बांसुरी महोत्सव का चंदा जिला प्रशासन के गले का फंदा बन गया

निर्मलकांत शुक्ला-

योगी राज : बांसुरी महोत्सव के नाम पर जबरन चंदा उगाही से भड़के वरुण, लौटने के लिए डीएम को भेजी चिट्ठी

-डीएम को चंदे का चेक देकर व्यापारियों से वसूली रकम वापस कराकर भरपाई करेंगे वरुण गांधी
-सांसद ने जिलाधिकारी को चिट्ठी भेजकर व्यापारियों से जबरिया वसूले गए चंदे की रकम बताने को कहा
-बांसुरी महोत्सव के आयोजन के लिए चंदा लिए जाने की व्यापारियों ने की थी सांसद से शिकायत
-सांसद बोले, व्यापारियों पर दबाव डालकर ऐसे आयोजन करना प्रायोजित भ्रष्टाचार

उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत में बीते सप्ताह आयोजित बांसुरी महोत्सव का चंदा जिला प्रशासन के गले का फंदा बन गया है। दरअसल व्यापारियों की जबरन चंदा वसूली की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उसे लौटाने के लिए सांसद वरुण गांधी ने मंगलवार को दिल्ली से जिलाधिकारी को चिट्ठी भेजकर जो सवाल किया है, उससे प्रशासन में हाहाकार मच गया है।

सांसद ने डीएम से बांसुरी महोत्सव के नाम पर सभी संगठनों/व्यापारियों से जबरन ली धनराशि का पता लगाकर अति शीघ्र अवगत कराने को कहा है ताकि वह उतनी धनराशि का उनको (डीएम) चेक भेज सकें और वह (डीएम) चंदे की रकम उन लोगों (संगठनों) को वापस कर सकें

चंदा वसूली को लेकर सांसद वरुण गांधी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर यह बताने को कहा है कि जिन लोगों से प्रशासन के द्वारा चंदा लिया गया है, उसकी धनराशि बताई जाए ताकि वह उन लोगों से ली गई धनराशि अपनी तरफ से लौटा दें।

सांसद वरुण गांधी ने मंगलवार को अपने दिल्ली कार्यालय से जिलाधिकारी को एक पत्र भेजा है। पत्र की कॉपी मीडिया को भी जारी की गई है। सांसद ने जिलाधिकारी को लिखे गए पत्र में कहा कि पिछले कुछ दिनों पहले मुझसे दिल्ली में मेरे आवास पर मिलने आए कुछ व्यापारी नेताओं ने मुझे अवगत कराया था कि पीलीभीत में होने वाले बांसुरी महोत्सव के आयोजन पर व्यापारी समाज से आयोजन खर्च के नाम पर दबाव बनाकर धनराशि लेने का प्रयास किया जा रहा है।

बीते दिवस गांधी प्रेक्षागृह में जिले के व्यापारियों के साथ एक संवाद कार्यक्रम के दौरान सांसद को जिले के अन्य व्यापारियों एवं व्यापार संगठनों ने इस बात की पुष्टि की और बताया कि बांसुरी महोत्सव के आयोजन में जिला प्रशासन द्वारा जनपद के कुछ व्यापारी संगठनों एवं व्यापारियों पर दबाव बनाकर डेढ़- डेढ़ लाख रुपए की धनराशि ली गई है। व्यापारी समाज के इस आर्थिक शोषण से जिले के व्यापारी रोष में दिखे। वह ऐसे आयोजनों और प्रथाओं के सख्त खिलाफ है, जो लोगों की पीठ पर बोझ डालकर किए जाएं।

पत्र में वरुण ने कहा- मेरी मां श्रीमती मेनका गांधी और उन्होंने खुद हमेशा से पीलीभीत के लोगों को अपना परिवार समझा है। कभी भी किसी व्यापारी या अन्य लोगों से एक रूपया भी चंदा नहीं मांगा बल्कि समय-समय पर पिछले 20-30 सालों से जब भी पीलीभीत वासियों पर कोई प्राकृतिक आपदा एवं समाजिक कष्ट या कभी कोई भी मुश्किल वक्त आया तो उन्होंने और उनकी मां ने हमेशा अपना सब कुछ दांव पर लगाकर एक परिवार की तरह सेवा की है और करते रहेंगे।

उन्होंने पत्र में लिखा कि व्यापारियों पर दबाव डालकर ऐसे आयोजन करना प्रायोजित भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है, जो लोग कोरोना में जीएसटी आदि की मार से पहले ही टूट चुके हों, उन पर और बोझ डालना उन पर अत्याचार करना जैसा है। उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले को गंभीरता से लेकर बांसुरी महोत्सव के नाम पर उन सभी संगठनों व व्यापारियों से जबरन ली गई धनराशि का पता लगा कर अवगत कराने को कहा ताकि वह उस धनराशि का चेक भेज दें और जिन लोगों से चंदा लिया गया, उनको धनराशि वापस कर दी जाए, जिससे उनका बोझ हल्का हो सके।

सांसद की जय जयकार, प्रशासन में हाहाकार

पीलीभीत में बीते दिवस व्यापारियों के साथ संवाद कार्यक्रम में जब सांसद वरुण गांधी के समक्ष बांसुरी महोत्सव में प्रशासन के द्वारा जबरन चंदा वसूली का मुद्दा उठाया गया तो सांसद ने दो टूक लहजे में व्यापारियों का रुपया स्वयं से वापस करने की भरे मंच से घोषणा कर दी। सांसद की घोषणा जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो उनके इस कदम की हर तरफ सराहना और जय जयकार होने लगी, वहीं चंदा प्रकरण को लेकर सांसद की घोषणा से प्रशासन में हाहाकार मचा हुआ है।



 

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