हिंदी साहित्य जगत में नया प्रयास : फोन करें और अपनी रचना इंटरनेट पर प्रकाशित करें…

जी हाँ! सहज, सरल, सुंदर. रचनाकार www.Rachanakar.org लगातार पिछले 11 वर्षों से हिंदी साहित्य की अंतहीन सामग्री को इंटरनेट पर प्रस्तुत करने में जुटा है. रचनाकार के रचनाकारों और पाठकों का निरंतर सहयोग के बगैर यह असंभव था, जिसके लिए हम आभारी हैं. अब एक कदम आगे बढ़ाते हुए, नवीन, उन्नत टेक्नॉलाज़ी का लाभ उठाते हुए, वाचिक रचना प्रकाशन को और अधिक सहज सरल बनाया जा रहा है. वैसे भी, आने वाला समय स्मार्ट टीवी का होगा, स्मार्ट उपकरणों का होगा, जिसमें रचनाओं का पठन-पाठन दृश्य-श्रव्य माध्यम से अधिक होगा. अब आप केवल एक फ़ोन कॉल कर अपना जीवंत रचना पाठ (लाइव ऑडियो पॉडकास्ट के रूप में) प्रकाशित कर सकते हैं. यानी आप फोन पर ही अपनी रचना का पाठ कर सकते हैं, और उसे रेकार्ड कर यूट्यूब अथवा अन्य पॉडकास्ट सेवा में प्रकाशित कर सकते हैं.

जी हाँ. केवल एक फ़ोन कॉल कर. इसे रचनाकार.ऑर्ग ने नवीन, उम्दा टेक्नोलॉज़ी का प्रयोग कर संभव बनाया है, और हिंदी साहित्य जगत में यह अपने किस्म का अकेला, नया और प्रथम प्रयास है. स्वयं की आवाज में रचना पाठ का इंटरनेट पर प्रकाशन, और श्रवण का अपना अलग ही आनंद है. इसके लिए बस इस नंबर 07552660358 (यह लैंड लाइन नंबर है, भारत से बाहर के कॉलर +91 का उपयोग करें)  पर कॉल करें, तीन रिंग बजने के बाद आपको रेकॉर्ड करने हेतु निर्देश सुनाई देंगे. निर्देशों को ध्यान से सुनें और, बीप की आवाज के बाद अपनी रचना का पाठ फ़ोन पर प्रारंभ कर दें. रचना का पाठ पूरा हो जाने के बाद फोन काट दें.

आपका रचना पाठ स्वचालित रेकॉर्ड कर लिया जाएगा, और उसे यथाशीघ्र इंटरनेट पर (प्रमुखतः यूट्यूब ऑडियो-वीडियो के रूप में, जिसकी पहुँच अधिक है) प्रकाशित कर दिया जाएगा, जिसकी जानकारी के लिए रचनाकार.ऑर्ग नियमित देखते रहें. रचना पाठ  प्रकाशन की सूचना अलग से देने की व्यवस्था वर्तमान में नहीं है.

ध्यान रखें, यह नंबर आईवीआरएस ( अन अटैंडेड इंटरैक्टिव वाइस रेस्पांस सिस्टम) पर कार्य करता है, और इसे कोई अटैंड नहीं करता. अतः इस नंबर का उपयोग केवल अपनी रचना पाठ रेकॉर्ड करने के लिए ही करें. किसी तरह की पूछताछ अथवा जानकारी के लिए नहीं. जानकारी पाने के लिए ईमेल सेवा का उपयोग करें. यह सुविधा 24×7 उपलब्ध है – यानी आप कभी भी कहीं से भी किसी भी समय फ़ोन लगा कर अपना रचना पाठ रेकॉर्ड कर सकते हैं.

वर्तमान में रचना पाठ रेकार्ड करने की अधिकतम सीमा 5 मिनट है, अतः इस सीमा के भीतर ही अपनी छोटी – छोटी कविताएँ, लघुकथाएँ, कहानी, व्यंग्य, संस्मरण आदि रेकॉर्ड करें. यदि आपका पाठ 5 मिनट से अधिक है, तो इसे दो भाग में रेकार्ड करें, परंतु रेकार्ड करते समय भाग एक या भाग दो का उल्लेख आरंभ में अवश्य करें. यदि यह प्रकल्प लोकप्रिय होता है, और मांग होती है तो इस सीमा (5 मिनट को) असीमित समय के लिए बढ़ाया भी जा सकता है.

यदि आप पहली बार रचनाकार के लिए रचना भेज रहे हैं या पाठ कर रहे हैं तो यथा संभव अपने संक्षिप्त परिचय के साथ अपना फ़ोटो अवश्य भेजें. इसके लिए ईमेल की सेवा लें. अच्छा होगा यदि रचना पाठ रेकॉर्ड करने के बाद रचना पाठ का समय व दिन के बारे में ईमेल से जानकारी भी दे दें (यह वैकल्पिक है, आवश्यक नहीं) – हमें सुविधा होगी. तो, देर किस बात की? फ़ोन लगाएँ, रचना पाठ करें और पूरी दुनिया में छा जाएं!

Ravi Ratlami
रवि रतलामी
raviratlami@gmail.com

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फिर सक्रिय होगा भड़ास Blog, पुराने निष्क्रिय हटेंगे, नयों को मिलेगा स्थान

Yashwant Singh : जागरण ग्रुप के बच्चा अखबार आई-नेक्स्ट के कानपुर संस्करण की लांचिंग कराने के बाद इसके संपादक पद से इस्तीफा देकर कई महीने तक अपने गांव में रहा. जी भर खुली हवा में सांस लेकर छाती मजबूत बनाने और घूम घूमकर ताड़ी पीकर गला तर करने के बाद नई नोकरी खोजने नोएडा पहुंचा. शराब न पीने और झगड़ा न करने टाइप कई किस्म की शर्तों को मुझसे मनवाए जाने के बाद अंतत: कामकाज के मेरे पुराने अच्छे रिकार्ड को देखते हुए दैनिक जागरण नोएडा में नौकरी दे दी गई. इसी दौरान सुना कि हिंदी में ब्लागिंग का दौर शुरू हुआ है और किसिम किसिम के हिंदी ब्लाग बन चल लिखे जा रहे हैं. अपन लोगों ने भी मिलकर एक ब्लाग बनाया. भड़ास नाम से. इसका आनलाइन पता WWW.Bhadas.Blogspot.COM रखा गया.

इस ब्लाग में करीब एक हजार संपादक बनाए गए. यानि जो भी इसका मेंबर बना उसको डायरेक्ट पोस्टिंग का राइट दे दिया गया. इस कारण कभी कभार ये भी होता कि मैं सो कर उठता तो देखता कि भाई लोग मुझे ही गालिया लिख लिखकर भड़ास पर छापे हुए हैं. खैर. कई किस्म की लंबी उठा पटक बहस झगड़ा होड़ कंपटीशन कंप्लेन मुंहफुलव्वल आदि के बाद ब्लागिंग की आग धीरे धीरे शांत होने लगी. शौकिया ब्लागर निष्क्रिय होने लगे. कुछ ही प्रतिबद्ध ब्लागर फील्ड में जमे रहे. कई लोग ब्लागिंग के आगे की राह देखने समझने लगे. कुछ लोग इधर उधर हुए तो कुछ ने फेसबुक ट्विटर आदि की राह पकड़ी. कइयों ने डाट काम को अपनाया. समय हर चमकीली चीज पर धूल की परत चढ़ाकर उसे पुराना कर देता है और कुछ नया चमकता पेश कर देता है.

अब जबकि ब्लागिंग लगभग न के बराबर है और हर कोई अपनी बात टेक्स्ट आडियो वीडियो के रूप में फेसबुक व ट्विटर जैसे मंचों पर पोस्ट पब्लिश करता है तो हम लोग एक बार फिर भड़ास ब्लाग को सक्रिय करने की तैयारी कर रहे हैं. पुराने निष्क्रिय (ज्यादातर निष्क्रिय ही हैं) को हटाकर नयों को शामिल करने की तैयारी चल रही है. मुझे यह स्वीकारने में गर्व है कि भड़ास ब्लाग के संचालन के दिनों में मिले ज्ञान समझ रगड़े झगड़े आदि के कारण विकसित हुई परिपक्वता से भड़ास4मीडिया का कांसेप्ट दिमाग में आया जो शुरुआती कठिन संघर्षों के बाद चल निकला. अन्यथा हम जैसे हिंदी पट्टी के देहातियों अराजकतावादियों मुंहफटों के लिए उन दिनों दिल्ली नोएडा में नौकरियों के सारे दरवाजे बंद किए जा चुके थे और सरवाइवल मुश्किल था. पर नौकरी के परे खुद के पैशन को प्रोफेशन बनाने की जो धुन सवार हुई तो भड़ास4मीडिया के जरिए परवान चढ़ता चला गया. लेकिन इस भड़ास4मीडिया को पैदा किया असल में भड़ास ब्लाग ने ही. एक बार आप भी भड़ास के सबसे शुरुआती, अनगढ़, ओरीजनल और देसज मंच को देखें. लिंक ये है: Bhadas.BlogSpot.com

भड़ास के संस्थापक यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

फेसबुक पर उपरोक्त पोस्ट पर आए कुछ कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Journalist Atul Tiwari Ab ye btao ki apni bhdas hum kha nikale

गुप्ता सेल्स राहुल गुप्ता सर कुछ लिखने के मौका दे Bhadas.Blogpost.com पर सबूत और पक्के साक्ष्य के साथ, पहले आप उनको जस्टिफाई और वेरिफाई कर ले उसके बाद उसको आगे प्रकाशित करे। उम्मीद है आप मौका देंगे।
राहुल गुप्ता
बदायूं।

Vishesh Shukla mai bhi gawah hu sir un dino ka

Harshvardhan Tripathi अब जबकि ब्लागिंग लगभग न के बराबर है Yashwant Singh आपकी इस बात से पूर्ण रूप से असहमत। नए बच्चे दे दनादन ब्लॉग ठेल रहे हैं। गोता लगाइए। अजब-गजब मोती मिल जाएंगे। हां, ये जरूर है कि उस समय के हमारे आपके जैसे लोग कुछ ठंडा गए हैं। और आपने तो उसे आगे ही बढ़ाया है। बाकी सुखद समाचार।

Shailesh Bharatwasi आप चंद टिके रहनेवाले लोगों मे रहे, ये बड़ी और प्रेरणास्पद बात है।

Riyaz Hashmi वह गालियों का मंच था और संभवतः इसीलिए उसका नाम भड़ास रखा गया था, जिसका मैं भी शुरूआती हिस्सा था। खूब बहस होती थी उस मंच पर।

Roy Tapan Bharati आपका ब्लाॅग पहले से और ज्यादा लोकप्रिय होगा

Yashwant Singh हर्षवर्द्धन सर, संभव है नए लोग जो ब्लाग चला रहे हों, उसके बारे में मुझे पता न हो. या डाट काम में अति व्यस्तता के कारण मैंने खुद ही ब्लाग की दुनिया के बारे में ज्यादा खैर खबर नहीं ली, न रखी. आपसे संपर्क कर नए सक्रिय ब्लागरों को जोड़ता हूं. ये एक अच्छा संकेत है. आपने ठीक जानकारी दी. शुक्रिया.

Anil Sakargaye प्रेम है रे,,,,तुमसे,,
बोले तो,,,,लाड,,,,
कईयो को पढा,,,कईयो को ललकारा
पर तुम्से न जाने क्यों,,,प्यार हो गया,,,
तुम्हारी,,,आग को सलाम,,,
उस आग को,,,उस ज्वाला को,,जो
तुम्हने,,,,जलायी/ लगाई तो,,,??
पर वो,,,रौशनी बिखेर रही है,,
सलाम प्रणाम,,,सब कुछ,,

Neelabh Ashk यशवन्त, न बिकना कोई बड़ी बात नहीं, न बिकते रहना बड़ी बात है. क्योंकि जो कहता है कि मैं पैसे पर नहीं बिकता, वो साला पद पर बिक जाता है, प्रतिष्ठा पर बिक जाता है, प्यार पर बिक जाता है, मजबूरियों के नाम पर बिक जाता है, नेता की लटकन बनने पर बिक जाता है. सम्मान पर बिक जाता है. हमारे यहां गृहस्थ जीवन को क्षुरस्य धार यानी छुरे की धार पर चलने की मानिन्द ठहराया गया है, पत्रकार बड़ा गृहस्थ होता है, उसका परिवार सारा समाज होता है, उसका जोखिम खांडे की धार पर चलने के बराबर है. जो इसे पूरा कर सके वो असली वरना गां–ऊ तो बहुत-से हैं.

Mayank Saxena सब याद है…. 🙂

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बांग्लादेश में एक और ब्लॉगर को चाकुओं से गोद डाला

बांग्लादेश में एक और ब्लॉगर निलॉय नील का शुक्रवार को मर्डर कर दिया गया। एक साल में देश में यह चौथा अटैक है। हत्यारों ने ढाका के उपनगर गोरान में उसके अपार्टमेंट में घुसकर चाकुओं से गोद डाला।

गौरतलब है कि मई में बांग्लादेश सरकार ने इस्लामी आतंकी अंसारउल्लाह बांग्ला टीम पर बैन लगा दिया था। इस ग्रुप पर देश में सेक्युलर ब्लॉगर्स की हत्या करने का आरोप था। हालांकि निलॉय की मौत के पीछे इस ग्रुप के भूमिका की जानकारी नहीं मिली है। इससे पहले मई में ब्लॉगर अनंत बिजॉय दास की हत्या कर दी गई थी।

शुक्रवार दोपहर 1.45 बजे जुमे की नमाज के बाद हमलावरों के दो ग्रुप अपार्टमेंट के चौथे फ्लोर पर निलॉय के फ्लैट में घुस गए। निलॉय उस समय अपने दोस्त के साथ बैठे थे। उन्होंने उसके दोस्त को धक्का देकर निलॉय को घेरकर चाकुओं से काट डाला। 

निलॉय एक रेगुलर ब्लॉगर होने के कारण इस्लामी आतंकियों के निशाने पर था। वह अपने आर्टिकल्स के जरिए इस्लामी पार्टियों को बैन करने का मूवमेंट चला रहा था। उसने कई बार 1971 वॉर क्राइम के दोषियों को ज्यादा से ज्यादा सजा देने की भी मांग की थी।

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बांग्लादेश के ब्लॉगर हत्याकांड में फोटो जर्नलिस्ट गिरफ्तार

बांग्लादेश के ब्लॉगर अनंत बिजॉय दास हत्याकांड में पुलिस ने सोमवार को एक संदिग्ध फोटो जर्नलिस्ट को अरेस्ट किया है। पुलिसा का दावा है कि ब्लॉगर की हत्या में कथित तौर पर उस शख्स का हाथ है।

पुलिस ने बताया कि इदरिस अली को अदालत के आदेश के बाद पूछताछ के लिए 7 दिन की पुलिस कस्टडी में रखा गया था और बाद में उसे सीआईडी हेडक्वॉटर्स लाया गया। इदरिस एक राष्ट्रीय दैनिक अखबार और सैलहेट डेली के लिए काम करता है। सीआईडी के एसएसपी अब्दुल्ला हैल बाकी ने बताया कि अली पर काफी समय से नजर रखी जा रही थी। हालांकि उन्होंने ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। बांग्लादेश में तीसरे ब्लॉगर के तौर पर अनंत की हत्या हुई थी। वहीं इस मामले में बांग्लादेश ने इस्लामी संगठन अंसरउल्ला बांग्ला टीम (एबीटी) को प्रतिबंधित कर दिया, जिस पर अलकायदा से जुड़े होने और कई ब्लॉगरों की हत्या में शामिल होने का आरोप था।

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श्रीलंका में ब्लॉगर सम्मेलन : सात विभूतियों को परिकल्पना सम्मान

 ब्लॉगरों को रचनात्मक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से विगत पांच वर्षों से कार्यरत लखनऊ की प्रमुख सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्था परिकल्पना द्वारा विगत दिनों आयोजित पांच दिवसीय पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मलेन एवं परिकल्पना सम्मान समारोह श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो तथा सांस्कृतिक राजधानी कैंडी में पूरी भव्यता के साथ संम्पन हुआ। समारोह का उद्घाटन श्रीलंका के वरिष्ठ रंगकर्मी डान सोमरत्ने विथाना ने किया। मुख्य अतिथि रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व नगर विकास मंत्री नकुल दुबे और मानद अतिथि रहे निदेशक भारतीय डाक सेवा राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र जोधपुर के कृष्ण कुमार यादव तथा विशिष्ट अतिथि रहे उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ सुनील कुलकर्णी। 

इस सम्मलेन में मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, महाराष्ट्र, असम, दिल्ली, हरियाणा समेत उत्तर प्रदेश के कई ब्लॉगरों को सम्मानित किया गया। लखनऊ के जिन ब्लॉगरों को सम्मानित किया गया उनमे डॉ. रामबहादुर मिश्र, कुसुम वर्मा, डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, डॉ. अनीता श्रीवास्तव, ओम प्रकाश जयंत, माला चौबे, विश्वंभरनाथ अवस्थी आदि प्रमुख थे। 

नकुल दुबे ने कहा कि निश्चित रूप से परिकल्पना संस्था दुनिया की बेहतरी की दिशा में कार्य कर रही है। मुझे गर्व है कि यह मेरे शहर लखनऊ की संस्था है। आप सभी ब्लॉगरों से ये उम्मीद की जाती है आप दुनिया की बेहतरी के लिए परिकल्पना संस्था के साथ मिलकर काम करेंगे। साथ ही एक सुंदर और खुशहाल सहअस्तित्व की परिकल्पना को साकार करेंगे। ब्लॉग में समाज को बदलने की बड़ी ताक़त है, इसलिए आप सभी मिलकर ब्लॉग के माध्यम से हाशिये के समाज को मुख्यधारा में लाने हेतु आगे बढ़ें। नाट्यकर्मी डान सोमरत्ने विथाना ने कहा कि पूरी दुनिया ने ब्लॉग की ताक़त को महसूस किया है। 

परिकल्पना के संस्थापक संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने आयोजन के सन्दर्भ में कहा कि दिल्ली, लखनऊ, काठमाण्डू, नेपाल तथा थिम्पू, भूटान के बाद पांचवां अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो सांस्कृतिक राजधानी कैंडी एवं निगम्बो आदि नगरों में संम्पन हुआ है। 

रवीन्द्र प्रभात ने बताया कि संस्कृतिक दृष्टि से भारत और श्रीलंका में कई समानताएं हैं। भारत से निकलकर बौद्ध धर्म जहाँ श्रीलंकाई संस्कृति में विलीन हो गया, वही भारतीय नृत्य शैलियों का यहाँ व्यापक प्रसार हुआ। श्रीलंका के शास्त्रीय संगीत चीनी, जापानी, भारतीय और इंडोनेशिया के संगीत के अधिक समीप हैं। यहाँ अनेकानेक नृत्य शैलियाँ प्रचलित हैं, जो नाटक से जुडी हुई है। इसमें रामायण का महत्वपूर्ण स्थान है। श्रीलंका का भारतीय दर्शन, धर्म, अध्यात्म में विशेष महत्व है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के क्रम में सम्मान समारोह, आलेख वाचन, चर्चा-परिचर्चा में देश के कई राज्यों एवं श्रीलंका के ब्लॉगरों तथा साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया। उल्लेखनीय है कि ब्लॉग, साहित्य, संस्कृति और भाषा के लिए प्रतिबद्ध परिकल्पना विगत चार वर्षों से ब्लॉग लेखन को बढ़ावा दे रही है। इस आयोजन में संगोष्ठी के तीन महत्वपूर्ण सत्र आयोजित हुए जिनका मुख्य फोकस ब्लॉग के माध्यम से दक्षिण एशिया में शान्ति सद्भावना की तालाश तथा दक्षिण एशिया में भाषाई सद्भावना तथा साहित्यिक संस्कृतिक आदान-प्रदान रहा।

सम्मान समारोह एवं परिचर्चा सत्र का आयोजन श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो के कोणकोर्ड  ग्राउंड सभागार में संम्पन हुआ। सम्मान समारोह के बाद परिचर्चा के दो सत्र आयोजित हुए। प्रथम सत्र की परिचर्चा का विषय था सृजनात्मक साहित्य में हिंदी ब्लॉग का योगदान। इस सत्र की अध्यक्षता कबीर कम्युनिकेशन की क्रिएटिव हेड डॉ. सर्जना शर्मा ने की तथा सञ्चालन लखनऊ के डॉ रामबहादुर मिश्र ने किया। 

मुख्य वक्ता प्रकाश हिन्दुस्तानी ने कहा कि ब्लॉगिंग के प्रारंभ में कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने टिप्पणी की थी कि इसके माध्यम से साहित्य का भला नहीं होगा। यही बात फिल्मो के सन्दर्भ में भी कही गयी थी लेकिन आज हम देखते हैं कि फ़िल्म और ब्लॉगिंग दोनों के माध्यम से हिंदी को प्रतिष्ठा मिली है। ब्लॉगिंग के माध्यम से अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास हुआ है। एक बात अवश्य है कि बहुत से ब्लॉगरों के कारण ब्लॉग पर स्तरहीनता का आरोप लगा है। एबीपी न्यूज मुंबई के वरिष्ठ संपादक जीतेन्द्र दीक्षित ने अपने महत्वपूर्ण शोध के माध्यम से विभीन्न आकडें प्रस्तुत करते हुए कहा की भारत में ५० हजार से अधिक ब्लॉग हैं। ११ करोड लोग फेसबुक से जुड़े है। उत्तर महाराष्ट्र विश्व विद्यालय जलगांव के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुलकर्णी ने ब्लॉगिंग  को एक शक्तिशाली माध्यम बताते हुए कहा कि ब्लॉग अभिव्यक्ति का ताकतवर माध्यम बनकर उभरा है। आतंकवादी भी इससे भयभीत हैं। यही कारण है कि बंगलादेश में अभिजीत राम और वशिकुर्ररहमान  जैसे  ब्लॉगरों की हत्या आतंवादी करते हैं। 

वरिष्ठ ब्लॉगर तथा निदेशक भारतीय डाक सेवा राजस्थान कृष्ण कुमार यादव ने कहा की ब्लॉग की लोकप्रियता इसी बात से सिद्ध होती है कि हर कोई ब्लॉग पर आना चाहता है। स्थापित साहित्यकार खतरा महसूस कर रहे हैं तथा ब्लॉगिंग की शक्ति को स्वीकार करके इसे अपना रहे हैं। वर्तनी का दोष, कट पेस्ट इसके नकारात्मक पक्ष हैं। सर्जना शर्मा ने कहा कि ब्लॉगिंग लेखन के लिए कार्यशालाओं की आवशयकता है क्योंकि इसके आभाव में संस्कार विहीन साहित्य आ रहा है। 

‘हिंदी ब्लॉग्गिंग की समृद्धि में महिलाओं का योगदान’ सत्र  की अध्यक्षता  डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने की। विषय प्रवर्तन करते हुए प्रसिद्ध ब्लॉगर आकांक्षा यादव ने कहा कि ब्लॉगिंग के क्षेत्र में एक चौथाई महिलाएं सक्रिय हैं। इनमें प्रायः पुरुष समाज की मानसिकता के विरुद्ध महिलाएँ लिख रही हैं। दहेज, घरेलू हिंसा, भ्रूण हत्याएं, देह विमर्श जैसे विषयों पर वे बेबाकी से लिख रही हैं। 

लखनऊ से प्रकाशित रेवांत पत्रिका की संपादक डॉ. अनीता श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएँ ब्लॉगिंग के क्षेत्र में दबंगई के साथ लिख रही हैं और वे पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ रही हैं। सुनीता प्रेम यादव ने कहा कि 16 करोड़ ब्लॉगरों में 25 प्रतिशत महिलाएँ बड़ी सक्रियता से साथ लिख रही हैं। डॉ. उर्मिला शुक्ल ने कहा कि हम हजारों मिल दूर बैठे मित्रों से तो बात कर लेते हैं किन्तु अपने घर बैठे सदस्यों से संवाद नहीं स्थापित कर पाते। डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएँ हर विधा में लिख रही हैं। 

तीसरा सत्र संगीत से संबंधित था जो एक शाम कुसुम शर्मा के नाम रहा। अवधी लोकगायिका कुसुम वर्मा ने अपने अवधी लोकगीतों के माध्यम से समा बाँध दिया। कुसुम वर्मा के साथ श्रीलंका के वादकों ने संगत दी। इस सत्र  में श्रीलंका के लगभग आधे दर्जन प्रतिभागियों ने भी प्रतिभाग किए जिसमें प्रमुख थीं सजिनी हंसिका विजेसेकरा, लियाङ्गे हिमालिका परेरा, हंसी एराण्डी, ड्यूमिनी समरकोन आदि। 

इसके अलावा 23 मई को श्री लंका की सांस्कृतिक राजधानी कैंडी में अंतर्राष्ट्रीय कविता सम्मेलन हुआ। जिसकी अध्यक्षता डॉ. सुभदा पाण्डेय ने की। कार्यक्रम में कुसुम  वर्मा, डॉ अनीता श्रीवास्तव, ओम प्रकाश जयंत, डा. अर्चना श्रीवास्तव, अंतर सोहेल, डॉ. राम बहादुर मिश्र, डॉ उर्मिला शुक्ल, डॉ सुनील कुलकर्णी तथा रवीन्द्र प्रभात की कविताओं को श्रोताओं ने सराहा। सञ्चालन डॉ. रामबहादुर मिश्र ने किया। 

23 मई से 25 मई तक रायपुर की डॉ. अल्पना देशपांडे और अदिति देशपांडे की कलाकृतियों की कैंडी और कोलंबो में लगी प्रदर्शनी भी सम्मेलन का मुख्य आकर्षण रही। इस अवसर पर ब्लॉगरों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र देकर एक निश्चित राशि के साथ सम्मानित किया गया। उदघाटन सत्र की अध्यक्षता रवीन्द्र प्रभात तथा संचालन संयुक्त रूप से डॉ राम बहादुर मिश्रा और सुनीता प्रेम यादव ने किया। अंत में कार्यक्रम के संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया।

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बांग्लादेश में एक और ब्लॉगर को नकाबपोशों ने मार डाला

बांग्लादेश में मंगलवार को एक ब्लॉगर की जान ले ली गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ब्लॉगर अनंत बिजॉय दास पर सिलहट शहर में नकाबपोश लोगों ने मांस काटने वाले चाकू से हमला किया। इस साल इस तरह की यह तीसरी घटना है। 

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि चार सशस्त्र हमलावरों ने उनपर तब हमला किया, जब वह रिक्शे से जा रहे थे। दास को अस्पताल ले जाया गया,  जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। बीडीन्यूज24 डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वह ‘गणजागरण मंच’ के कार्यकर्ता थे, जो इस्लामिक पार्टियों पर प्रतिबंध तथा युद्ध अपराधियों को मौत की सजा देने की मांग करने वाला एक मंच है।

वह एक ब्लॉग ‘मुक्तो मोना’ चलाते थे, जो तर्कवाद का प्रचार एवं कप्तरवाद का विरोध करता है। इस वेबसाइट को  दिवंगत ब्लॉगर अविजित रॉय ने शुरू किया था, जिन्हें फरवरी में ढाका विश्वविद्यालय के निकट मौत के घाट उतार दिया गया था। वहीं मार्च में एक और ब्लॉगर वशीकुर रहमान की ढाका में हत्या कर दी गई। इस महीने की शुरुआत में अल कायदा के भारतीय धड़े ने बांग्लादेश में ब्लॉगरों के हत्या की जिम्मेदारी ली थी और उन्हें ईश-निंदक करार दिया था।

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हेपेटाइटिस सी से पीड़ित ब्लागर अविनाश वाचस्पति को उनके बेटे ने पागल बताकर अस्पताल में कैद कराया

अविनाश वाचस्पति : मैं पागल हूं क्‍या… मेरी इकलौती पोती राव्‍या के पिता यूं तो मेरा बड़ा बेटा अंशुल वाचस्‍पति है पर उसने मुझे पागल मान लिया है… 9 अप्रैल 2015 को बतरा अस्‍पताल में एड‍मिट किए जाने पर डाक्‍टर शरद अग्रवाल और नरसिंग स्‍टाफ की सलाह पर मुझसे मिलकर समझाने की बजाय रस्सियों से मेरे हाथ पैरों इत्‍यादि को बांधने की अनुमति पर अपने हस्‍ताक्षर कर दिए। और, मैं रात भर अपने बेटे का इंतजार करके तड़पता रहा। वह घर में आराम से चैन की नींद लेता रहा। माबाइल पर गेम खेलता रहा। टीवी पर सुनता रहा राजनैतिक घटनाक्रम।

अब तो आपको मान लेना चाहिए कि मैं पागल हूं। यह सच्‍चाई बतरा अस्‍पताल से 16 अप्रैल 2015 को उसने मुझे बहुत शान से बताई और मैं खून के आंसू रोता रहा। अगर मुझे हेपे‍टाइटिस-सी जैसा खतरनाक रोग मिला तो इसमें मेरा क्‍या कसूर है। मेरी धर्मपत्‍नी का कहना है- ”आपने हमारे लिए जितना किया, उससे ज्‍यादा तो उनका हक बनता है। आपकी बीमारी में मेरी कोई जिम्‍मेदारी इसलिए नहीं बनती है क्‍योंकि रोग को लाने में हमारा कोई रोल नहीं है। आपके दोस्‍त तो आपकी मदद कर नहीं रहे हैं तो इससे आपकी लोकप्रियता का पता चलता है। फिर दोषी हम अकेले ही क्‍यों, हम न दें तो कोइ आपको दो रोटी के लिए नहीं पूछेगा, बात करते हो।”

ब्लागर अविनाश वाचस्पति के फेसबुक वॉल से.

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Open life threat to me from Modi’s dirty department

 

Dear Narendra bhai Hitler Modi

if you think that life threats to me and reporting of Idhar Udhar blog as spam due to which Google has disabled my ad sense account, will able to force me to stop writing against you, then you and your dirty department are living in fool paradise world. I don’t write articles just for the sake of earning from google ads. I have direct ads of Sujata Magazine and web designing also. Even if google close my blog, then also I have an option to create my own website.

I don’t care about my life as well and you may buy the main stream media but you can’t bid for the neutral platforms with your money and muscle power. Your life threats has inspired me even more to keep exposing you and your party. You may kill or arrest me tomorrow but I will let my pen to do all the talking. If you take the life of one blogger for writing against you then there will be thousands of bloggers tomorrow who can make your life hell.

Our real war has started from today and we are going to give you a real tough time from now onwards. Stop me if you can and take this as an open challenge from Idhar Udhar. One random guy has thrown this warning letter to my house today which is not in someone’s hand writing. He has cleverly typed this warning letter. Earlier, some people have spammed the blog due to which FB was reporting my blog link as a spam. They have deliberately added my blog link into adult content sites so that google can take action against my blog.

Divye Joshi

दिव्य जोशी

Blogger

www.idharudhar24x7.blogspot.in

divvejoshi@gmail.com

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