‘हिन्दुस्तान’ और ‘प्रभात खबर’ अखबारों में भड़ास पर लगा प्रतिबन्ध

बिहार और झारखण्ड में हिन्दुस्तान और प्रभात खबर जैसे अखबारों में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम को देखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. जो कोई अपने मोबाईल पर भी इसे देखते पाया जायगा उसके  खिलाफ कारवाई की चेतावनी मौखिक रूप से दे दी गयी है. इन अखबारों के आफिसों में रखे कंप्यूटरों पर भड़ास को पहले से ही बैन किया हुआ है. मजीठिया वेज बोर्ड संबंधी खबरों और इन अखबारों की मदर कंपनियों के खिलाफ खबरों के लगातार प्रकाशन और मैनेजमेंट की काली करतूतों का भंडाफोड़ करने से भड़ास पर प्रतिबंध लगाया गया है.

नज़र रखिए, NDTV का ओपिनियन पोल आएगा जिसमें बीजेपी की सरकार यूपी में बनती दिखेगी!

Dilip C Mandal : एनडीटीवी बाक़ी समय सेकुलरिज्म का नाटक करता है, ताकि चुनाव के समय जब वह BJP का समर्थन करे तो लोग उस पर भरोसा करें। 2004, 2009, 2015….NDTV ने हर बार ग़लती की। हर बार BJP के पक्ष में ग़लती की। यूपी चुनाव में NDTV क्या करेगा? यह ट्विट आज भी बरखा दत्त के ट्विटर हैंडल पर मौजूद है। बिहार में BJP को दो तिहाई बहुमत दिला रही थीं मोहतरमा।

गौर से देखा जाए तो NDTV जीत कर भी हार गया है!

Vishnu Gupt : एनडीटीवी के सामने मोदी सरकार ने किया समर्पण, प्रतिबंध किया स्थगित, एनडीटीवी के खिलाफ अभियान चलाने वाले ठगे गये… यह मोदी सरकार की वीरता नहीं है। मोदी सरकार की यह दूरदृष्टि नहीं है। मोदी सरकार ने उन लाखों देशभक्तों के प्रयास पर पानी फेर दिया जो एनडीटीवी के राष्ट्रविरोधी प्रसारणों और इसकी पाकिस्तान परस्ती के पोल खोलने में लगे थे। जब औकात नहीं थी तो फिर मोदी सरकार को यह कदम उठाना ही नहीं चाहिए था, अगर कदम उठाया था तो उस पर अमल करना चाहिए। लग रहा था कि पहली बार कोई सरकार हिम्मत दिखायी है। पर मोदी सरकार भी डरपोक, रणछोड़ निकली। हमारे जैसे लोग जिन पर विश्वास करता है वही रणछोड हो जाता है, वही डरपोक हो जाता है। अब एनडीटीवी सहित पूरे मीडिया का देशद्रोही और पाकिस्तान परस्ती पत्रकारिता सिर चढकर बोलेगी।

NDTV पर नहीं लगेगा बैन, आदेश स्थगित

केंद्र सरकार ने एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन के बैन लगाने के अपने आदेश को स्थगित कर दिया है. इस प्रतिबंध को NDTV ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कल यानी मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी.

एनडीटीवी पर प्रस्तावित बैन के खिलाफ देहरादून में धरना (देखें तस्वीरें)

देहरादून। जन संवाद मंच के आह्वान पर विभिन्न संगठनों ने गांधी पार्क पर धरना दिया। इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के पदाधिकारी विजय भट्ट ने कहा कि, इधर कुछ महीनों से संवैधानिक व जनतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बढ़ता जा रहा है । तथाकथित हिंदूवादी संगठन कभी गौहत्या के बहाने तो कभी गोमांस सेवन के बहाने तो कभी लव जेहाद या तीन तलाक के बहाने हमें लड़ा रहे हैं। अब इन्होंने मीडिया पर हमला बोल दिया है हमें इस तरह के खतरों के प्रति सचेत होना पड़ेगा।

एनडीटीवी पर यह व्‍यर्थ का हंगामा

लोग सही कहते हैं कि जब प्रभावशाली व्‍यक्‍ति, समूह, संस्‍था किसी निर्णय से प्रभावित होते हैं तो उसका असर दूर तक जाता है, उसके पहले भले ही कई प्रभावित होते रहे हों किंतु उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता। ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार ने एनडीटीवी इंडिया के प्रसारण के पूर्व किसी ओर चैनल के द्वारा गलत जानकारी के सार्वजनिक किए जाने के बाद दण्‍ड स्‍वरूप उस पर रोक न लगाई हो, जिसने की न दिखाने वाली सामग्री का प्रसारण किया है। पर इस बार की बात कुछ ओर है, क्‍यों कि इस बार केंद्र के घेरे में एनडीटीवी आया है, जहां रवीश जैसे श्रेष्‍ठ एंकर हैं और उसे देखनेवाले दर्शक भी देश-दुनिया में बड़ी संख्‍या में मौजूद हैं।

मुझे नहीं लगता NDTV की मोदी सरकार से भिड़ने की हैसियत है

Dilip C Mandal : NDTV आज की तारीख़ में सिर्फ 513 करोड़ रुपए की कंपनी है। उस पर फ़ेमा यानी मनी लॉन्ड्रिंग का 2031 करोड़ रुपए का और टैक्स अदायगी से संबंधित 450 करोड़ रुपए के मामले है। सरकार जिस पल चाहेगी, ऑक्सीजन रोक देगी। लेकिन जेटली जी के होते NDTV का ऑक्सीजन रुकना मुमकिन नहीं लगता। मुझे नहीं लगता NDTV की सरकार से भिड़ने की हैसियत है। NDTV के मालिक प्रणय राय एक्सप्रेस वाले रामनाथ गोयनका नहीं हैं कि घर फूँककर भिड़ जाएँ। जो दिख रहा है, हो सकता है कि हक़ीक़त वह न हो।

एनडीटीवी पर बैन के खिलाफ देश भर से उठने लगी आवाज

DUJ Calls for Protest on NDTV Ban

The Delhi Union of Journalists (DUJ) strongly and unequivocally condemns the one-day ban on NDTV’s Hindi channel, ostensibly for its reporting of the Pathankot airbase attack.  We see no reason for singling out NDTV in this manner when all channels reported the attack in similar fashion.  In a democracy no bureaucratic body such as the Inter-ministerial Committee of the Information & Broadcasting Ministry that issued this order should have such arbitrary powers. Exercise of such power reminds one of the dark days of the Emergency when the media was muzzled and citizens’ freedoms lost.

एनडीटीवी पर बैन कोई एक दिन का फैसला नहीं

3 मई 2011 को मेरे, मेरे 80 साल के पिता (जो कि केंद्र सरकार से सेवानिवृत कर्मचारी) और मेरे अख़ाबर को छापने वाले प्रिंटर के खिलाफ गाजियाबाद के कई थानों में कई एफआईआर दर्ज करा दीं गईं। साथ ही हमारे हिंदी अख़बार को उत्तर प्रदेश सरकार ने बैन कर दिया। इसके अलावा हमारे घर की बिजली और पानी तक काट दिया गया। जिसके बाद पूरे शहर के बुद्धीजीवि वर्ग ने इसका विरोध किया और सभी राजनीतिक दलों के सम्मानित नेताओं ने सरकार की मनमानी का विरोध किया। चाहे जनाब भारतेंदु शर्मा जी हो या फिर श्री के.सी त्यागी जी या फिर श्री कुंवर अय्यूब अली, इन सभी लोगों ने हमारा न सिर्फ हमारा समर्थन किया बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की मशीनरी को आड़े हाथों लिया।

एनडीटीवी बैन के खिलाफ रवीश के इस ऐतिहासिक प्राइम टाइम को न देख पाएं हों तो अब जरूर देख लें

Om Thanvi : आज रवीश का प्राइम टाइम ‘सवाल पर सवाल है’ ऐतिहासिक था। उस रोज़ की तरह, जब उन्होंने स्क्रीन को स्वेछा से काला किया था, अभिव्यक्ति के संसार में पसरे अंधेरे को बयान करने के लिए। आज उन्होंने हवा में व्याप्त ज़हर के बहाने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हो रहे प्रहार को दो मूकाभिनय के कलाकारों से ‘सम्वाद’ के ज़रिए चित्रित किया। बहुत मार्मिक ढंग से।

एनडीटीवी को सरकारी प्रतिबन्ध की बधाई

Sanjaya Kumar Singh : एनडीटीवी पर कार्रवाई की खबर से मुझे आम आदमी पार्टी के सासंद भगवंत मान पर संसद की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के आरोप और फिर मान के आरोप की याद आई। पता नहीं अब यह मामला किस स्थिति में है पर “सैंया भये कोतवाल” ऐसे ही नहीं कहा जाता है। संसद की साइट पर संसद भवन का वर्चुअल लिंक दिख तो अब भी रहा है पर चल नहीं रहा। चूंकि संसद देखा हुआ है इसलिए वर्चुअल लिंक देखने की जरूरत ही नहीं महसूस हुई। संसद का वीडियो लोड करने के लिए जब मान का मामला गर्माया तो मैंने देखना चाहा कि अधिकृत तौर पर क्या दिखाया जा रहा है और मान ने क्या दिखा दिया। पर उस दिन से वह लिंक चल ही नहीं रहा है। काफी दिन हो गए। आज याद आया तो सोचा फिर देखा जाए। पर उसे चलाने, लगाने, हटाने वाले भी, लगता है, भूल गए। वैसे ही है। ना हटा है, ना चल रहा है। फिलहाल, एनडीटीवी मामले में मुझे यकीन है कि वह इस कार्रवाई से और मजबूत होगा। उसका समर्थन बढ़ेगा। अगर ऐसे प्रतिबंधों से डरना होता तो वह ऐसा कुछ करता ही क्यों जिससे मिर्ची लगती है।

उन्हें सुदर्शन टीवी की गटर छाप पत्रकारिता से दिक्कत नहीं, बस एनडीटीवी इंडिया के अस्तित्व से बड़ी समस्या है

Sheetal P Singh : ये कहाँ आ गये हम…  जिन्हें सुदर्शन टीवी (जिसके मालिक/ संपादक पर यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ है) जो अनवरत सांप्रदायिक प्रचार करता है, नाबालिग़ लड़की से बलात्कार करने के आरोप में बंद आसाराम का खुला समर्थन करता है । भाषा / कंटेंट के मामले में गटर पत्रकारिता का नमूना है से बाल भर भी आपत्ति न है न हुई न होगी उनके तरकश में NDTV इंडिया के खिलाफ भाखने को बहुत कुछ है! जिन्हें Znews के संपादक / प्रबन्धक / मालिक को वीडियोटेप पर नवीन जिन्दल से सौ करोड़ का ब्लैकमेल करते देखने से रत्ती भर भी फ़र्क़ न पड़ा वे पत्रकारिता की शुचिता की तलाश में NDTV इंडिया की कमियाँ गिना रहे हैं! जिन्हें संपूर्ण मीडिया के नरेंद्र मोदी अमित शाह अरुण जेटली मुकेश अंबानी गौतम अडानी से संबंधित हर ऐसे समाचार जिसमें आलोचना हो पर अघोषित प्रतिबंध से हर्फ़ भर भी दिक़्क़त नहीं है उन्हे NDTV इंडिया के अस्तित्व से ही बड़ी दिक़्क़त है! इन सब को पहचानिये! इनकी जात पहचानिये! ये एक रंग के हैं, इनका रंग पहचानिये!

मोदी अगर एनडीटीवी को ठिकाने लगाने पर आ जाएंगे तो एक दिन का नहीं, पूरा ही ब्लैक आउट करा देंगे

Rajat Amarnath : NDTV जहाँ नौकरी पाने का पैमाना होता था कि आपके परिवार में कौन कौन ब्यूरोक्रेसी में हैं ताकि ख़बर के साथ साथ आड़े वक्त पर चैनल का काम निकाल सकें सरकार बदली तो काम निकालने वाले ब्यूरोक्रेट्स भी बदल गए डॉक्टर राय खुद कांग्रेसी हैं इसलिए उन्हीं के समय मे पनपे हैं उनकी पत्नी राधिका राय की बहन हैं वृंदा करात और बहनोई हैं प्रकाश करात जो वामपंथी हैं ये जगजाहिर है ऐसे में ये चैनल सरकारी पक्ष की तो बात करने से रहा और अब जब सरकार ने बाकी चैनलों को बख्श दिया लेकिन NDTV को एक दिन के लिए ब्लैक आउट करने का आदेश दिया तो छटपटाहट शुरू हो गई. अब इसे अघोषित आपातकाल बताया जा रहा है.  

प्रश्नों पर जब प्रतिबंध लगे तब दुगुने वेग से दागने चाहिये सवाल (कविता)

प्रश्नकाल

-भंवर मेघवंशी-

प्रश्नों पर जब प्रतिबंध लगे
तब दुगुने वेग से
दागने चाहिये सवाल
सवाल,सवाल और सवाल
अनगिनत ,अनवरत
प्रश्न ही प्रश्न पूछे जाने चाहिये
तभी यह अघोषित आपातकाल
प्रश्नकाल में बदल सकता है.

छप्पन इंच के सीने पर छेद तमाम हैं… अगर छेद दिखाए गए तो बैन कर दिया जाता है…

सच को सच कह दिया था इसी पर मेरे पीछे ज़माना पड़ा है… इस ज़माने में सिर्फ वो सरकार है जिसे सवाल पसंद नहीं, और कुछ भक्तों की संख्या है जिनकी आंखें फूट चुकी हैं.. छप्पन इंच के सीने पर छेद तमाम हैं… और अगर छेद दिखाए गए… तो बैन कर दिया जाता है… 2014 से 2019 तक के बीच के लोगों को खुद को महान समझना चाहिए… क्योंकि उन्हें दोबारा हिटलर को देखने का मौक़ा मिल रहा है… हमें कोरिया जाने की ज़रूरत नहीं है… क्योंकि एक ‘किम जोंग’ हमारे देश में भी फल-फूल रहा है… उसे सवाल पसंद नहीं है, उसे मन की करनी है, उसे किसी की नहीं सुननी है… रावण जैसा अहंकार, बकासुर जैसी सोच, कंस जैसी क्रूरता उसके भीतर कूट-कूट कर भरी है…

सच की जुर्रत करने वाले एनडीटीवी चैनल को खत्म करो!

गले में बाँधे रहते थे, अब मुँह पर पट्टा बाँधे हैं,
पालतू हैं हम मोदी के, इस बात का गंडा बाँधे हैं।
सच की जुर्रत करने वाले एनडीटीवी को खत्म करो,
झूठ के भोपू वाले हैं, हम झूठ का दामन थामे हैं।

ये पंक्तियाँ उन चंद तथाकथित बिकाऊ पत्रकारों की भावनाओं की कल्पना है जिन्हें कोई अंध भक्त कहता है, कोई सरकार के झूठ का भोंपू तो कोई मोदी का पालतू। आजाद पत्रकारिता और निष्पक्ष कलम जब सरकार की गलत नीतियों का बखान करने लगता है तो पालतू गला फाड़-फाड़ कर भोंकते हैं। सरकार की मुखालिफत पर ये अक्सर काट भी लेते हैं। लेकिन इनके काटने से पीड़ितों को ना इन्जेक्शन लगवाना पड़ता है और न ही जान का खतरा महसूस होता है। मेडिकल साइंस कहती है कि काटने वाला जब तक जीवित है तब तक पीड़ित खतरे से बाहर है। अभी तीन साल तक इन्हे चंद टुकड़ों की ताकत जिन्दा रखेगी और सत्ता की ताकत इन्हेँ झूठ का साथ देने की आब-ए-हयात देती रहेगी। झूठ की हिफाजत के लिये निष्पक्ष पत्रकारिता पर जो भौकते रहते है उनका मोदी सरकार की दमनकारी नीतियों पर खामोश रहना स्वाभाविक भी है।

ये तीन तरह के लोग एनडीटीवी पर बैन के खतरनाक फैसले को नहीं समझ पाएंगे

Nitin Thakur : एनडीटीवी इंडिया पर बंदिश का फैसला कितना खतरनाक है, ये बात तीन तरह के लोगों की समझ में नहीं आएगी।  1. वो जिन्होंने मजबूरी में पत्रकारिता के पेशे को अपनाया है। 2. किसी और एजेंडे को पूरा करने के लिए इस पेशे में घुस आए लोग। 3. ग्लैमर से अंधे होकर पत्रकारिता की गलियों में आवारगर्दी कर रहे पत्रकार जैसे दिखनेवाले लोग। इनके लिए रिपोर्टिंग करते किसी पत्रकार का पिटना हास्य का विषय है। किसी पत्रकार या पत्रकारिता संस्थान पर चलनेवाले सरकारी डंडे को ये इज़्ज़त देते हैं। दरअसल इन्हें अपने पेशे पर शर्म है लेकिन ये लोग इस पेशे के लिए खुद शर्म का विषय हैं।

बिहार में मीडिया पर घोषित प्रतिबंध

Vinayak Vijeta : मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश, ईटीवी को कोई बाईट नहीं दें जदयू नेता… राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू नेताओं और अपने प्रवक्ताओं को यह सख्त निर्देश दिया है कि वह ईटीवी को न तो कोई बाईट दें और न ही ऑन या ऑफ द रिकार्ड इस चैनल के किसी संवाददाता से बात करें। सुत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री का इस चैनल पर गुस्सा पिछले दिनों पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मेलन को लेकर था। बताया जाता है कि इस सम्मेलन के प्रचार के लिए सूचना और जनसंपर्क विभाग ने पटना के तीन निजी चैनलों को विज्ञापन दिया था। पर ईटीवी ने इस विज्ञापन को इसलिए स्वीकार नहीं किया कि विज्ञापन का दर चैनल के निर्धारित दर से काफी कम था।

कश्मीर में मीडिया पर बैन का कोई तुक नहीं बनता : रवीश कुमार

कश्मीर में अख़बार बंद है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ आज दूसरा दिन है जब वहाँ किसी को अख़बार नहीं मिला है। राज्य सरकार ने अख़बारों के छपने और वितरण पर रोक लगा दी है। दिल्ली की मीडिया में ख़बरें आई हैं कि कर्फ़्यू के कारण वितरण रोका गया है। छपी हुई प्रतियाँ ज़ब्त कर ली गई हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट भी बंद है। कर्फ़्यू के कई दिन गुज़र जाने के बाद राज्य सरकार को ख़्याल आया कि अख़बारों को बंद किया जाए। क्या कर्फ़्यू में दूध,पानी सब बंद है? मरीज़ों का इलाज भी बंद है? आधुनिक मानव के जीने के लिए भोजन पानी के साथ अख़बार भी चाहिए। सूचना न मिले तो और भी अंधेरा हो जाता है। अफ़वाहें सूचना बन जाती हैं और फिर हालात बिगड़ते ही हैं, मन भी बिगड़ जाते हैं। खटास आ जाती है।

पोर्न पर पाबंदी : सरकार ने कहा- हम किसी के बेडरूम में नहीं झांक सकते

नयी दिल्ली : पोर्न पर प्रतिबंध की चर्चा के बीच आज केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि वह पोर्न पर प्रतिबंध के खिलाफ है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आज अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह चाइल्ड पोर्नोग्राफी को छोड़कर  पोर्न पर बैन के खिलाफ है. सरकार की ओर से कहा गया कि पोर्न पर प्रतिबंध संभव नहीं है, यह निजता का हनन होगा. अगर कोई बंद कमरे में कुछ कर रहा है, तो उसपर प्रतिबंध संभव नहीं है.

अब पूरे देश में एक लाख की जमानत और इजाजत के बिना पत्रकारों के जेल में प्रवेश पर पाबंदी

केंद्र सरकार ने विशेष अनुमति के बगैर पत्रकारों और फिल्म निर्माताओं के जेल में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव कुमार आलोक ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखा है कि किसी भी पत्रकार, एनजीओ या कंपनी के कर्मचारी को शोध करने, डॉक्यूमेंटरी बनाने, लेख लिखने या साक्षात्कार लेने के लिए जेल में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

मीडिया ट्रायल रोकने के नाम पर मीडिया पर बैन?

मुंबई और महाराष्ट्र में मीडिया का काम कठिन होने वाला है। खासकर अपराध से जुड़ें मामलों में। महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट मे एक हलफनामा दायर कर बताया है कि आरोपी और पीड़ित की निजता बनाए रखने के लिए पुलिस को दिशा-निर्देश जारी किया है, जिसमें आरोपी का नाम, उसकी तस्वीर और उससे जुड़ी कोई भी जानकारी मीडिया को देने के लिए मना किया गया है। यह हलफनामा बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका के जवाब में दिया गया है। जनहित याचिका दायर करने वाले वकील राहुल ठाकुर के मुताबिक, किसी पर भी मामला दर्ज होते ही पुलिस उसकी पुरी जानकारी, तस्वीर मीडिया को दे देती है। नतीजा ये होता है कि दोष साबित होने के पहले ही वह शख्स अपराधी मान लिया जाता है, जो अन्याय है।

इबलीस की शैतानी ताकत के खिलाफ एकजुट हों आध्यात्मिकतावादी

केरल के बाद अब दिल्ली में भी मैगी की बिक्री को पंद्रह दिन के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। उधर सेना ने भी अपने डिपार्टमेंटल स्टोरों से मैगी की बिक्री पर रोक लगा दी है। मैगी को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है। इसकी शुरूआत उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद से हुई जहां मैगी के नमूने प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजे गए थे जिसमें यह रिपोर्ट आई कि मैगी में जस्ते की मात्रा सुरक्षा मानकों से काफी ज्यादा है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में और साथ ही दूसरे राज्यों में भी ताबड़तोड़ मैगी के नमूनों का परीक्षण कराया गया। लगभग सभी जगह अभी तक की रिपोर्ट के अनुसार मैगी के नूडल्स को खाना स्वास्थ्य के लिए हानिप्रद माना गया है। हालांकि बंगला देश ने मैगी को क्लीन चिट दे दी है। 

आईआईटी मद्रास के छात्रों के ग्रुप पर पाबंदी लगाना फासीवादी कार्रवाई : ‘दिशा’

हाल ही में आई.आई.टी छात्रों द्वारा चलाये जा रहे अम्बेडकर पेरियार स्टडी सर्किल पर आई.आई.टी मद्रास के प्रबंधन द्वारा लगाया गया प्रतिबन्ध विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है। दिशा छात्र संगठन ने इस प्रतिबन्ध की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है। 

भास्कर, हिंदुस्तान, जागरण समेत कई अखबारों में भड़ास पर पाबंदी

खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का नेता बताने वाले और इस हक के लिए लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले मीडिया समूह अब उन छोटे व नए मीडिया माध्यमों की आवाज अपने यहां दबाने में लगे हैं जो बड़े बड़े मीडिया हाउसों की पोल खोलते हैं. ताजी सूचना के मुताबिक दैनिक भास्कर और दैनिक हिंदुस्तान अखबार के दफ्तरों में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम को ब्लाक कर दिया गया है. इन संस्थानों के प्रबंधकों ने ऐसा फैसला मालिकों के निर्देश के बाद लिया है. मालिकों ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर भड़ास4मीडिया द्वारा चलाए गए अभियान और आम मीडियाकर्मियों को उनका हक दिलाने से संबंधित मुहिम से नाराज होकर इस पोर्टल को अपने संस्थान के अंदर बंद कराने का आदेश दिया ताकि उनके यहां काम करने वाला कोई कर्मचारी इस पोर्टल को पढ़कर सुप्रीम कोर्ट न चला जाए.

बीबीसी ने बैन के बावजूद आज तड़के डॉक्युमेंटरी ‘इंडियाज़ डॉटर’ दिखा दिया…

Om Thanvi : तड़के बीबीसी ने डॉक्युमेंटरी ‘इंडियाज़ डॉटर’ दिखाई और सुबह से वह यू-ट्यूब, ट्विटर लिंक आदि के जरिए सामने है! अर्णब गोस्वामी, राजनाथ सिंह, माननीय सांसदगण, माननीय अदालत और दिल्ली पुलिस का शुक्रिया। आज के युग में बैन आगे से दिखाने के लिए लगाया कीजिए, न दिखाने के लिए नहीं – इतना तो टीवी पर उस अंगरेजी डॉक्युमेंटरी को लोग भी न देखते! और वह कलमुँहा ड्राइवर – पता नहीं फिल्म में कब आया और अपनी बकवास में अपनी ही मौत मर गया! उसके बयान (जिसमें ज्यादा समय विजुअल दूसरे ही चलते हैं) से उस रात के पाशविक कृत्य, अपराधियों की मानसिकता आदि को मुझे ज्यादा शिद्दत से समझने का मौका मिला। … इस पर चीखे अर्णब तुम सारी-सारी रात?

केजरीवाल की राह पर चंद्रशेखर राव, मीडिया को बाहर निकाला, पत्रकारों का प्रदर्शन

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की राह पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री चलने लगे है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव के निर्देशों को लागू करते हुए सचिवालय में मीडिया पर पाबंदी शुरू हो गई है. एक ओर मुख्यमंत्री कार्यालय वाले सी ब्लॉक से सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकारों को बाहर निकल जाने का आदेश सुनाकर अपमानित किया है तो वहीं दूसरी ओर पत्रकारों को ललचाने के लिए पत्रकार निधि के लिए दस करोड़ रुपये आवंटित किये गए. सरकार की इस नीति का तेलंगाना के पत्रकारों द्वारा जमकर विरोध किया जा रहा है. सरकार ने मीडिया पर नियंत्रण ना होने के दावे करते हुए ही चुपचाप प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया गया है. इस विषय पर सूचना-जनसम्पर्क विभाग के प्रमुख द्वारा ये कहा जा रहा है कि मीडिया पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन मीडिया को स्वयं नियंत्रण पद्धति को अपनाना चाहिए।

पत्रकारों द्वारा सचिवालय में घुसकर दलाली करने के धंधे को बंद करेंगे : गोपाल राय

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने राज्य सचिवालय में मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी है और ‘आप’ नेता गोपाल राय ने पाबंदी को जायज ठहराया है. गोपाल राय ने मीडिया पर पाबंदी के बारे में कहा- ‘कुछ ऐसे पत्रकार हैं जो गलियारों में घुस कर दलाली करते थे. इनको अब दिक्कत हो रही है. दलाली के धंधे को सचिवालय में बंद करेंगे.’

”मनीष सिसोदिया और आशुतोष खुद पत्रकार रहे हैं और अब वही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोटना चाहते हैं”

दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (डीजेए) केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली सचिवालय में पत्रकारों के प्रवेश पर प्रतिबंध की कड़ी निंदा करता है और साथ ही दिल्ली के उप-राज्यपाल से मांग करता है कि वह प्रेस की आजादी को बचाने के लिए हस्तक्षेप करें और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फौरन इस प्रतिबंध को हटाने का निर्देश दें। पिछली बार भी जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी तब भी केजरीवाल सरकार ने पत्रकारों के सचिवालय में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन पत्रकारों के प्रबल विरोध और सचिवालय पर धरना प्रदर्शन के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया था। इस बार भी पत्रकार इसके विरोध में मीडिया रूम में दो दिन से डटे हुए हैं।

दैनिक भास्कर ने कुछ संस्करणों में ‘जेड प्लस’ फिल्म के लेखक रामकुमार सिंह का नाम रिव्यू से हटाया

Ajay Brahmatmaj : जयप्रकाश चौकसे के कॉलम ‘पर्दे के पीछे’ से दैनिक भास्‍कर के जयपुर समेत कुछ संस्‍करणों में फिल्म के लेखक Ramkumar Singh का नाम हटा दिया गया। पत्रकार बिरादरी की तुच्‍छता है यह। यह शर्मनाक और दुखद है। फिलहाल जयप्रकास चौकसे को पढ़ें और कल फिल्‍म देखने का फैसला करें। शेयर करें और दूसरों को पढ़ाएं।

मुंबई के वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज के फेसबुक वॉल से.