी बाइक पर बैठाकर रमणिका को पहले सेक्टर-12 स्थित सुरभि क्लीनिक लेकर गया. वहां से डॉक्टरों ने उसे सेक्टर-35 स्थित सुरभि अस्पताल के लिए भेज दिया. शाम होते ही पुलिस की मौजूदगी बढ़ जानी चाहिए लेकिन इस शहर में ऐसा नहीं होता. इसी का नतीजा था कि यह वारदात हुई. सेक्टर-11 में न्यूज चैनल के दफ्तर के साथ ही एचसीएल समेत तमाम कम्पनियां हैं जहां से महिलाएं व लड़कियां डय़ूटी कर घर जाने के लिए निकलती हैं लेकिन पुलिस गश्त नहीं होने के चलते वारदात होती है.

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यूपी पुलिस रातों रात इतनी बहादुर हो गई कि उसको पत्रकारों को दौड़ा दौड़ा कर पीटना भी आ गया! …आखिर क्यों!!

उत्तर प्रदेश पुलिस ने आगरा में कई पत्रकारों को जमकर लाठियों से पीटा और उनको घायल कर दिया। बताया जाता है कि उनके कैमरे तक तोड़ दिय गये। पत्रकार असली थे या नक़ली..? दलाल थे या ईमानदार..? कवरेज कर रहे थे या ब्लैकमेल…? हो सकता है कुछ लोगों के मन में इस दखद समय में इसी तरह के विचार आ रहे हों! हो सकता है कि कुछ प्रेस क्लबों में शराब के नशे मे धुत कुछ कथित क़लम के सिपाही सरकार को गिराने से लेकर एक एक को देख लेने का प्लान भी बना भी चुके हों!

इस शर्मनाक हादसे के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की जितनी भर्त्सना की जाए कम है और पत्रकारों के हक़ में खड़ा होने में अब भी देर की जाए तो सबसे बड़ी शर्म की बात है। लेकिन इस मौक़े पर एक सवाल का जवाब आप सभी से मांगने की गुस्ताखी करना चाहता हूं,…! कि इस स्थिति के लिए आख़िर ज़िम्मेदार कौन है? क्या अपराधियों के आगे चूहा साबित होने वाली और प्रेस कांफ्रेसों में बड़े बड़े दावे करके पत्रकारों से छपवाने वाली पुलिस रातों रात इतनी बहादुर हो गई कि उसको पत्रकारों को दौड़ा दौड़ा कर पीटना भी आ गया?

नहीं क़तई नहीं! पुलिस को बहादुर बनाया हमारे ही कुछ कथित पत्रकार साथियों ने..! शाम को एक बोतल और कभी कभी घर के लोगों को घुमाने के लिए मांगी जाने वाली कार या फिर थोड़ा बहुत मंथली पाने पत्रकारों को आप न जानते हों..! तो हर शहर के कुछ पत्रकारों से मालूम कर लेना… लंबी फहरिस्त मिल जाएगी। ये वही जमात है, जो पुलिस की  प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस की तरफ से बतौर प्रवक्ता बनकर असल सवालों को पूछने वालों को चुप करने का ठेका लिये रहती है। भले ही किसी चैनल में काम करें या न करें… भले ही उनके कथित चैनल को बंद हुए जमाना हो गया हो मगर पुलिस के साथ इनकी जत्थेदारी शहरभर में जानी जाती है।

अगर किसी पगले या जुझारू पत्रकार ने सच्चाई लिख भी दी तो पुलिस से पहले खुद ही उसका खंडन करना इनकी ड्यूटी होती है। हर शहर के लिए दावा है मेरा…. अगर आपके शहर में जांच करा दी जाए तो 98 फीसदी पत्रकारों के पास न तो किसी चैनल का आई कार्ड होगा न कोई नियुक्ति पत्र। न किसी को सैलरी मिलती होगी न ही कोई नंबर एक की आमदनी। लेकिन उनके ठाठ बाट आपको दंग करने के लिए काफी होंगे।

किसी की सुनी सुनाई बात नहीं करता मैं। न ही किसी पर आरोप लगाना यहां मेरा मक़सद है। लेकिन सिर्फ चार साल पहले 3 मई 2011 को गाजियाबाद प्रशासन ने कथिततौर पर तत्तकालीन मायावती सरकार के इशारे पर गाजियाबाद के एक पत्रकार के खिलाफ चंद मिनट के अंदर कई थानों में कई एफआईआर दर्ज कर डाली थीं। वो पत्रकार जिसने सहारा और इंडिया टीवी सहित कई राष्ट्रीय चैनलों पर बतौर एंकर और कॉरसपॉंडेंट और पे रोल पर रहते हुए लगभग 17 साल कार्य किया हो। जिस पत्रकार के हाथों नियुक्त किये गये दर्जनों लोग देश के कई शहरों में कार्यरत हों।

जिस पत्रकार का दावा हो कि देशभर में कोई एक इंसान अपने बच्चों कसम खाकर बता दे कि किसी से उसने रिश्वत या एक रुपया भी लिया हो। उसी पत्रकार के खिलाफ गाजियाबाद प्रशासन ने न सिर्फ झूठी एफआईआर दर्ज करा दीं बल्कि उसके परिवार को प्रताणित किया। और सरकार के खिलाफ खबर न लिखने के लिए मजबूर करने के लिए घर की लाइट और पानी तक काट दिया। उस पत्रकार झुकने के बजाए एक माह तक जनरेटर चलाया। पत्रकार का पागलपन सिर्फ इतना है कि उसने प्रशासन के आगे झुकने के बजाय हाइकोर्ट की शरण ली और कई साल तक लड़ने के बाद प्रशासन की पोल खोल दी। पत्रकार का हौंसला जीता….उसके साथियों का भरोसा जीता।

लेकिन अफसोस इस सारी लड़ाई के बीच शहर के कई पत्रकार प्रशासन के भ्रष्ट सिस्टम के सामने दीवार की तरह खड़े होकर प्रशासन के करप्ट लोगों के लिए काम करते रहे। कई ने लिखित में एफिडेविट दिये। कई दलालों ने प्रशासन के करप्ट लोगों को कहा कि कुछ नहीं होगा। ऐसे बहुत पत्रकार घूमते हैं।  ये कहानी नहीं बल्कि मेरे अपने साथ होने वाली घटना है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ कई पत्रकारों को पुलिस ने फंसाया दबाव बनाया। जो झुक गया ठीक नहीं तो जाओ जेल। अपने जनून और पागलपन के दमपर भड़ास चलाने और भारतीय पत्रकारिता को एक नया आयाम देने वाला यशवंत नोएडा पुलिस के हाथों प्रताड़ित किया गया। मुझ सहित कितने पत्रकारों ने इसको आंदोलन बनाया? इस मामले में सबसे ज्यादा खुद को सबसे ज्यादा दोषी मानते हुए भले ही मैं यह बहाना कर लूं कि मैं खुद उन दिनों पुलिस से बचने और अदालत के चक्करों मे फंसा हुआ था।

लेकिन सच्चाई यही है कि आगरा की घटना अचानक नहीं हुई। ये कतई नहीं माना जा सकता कि आगरा में जो कुछ हुआ अचानक हो गया। इस सबके लिए पुलिस से ज्यादा हम सब दोषी हैं। आगरा में पुलिस के हाथों जो कैमरे और पत्रकारों के हाथ पैर टूटे हैं वो पुलिस की लाठी से नहीं बल्कि पत्रकारों की खुद की लापरवाही, गलती और दलाली का नमूना भर है।

लेखक आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं। सहारा टीवी, इंडिया टीवी, डीडी आंखो देखी, इंडिया न्यूज़ समेत कई राष्ट्रीय चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में oppositionnews.com में कार्यरत हैं।

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यशवंत पर हमले की कहानी, उन्हीं की जुबानी ( देखें सुनें संबंधित आडियो, वीडियो और तस्वीरें )

बिना वाइपर की बस… यह तस्वीर तबकी है जब बारिश थोड़ी कम हो गई थी.

दिल्ली को अलविदा कहने के बाद आजकल भ्रमण पर ज्यादा रहता हूं. इसी कड़ी में बनारस गया. वहां से रोडवेज बस के जरिए गाजीपुर जा रहा था. मेरे चाचाजी को हार्ट अटैक हुआ था, जिसके बाद उनकी ओपन हार्ट सर्जरी होनी है. उन्हीं को देखने के लिए गाजीपुर जा रहा था. शिवगंगा ट्रेन से बनारस उतरा और रोडवेज की बस पकड़ कर गाजीपुर जाने लगा. मौसम भीगा भीगा था. बारिश लगातार हो रही थी. बस चलने लगी. बिना वाइपर की बस धीमी गति से रेंगते हुए बढ़ रही थी. ड्राइवर कुछ ज्यादा ही सजग था क्योंकि लगातार बारिश से बस का शीशा पानीमय हुआ जा रहा था और उसे शीशे के पार सड़क पर देखने के लिए कुछ ज्यादा ही मशक्कत करनी पड़ रही थी.

मेरी सीट ड्राइवर के ठीक पीछे यानि पहली वाली सीट थी. मैं आसानी से बारिश और ड्राइवर का संकट देख समझ पा रहा था. बस जब घंटे डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद बनारस शहर के बाहर निकल गई और गाजीपुर की तरफ चलने लगी तो भी बस की स्पीड तीस चालीस से ज्यादा नहीं हो पा रही थी. एक जगह चाय पानी के लिए जब बस रुकी तो ड्राइवर साहब अपने सामने वाले बस के शीशे पर कुछ सफेद सफेद पोतने लगे. मैंने पूछा कि ये क्या रगड़ रहे हैं. ड्राइवर ने बताया कि ये चूना है, ये कैटलिस्ट होता है, पानी को रुकने नहीं देता, यानि पानी बूंद के रूप में शीशे पर इकट्ठा नहीं हो सकेगा और चूने के प्रभाव में आकर सरपट नीचे भागेगा जिससे थोड़ी बहुत विजिबिलिटी बनी रहेगी. ड्राइवर के इस देसी नुस्खे को देखकर हैरत में पड़ गया है. क्या गजब जुगाड़ है भारत में. हर चीज जो नहीं है, उसका स्थानापन्न तलाश लिया जाता है. शायद दुख और संकट का भी स्थानापन्न हम तलाश लेते हैं, मन ही मन, कि ये सब पूर्व जन्मों का फल है इसलिए भोग लो.

ड्राइवर ने जब दुबारा बस स्टार्ट की तो चूने का असर साफ दिख रहा था. ड्राइवर के सामने वाले जिस शीशे पर चूना लगा था वहां पानी रुक नहीं रहा था, सरपट भाग रहा था नीचे, इसलिए साफ दिख रहा था. ड्राइवर के बाएं वाले शीशे जहां चूना नहीं लगा था, वहां बूंद बूंद पानी चिपका हुआ था. ड्राइवर से बातचीत शुरू हुई. आखिर बिना वाइपर ये बस चलाने का मकसद, मतलब क्या है. इतने सारे यात्रियों की जान खतरे में डाले हुए हैं. जहां हमें दो घंटे में पहुंच जाना चाहिए, वहां वाइपर न होने के कारण चार घंटे में पहुंचेंगे, स्पीड धीमी होने के कारण. ड्राइवर बस चलाते हुए लगभग फट पड़ा. अपने अधिकारियों के उपर. अफसरों की लापरवाही और हीलाहवाली से दुखी ड्राइवर बोला कि मैं साल भर से कंप्लेन कर रहा हूं, कोई नहीं सुन रहा. आज भी जब ये बस ले कर चला हूं तो रजिस्टर पर लिखवा कर आया हूं कि इसमें वाइपर नहीं लगा है.

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अमर उजाला के आगरा आफिस पर नारायण साईं समर्थकों का हमला, पत्रकार का गला दबाया

आगरा। दुष्कर्म मामले में जेल में बंद आसाराम के बेटे नारायण साईं के करीब दो दर्जन समर्थकों ने मंगलवार शाम अमर उजाला कार्यालय पर हमला किया। तोड़फोड़ और मारपीट कर रहे इन लोगों के खिलाफ जब कर्मचारी एकजुट हुए तो अन्य भाग निकले लेकिन दो पकड़े गए। इन्हें सिकंदरा थाने की पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। नारायण साईं समर्थक अमर उजाला में गत 20 सितंबर को छपी खबर पर प्रतिक्रिया जताने आए थे। बड़ी संख्या में लोगों को देख जब गार्ड ने रोका तो उनसे हाथापाई करते हुए सभी स्वागत कक्ष तक आ गए। मुख्य उप संपादक चंद्र मोहन शर्मा ने फिर भी पूरे संयम से उनकी बात सुनी।

जब उन्होंने समझाने की कोशिश की कि इस खबर में आपत्तिजनक कोई तथ्य नहीं है। यह नारायण साईं के खिलाफ उनकी पत्नी जानकी हरपलानी द्वारा इंदौर के खजराना थाने में दी गई शिकायत पर आधारित है। इसमें वही लिखा गया गया है जो जानकी ने पुलिस से कहा। इतना सुनते ही उन्होंने गाली-गलौज करते हुए उनकेसाथ हाथापाई शुरू कर दी। ये हमारे बापू के खिलाफ बहुत लिखते हैं आज इन्हें सबक सिखा देना है, कहते हुए कई ने छुपाकर लाए लाठी-डंडे निकाल लिए। उन्हें घिरा देख टेलीफोन आपरेटर राजेंद्र बीचबचाव को पहुंचे। बीचबचाव को आए पत्रकारों आशीष शर्मा, धर्मेंद्र यादव और राजीव शर्मा को भी हमले में चोटें आईं। इसी बीच एक समर्थक ने चंद्रमोहन शर्मा का गला दबाने की कोशिश की। शोर सुनकर अन्य कर्मचारियों को आता देख हमलावर धमकियां देते हुए भाग निकले पर दो पकड़ लिए गए। हमले की सूचना पाकर सिकंदरा थाने के इंस्पेक्टर हरीमोहन सिंह फोर्स के साथ आए। पकड़े गए युवकों डिफेंस स्टेट, सदर निवासी देवेश पुत्र विशंभरदयाल और नेहरू एन्क्लेव सदर निवासी हरिओम पुत्र कुंवरसेन को उन्होंने हिरासत में ले लिया और थाने ले गए। एडमिन हेड हिमांशु बघेल ने थाना पुलिस को हमलावरों के खिलाफ बलवा, तोड़फोड़, मारपीट, जानलेवा हमले की तहरीर दी है।

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झांसी महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने पत्रकार को बंधक बना पीटा

उत्तर प्रदेश के झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में समाचार संकलन करने और अपने पत्रकार साथी का उपचार कराने पहुंचे पत्रकारों के साथ जूनियर डॉक्टरों ने अभद्रता करनी शुरू कर दी. जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वे पत्रकारों को पकड़ने लगे. इसी दौरान एक पत्रकार अपनी जान बचाकर मेडिकल कॉलेज से भागकर बाहर आया जबकि दूसरे पत्रकार को डॉक्टरों ने पकड़ लिया और कमरे में बन्धक बनाकर बेरहमी से पिटाई की, यह देख भागे पत्रकार ने इसकी सूचना सम्बधित थाने की पुलिस व मेडिकल प्रशासनिक अधिकारियों को दी, जिस पर उन्होनें किसी प्रकार बन्धक बने पत्रकार को बचाया.

झांसी के एक हिन्दी दैनिक अखबार के पत्रकार प्रशान्त शर्मा अपने पत्रकार साथी मुकेश साहू के साथ समाचार संकल्न करने व उसका उपचार के लिये महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में पहुंचे. प्रशान्त शर्मा ने आरोप लगाते हुये बताया कि जब वह अपने साथी पत्रकार मुकेश साहू के उपचार के लिये चिकित्सक के पास पहुंचे और सीनियर डॉक्टर की जानकारी करने लगे, तभी उनमें कहासुनी हो गयी। कहासुनी इतनी बढ की कि जूनियर डॉक्टरों ने कानून को अपने हाथ में लेकर उनके साथ गाली गलौज करते हुये अभद्रता करनी शुरू कर दी. जिसका उन्होनें विरोध किया तो वे उनके साथ मारपीट करने लगे, किसी प्रकार उनका साथी मुकेश साहू अपनी जान बचाकर वहां से बाहर निकलने में सफल हो गये, जबकि जूनियर डॉक्टरों ने उसे पकड़ लिया, इससे पहले वे कुछ समझते उन्हे एक कमरे में ले जाकर बन्धक बनाया और फिर उसकी बेरहमी से पिटाई करनी शुरू कर दी. जान बचाने के लिये वह चीखते-चिल्लाते रहे लेकिन जूनियर डॉक्टरों की गुण्डई के आगे किसी ने भी हिम्मत जुटाकर उन्हें बचाने का प्रयास नहीं किया, लगभग आधा घंटे उन्हे बन्धक बनाये रखा.

वहीं दूसरे पत्रकार मुकेश साहू ने बताया कि मामले को बढते देख उन्होनें इसकी सूचना सम्बधित थाने की पुलिस व अधिकारियों और अपने साथियों को दी, तो आनन-फानन में सभी मोके पर पहुंचे और बन्धक पत्रकार प्रशान्त को जूनियर डॉक्टरों के चंगुल से बचाया है. यदि प्रशासन समय पर नही आता तो बड़ी घटना को सकती थी. जब इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी ली गयी तो उन्होनें बताया कि पीड़ित पत्रकार की शिकायत पर मामला दर्ज कराया जायेगा.

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शिल्‍पा शेट्टी ने रिपोर्टर को मारने के लिए माइक उठाया… देखें तस्वीरें

बॉलीवुड एक्‍ट्रेस और राजस्‍थान रॉयल्‍स की मालकिन शिल्‍पा शेट्टी को एक प्रोडक्‍ट लॉन्‍च के दौरान एक रिपोर्टर पर इतना गुस्‍सा आ गया कि उन्‍होनें उसे मारने के लिए माइक उठा लिया। दरअसल आईपीएल से राजस्‍थान रॉयल्‍स टीम के सस्‍पेंशन के बाद से कोई भी उनसे आईपीएल के बारे में पूछ लेता है तो उनका पारा हाई हो जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ इस प्रेस मीट के दौरान। वास्‍तव में शिल्‍पा ने गुस्‍से में रिपोर्टर को माइक मारने के लिए तो उठाया लेकिन फिर इस घटना को हंसी-हंसी में किया गया काम दिखाते हुए टाल दिया।

हाल ही में शिल्पा शेट्टी अपने पति राज कुंद्रा के साथ एक प्रमोशनल इवेंट में मौजूद थीं। इसी मौके पर मीडिया से बातचीत के दौरान एक रिपोर्टर ने विवादों में फंसी उनकी आईपीएम टीम ‘राजस्थान रॉयल्स’ के बारे में पूछा लिया। फिर क्या था, शिल्पा शेट्टी को गुस्सा आ गया। माइक लेकर मारने के लिए हाथ उठाते हुए वह बोलीं कि प्रोडक्ट लांच से पहले माइक लांच कर दूंगी। यह सब करने के बाद उन्होंने हंसकर पूरे मामले को हंसी मजाक का रूप दे दिया।

माइक उठाकर मारने वाली शिल्पा शेट्टी की कुछ अन्य तस्वीरें देखने के लिए नीचे लिखे आ रहे Next पर क्लिक करते जाए>>

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