भड़ासी खबरों से अपडेट रहने को मोबाइल में भड़ास एप्प इंस्टाल करें

भड़ास4मीडिया का नया एप्प आ गया है। जिसने न डाउनलोड किया है, अब कर ले। जिसने पहले ही डाऊनलोड कर रखा है, वो उसे अनइंस्टाल करके अब नए एप्प को इंस्टाल करे क्योंकि पुराना एप्प किन्हीं वजहों से प्ले स्टोर से रिमूव करा दिया गया है और उसकी जगह नया एप्प लांच किया जा चुका …

एक ‘भक्त’ का आरोप- भड़ास न्यूज भड़वा है! (सुनें टेप)

‘दस परसेंट आरक्षण सुप्रीम कोर्ट में नहीं टिकेगा’… इस शीर्षक से कई लोगों की फेसबुकी प्रतिक्रियाओं का संकलन कर एक पोस्ट का प्रकाशन भड़ास4मीडिया डाट काम पर किया गया. साथ ही इस न्यूज को अन्य कई भड़ासी खबरों के साथ भड़ास के दर्जनों ह्वाट्सअप ब्राडकास्ट ग्रुपों में भेजा गया.

साहसी पत्रकारिता को सपोर्ट करें, भड़ास के संचालन में सहयोग करें

भड़ास4मीडिया मीडिया वालों की खबर लेता है. भड़ास4मीडिया एक ऐसा न्यू मीडिया प्लेटफार्म है जो मीडिया के अंदरखाने चलने वाले स्याह-सफेद का खुलासा करता है. भड़ास4मीडिया आम मीडियाकर्मियों के दुख-सुख का प्रतिनिधित्व करता है. भड़ास4मीडिया मुख्य धारा की मीडिया, कारपोरेट मीडिया और करप्ट मीडिया द्वारा दबाई-छिपाई गई खबरों को प्रमुखता के साथ प्रकाशित प्रसारित करता …

भड़ास4मीडिया की खबरें अब यूट्यूब पर भी मिलेंगी, करें चैनल को सब्सक्राइब

अगले कुछ दिनों में भड़ास4मीडिया की खबरें वीडियो फार्मेट में यूट्यूब पर भी मिला करेंगी. इसके पीछे तीन कारण हैं. अगर कोई बड़ी खबर है और उसे तुरंत शेयर करना है तो यूट्यूब के जरिए लाइव उसे ब्राडकास्ट कर दिया जाए. बाद में इत्मीनान से उसे भड़ास4मीडिया पर लिखा-पढ़ा जाए. दूसरा कारण है यूट्यूब के जरिए लाइव ब्राडकास्ट के एक बेहतरीन विकल्प का इस्तेमाल बढ़ाना ताकि इस माध्यम से उन खबरों को सामने लाया जाए जिसे आम तौर पर टीवी / चैनल वाले इग्नोर करते हैं.

एफआईआर दर्ज न होने से परेशान यूपी के एक मान्यता प्राप्त पत्रकार ने भेजी भड़ास को चिट्ठी

अर्जुन द्विवेदी ने भड़ास4मीडिया को एक पत्र भेजकर एक एफआईआर दर्ज कराने के बाबत किए जा रहे अपने संघर्ष का उल्लेख किया है और अपनी जान-माल के नुकसान की आशंका जाहिर की है. अर्जुन द्विवेदी यूपी के राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं. अर्जुन से संपर्क editorsristimail@gmail.com के जरिए किया जा सकता है. पढ़िए भड़ास के नाम आई अर्जुन की चिट्ठी…

आइए, सच्ची दिवाली मनाएं, मन के अंधेरे घटाएं

दिवाली में दिए ज़रूर जलाएं, लेकिन खुद के दिलो-दिमाग को भी रोशन करते जाएं. सहज बनें, सरल बनें, क्षमाशील रहें और नया कुछ न कुछ सीखते-पढ़ते रहें, हर चीज के प्रति संवेदनशील बनें, बने-बनाए खांचों से उबरने / परे देखने की कोशिश करें, हर रोज थोड़ा मौन थोड़ा एकांत और थोड़ा ध्यान जरूर जिएं.

मुझे भी यही लगता है कि भड़ास एक स्तरहीन पोर्टल है!

भड़ास के खिलाफ भड़ास निकालने वाले अभय को दिवाकर और अवनिन्द्र ने भी दिया जवाब, पढ़िए

भड़ास4मीडिया को शुरू से ही एक खुला, पारदर्शी और लोकतांत्रिक मंच बनाकर रखने की कोशिश की गई. यही कारण है कि जब जब भड़ास या इसके फाउंडर यशवंत के खिलाफ कुछ भी किसी ने लिखकर भेजा तो उसे पूरे सम्मान के साथ छापा गया. इसी क्रम में कल भड़ास के एक पाठक अभय सिंह का पत्र भड़ास पर प्रकाशित किया गया, साथ ही संपादक यशवंत द्वारा दिया गया क्रमवार जवाब भी… इसके पब्लिश होते ही दो प्रतिक्रियाएं भड़ास के पास मेल से आई हैं. बनारस से युवा पत्रकार अवनिंद्र और नोएडा से आईटी कंपनी के संचालक दिवाकर ने जो कुछ भेजा है, उसे नीचे प्रकाशित किया जा रहा है.

भड़ास पर भी लग गया ‘आनलाइन कटोरा’, आप भी कुछ डालें इसमें

Yashwant Singh : द वायर और न्यूज लांड्री जैसी कारपोरेट फंडित वेबसाइटों ने भी जनता से पैसा मांगने के लिए हर खबर के नीचेे एक कटोरा (बल्कि आनलाइन कटोरा कहना चाहिए) लगा रखा है, ”दे दो रे, सौ दो सौ तीन सौ चार सौ… जो सूझे वही दे दो क्योंकि हम लोग बड़ी किरांती कर रहे हैं.. आप जनता की खातिर…” टाइप वाला कटोरा…

भड़ास के खिलाफ एक पाठक ने यूं निकाली अपनी भड़ास, ‘यशवंत जी, भड़ास का अंत आवश्यक हो गया है!’

यशवंत जी भड़ास पर मेरी भी एक भड़ास है। ये भड़ास आपके पोर्टल से उत्पन्न हुई है। जब आप मीडिया के कुकृत्यों पर भड़ास निकालते हैं तो मीडिया के ही लोग आप पर लात घूसों की मुक्केबाजी करके भड़ास निकालने लगते हैं। आखिर ये सिलसिला कब तक चलेगा। जब NBA, एडिटर्स गिल्ड जैसी अनेक संस्थाएं …

‘भडास4मीडिया’ के बाद ‘कैफे भड़ास’ शुरू, देखें यहां कैसे निकालते हैं ‘भड़ास’! (वीडियो)

Kunal Verma : सुना है आपने ‘कैफे भड़ास’ के बारे में? मुझे पता है आप लोगों में अधिकतर ने भड़ास का नाम सुना होगा। हां वही भड़ास जो फ्रस्ट्रेशन के नाम से हमारे मन के भीतर होता है। मीडिया के लिए चर्चित तब हुआ जब वरिष्ठ पत्रकार यशवंत सिंह ने मीडिया के लोगों को अपना फ्रस्ट्रेशन निकालने के लिए एक मंच प्रदान किया। इसे नाम दिया ‘भड़ास फॉर मीडिया’। तमाम झंझावतों को झेलते हुए भड़ास फॉर मीडिया आज भी हिंदी का सबसे लोकप्रिय साइट बना हुआ है। लोकप्रिय क्यों है, यह एक रिसर्च का विषय है। पर साधारण शब्दों में कहा जाए तो सभी के अंदर कुछ न कुछ भड़ास है जिसे वह पढ़कर, लिखकर, सुनकर, बोलकर निकाल लेना चाहता है। भड़ास ने वह प्लेटफॉर्म सभी को दिया।

क्या ‘भड़ास टास्क फोर्स’ बनाने का वक्त आ गया है?

भड़ास संपादक यशवंत पर पत्रकार कहे जाने वाले दो हमलावरों भूपेंद्र नारायण भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी ने प्रेस क्लब आफ इंडिया के गेट पर हमला किया था. उस हमले से उबरने के बाद यशवंत ने अपने भविष्य की योजनाओं को लेकर काफी कुछ खुलासा किया है. इसमें एक भड़ास टास्क फोर्स बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है.

भड़ास4मीडिया के भविष्य को लेकर यशवंत ने क्या लिया फैसला, जानें इस एफबी पोस्ट से

Yashwant Singh : ऐ भाई लोगों, कल हम पूरे 44 के हो जाएंगे. इलाहाबाद में हायर एजुकेशन की पढ़ाई के दौरान ओशो-मार्क्स के साथ-साथ अपन पामोलाजी-न्यूमरोलॉजी की किताब पर भी हाथ आजमाए थे. उस जमाने में हासिल ज्ञान से पता चलता है कि मेरा जन्मांक 8 और मूलांक 9 है. जन्मांक छब्बीस का छह और …

भड़ास4मीडिया की मौत का ऐलान हम सबके लिए एक बुरी खबर है

चर्चित मीडिया केन्द्रित वेबसाइट भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने ऐलान किया है कि 26 अगस्त से वेबसाइट का संचालन बंद कर दिया जाएगा। पिछले एक दशक से मीडिया संस्थानों के न्यूज़ रूम के अंदर और बाहर पत्रकारों और उनके मालिकों के अच्छे-बुरे कर्मों को बेबाकी के साथ प्रकाशित करने वाले यशवंत सिंह आर्थिक संकट की वजह से भड़ास को बंद करने की बात पहले भी करते रहे हैं, लेकिन जैसे-तैसे यह वेबसाइट अब तक चलती आ रही है।

यशवंत ने फेसबुक पर लिखा- ”26 अगस्त से भड़ास बंद!”

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत ने फेसबुक पर एक छोटी-सी पोस्ट डालकर ऐलान किया कि भड़ास4मीडिया का संचालन 26 अगस्त से बंद कर दिया जाएगा. इसके पीछे उन्होंने वजह आर्थिक संकट के साथ-साथ हिंदी समाज व इसकी समझ को भी बताया है. इस ऐलान के बाद आए सैकड़ों कमेंट्स में से कुछ चुनिंदा यहां दिए जा रहे हैं…

सुधीर चौधरियों और रवीश कुमारों की बातों पर भरोसा क्यों न करें, बता रहे हैं यशवंत सिंह

Yashwant Singh : सुधीर चौधरियों और रवीश कुमारों की बातों पर भरोसा मत करिए. ये पेड लोग हैं. ये दोनों अपने-अपने मालिकों के धंधों को बचाने-बढ़ाने के लिए वैचारिक उछल कूद करते हुए आपको बरगलाएंगे, भरमाएंगे, डराएंगे, अपने पक्ष में खड़े होने के लिए उकसाएंगे और इसके लिए देर तक व दूर तक ब्रेन वाश करते चलते जाएंगे…

माई लॉर्ड ने वरिष्ठ पत्रकार को अवमानना में तिहाड़ भेजा पर मीडिया मालिकों के लिए शुभ मुहुर्त का इंतजार!

…सहारा का होटल न खरीद पाने वाले चेन्नई के एक वरिष्ठ पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी मान कर आनन-फानन में जेल भेज दिया… यह वरिष्ठ पत्रकार गिड़गिड़ाता रहा लेकिन जज नहीं पसीजे… पर मीडिया मालिक तो खुद एक बार सुप्रीम कोर्ट के सामने उपस्थित तक नहीं हुए और कोर्ट को चकरघिन्नी की …

यशवंत का भड़ासी चिंतन- पार्ट एक और दो : मनुष्यता से इस्तीफा देने का वक्त आ गया है…

Yashwant Singh : भड़ासी चिंतन पार्ट वन… उम्र और अनुभव के इस नाजुक व कमसिन पड़ाव पर पहुंच कर, फेसबुक को साक्षी मानते हुए, आप सभी के कपार पर अपना हाथ रखकर कसम खाते हुए… होश में रहकर पूरे जोश के साथ ऐलान करना चाहूंगा कि…..

‘हिन्दुस्तान’ और ‘प्रभात खबर’ अखबारों में भड़ास पर लगा प्रतिबन्ध

बिहार और झारखण्ड में हिन्दुस्तान और प्रभात खबर जैसे अखबारों में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम को देखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. जो कोई अपने मोबाईल पर भी इसे देखते पाया जायगा उसके  खिलाफ कारवाई की चेतावनी मौखिक रूप से दे दी गयी है. इन अखबारों के आफिसों में रखे कंप्यूटरों पर भड़ास को पहले से ही बैन किया हुआ है. मजीठिया वेज बोर्ड संबंधी खबरों और इन अखबारों की मदर कंपनियों के खिलाफ खबरों के लगातार प्रकाशन और मैनेजमेंट की काली करतूतों का भंडाफोड़ करने से भड़ास पर प्रतिबंध लगाया गया है.

‘साधना न्यूज’ ने ‘चांपना न्यूज’ वाले व्यंग्य को दिल पर लिया, भड़ास पर मुकदमा ठोंका, जानिए कोर्ट में क्या हुआ

भड़ास पर ‘चांपना न्यूज’ नामक एक चैनल के बारे में पांच किश्तों में व्यंग्यात्मक खबर छपी. ‘चांपना न्यूज’ एक काल्पनिक नाम है, जिसे वर्तमान न्यूज चैनलों की दुनिया के अंदर का हाल बताने के लिए सृजित किया गया और उसके सहारे उसके बहाने पूरी अंतरकथा बताई गई. पर इस व्यंग्य को साधना न्यूज नामक चैनल नहीं पचा पाया और उसके कर्ताधर्ता चले गए दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट. वहां इन लोगों ने कहा कि योर आनर, दरअसल चांपना न्यूज नामक जिस चैनल की कहानी भड़ास में बताई गई है, वह उसी के साधना न्यूज नामक चैनल के बारे में है, इसलिए इस मानहानि कारक कंटेंट को रिमूव कराया जाए और अंतिम फैसला आने से पहले इस वेब पोर्टल को आदेशित किया जाए कि वह साधना न्यूज के बारे में कुछ न छापे.

जब सोनिया गांधी सत्ता की सर्वेसर्वा थीं तो उनके कालेधन के बारे में उसी दौर में भड़ास पर स्टोरी छापी गई थी

Yashwant Singh : मूर्ख भाजपाइयों और भक्तों को बता दें कि जब वो चुप्पी मारे बिल में थे तब भी हम लोग सत्ता के खिलाफ लिखते थे और सीना ठोक कर लिखते थे. ये स्टोरी भड़ास के तब कंटेंट एडिटर रहे Anil Singh ने तैयार की थी और जून 2011 में तब प्रकाशित किया था भड़ास पर जब कांग्रेस की सरकार केंद्र में थी और आदरणीया सोनिया जी सर्वेसर्वा हुआ करती थीं. मीडिया का काम ही सत्ता में बैठे लोगों की कुनीतियों और कदाचारों का खुलासा होता है.

भड़ास4मीडिया के 8 साल पूरे होने वाले हैं… जानिए कब और कैसे प्रकट हुआ भड़ास

देखते ही देखते आठ साल पूरे होने वाले हैं. इतने लंबे वक्त तक भड़ास निकालता रहूंगा, मुझे खुद पर कतई भरोसा न था. अब जब आठ साल सामने है तो कई चीजें याद आ रही हैं. भड़ास4मीडिया के चार साल पूरे होने पर जो आर्टकिल लिखा था, उसे हूबहू नीचे दे रहा हूं क्योंकि इस आर्टकिल में तफसील से सब कुछ है, वो सब कुछ जिसे फ्लैशबैक में जाकर याद कर रहा हूं. जो कुछ छूटा है, नया है, वह आगे लिखूंगा. फिलहाल चार साल पहले लिखे आर्टकिल को दुबारा पढ़िए. इसे इसलिए भी पढ़िए क्योंकि इस पुराने आर्टकिल के बारे में ‘मीडिया वीडिया’ नामक एक अंग्रेजी ब्लाग चलाने वाले भाई परमीत लिखते हैं: ”This is most frank personal story of any Indian blogger I have read so far.” कोई अंग्रेजी वाला बंदा हम जैसे हिंदी वाले शुद्ध देसी आदमी की अंग्रेजी में तारीफ करता है तो अच्छा तो लगेगा ही गुरु. पहले पढ़िए, परमीत ने पूरा क्या लिखा है. उसके बाद पढ़िए वो आर्टकिल जो भड़ास के चार साल पूरे होने पर पूरे रौ में एक सीटिंग में लिख डाला था.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

IIMC के दीक्षांत समारोह से मीडिया को दूर रख मीडिया के खिलाफ खूब भड़ास निकाली मंत्री राज्यवर्धन राठौर ने

नयी दिल्ली : ‘स्व नियमन’ की हिमायत करते हुए सरकार ने मीडिया से कहा कि वह कोई नियमन नहीं लाएगी, बल्कि प्रेस को अपने पास मौजूद व्यापक जिम्मेदारी को पहचानना चाहिए। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने यह सुझाव भी दिया कि मीडिया कवरेज में अक्सर आंकवादियों की छोटी हरकतों को प्रचारित कर आतंकवादियों का समर्थन किया जाता है, जिससे डर फैलता है।

आनलाइन एड एजेंसी झुकी, भड़ास के खाते में हफ्ते भर के विज्ञापन के लिए 70 डालर आए… चीयर्स

एक विदेशी आनलाइन एड एजेंसी ने 70 डालर मेरे एकाउंट में भेज दिए. काफी दिनों से बारगेनिंग चल रही थी. मैंने बहुत पहले तय कर लिया था कि बिना एडवांस लिए आनलाइन या आफलाइन, किसी एड एजेंसी वालों या किसी शख्स का विज्ञापन नहीं चलाउंगा क्योंकि विज्ञापन चलवाने के बाद पेमेंट न देने के कई मामले मैं भुगत चुका था. बकाया भुगताने के लिए बार बार फोन करने, रिरियाने की अपनी आदत नहीं रही. हां, इतना जरूर कुछ मामलों में किया हूं कि किसी रोज दारू पीकर बकाया पैसे के बराबर संबंधित व्यक्ति को फोन कर माकानाकासाका करके हिसाब चुकता मान लेता हूं. पर यह कोई ठीक तरीका थोड़े न है. इसलिए एक नियम बना लिया. बिना एडवांस कोई विज्ञापन सिज्ञापन नहीं. दर्जनों एड प्रपोजल इसलिए खारिज करता रहा क्योंकि आनलाइन एजेंसी को एडवांस पेमेंट वाला शर्त मंजूर न था. लेकिन आखिरकार एक एड एजेंसी झुकी और 70 डालर हफ्ते भर के विज्ञापन के लिए दे दिए.

जिसने भड़ास पढ़ने के कारण पत्रकार को नौकरी नहीं दी वह खुद ही छिप-छिप कर भड़ास पढ़ता है!

यशवंत भाई

सादर प्रणाम,

एक खबर bhadas4media.com पर पढ़ने को मिला कि एक पत्रकार साथी को सिर्फ इसलिए नौकरी नहीं दी गई क्योंकि वह भड़ास का रीडर है. सबसे बड़ी बात यह है कि वह जिसने पत्रकार साथी को नौकरी नहीं दी, वह अभी तक अपने पद पर कैसे बना है? उसे भी तो संस्थान को निकाल देना चाहिए था. क्योंकि हकीकत तो यह है वह भी भड़ास पढ़ता है, भले ही छुप छुप कर पढ़ता हो. यह सच्चाई है कि मीडिया से जुड़ा हर आदमी.. चाहे कैमरामैन हो, पत्रकार हो यहां तक सफाई कर्मचारी भी भड़ास के रीडर हैं.

यशवंत पर हमले की कहानी, उन्हीं की जुबानी ( देखें सुनें संबंधित आडियो, वीडियो और तस्वीरें )

बिना वाइपर की बस… यह तस्वीर तबकी है जब बारिश थोड़ी कम हो गई थी.

दिल्ली को अलविदा कहने के बाद आजकल भ्रमण पर ज्यादा रहता हूं. इसी कड़ी में बनारस गया. वहां से रोडवेज बस के जरिए गाजीपुर जा रहा था. मेरे चाचाजी को हार्ट अटैक हुआ था, जिसके बाद उनकी ओपन हार्ट सर्जरी होनी है. उन्हीं को देखने के लिए गाजीपुर जा रहा था. शिवगंगा ट्रेन से बनारस उतरा और रोडवेज की बस पकड़ कर गाजीपुर जाने लगा. मौसम भीगा भीगा था. बारिश लगातार हो रही थी. बस चलने लगी. बिना वाइपर की बस धीमी गति से रेंगते हुए बढ़ रही थी. ड्राइवर कुछ ज्यादा ही सजग था क्योंकि लगातार बारिश से बस का शीशा पानीमय हुआ जा रहा था और उसे शीशे के पार सड़क पर देखने के लिए कुछ ज्यादा ही मशक्कत करनी पड़ रही थी.

यशवंत जी, आपका ब्लाग कुछ समय से अरविन्द केजरीवाल, ABP न्यूज़ और ND टीवी का मुखपत्र बन गया है!

प्रिय यशवंत जी।

मैं लंबे समय से आपका भड़ास4मीडिया ब्लॉग पढ़ रहा हूँ। पहले मुझे ये अच्छा लगता था क्यों की आप मीडिया में फैली बुराइयों को सामने लाते थे। लेकिन कुछ समय से देख रहा हूँ की आपका ये ब्लॉग अरविन्द केजरीवाल, ABP न्यूज़ और ND टीवी का मुखपत्र बन गया है।

भड़ास वाले यशवंत ने दिल्ली को अलविदा कहा

Yashwant Singh : अलविदा दिल्ली। 9 साल का साथ आज ख़त्म। पैकिंग कम्प्लीट। रात में रवानगी। अब पूरा देश मेरा। केरल से लेकर कासगंज तक रहेगा डेरा, बारी बारी। दिल्ली में आज आखिरी दिन विदा देने राहुल पूनम राजीव आदि साथी पहुंचे। सबका आभार। लेकिन हे दिल्ली वालों, ये मत बुझना कि यहाँ से गया तो चला ही गया। आऊंगा, भले ही मेहमान की तरह। दिल्ली में हर राज्य के बने भवन सदन गेस्ट हाउस निवास जो हजारों की संख्या में हैं, सब मेरे हैं। इतने सारे दोस्त साथी मित्र भाई दिल्ली में हैं कि रहने के दिन कम पड़ जाएंगे, जगह नहीं। इसलिए जाने का मतलब ये नहीं कि मूंग दलना बंद होगा या कम होगा। पर अब फिक्स हो कर नहीं बैठेंगे। पूरा भारत दबा के घूमना है। काम जब अपना ऑनलाइन है तो शरीर के मोबाइल रहने में कोई प्रॉब्लम नहीं। और, कई दफे शरीर की सचेत या निष्प्रयोज्य मोबिलिटी आत्मा चेतना को झकझोरने जगाने का काम करता है। कुल मिला कर अज्ञात नए के लिए के लिए तन मन से प्रस्तुत हूँ।

भड़ास में वैकेंसी, अप्लाई करें

भारत की चर्चित वेबसाइट भड़ास यानि www.Bhadas4Media.com को दो पत्रकारों की जरूरत है. हिंदी टाइपिंग स्पीड अच्छी होनी चाहिए. अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद ठीकठाक हो. खुद का लैपटाप हो. दो-चार साल कार्य का अनुभव हो. पत्रकारिता में डिग्री-डिप्लोमा न हो तो भी चलेगा लेकिन मीडिया की दुनिया की बारीक समझ हो. जरूरी नहीं कि दिल्ली में हों, देश के किसी भी कोने में हों, चलेगा. घर से भी काम कर सकते हैं. सेलरी कार्य और योग्यता के अनुसार.

फिर सक्रिय होगा भड़ास Blog, पुराने निष्क्रिय हटेंगे, नयों को मिलेगा स्थान

Yashwant Singh : जागरण ग्रुप के बच्चा अखबार आई-नेक्स्ट के कानपुर संस्करण की लांचिंग कराने के बाद इसके संपादक पद से इस्तीफा देकर कई महीने तक अपने गांव में रहा. जी भर खुली हवा में सांस लेकर छाती मजबूत बनाने और घूम घूमकर ताड़ी पीकर गला तर करने के बाद नई नोकरी खोजने नोएडा पहुंचा. शराब न पीने और झगड़ा न करने टाइप कई किस्म की शर्तों को मुझसे मनवाए जाने के बाद अंतत: कामकाज के मेरे पुराने अच्छे रिकार्ड को देखते हुए दैनिक जागरण नोएडा में नौकरी दे दी गई. इसी दौरान सुना कि हिंदी में ब्लागिंग का दौर शुरू हुआ है और किसिम किसिम के हिंदी ब्लाग बन चल लिखे जा रहे हैं. अपन लोगों ने भी मिलकर एक ब्लाग बनाया. भड़ास नाम से. इसका आनलाइन पता WWW.Bhadas.Blogspot.COM रखा गया.

भड़ास की खबर सच साबित हुई, ‘समाचार प्लस’ चैनल के हेड ऑफिस में एमएमएस बनाया

{jcomments off}नोएडा : नोएडा के फेज-3 (सेक्टर 63) स्थित ‘समाचार प्लस’ न्यूज चैनल के हेड ऑफिस के वॉशरूम में एक महिला कर्मी का एमएमएस बनाया गया। पीड़िता के चीखने पर हरकत करने वाले चैनल के कैब चालक को दबोच लिया गया। 

प्रभात के बारे में भड़ास पर प्रकाशित खबर गलत, कृपया तथ्यों को दुरुस्त करें

संपादक, भड़ास4मीडिया, आपके न्यूज पोर्टल पर “प्रभात और मनोज पहुंचे दैनिक जागरण” नाम से एक खबर प्रकाशित हुई है । गलत तथ्यों पर आधारित यह खबर भ्रामक स्थिति पैदा करने वाली है। इस खबर में ज़िक्र है कि संपादक के बेहूदापूर्ण व्यवहार से नाराज होकर प्रभात ने जागरण ज्वाइन कर लिया है। यह सत्य है कि मैंने जागरण ज्वाइन कर लिया है। पर किसी के व्यवहार से नाराज होकर नहीं किया है।

बदल रही है हिन्दी की दुनिया

हिन्दी और पत्रकारों के बीच लोकप्रिय साइट भड़ास4मीडिया (Bhadas4Media) पर ‘जिन्दगी’ का विज्ञापन अमैजन की ओर से। हिन्दी के दिन बदलेंगे? सरकारी खरीद के भरोसे रहने वाले हिन्दी के प्रकाशकों ने हिन्दी के लेखकों को खूब छकाया है। किताबें बिकती नहीं हैं, खरीदार कहां हैं – का रोना रोने वाले प्रकाशकों के रहते हुए मुमकिन है कि हिन्दी के लेखक भविष्य में खुद ही प्रकाशक भी बन जाएं। या लेखक और रचना को पहचानने वाले नए प्रकाशक सामने आएं और लेखक पाठकों तक आसानी से पहुंच सकें। भड़ास4मीडिया चलाने वाले यशवंत सिंह नेट पर लिखकर पैसा कमाने के तरीके बताने के लिए अलग आयोजन कर चुके हैं और चाहते हैं कि हिन्दी वाले कुछ अलग और नया करें। आत्म निर्भर हों। इसपर फिर कभी। 

पढ़ते रहें भड़ास, लामबंद हो अब उत्पीड़ित-वंचित मीडिया बिरादरी

हम किसी भी कीमत पर इस कारपोरेट मीडिया के तिलिस्म को किरचों में बिखेरना चाहते हैं। मजीठिया के नाम पर धोखाधड़ी से जिन्हें संशोधित वेतनमान के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हुआ है और अपने अपने दफ्तरों में गुलामों जैसी जिनकी जिंदगी है, बेड़ियां उतार फेंकने की चुनौती वे अब स्वीकार करें। 

 

राजनीति में आपके लिए ये चुनौतियां हैं यशवंत भाई

यशवंत भाई, 

राजनीतिक पार्टी शुरू करने के लिए बधाई। आपके जन सरोकारी विचारों का हम आदर करते हैं। लेकिन मेरे मन में कुछ बातें हैं जिन्हें साझा करना चाहता हूं। पहला तो यह कि यदि आप ईमानदारी से आगे बढ़ेंगे तो बेईमान प्रजाति के लोग आपके ऊपर हमला करने से नहीं चूकेंगे। आपको मटियामेट कर देना चाहेंगे ताकि उनका खेल चलता रहे,  बेहिसाब गति से अकूत संपत्ति आती रहे और वे ताकतवर भी बने रहें। 

आपसी मतभेद भुलाकर अब भड़ास के मंच पर आएं सभी वामपंथी

प्रिय भाई यशवंत जी, आपकी नई पार्टी बनाने की योजना का स्वागत करता हूँ लेकिन एक विचार मन में उत्पन्न हुआ, जो लिख रहा हूँ। यदि अच्छा लगे तो उस पर चिंतन और मनन करते हुए एक विचार गोष्ठी के लिए सभी गणमान्य लोगों आमंत्रित करें और उस पर कार्य हो। हम लोग आरम्भ से ही वामपंथ से जुड़े रहे और आज आवश्यकता है देश के सभी वामपंथी सभी भेदभाव भूलकर एक मंच पर आयें, सभी लोग मिलकर एक ही पार्टी बनायें। 

भड़ास को कूरियर से पांच हजार रुपये रिश्वत भेजने वाले ने दिमाग तो खूब लगाया लेकिन थोड़ी-सी कमी कर दी

Editor

BHADAS4MEDIA.COM

माननीय महोदय

सब जानते है साम, दाम अथवा दण्ड से भड़ास पर दबाव बना नहीं सकते. माफिया ने भेद का अक्लमंदी से उपयोग किया. आप के आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचाने का उनका उददेश्य हुआ पूरा. कमी हमारी लाल इमली टीम में है. कुछ लोग प्रतिज्ञा के साथ जुड़े थे. हमारी टीम के जयचंद चंद टुकड़ों के लिए प्रयास आरंभ होते ही कुठाराघात कर देते है. हम क्या सोचते हैं, किस तरफ काम कर रहे हैं,  वो BIC Management तक बिजली की गति से परोसा जाता रहा है. जो उद्योगपति 12 साल तक इस घोटाले को थामे हुए हैं, वह हम लोगों से सौ गुना तेज हैं. यह बात कई बार साबित हो चुकी है. लाल इमली के हम लोग इस लायक नहीं कि एकजुट हो कर इस संघर्ष को आगे ले जा सके.

भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह को IMWA का बेस्ट सोशल मीडिया अवॉर्ड

दिल्ली : मावलंकर ऑडिटोरियम में गत दिवस हर साल की तरह इंडियन मीडिया वैल्फेयर एसोसिएशन की ओर से इम्वा अवार्ड 2015 से पत्रकारों को सम्मानित किया गया। केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा, सांसद उदित राज आदि की उपस्थिति में पत्रकारिता के भिन्न-भिन्न क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार सम्मानित हुए। बेस्ट सोशल मीडिया का अवॉर्ड भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह को दिया गया। बेस्ट क्राइम एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी और लीडिंग शो के लिए रजत शर्मा को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इंडियन मीडिया वेल्फेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव निशाना ने कहा कि पत्रकार हर परिस्थिति में हर खबर पर नज़र बनाए रखता है और जनता को हर खबर से राबता कराता है। मीडिया को ही लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है। इसीलिए IMWA  पत्रकारों के मान और सम्मान के लिए इम्वा अवॉर्ड हर साल कराता है, जिससे पत्रकारों का हौसला अफज़ाई हो और साथ साथ उनका मनोबल भी बढ़ता जाए। 

जुआ खेलकर रक़म जीतने का लालच देता ये विज्ञापन भड़ास को शोभा नहीं देता!

यशवंत सिंह जी

संपादक, भड़ास4मीडिया

भड़ास को हम सब पत्रकार बहुत गंभीरता से लेते हैं… पर एक ऐसा विज्ञापन देखा कि आपको पत्र लिखने को मजबूर हुआ.. लिखने को तो दस पेज भी लिख सकता हूँ.. मगर आप बुद्धिजीवी हैं… इसलिए पूरा यकीन है कि कम लिखे को ज़्यादा ही समझेंगे… इस मेल के साथ में एक तस्वीर अटैच की है, उसे देखिए… इसमें जो ऑफर है, वो किसी भी नज़रिये से स्वस्थ नहीं कहा जा सकता… जुआ खेलने का ऑफर देकर रक़म जीतने की उम्मीद या लालच देता ये विज्ञापन भड़ास को शोभा नहीं देता… आशा करता हूं कि आप इस पर ध्यान देंगे.

धन्यवाद.

आसिफ खान

Asif Khan

kasif.niaz@gmail.com

मजीठिया मुद्दे पर भड़ास की लड़ाई जारी : जागरण, पत्रिका समेत कई मामलों पर 27 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

मजीठिया वेतनमान न देने और सुप्रीमकोर्ट की अवमानना करने के कुछ और मामले 27 मार्च को अदालत में आने वाले हैं। इन मामलों में दो मामले आरसी अग्रवाल और एक मामला महेंद्र मोहन गुप्‍ता के खिलाफ है। मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर दायर सभी नई याचिकाओं, जिनमें भड़ास की तरफ से दायर याचिकाएं भी शामिल हैं, को एक जगह करके सुप्रीम कोर्ट में इनकी सुनवाई के लिए 27 मार्च तारीख तय किया जा चुका है.

भास्कर, हिंदुस्तान, जागरण समेत कई अखबारों में भड़ास पर पाबंदी

खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का नेता बताने वाले और इस हक के लिए लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले मीडिया समूह अब उन छोटे व नए मीडिया माध्यमों की आवाज अपने यहां दबाने में लगे हैं जो बड़े बड़े मीडिया हाउसों की पोल खोलते हैं. ताजी सूचना के मुताबिक दैनिक भास्कर और दैनिक हिंदुस्तान अखबार के दफ्तरों में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम को ब्लाक कर दिया गया है. इन संस्थानों के प्रबंधकों ने ऐसा फैसला मालिकों के निर्देश के बाद लिया है. मालिकों ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर भड़ास4मीडिया द्वारा चलाए गए अभियान और आम मीडियाकर्मियों को उनका हक दिलाने से संबंधित मुहिम से नाराज होकर इस पोर्टल को अपने संस्थान के अंदर बंद कराने का आदेश दिया ताकि उनके यहां काम करने वाला कोई कर्मचारी इस पोर्टल को पढ़कर सुप्रीम कोर्ट न चला जाए.

कोटा के बाद दैनिक भास्कर भीलवाड़ा में भी बगावत, प्रबंधन पीछे हटा

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने वाले कर्मियों को लगातार परेशान करने के कारण भास्कर ग्रुप में जगह-जगह विद्रोह शुरू हो गया है. अब तक प्रबंधन की मनमानी और शोषण चुपचाप सहने वाले कर्मियों ने आंखे दिखाना और प्रबंधन को औकात पर लाना शुरू कर दिया है. दैनिक भास्कर कोटा में कई कर्मियों को काम से रोके जाने के बाद लगभग चार दर्जन भास्कर कर्मियों ने एकजुटता दिखाते हुए हड़ताल कर दिया और आफिस से बाहर निकल गए.

बाएं से दाएं : आंदोलनकारी मीडियाकर्मियों के साथ बात करते भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह, अजमेर के वरिष्ठ पत्रकार रजनीश रोहिल्ला और जर्नलिस्ट एसोसिएशन आफ राजस्थान (जार) के जिलाध्यक्ष हरि बल्लभ मेघवाल.

“सूत न कपास जुलाहे में लट्ठम-लट्ठा”

“सूत न कपास जुलाहे में लट्ठम-लट्ठा” ये बात जाहिर होती है पत्रकारिता बचाने के नाम पर लड़ाई करने वालों के सोशल मीडिया स्वांग से| अभी हाल का ही मामला ले लीजिये एक भड़ास4मीडिया के यशवंत सिंह हैं ने आईबीएन 7 के पंकज श्रीवास्तव मामले में जिस बचपने का परिचय दिया है उससे तो यही लगता है कि चैनलों और दूसरे मीडिया संस्थानों के भीतर की खबरों को भड़ास पर दिखा के यशवंत मीडिया के नामचीन मठाधीशों में शामिल तो हो गए लेकिन भड़ास से सिर्फ उनके व्यक्तिगत संबंधों और संपर्कों के सिवा और कुछ नहीं निकला| लेकिन अगर ये अनुमान लगाया जाए कि इससे देश दुनिया समाज और खुद पत्रकारिता पर फर्क क्या पड़ा तो नतीजा ढ़ाक के तीन पात ही नज़र आता है|

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह का एक पुराना इंटरव्यू

मीडियासाथी डॉट कॉम नामक एक पोर्टल के कर्ताधर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने 10 मार्च 2011 को भड़ास के संपादक यशवंत सिंह का एक इंटरव्यू अपने पोर्टल पर प्रकाशित किया था. अब यह पोर्टल पाकिस्तानी हैकरों द्वारा हैक किया जा चुका है. पोर्टल पर प्रकाशित इंटरव्यू को हू-ब-हू नीचे दिया जा रहा है ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और यशवंत के भले-बुरे विचारों से सभी अवगत-परिचित हो सकें.

यशवंत सिंह

 

आप जिया न्यूज के कर्मियों के पक्ष में लिख-लड़ रहे हैं और वो कर्मी आपका विश्वास नहीं करते!

यशवंत भईया प्रणाम, बड़े दु:ख की बात है कि ये जो जिया न्यूज के कर्मचारी आपका विश्वास नहीं करते, आपके सहयोगियों का विश्वास नहीं करते, उनके लिए आप इतना कर रहे हैं. आपको बता दूं भइया, आपने एक न्यूज डाली थी भड़ास पर जिया न्यूज की महिला कर्मचारी का पैर कटने की. उस समाचार को मैंने सभी जिया न्यूज के कर्मचारियों को मेल किया. उस मेल में रोहन जगदाले, एसएन विनोद और कई शीर्ष कर्मियों के नाम शामिल थे.

भड़ास के जरिए मैंने जिंदगी में पहली बार न्यू मीडिया / सोशल मीडिया की शक्ति का अनुभव किया

जानिब ए मंजिल की ओर अकेला चला था मगर
लोग मिलते गए, कारवां बनता गया!!!

यशवंतजी की ओर से देशभर के पत्रकारों के नाम भड़ास पर पोस्ट हुआ संदेश न्याय की लड़ाई में उबाल ला चुका है। भड़ास के जरिए मैंने जिंदगी में पहली बार न्यू मीडिया / सोशल मीडिया की शक्ति का अनुभव किया। भड़ास की पूरी टीम को मेरा धन्यवाद! धन्यवाद देने का एक बड़ा कारण यह भी है कि मजीठिया के मामले में देश के पत्रकारों को एकजुट होने का मंच भी मिला है। भड़ास के यशवंतजी का मेरे को लेकर लेख आने के बाद मेरे पास पिछले दो दिनों से देशभर से बड़ी संख्या में पत्रकारों के फोन आ रहे हैं। अधिकांश पत्रकार मजीठिया की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहते हैं।

ABOUT US

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया डॉट कॉम. यह पोर्टल अपनी विशिष्टता, बेबाकी, ईमानदारी, साहस, जन सरोकार के लिए जाना जाता है. भड़ास4मीडिया एक ऐसा न्यू मीडिया प्लेटफार्म है जो विशेष तौर पर मीडिया के अंदरखाने चलने वाले स्याह-सफेद को उजागर करता है, आम मीडियाकर्मियों के दुख-सुख का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही मुख्य धारा की कारपोरेट मीडिया द्वारा दबाई-छिपाई गई खबरों को प्रमुखता के साथ प्रकाशित प्रसारित कर पूरे मीडिया जगत का माइंडसेट तय करता है.

पहले यश मेहता को गालियां दी, नौकरी से निकाला गया तो भड़ास पर खबर छपने के कारण यशवंत को गालियां दे रहा

Yashwant Singh :  कल रात एक बंदे ने मुझे फोन किया और बिना नाम पहचान बताए धाराप्रवाह माकानाका करने लगा यानि गालियां बकने लगा. खूब दारू पिए हुए लग रहा था. उससे मैं पूछता रह गया कि भाई साब आप कौन हैं, क्या समस्या है.. पर वो सिवाय गाली बकने के दूसरा कोई काम नहीं कर रहा था, न सुन रहा था, न सवालों का जवाब दे रहा था. वह सिर्फ गालियां बकता जा रहा था. फोन कटा तो मैं हंसा. उस बंदे का नंबर फेसबुक पर डाला और फेसबुकिया साथियों से पता लगाने को कहा कि ये कौन शख्स है, जरा काल कर के इससे पूछें.

Divya Ranjan