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भास्कर, हिंदुस्तान, जागरण समेत कई अखबारों में भड़ास पर पाबंदी

खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का नेता बताने वाले और इस हक के लिए लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले मीडिया समूह अब उन छोटे व नए मीडिया माध्यमों की आवाज अपने यहां दबाने में लगे हैं जो बड़े बड़े मीडिया हाउसों की पोल खोलते हैं. ताजी सूचना के मुताबिक दैनिक भास्कर और दैनिक हिंदुस्तान अखबार के दफ्तरों में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम को ब्लाक कर दिया गया है. इन संस्थानों के प्रबंधकों ने ऐसा फैसला मालिकों के निर्देश के बाद लिया है. मालिकों ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर भड़ास4मीडिया द्वारा चलाए गए अभियान और आम मीडियाकर्मियों को उनका हक दिलाने से संबंधित मुहिम से नाराज होकर इस पोर्टल को अपने संस्थान के अंदर बंद कराने का आदेश दिया ताकि उनके यहां काम करने वाला कोई कर्मचारी इस पोर्टल को पढ़कर सुप्रीम कोर्ट न चला जाए.

खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का नेता बताने वाले और इस हक के लिए लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले मीडिया समूह अब उन छोटे व नए मीडिया माध्यमों की आवाज अपने यहां दबाने में लगे हैं जो बड़े बड़े मीडिया हाउसों की पोल खोलते हैं. ताजी सूचना के मुताबिक दैनिक भास्कर और दैनिक हिंदुस्तान अखबार के दफ्तरों में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम को ब्लाक कर दिया गया है. इन संस्थानों के प्रबंधकों ने ऐसा फैसला मालिकों के निर्देश के बाद लिया है. मालिकों ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर भड़ास4मीडिया द्वारा चलाए गए अभियान और आम मीडियाकर्मियों को उनका हक दिलाने से संबंधित मुहिम से नाराज होकर इस पोर्टल को अपने संस्थान के अंदर बंद कराने का आदेश दिया ताकि उनके यहां काम करने वाला कोई कर्मचारी इस पोर्टल को पढ़कर सुप्रीम कोर्ट न चला जाए.

 

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर भास्कर प्रबंधन किस तरह घबराहट में है, इसका ताजा उदाहरण ये है कि पूरे मध्य प्रदेश सहित देश भर के भास्कर के सेंटरों पर भडास4मीडिया की साइट ब्लाक कर दी गई है. यह साइट कर्मचारियों में जागरूकता फैलाने में अहम रोल अदा कर रही है. इस कारण कई कर्मचारियों ने हिम्मत दिखाई और अपने हक के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इससे मालिकों की नींद हराम हो गई. अब प्रबंधन के पालतू सफेद हाथी कोर्ट गए कर्मचा‍रियों को तरह तरह से धमकाने में लगे हुए हैं. जो इस उम्‍मीद से चुप बैठे थे कि वे प्रबंधन के चहेते बन जाएंगे वे भी इन दिनों प्रताड़ना के दायरे में आ गए हैं. वैसे प्रताड़ना से डरने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि इनका एक भी गलत कदम मालिकों को सुब्रत राय बना सकता है. अभी भी समय है. उठो जागो और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष पथ पर चल पड़ो. सफलता सौ फीसदी आपके कदम चूमेगी.

सुप्रीम कोर्ट में 10 मार्च को हुई सुनवाई के बाद हिन्दुस्तान अख़बार में भड़ास4मीडिया को बंद कर दिया गया है ताकि कोई मजीठिया से संबंधित खबर न जान सके. प्रबन्धन के इस फैसले पर हंसी आती है. मोबाइल के ज़माने में भी हिन्दुस्तान का प्रबंधन ऐसी हरकत करेगा, ये कोई सोच भी नहीँ सकता. धनबाद के एक पत्रकार ने बताया कि अब वहां के कर्मचारी मोबाइल पर ही भड़ास पढ़ रहे हैं.

ज्ञात हो कि राजस्थान पत्रिका से लेकर कई अन्य दूसरे अखबार व न्यूज चैनल अपने अपने यहां भड़ास4मीडिया पर समय-समय पर पाबंदी लगाते आए हैं. खबरों और मीडिया के इन ठेकेदारों को लगता है कि वे अपने संस्थान में पाबंदी लगाकर अपने मीडियाकर्मियों को मीडिया से संबंधित सूचनाओं जानकारियों अधिकारों को जानने से वंचित कर देंगे लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि अब जमाना स्मार्ट फोन का है. इससे पहले हजारों मीडियाकर्मियों ने सिर्फ भड़ास पढ़ने के लिए अपने बचत के पैसे से लैपटाप खरीदा और घर से भड़ास पढ़ कर भड़ास को इनपुट भेजना शुरू कर दिया.

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1 Comment

1 Comment

  1. राकेश भारतीय

    March 18, 2015 at 2:49 pm

    शर्म की बात है की भड़ास4मीडिया जैसी साइट्स को ब्लाक किया जा रहा है वैसे मिडिया हाउस द्वारा की जाने वाली हरकत के लिए पत्रकार भी जिमेदार है जो समाज व् लोगो की पीड़ा तो उजागर करते है लेकिन अपनी आवाज़ बुलंद नहीं कर पाते यही कारण है की अनपढ़ व् चापुलुस पत्रकार कुकुर्मुते की भांति बढ रहे है अरे कलम के सिपाहियों जगो व् पत्रकारिता के दलालों का मु तोड़ जवाब दो रही बात समाचार पत्र के मालिको से डरने की तो वो कोई खुद्दा नहीं है

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