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मजीठिया : भास्कर को फिर झटका, अब लेबर कोर्ट ने की अर्जी खारिज, दूसरी बार एक्स पार्टी घोषित

BHASKAR

मजीठिया मामले में अखबार मालिकों के लिए एक के बाद एक सभी दरवाजे बंद होते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के बाद दैनिक भास्कर दिल्ली को ताजा झटका लेबर कोर्ट से लगा है। दिल्ली के द्वारका स्थित लेबर कोर्ट ने 11 कर्मचारियों के माला फाइड ट्रांसफर और ट्रमिनेशन मामले में दैनिक भास्कर मैनेजमेंट को दूसरी बार एक्स पार्टी अर्थात केस से बाहर कर दिया है। मैनेजमेंट के लगातार अनुपस्थित रहने और घोर लापरवाही के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।

लेबर कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक और असाधारण है, जब किसी पक्ष को एक केस में दो-दो बार एक्स पार्टी घोषित किया गया है। दैनिक भास्कर मैनेजमेंट के लिए लेबर कोर्ट के दरवाजे अब बंद हो गए हैं। अब लेबर कोर्ट में मैनेजमेंट का पक्ष नहीं सुना जाएगा, सिर्फ कर्मचारियों की ही सुनवाई होगी। पत्रकारों के भेष में घूम रहे मैनेजमेंट के हितैषी चाहें तो लेबर कोर्ट के इस फैसले पर भी जश्न मना सकते हैं। वकीलों और अधिकारियों के हाथों गुमराह मैनेजमेंट और उसके चीयर लीडर्स हर हार पर जश्न मनाते रहें, अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे पत्रकारों के लिए इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है।

गौरतलब है कि मजीठिया से बचने के लिए दैनिक भास्कर सितंबर 2015 में अपना संपादकीय कार्यालय रातों रात राजेंद्र प्लेस दिल्ली से उठाकर रेवाड़ी भाग गया था। इस संबंध में न कर्मचारियों को कोई सूचना दी गई थी और न सरकार से इजाजत ली गई थी। इतना ही नहीं, मजीठिया वेतनमान की मांग कर रहे कर्मचारियों का तबादला दूर-दराज अन्य राज्यों में कर दिया गया था और बाद में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। इस पर पीड़ित कर्मचारियों ने डीएलसी का दरवाजा खटखटाया।

डीएलसी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद केस लेबर कोर्ट रेफर कर दिया था। लगातार अनुपस्थित रहने और जवाब दाखिल न करने पर लेबर कोर्ट ने मैनेजमेंट को पहली बार 20-09-2017 को एक्स पार्टी कर दिया था। इस पर मैनेजमेंट ने एक अर्जी दाखिल कर केस में फिर से शामिल होने की गुहार लगाई। कोर्ट ने अर्जी पर बहस के लिए 10 मई तारीख निर्धारित की थी मगर इस तारीख को मैनेजमेंट फिर गायब हो गया। लेबर कोर्ट ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मैनेजमेंट की अर्जी खारिज कर दी और मैनेजमेंट को दोबारा एक्स पार्टी घोषित कर दिया। इस तरह अब लेबर कोर्ट के दरवाजे भी दैनिक भास्कर के लिए बंद हो चुके हैं।

उधर इन कर्मचारियों से जुड़े मजीठिया वेतनमान और रिकवरी मामले में भी हाईकोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि डीएलसी 2 माह के अंदर रेफरेंस लेबर कोर्ट को भेजे और लेबर कोर्ट 6 माह के अंदर केस का फैसला करे। मतलब 8 माह में खेल खत्म। स्पष्ट है कि मैनेजमेंट दोनों मामलों में बुरी तरह घिर गया है। मैनेजमेंट का ख्याल था कि शतुर्मुर्ग की तरह रेत में सिर गड़ाने से बला टल जाएगी और वकीलों व अधिकारियों की फौज उसे बचा लेगी।

मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि केस में देरी भी उसे ही भारी पड़ने वाली है। क्योंकि कर्मचारी अपना तमाम बकाया कानून के तहत अप टू डेट ब्याज समेत वसूल करेंगे। जितनी देर होगी, मैनेजमेंट को भुगतान भी उतना ज्यादा करना होगा। हर माह एरियर में ब्याज भी जुड़ता जा रहा है। जिसका जितने लाख एरियर, उसका उतने ही हजार हर माह ब्याज। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया वेतनमान नवंबर 2011 से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

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