श्रीलंका में ब्लॉगर सम्मेलन : सात विभूतियों को परिकल्पना सम्मान

 ब्लॉगरों को रचनात्मक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से विगत पांच वर्षों से कार्यरत लखनऊ की प्रमुख सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्था परिकल्पना द्वारा विगत दिनों आयोजित पांच दिवसीय पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मलेन एवं परिकल्पना सम्मान समारोह श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो तथा सांस्कृतिक राजधानी कैंडी में पूरी भव्यता के साथ संम्पन हुआ। समारोह का उद्घाटन श्रीलंका के वरिष्ठ रंगकर्मी डान सोमरत्ने विथाना ने किया। मुख्य अतिथि रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व नगर विकास मंत्री नकुल दुबे और मानद अतिथि रहे निदेशक भारतीय डाक सेवा राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र जोधपुर के कृष्ण कुमार यादव तथा विशिष्ट अतिथि रहे उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ सुनील कुलकर्णी। 

इस सम्मलेन में मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, महाराष्ट्र, असम, दिल्ली, हरियाणा समेत उत्तर प्रदेश के कई ब्लॉगरों को सम्मानित किया गया। लखनऊ के जिन ब्लॉगरों को सम्मानित किया गया उनमे डॉ. रामबहादुर मिश्र, कुसुम वर्मा, डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, डॉ. अनीता श्रीवास्तव, ओम प्रकाश जयंत, माला चौबे, विश्वंभरनाथ अवस्थी आदि प्रमुख थे। 

नकुल दुबे ने कहा कि निश्चित रूप से परिकल्पना संस्था दुनिया की बेहतरी की दिशा में कार्य कर रही है। मुझे गर्व है कि यह मेरे शहर लखनऊ की संस्था है। आप सभी ब्लॉगरों से ये उम्मीद की जाती है आप दुनिया की बेहतरी के लिए परिकल्पना संस्था के साथ मिलकर काम करेंगे। साथ ही एक सुंदर और खुशहाल सहअस्तित्व की परिकल्पना को साकार करेंगे। ब्लॉग में समाज को बदलने की बड़ी ताक़त है, इसलिए आप सभी मिलकर ब्लॉग के माध्यम से हाशिये के समाज को मुख्यधारा में लाने हेतु आगे बढ़ें। नाट्यकर्मी डान सोमरत्ने विथाना ने कहा कि पूरी दुनिया ने ब्लॉग की ताक़त को महसूस किया है। 

परिकल्पना के संस्थापक संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने आयोजन के सन्दर्भ में कहा कि दिल्ली, लखनऊ, काठमाण्डू, नेपाल तथा थिम्पू, भूटान के बाद पांचवां अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो सांस्कृतिक राजधानी कैंडी एवं निगम्बो आदि नगरों में संम्पन हुआ है। 

रवीन्द्र प्रभात ने बताया कि संस्कृतिक दृष्टि से भारत और श्रीलंका में कई समानताएं हैं। भारत से निकलकर बौद्ध धर्म जहाँ श्रीलंकाई संस्कृति में विलीन हो गया, वही भारतीय नृत्य शैलियों का यहाँ व्यापक प्रसार हुआ। श्रीलंका के शास्त्रीय संगीत चीनी, जापानी, भारतीय और इंडोनेशिया के संगीत के अधिक समीप हैं। यहाँ अनेकानेक नृत्य शैलियाँ प्रचलित हैं, जो नाटक से जुडी हुई है। इसमें रामायण का महत्वपूर्ण स्थान है। श्रीलंका का भारतीय दर्शन, धर्म, अध्यात्म में विशेष महत्व है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के क्रम में सम्मान समारोह, आलेख वाचन, चर्चा-परिचर्चा में देश के कई राज्यों एवं श्रीलंका के ब्लॉगरों तथा साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया। उल्लेखनीय है कि ब्लॉग, साहित्य, संस्कृति और भाषा के लिए प्रतिबद्ध परिकल्पना विगत चार वर्षों से ब्लॉग लेखन को बढ़ावा दे रही है। इस आयोजन में संगोष्ठी के तीन महत्वपूर्ण सत्र आयोजित हुए जिनका मुख्य फोकस ब्लॉग के माध्यम से दक्षिण एशिया में शान्ति सद्भावना की तालाश तथा दक्षिण एशिया में भाषाई सद्भावना तथा साहित्यिक संस्कृतिक आदान-प्रदान रहा।

सम्मान समारोह एवं परिचर्चा सत्र का आयोजन श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो के कोणकोर्ड  ग्राउंड सभागार में संम्पन हुआ। सम्मान समारोह के बाद परिचर्चा के दो सत्र आयोजित हुए। प्रथम सत्र की परिचर्चा का विषय था सृजनात्मक साहित्य में हिंदी ब्लॉग का योगदान। इस सत्र की अध्यक्षता कबीर कम्युनिकेशन की क्रिएटिव हेड डॉ. सर्जना शर्मा ने की तथा सञ्चालन लखनऊ के डॉ रामबहादुर मिश्र ने किया। 

मुख्य वक्ता प्रकाश हिन्दुस्तानी ने कहा कि ब्लॉगिंग के प्रारंभ में कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने टिप्पणी की थी कि इसके माध्यम से साहित्य का भला नहीं होगा। यही बात फिल्मो के सन्दर्भ में भी कही गयी थी लेकिन आज हम देखते हैं कि फ़िल्म और ब्लॉगिंग दोनों के माध्यम से हिंदी को प्रतिष्ठा मिली है। ब्लॉगिंग के माध्यम से अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास हुआ है। एक बात अवश्य है कि बहुत से ब्लॉगरों के कारण ब्लॉग पर स्तरहीनता का आरोप लगा है। एबीपी न्यूज मुंबई के वरिष्ठ संपादक जीतेन्द्र दीक्षित ने अपने महत्वपूर्ण शोध के माध्यम से विभीन्न आकडें प्रस्तुत करते हुए कहा की भारत में ५० हजार से अधिक ब्लॉग हैं। ११ करोड लोग फेसबुक से जुड़े है। उत्तर महाराष्ट्र विश्व विद्यालय जलगांव के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुलकर्णी ने ब्लॉगिंग  को एक शक्तिशाली माध्यम बताते हुए कहा कि ब्लॉग अभिव्यक्ति का ताकतवर माध्यम बनकर उभरा है। आतंकवादी भी इससे भयभीत हैं। यही कारण है कि बंगलादेश में अभिजीत राम और वशिकुर्ररहमान  जैसे  ब्लॉगरों की हत्या आतंवादी करते हैं। 

वरिष्ठ ब्लॉगर तथा निदेशक भारतीय डाक सेवा राजस्थान कृष्ण कुमार यादव ने कहा की ब्लॉग की लोकप्रियता इसी बात से सिद्ध होती है कि हर कोई ब्लॉग पर आना चाहता है। स्थापित साहित्यकार खतरा महसूस कर रहे हैं तथा ब्लॉगिंग की शक्ति को स्वीकार करके इसे अपना रहे हैं। वर्तनी का दोष, कट पेस्ट इसके नकारात्मक पक्ष हैं। सर्जना शर्मा ने कहा कि ब्लॉगिंग लेखन के लिए कार्यशालाओं की आवशयकता है क्योंकि इसके आभाव में संस्कार विहीन साहित्य आ रहा है। 

‘हिंदी ब्लॉग्गिंग की समृद्धि में महिलाओं का योगदान’ सत्र  की अध्यक्षता  डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने की। विषय प्रवर्तन करते हुए प्रसिद्ध ब्लॉगर आकांक्षा यादव ने कहा कि ब्लॉगिंग के क्षेत्र में एक चौथाई महिलाएं सक्रिय हैं। इनमें प्रायः पुरुष समाज की मानसिकता के विरुद्ध महिलाएँ लिख रही हैं। दहेज, घरेलू हिंसा, भ्रूण हत्याएं, देह विमर्श जैसे विषयों पर वे बेबाकी से लिख रही हैं। 

लखनऊ से प्रकाशित रेवांत पत्रिका की संपादक डॉ. अनीता श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएँ ब्लॉगिंग के क्षेत्र में दबंगई के साथ लिख रही हैं और वे पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ रही हैं। सुनीता प्रेम यादव ने कहा कि 16 करोड़ ब्लॉगरों में 25 प्रतिशत महिलाएँ बड़ी सक्रियता से साथ लिख रही हैं। डॉ. उर्मिला शुक्ल ने कहा कि हम हजारों मिल दूर बैठे मित्रों से तो बात कर लेते हैं किन्तु अपने घर बैठे सदस्यों से संवाद नहीं स्थापित कर पाते। डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएँ हर विधा में लिख रही हैं। 

तीसरा सत्र संगीत से संबंधित था जो एक शाम कुसुम शर्मा के नाम रहा। अवधी लोकगायिका कुसुम वर्मा ने अपने अवधी लोकगीतों के माध्यम से समा बाँध दिया। कुसुम वर्मा के साथ श्रीलंका के वादकों ने संगत दी। इस सत्र  में श्रीलंका के लगभग आधे दर्जन प्रतिभागियों ने भी प्रतिभाग किए जिसमें प्रमुख थीं सजिनी हंसिका विजेसेकरा, लियाङ्गे हिमालिका परेरा, हंसी एराण्डी, ड्यूमिनी समरकोन आदि। 

इसके अलावा 23 मई को श्री लंका की सांस्कृतिक राजधानी कैंडी में अंतर्राष्ट्रीय कविता सम्मेलन हुआ। जिसकी अध्यक्षता डॉ. सुभदा पाण्डेय ने की। कार्यक्रम में कुसुम  वर्मा, डॉ अनीता श्रीवास्तव, ओम प्रकाश जयंत, डा. अर्चना श्रीवास्तव, अंतर सोहेल, डॉ. राम बहादुर मिश्र, डॉ उर्मिला शुक्ल, डॉ सुनील कुलकर्णी तथा रवीन्द्र प्रभात की कविताओं को श्रोताओं ने सराहा। सञ्चालन डॉ. रामबहादुर मिश्र ने किया। 

23 मई से 25 मई तक रायपुर की डॉ. अल्पना देशपांडे और अदिति देशपांडे की कलाकृतियों की कैंडी और कोलंबो में लगी प्रदर्शनी भी सम्मेलन का मुख्य आकर्षण रही। इस अवसर पर ब्लॉगरों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र देकर एक निश्चित राशि के साथ सम्मानित किया गया। उदघाटन सत्र की अध्यक्षता रवीन्द्र प्रभात तथा संचालन संयुक्त रूप से डॉ राम बहादुर मिश्रा और सुनीता प्रेम यादव ने किया। अंत में कार्यक्रम के संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया।

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