भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव को ‘भारत रत्न’ अब तक क्यों नहीं?

हमारे हिंदुस्तान में कलंकितों और घोटालेबाजों को भी खैरात की तरह पद्म सम्मान बांटे जाने का इतिहास है। और सचिन तेंडुलकर जैसे पैसे लेकर खेलनेवाले को भी क्रिकेट के लिए ‘भारत रत्न’ दिया जा सकता है। ऐसे में हार्दिक पटेल का यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है कि अमर शहीद भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को अब तक ‘भारत रत्न’ क्यों नहीं? लेकिन कोई सुने तब न!

-निरंजन परिहार

आप चाहें, तो हार्दिक पटेल की भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव को ‘भारत रत्न’ से सम्मनित करने की मांग को विशुद्ध राजनीतिक चाल कह सकते हैं, और चाहें तो एक युवा नेता की राष्ट्रीय स्तर पर छा जाने की महत्वाकांक्षा भी मान सकते हैं। लेकिन हार्दिक पटेल की इस बात में दम है, यह तो आपको भी मानना ही पड़ेगा। हमारे हिंदुस्तान में बड़े पैमाने पर माना जाता है कि क्रिकेट अंग्रेजों की देन है, इसलिए हमारे लिए यह गुलामी का प्रतीक खेल है। लेकिन फिर भी कमाने के उद्धेश्य से पैसे लेकर क्रिकेट खेलने के बावजूद जब सचिन तेंडुलकर को देशभक्त बताकर राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया सकता है, तो अपना सर्वस्व न्यौछावर करके देश की आजादी के लिए के लिए हंसते हंसते फांसी पर चढ़ जानेवाले अमर शहीद भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव को ‘भारत रत्न’ क्यों नहीं दिया जाना चाहिए?

वैसे, सत्ता में चाहे कोई भी हो, हमारे देश में विपक्षियों की वाजिब मांगों पर भी ध्यान न देना और उनकी बिल्कुल ही अवहेलना करना सत्ता में बैठे लोगों की राजनीतिक परंपरा है। सो, बहुत संभव है कि हार्दिक पटेल की बात को भी अनसुना कर दिया जाए, क्योंकि वे तो कांग्रेस के हैं, और ‘भारत रत्न’ सम्मान के निर्णयकर्ताओं के लिए कांग्रेस और हार्दिक पटेल दोनों ही लगभग अछूत की श्रेणी में है। लेकिन सवाल यह भी है कि सिर्फ कांग्रेस का हो जाने से ही देश के एक जागरूक नागरिक के रूप में हार्दिक पटेल की भावनाओं और युवा देश की युवा पीढ़ी के युवा प्रतिनिधि के नाते अपने शहीदों के प्रति उनके श्रद्दाभाव को सिरे से खारिज कर देना भी तो उचित नहीं होगा। हालांकि, जिस देश में कलंकितों और घोटालों के आरोपियों लोगों को भी पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे सम्मान खैरात की तरह बांटे जाने का इतिहास रहा हो, और सचिन तेंडुलकर जैसे शुद्ध व्यावसायिक क्रिकेटर को भी ‘भारत रत्न’ जैसे अलंकरण ससम्मान पहना दिए जाते हों, उस देश में शहीद भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को मरणोपरांत ही सही, यदि ‘भारत रत्न’ सम्मान दे दिया जाए, तो देश के किसी भी व्यक्ति को रत्ती भर भी आपत्ति नहीं होगी, यह तो पक्का है।

अमर शहीदों को ‘भारत रत्न’ देने की मांग करनेवाले हार्दिक पटेल इन दिनों गुजरात कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। काफी सक्रिय हैं एवं देश भर में युवा नेतृत्व की अपनी आंदोलनकारी पहचान बनने के बाद फिलहाल निश्चित रूप से वे एक विशिष्ट दिशा में सक्रिय हैं, इसीलिए वे हाल ही में अमर शहीद भगतसिंह के पैतृक गांव खटकड़कलां गए, तो पंजाब में स्थित भारत -पाकिस्तान बॉर्डर के हुसैनीवाला गांव भी गए, जहां शहीद भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव की समाधि है। हार्दिक ने समाधि के दर्शन किए, मत्था टेका और राष्ट्र के नागरिक के रूप में कृतज्ञभाव से श्रद्धांजलि अर्पित की। हार्दिक ने देखा कि यह स्थल किसी भी मायने में किसी तीर्थस्थल से कम नहीं हैं। इसीलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को ‘भारत रत्न’ सम्मान से अलंकृत किया जाए एवं उनके समाधिस्थल हुसैनीवाला को तीर्थ स्थल के रूप में भारत सरकार द्वारा ठीक उसी तरह विकसित किया जाए, जैसे गुजरात में सरदार पटेल के स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का विकास किया गया है। हार्दिक ने आष्चर्य व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री को लिखा है कि पिछले कई वर्षों से वे देश की जनता के मन में यह भावना महसूस कर रहे हैं कि जिन शहीदों ने देश को सर्वोपरि मानकर आजादी के लिए बलिदान देकर एक पूरी पीढ़ी को देश के लिए समर्पण का संदेश दिया, उन शूरवीर शहीदों को देश ने आखिर अब तक ‘भारत रत्न’ से सम्मानित क्यों नहीं किया? हार्दिक ने प्रधानमंत्री से इन तीनों अमर शहीदों को ‘भारत रत्न’ से अलंकृत करने की शीघ्र घोषणा की मांग की है।

भारत के ऐतिहासिक स्वतंत्रता आंदोलन में भगत सिंह, राजगुरु एवं सुखदेव के बलिदान से देश का बच्चा – बच्चा वाकिफ है। लेकिन, देश इस बात से भी वाकिफ है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई भोले आदमी नहीं है, सो एक कांग्रेसी नेता की इस मांग को हल्के में लेकर शहीदों का अपमान करें। फिर भी, यह तो खैर संभव ही नहीं है हार्दिक की इस मांग को मान लिया जाए। लेकिन यह भी संभव नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी बीजेपी हार्दिक की इस मांग का राजनीतिकरण करके खारिज कर दें। इस तथ्य को हार्दिक भी जानते हैं, इसीलिए प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार जब तक इस दिशा में काम शुरू नहीं करती, वे अपने प्रयास जारी रखेंगे। साथ ही केंद्र सरकार के सभी मंत्रियों के जरिए गुजरात सहित देशभर के युवाओं की यह मांग भारत सरकार तक पहुंचाते रहेंगे।लेकिन फिर भी, मामला एक कांग्रेसी की मांग का है, सो हार्दिक को और हम सबको भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को ‘भारत रत्न’ सम्मान से अलंकृत करने की इस देश के गौरव की मांग पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार से कोई बहुत चमकदार नतीजों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। फिर भी एक बहुत ही विनम्र सवाल आपसे भी है कि क्या भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव की इस देश में सचिन तेंडुलकर से तुलना भी उन महान शहीदों का अपमान नहीं है? बस, इसीलिए इन महान शहीदों को ‘भारत रत्न’ सम्मान के इस विचार के समर्थन का मन करता है। मन तो आपका भी यही कहता होगा!

हार्दिक पटेल ने की भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव को ‘भारत रत्न’ देने की मांग, पीएम मोदी को पत्र में लिखा – हुसैनीवाला को स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की तर्ज पर विकसित करे सरकार

गुजरात कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने शहीद भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में हार्दिक पटेल ने कहा है कि पिछले कई वर्षों से वे देश की जनता के मन में यह भावना महसूस कर रहे हैं कि जिन वीरों ने देश को सर्वोपरि मानकर आजादी के लिए अपना बलिदान देकर एक पूरी पीढ़ी को देश पर मर मिटने का संदेश दिया, देश ने अभी तक उन वीरों को अब तक “भारत रत्न” से सम्मानित क्यों नहीं किया? हार्दिक पटेल ने प्रधानमंत्री मोदी से इन तीनों अमर शहीदों को भारत रत्न से अलंकृत करने की जल्द घोषणा करने की मांग की है।

भारत के ऐतिहासिक स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में अमर शहीद भगत सिंह, वीर राजगुरु एवं सुखदेव जी के बलिदान से देश का बच्चे – बच्चे के परिचित होने की बात करते हुए गुजरात कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने कहा है कि उनको गत दिनों शहीद भगतसिंह के पैतृक गाँव खटकड़कलां एवं भारत -पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित हुसैनीवाला गाँव में शहीद भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के समाधि स्थल पर दर्शन करने गए थे। उन्होंने कहा कि यह स्थल देश के लिए किसी भी अन्य तीर्थस्थल से कम नहीं हैं। ऐसे में इन वीरों के समाधिस्थल हुसैनीवाला को तीर्थ स्थल के रूप में उसी प्रकार विकसित किया जाए, जिस प्रकार भारत सरकार द्वारा गुजरात के केवड़िया में सरदार पटेल के स्टेच्यू ऑफ यूनिटी को किया जा गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गुजरात कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने मांग की है कि भारत सरकार इस विषय में तुरंत पहल करें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि भारत सरकार जब तक इस दिशा में काम शुरू नहीं करती, वे अपने प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही वे सभी केन्द्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर गुजरात सहित देशभर के युवाओं की यह मांग भारत सरकार तक पहुंचाते रहेंगे।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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One comment on “भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव को ‘भारत रत्न’ अब तक क्यों नहीं?”

  • ye maang karna hi shahido ka apman hai. Aaj Bharat een shahido ke wazah se hai. Bharat ratn dena hamare shahido ke balidan our tyag ka apman hoga.
    kya ham shahide azam ko ek cricket khelne ya ek political leader ke barabar rakhna chahte hai.
    Een teen mahan shahidon ko shahide azam hi rahne dijiye. Bharat ratna ka koi wazood nahi “shahide aazam”ke shamne.
    Kya kisi Bharat Ratna awardee ka naam zahan me aane par kuch hota hai nahi, magar ek baar kabhi bhi in teeno shahido ka naam le kar dekho andar thk siharan ho jaati hai.

    Please do not politics on the name of these three legends. The are beyond any award. They are our real Hero/ Super Hero. They are SHAHID – E- AZAM.
    At least leave them.

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