अराजक रोडवेजकर्मियों ने लखनऊ के पत्रकार को मिल कर पीटा, मीडिया संगठन चुप्पी साधे हैं

लखनऊ से खबर है कि मान्यता प्राप्त पत्रकार शशि नाथ दुबे के ऊपर आलमबाग रोडवेज के कर्मचारियों ने हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया. शशि नाथ दुबे बिजनेस टाइम्स से राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं. वे टिकट बुक कराने के लिए आलमबाग बस स्टेशन पहुंचे और जयपुर जाने के लिए अपना रिजर्वेशन …

दैनिक जागरण जौनपुर के विज्ञापन प्रभारी शीतला प्रसाद मौर्य पर हमला

पत्रकार पर हुए हमले से पत्रकार संघ आक्रोशित… जौनपुर। जौनपुर पत्रकार संघ ने दैनिक जागरण के जिला विज्ञापन प्रभारी शीतला प्रसाद मौर्य पर हमले की निंदा कर आक्रोश व्यक्त किया है। संघ ने  दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्यवाही की मांग किया है। इस सम्बंध में आयोजित संघ की बैठक अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि कतिपय अराजक तत्वों ने रविवार की रात को श्री मौर्य को लाठी डंडे और लोहे के रॉड मारपीट कर घायल कर दिया था। पुलिस ने अभी तक घटना के दोषियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नही किया। जिससे पत्रकारों में आक्रोश है। बैठक का संचालन  महामंत्री डॉ मधुकर तिवारी ने किया।

भाजपाई गुंडों ने दो टीवी पत्रकारों के साथ ये क्या कर दिया.. सुनिए पूरी कहानी…

Chander Mauli Sharma :  शायद अब मैं हिमाचल कभी जाऊँ…. जी हां, हम और हमारी टीम लगातार पिछले एक महीनें से डीपीआर से आज्ञा लेकर चुनावी कवरेज पर थे. सब कुछ अच्छा जा रहा था हिमाचल को बेहद करीब से देखा, जैसा सुना वैसा लगा भी. पर शायद मैं किसी भ्रम में ही था, या शायद कोई बुरा सपना जो परसों रात टूट गया. हम पावंटा साहिब में राहूल की रैली कवर कर के नाहन के लिए निकलें, क्यूँकि वहा भी सीएम राजा वीरभद्र की रैली थी. बहुत अच्छा जा रहा था और हम निकलनें वाले थे कि स्थानिय लोगों से पता चला यहां रात को शराब बंटती हैं. एक गज़ब की स्टोरी हमारे सामने थी, और हम सुबह से उस स्टोरी पर काम करना शुरू भी कर चुके थे।

इन खबरों के कारण भड़ास संपादक यशवंत पर हमला किया भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी ने!

साढ़े छह साल पुरानी ये वो खबरें है जिसको छापे जाने की पुरानी खुन्नस में शराब के नशे में डूबे आपराधिक मानसिकता वाले भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी ने किया था भड़ास संपादक यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब आफ इंडिया में हमला… इसमें सबसे आखिरी खबर में दूसरे हमलावर अनुराग त्रिपाठी द्वारा स्ट्रिंगरों को भेजे गए पत्र का स्क्रीनशाट है जिसके आखिर में उसका खुद का हस्ताक्षर है… ये दोनों महुआ में साथ-साथ थे और इनकी कारस्तानियों की खबरें भड़ास में छपा करती थीं… बाद में दोनों को निकाल दिया गया था…

यशवंत हजारों पीड़ितों को स्वर दे रहे हैं, भगवान उन्हें दीर्घायु दें

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह पर हमले की खबर पढ़कर मन बहुत व्यथित हुआ। साथ ही इससे बहुत खिन्नता भी उपजी, आज के पत्रकारिता जगत के स्वरूप को लेकर। यशवंत सिंह पर हमला करने वाले निश्चित रूप से मानसिक रूप से दिवालिया हैं। यह बात भी तय है कि वे तर्क और सोचविहीन हैं।

पत्रकार कहे जाने वालों का यशवंत जैसे एक निर्भीक पत्रकार पर हमला बेहद शोचनीय है : अविकल थपलियाल

Avikal Thapliyal : कोहरा घना है… बेबाक और निडर पत्रकारों पर हमले का अंदेशा जिंदगी भर बना रहता है। भाई यशवंत को भी एक दिन ऐसे घृणित हमले का शिकार होना ही था। बीते वर्षों में हुई मुलाकात के दौरान मैंने यशवंत का ध्यान इस ओर खींचा भी था। लेकिन मुझे ऐसा लगता था कि कई बार फकीराना अंदाज में सभी को गरियाने वाले यशवंत किसी अपराधी या फिर विशेष विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले हिंसक लोगों के कोप का भाजन बनेंगे। लेकिन पत्रकार कहलाये जाने वाले ही अपने बिरादर भाई यशवंत की नाक पर दिल्ली प्रेस क्लब में हमला कर देंगे, यह नहीं सोचा था।

हमलावर लोग कायर होते हैं, इसलिए हारना अंततः उन्हें ही होता है…

Anoop Gupta : पत्रकार यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर हमला किया गया और पुलिस की चुप्पी तो समझ आती है, प्रेस क्लब की चुप्पी के मायने क्या हैं। अगर यशवंत का विरोध करना ही है तो लिख कर कीजिये, बोल कर कीजिए, हमला करके क्या साबित किया जा रहा है। मेरा दोस्त है यशवंत, कई बार मेरे मत एक नहीं होते, ये जरूरी भी नहीं है लेकिन हम आज भी दोस्त हैं। चुनी हुई चुप्पियों और चुने हुए विरोध से बाहर निकलने की जरूरत है।

हे ईश्वर, हमलावर भुप्पी और अनुराग को क्षमा करना, वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं..

Shrikant Asthana : प्रेस क्लब आफ इंडिया परिसर में यशवंत पर हमला हुए कई दिन बीत चुके हैं। अपराधियों की पहचान भी सबके सामने है। फिर भी न पुलिस कार्रवाई का कुछ पता है, न ही इनके संस्थानों की ओर से। क्या हम बड़ी दुर्घटनाओं पर ही चेतेंगे? कौन लोग इन अपराधियों को बचा रहे हैं? वैसे भी, कथित मेनस्ट्रीम मीडिया के बहुत सारे कर्ता-धर्ता तो चाहते ही हैं कि वे यशवंत की चटनी बना कर चाट जाएं। इस श्रेणी से ऊपर के मित्रों-शुभचिंतकों से जरूर आग्रह किया जा सकता है कि वे उचित कार्रवाई के लिए दबाव बनाएं। अपनी फक्कड़ी में यशवंत किसी को अनावश्यक भाव देता नहीं। लगभग ‘कबीर’ हो जाना उसे यह भी नहीं समझने देता कि यह 15वीं-16वीं शती का भारत नहीं है। First hand account of attack on Yashwant Singh : https://www.youtube.com/watch?v=MgGks6Tv2W4 I’m very thankful to friends who have shown deep concern about the incident and are likely to help create due pressure.

पत्रकारिता में ‘सुपारी किलर’ और ‘शार्प शूटर’ घुस आए हैं, इनकी रोकथाम न हुई तो सबके चश्मे टूटेंगे!

Rajiv Nayan Bahuguna : दिल्ली प्रेस क्लब ऑफ इंडिया परिसर में एक उद्दाम पत्रकार यशवंत सिंह को दो “पत्रकारों” द्वारा पीटा जाना कर्नाटक में पत्रकार मेध से कम चिंताजनक और भयावह नहीं है। दरअसल जब से पत्रकारिता में लिखने, पढ़ने और गुनने की अनिवार्यता समाप्त हुई है, तबसे तरह तरह के सुपारी किलर और शार्प शूटर इस पेशे में घुस आए हैं। वह न सिर्फ अपने कम्प्यूटर, मोबाइल और कैमरे से अपने शिकार को निशाना बनाते हैं, बल्कि हाथ, लात, चाकू और तमंचे का भी बेहिचक इस्तेमाल करते हैं।

यशवंत की गुरिल्ला छापामार पत्रकारिता और प्रेस क्लब में दो दलाल/भक्तनुमा पत्रकारों का हमला करना…

Anil Jain : गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित सभा में कुछ वामपंथी नेताओं के आ जाने पर कुछ ‘राष्ट्रवादी’ पत्रकार मित्रों के पेट में काफी दर्द हुआ, जिसका इजहार करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रेस क्लब वामपंथियों और नक्सलियों का अड्डा बनता जा रहा है। लेकिन उसी सभा के दो दिन पहले प्रेस क्लब में न्यूज पोर्टल भडास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर हुए हमले को लेकर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों सहित किसी ने कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की। प्रेस क्लब के ‘नक्सलियों का अड्डा’ बन जाने की काल्पनिक चिंता में दुबले हुए पत्रकार मित्रों की संवेदना भी पता नहीं कहां चली गई दक्ष-आरम और ध्वज प्रणाम करने!

खबर छापे जाने की नाराजगी में फिर एक पत्रकार हुआ जानलेवा हमले का शिकार

हमले के शिकार लखनऊ के पत्रकार राजेंद्र.

लखनऊ से जानकारी मिली है कि खबर छापने की कीमत एक वरिष्ठ पत्रकार को चुकाना पड़ा है. आरटीओ आफिस में करप्शन की खबर छापे जाने से नाराज़ आरटीओ कर्मियों ने वरिष्ठ पत्रकार पर लाठी, डंडों और ईंट से जानलेवा हमला कर दिया. पीड़ित पत्रकार हैं राजेन्द्र राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं. उन पर आरटीओ कार्यालय परिसर में हुआ हमला. पत्रकार राजेंद्र गंभीर रूप से घायल हैं. थाना सरोजनीनगर इलाके में है आरटीओ कार्यालय.

Probe police attack on journalists in Amaravati

Based on reports reaching here, the Mumbai Press Club demands an impartial inquiry into the arrest of Prashant Kamble, an award winning journalist, and Abhijit Tiwari, a local scribe. The two have alleged that they were beaten and arrested while reporting a suicide of a local girl in Chandur Railway in Amravati district early this week.

इलाहाबाद में वरिष्ठ पत्रकार पर जानलेवा हमला, स्टूडियो संचालक ने की मारपीट

दी पायनियर न्यूज़ पेपर इलाहाबाद के ब्यूरो चीफ और शहर के वरिष्ठतम पत्रकार अभिलाष नारायण को उनके तथाकथित मकान मालिक (स्टूडियो संचालक) राजीव वाष्णेय और उसकी पत्नी गीता ने मंगलवार रात बुरी तरह मारा पीटा। श्री अभिलाष नारायण के साथ ही उनकी पत्नी को मारा और उनसे बदतमीजी भी की। यही नहीं, कथित मालिक स्टूडियो संचालक ने श्री नारायण के कमरे में घुस कर मारा और दोनों को भद्दी भद्दी गालियां दी। उनसे अभद्र व्यवहार भी किया। उनके चेहरे पर कई बार किये। पत्थर से भी मारने का प्रयास किया।

भाजपा नेता को पत्रकारिता पसंद न आई तो पत्रकार पर कर दिया तलवार से हमला

ये भाजपा वाले जन्मजात मीडिया विरोधी होते हैं.. या तो पटा लेते हैं या फिर हमला कर देते हैं.. इन्हें डेमोक्रेसी कतई पसंद नहीं… मध्य प्रदेश में एक भाजपा नेता को पत्रकारिता पसंद न आई तो पत्रकार पर कर दिया तलवार से हमला.. मध्य प्रदेश में जगह जगह पत्रकार भाजपा नेताओं के हाथों पीटे जाते हैं… कइयों की जान तक ले ली गई..

घटना मध्य प्रदेश की. खबर छापे जाने से नाराज था बीजेपी का नेता.. पत्रकार को तलवार मारी… जबलपुर में भाजपा नेता और पार्षद पति ने पत्रकार आशीष विश्वकर्मा को घर बुलाकर तलवार से जानलेवा हमला किया. पत्रकार को गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है. बताया जा रहा है कि एक खबर छापे जाने से नाराज होकर भाजपा नेता ने जानलेवा हमला किया. स्थानीय हिंदी दैनिक के पत्रकार आशीष विश्वकर्मा पर शुक्रवार रात को भाजपा गढ़ा जोन अध्यक्ष और पार्षद रीना राजपूत के पति हृदयेश और उसके भाई नीरज ने घर बुलाकर जानलेवा हमला कर दिया.

आतंकवादी गरीब नहीं होते!

सुनील संवेदी

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के सबसे सुरक्षित इलाके में आतंकी हमले के बाद दुनिया को आतंकवाद से बचाने और दोषी कौन पर बहस फिर शुरू हो गई। अब भारत की बारी पर भी चर्चायें हो रही हैं। इन सबमें शायद एक चीज पहली बार हुई है कि प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया, समाजशास्त्रियों से लेकर राजनीतिज्ञों ने इन आतंवादियों के ठाट-बाट पर कई दिनों तक अच्छी खासी चर्चा की। ढाका हमले में लिप्त आतंकवादी काफी धनिक परिवारों से थे। मतलब उन्होंने पैसे के लिए मानवता की हत्या कर खुद को मौत के मुंह में नहीं धकेला। इससे एक बात और साबित हुई कि गरीबी और अशिक्षा के चलते लोग आतंकवाद के रास्ते पर चल रहे हैं, ये सिद्धांत झूठा था। सिर्फ मुद्दे की दिशा बदलने के लिए इस सिद्धांत को गढ़ा गया था।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पत्रकार को शराब ठेकेदार और आबकारी विभाग के लोगों ने पीटा

बिलासपुर में शराब ठेकेदार के पंडों का आतंक…. पत्रकार भी सुरक्षित नहीं…… छत्तीसगढ़ प्रदेश में आतंक का पर्याय बन चुके शराब ठेकेदार के पंडों के हौसले इस कदर बुलन्द हैं कि पत्रकार की पिटाई करने में भी उन्हें कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं रह गया है। मिली जानकारी के अनुसार पंडो ने बुधवार सरकंडा बिलासपुर स्थित देशी शराब भट्टी में “पत्रिका” से संबद्ध एक पत्रकार संदीप के साथ अकारण झुमाझपटी और मारपीट की है। इसमें आबकारी उपनिरीक्षक नितिन शुक्ला भी संलिप्त था।

BHU में हॉस्टल मांगने वाले मेडिकल छात्र की सुरक्षाकर्मियों ने टांग तोड़ी (देखें वीडियो)

बीएचयू के PRO राजेश सिंह आधिकारिक बयान दे रहे हैं कि मेडिकल के बच्चों पर लाठीचार्ज हुआ ही नहीं है। लेकिन एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसमें सुरक्षीकर्मी एक छात्र को पीट रहे हैं और बाद में टांग टूटने से छात्र जमीन पर लेटकर बुरी तरह चिल्ला रहा है. इन दिनों B.H.U प्रशासन पूरी तरह छात्र विरोधी रवैया अपनाए हुए है. एक तरफ़ जहां वो मेडिकल छात्रों पे लाठियां भांज रही थी वहीं रात को जब BIRLA और LBS के छात्र आपस मे भिड़े हुए थे तब तक कोई PROCTORIAL नहीं आयी, जब तक बनारस प्रशासन ने मोर्चा नहीं सम्भाल लिया.

मुजफ्फरपुर में ‘JNU Speaks’ कार्यक्रम पर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने किया हमला, देखें वीडियो

बिहार के मुजफ्फरपुर से खबर है कि ‘जेएनयू स्पीक्स’ नामक कार्यक्रम पर भाजपा के छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया. इसके कार्यक्रम में शामिल कई लोगों को चोटें आई हैं. जेएनयू से जुड़ी रहीं महिलावादी और भाकपा माले नेता कविता कृष्णन ने इस बारे में जानकारी अपने फेसबुक वॉल पर दी है. उन्होंने बोलने के अधिकार पर लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे कार्यक्रम पर हमला करने की संघी गुंडों की हरकत को बेहद शर्मनाक करार दिया. 

संजय दत्त के कार्यक्रम को कवर करने गए पत्रकारों की पिटाई

मुंबई : शीना वोरा मर्डर केस में हुई दुनिया भर की फजीहत झेल रही मुंबई पुलिस ने संजय दत्त के कार्यकम को कवर करने गए पत्रकारों की पिटाई की है। ताजा मामला सिद्धि विनायक मंदिर कैंपस की है, जहां मुंबई पुलिस ने आधे दर्जन पत्रकारों और कैमरामैनों पर लाठियां चलाई हैं। उन्हें गन्दी गन्दी गलियां दी हैं। यहां तक की अपनी वर्दी के रौब में आकर उन पर जोर-जबरदस्ती कर उनकी रोजी रोटी छीनने की कोशिश की है।

पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम पर जगदलपुर में हुए हमले की डीयूजे ने निंदा की

DUJ CONDEMNS ATTACK ON SCROLL.IN CONTRIBUTOR

The DUJ condemns the attack on the residence of Scroll.in contributor Malini Subramaniam in Jagdalpur, Chhattisgargh in the early hours of Sunday. From reports it is clear that the local police failed to act and nab the culprits. It is shocking that even a FIR on Ms. Subramaniam’s complaint has not been lodged till now.

दिल्ली में आरएसएस मुख्यालय पर छात्रों के प्रदर्शन को कवर कर रहे मीडियाकर्मियों पर पुलिस का हमला

January 31, 2016 : The Delhi Union of Journalists (DUJ) condemns the unprovoked and unjustifiable assault by the police on a photojournalist covering the students’ march to the RSS headquarters in Delhi on January 30. Photojournalist Jiji Pillai working for the Mathrubhumi news channel has suffered injuries.

बिहार के जहानाबाद में आईबीएन7 संवाददाता पर प्राणघातक हमला

जिला युवा राजद अध्यक्ष धर्मपाल यादव पर हमले का आरोप

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद यूं तो अपराध में बढ़ोतरी हुई ही, अब पत्रकारों की भी जान सुरक्षित नहीं दिख रही। बुधवार को जहानाबाद नगर थाना क्षेत्र के टेनीबिगहा गांव में आईबीएन-7 के जिला संवाददाता मुकेश कुमार पर जानलेवा हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल मुकेश ने हमले का आरोप अपने गांव टेनीबिगहा के ही रहने जिला युवा राजद के अध्यक्ष धर्मपाल यादव और उसके एक करीबी अनिल यादव पर लगाते हुए नगर थाना में भादवि की धारा 307, 341 व 323 के तहत प्राथमिकी (32/16) दर्ज करायी है।

बलिया के तहसील बेल्थरा रोड के एसडीएम प्रवरशील बरनवाल पर वकीलों ने किया हमला (देखें वीडियो)

बलिया के तहसील बेल्थरा रोड के एसडीएम प्रवरशील बरनवाल पर वकीलों ने हमला कर दिया. बेल्थरा रोड तहसील के वकीलों का एसडीएम पर आरोप है कि एसडीएम साहब बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करते. वकीलों का आरोप यह भी था कि हर केस पर एसडीएम साहब पैसा लेने के लिए एजेंट रखे हुए हैं. इस सबको लेकर आज वकील काफ़ी गुस्से में थे.

यूपी के देवरिया में एसओ ने पत्रकार के सिर पर रिवाल्वर की बट से मारा

खाकी की गुंडई का शिकार बना पत्रकार

उत्तर प्रदेश पुलिस की खुलेआम गुंडई एक बार फिर सामने आयी है. देवरिया जिले के खुखुन्दु थाने के एसओ अंशुमान यदुवन्शी ने एक पत्रकार पर कातिलाना हमला करते हुए उसे फर्जी मुकदमें में फसांने की धमकी दे डाली. इतना ही नहीं शिकायत करने गये लोगों पर जमकर लाठिया भी बरसाई. खुखुन्दु थाना क्षेत्र के पडरी गांव मे वारावफात का जुलूस निकलना था जो पत्रकार अरविन्द पाण्डेय के घर के सामने से होकर जाना था.

सहारा मीडिया की महिला पत्रकार रमणिका को अज्ञात युवक ने चाकू मारा

ये तस्वीर पत्रकार रमणिका राठी की है जिन्हें चाकू मारकर घायल कर दिया गया. वारदात नोएडा के सेक्टर-24 में हुई. रमणिका सहारा मीडिया के समय न्यूज नेटवर्क में कार्यरत हैं. महिला पत्रकार को एक युवक ने चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया. महिला पत्रकार दफ्तर से घर जाने के लिए निकली थीं. शुक्रवार शाम सेक्टर-24 कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-12 में चाकू से हमले की वारदात हुई. उन्हें गंभीर हालत में सेक्टर-35 स्थित सुरभि अस्पताल में भर्ती कराया गया.

यूपी पुलिस रातों रात इतनी बहादुर हो गई कि उसको पत्रकारों को दौड़ा दौड़ा कर पीटना भी आ गया! …आखिर क्यों!!

उत्तर प्रदेश पुलिस ने आगरा में कई पत्रकारों को जमकर लाठियों से पीटा और उनको घायल कर दिया। बताया जाता है कि उनके कैमरे तक तोड़ दिय गये। पत्रकार असली थे या नक़ली..? दलाल थे या ईमानदार..? कवरेज कर रहे थे या ब्लैकमेल…? हो सकता है कुछ लोगों के मन में इस दखद समय में इसी तरह के विचार आ रहे हों! हो सकता है कि कुछ प्रेस क्लबों में शराब के नशे मे धुत कुछ कथित क़लम के सिपाही सरकार को गिराने से लेकर एक एक को देख लेने का प्लान भी बना भी चुके हों!

यशवंत पर हमले की कहानी, उन्हीं की जुबानी ( देखें सुनें संबंधित आडियो, वीडियो और तस्वीरें )

बिना वाइपर की बस… यह तस्वीर तबकी है जब बारिश थोड़ी कम हो गई थी.

दिल्ली को अलविदा कहने के बाद आजकल भ्रमण पर ज्यादा रहता हूं. इसी कड़ी में बनारस गया. वहां से रोडवेज बस के जरिए गाजीपुर जा रहा था. मेरे चाचाजी को हार्ट अटैक हुआ था, जिसके बाद उनकी ओपन हार्ट सर्जरी होनी है. उन्हीं को देखने के लिए गाजीपुर जा रहा था. शिवगंगा ट्रेन से बनारस उतरा और रोडवेज की बस पकड़ कर गाजीपुर जाने लगा. मौसम भीगा भीगा था. बारिश लगातार हो रही थी. बस चलने लगी. बिना वाइपर की बस धीमी गति से रेंगते हुए बढ़ रही थी. ड्राइवर कुछ ज्यादा ही सजग था क्योंकि लगातार बारिश से बस का शीशा पानीमय हुआ जा रहा था और उसे शीशे के पार सड़क पर देखने के लिए कुछ ज्यादा ही मशक्कत करनी पड़ रही थी.

अमर उजाला के आगरा आफिस पर नारायण साईं समर्थकों का हमला, पत्रकार का गला दबाया

आगरा। दुष्कर्म मामले में जेल में बंद आसाराम के बेटे नारायण साईं के करीब दो दर्जन समर्थकों ने मंगलवार शाम अमर उजाला कार्यालय पर हमला किया। तोड़फोड़ और मारपीट कर रहे इन लोगों के खिलाफ जब कर्मचारी एकजुट हुए तो अन्य भाग निकले लेकिन दो पकड़े गए। इन्हें सिकंदरा थाने की पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। नारायण साईं समर्थक अमर उजाला में गत 20 सितंबर को छपी खबर पर प्रतिक्रिया जताने आए थे। बड़ी संख्या में लोगों को देख जब गार्ड ने रोका तो उनसे हाथापाई करते हुए सभी स्वागत कक्ष तक आ गए। मुख्य उप संपादक चंद्र मोहन शर्मा ने फिर भी पूरे संयम से उनकी बात सुनी।

झांसी महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने पत्रकार को बंधक बना पीटा

उत्तर प्रदेश के झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में समाचार संकलन करने और अपने पत्रकार साथी का उपचार कराने पहुंचे पत्रकारों के साथ जूनियर डॉक्टरों ने अभद्रता करनी शुरू कर दी. जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वे पत्रकारों को पकड़ने लगे. इसी दौरान एक पत्रकार अपनी जान बचाकर मेडिकल कॉलेज से भागकर बाहर आया जबकि दूसरे पत्रकार को डॉक्टरों ने पकड़ लिया और कमरे में बन्धक बनाकर बेरहमी से पिटाई की, यह देख भागे पत्रकार ने इसकी सूचना सम्बधित थाने की पुलिस व मेडिकल प्रशासनिक अधिकारियों को दी, जिस पर उन्होनें किसी प्रकार बन्धक बने पत्रकार को बचाया.