ऑक्सीजन मैन : सबकी मदद करने वाले बीवी श्रीनिवास हैं कौन?

अपूर्व भारद्वाज-

आक्सीजन मैन : दिल्ली में टिवटर पर आक्सीजन के लिए जब भी कोई मदद मांगता है तो एक आदमी का नाम कहीं न कही से मेंशन जरूर होता है वो नाम है श्रीनिवास बीवी …आक्सीजन के लिए तरसने वाली हर आँख को उनके चेहरे में एक उम्मीद। नजर आती है और वो अपनी जान की परवाह किये बगैर इस महामारी से लड़ रहे है और अकेले दम पर पूरा नेटवर्क खड़ा करके सिस्टम को सपोर्ट कर रहे है

कर्नाटक के एक बेहद साधारण परिवार में जन्मे श्रीनिवास एक गैर राजनीतिक बैकग्राउंड से आते है वो अपने दम पर संघर्ष करके छात्र राजनीति में आए और उनका कोई गॉडफादर भी नही था पहले NSUI औऱ अब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के रुप मैं वो युवा राजनीति के नए मापदंड रच रहे है जो युवा कहते है कि राजनीति बहुत बुरी फील्ड है उन्हें श्रीनिवास की अथक मेहनत और लगन देखने की आवश्यकता है

आज बीजेपी के मंत्री ,सांसद, औऱ कार्यकर्ता से लेकर विदेशी राजदूत तक श्रीनिवास की हैल्प मांग रहे है औऱ वो बिना किसी का धर्म, जाती और राजनीति देखे उनकी मदद किये जा रहे है और यह मदद पहली बार नही कर रहे है पहले लाकडाऊन जितनी मदद उन्होंने बेबस मजदूरों की थी उतनी तो शायद सोनू सूद जैसे सेलेब्रिटी ने नही की होगी किसान आंदोलन में उन्होंने धरती पुत्र अन्नदाता को भी अन्न खिलाया औऱ दिन रात भरी ठंड में उनकी सेवा की थी वो आज राजनीति में जमीनी काम करने वाले कार्यकर्ताओं के रोल मॉडल है

आज जब सारे राजनेताओं से लोगो की उम्मीद मर गई है ऐसे में श्रींनिवास एक उम्मीद जगाते है कि गौतम , गाँधी और भगतसिंह की धरती अभी बंजर नही हुई है अगर श्रींनिवास जैसे 100 औऱ युवा इस देश को मिल जाए तो यह देश इस महामारी को क्या हर समस्या से लड़कर जीत सकता है

हॉलीवुड में लोग सुपरमैन बैटमैन, स्पाइडरमेन और एवेंजर जैसे काल्पनिक सुपर हीरो को पूजते है आपके पास तो एक रियल सुपर हीरो है भारत के इस नए सुपर हीरो ऑक्सीजन मेन का स्वागत नही करोगे आप।


कृष्ण कांत-

जिस राहुल गांधी का सरकार में बैठे अहंकारी ‘पप्पू’ कहकर हमेशा मजाक उड़ाते हैं, उन्हीं राहुल गांधी के निर्देश पर अमल करके श्रीनिवास बी वी महामारी में मसीहा बन गए. श्रीनिवास से एनडीटीवी की नगमा ने पूछा कि आप महामारी में मसीहा बनकर उभरे हैं, ये सब कैसे कर पा रहे हैं?

श्रीनिवास ने बताया, मार्च के पहले हफ्ते में हमारे संगठन की बैठक हुई थी. तभी राहुल गांधी ने कहा था कि महामारी के चलते बड़ा संकट आने वाला है. आप लोग तैयारी रखें. तभी इस बारे में एक रिजोलयूशन पास हुआ. इसके बाद हमने अपने संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ तैयारी शुरू कर दी थी. हमने वॉट्सएप ग्रुप बनाए. सोशल मीडिया पर नेटवर्क बनाया. जब तक जरूरत की चीजें बाजार में उपलब्ध थीं, तब तक बाजार से खरीदा. जब बाजार में कमी हुई तो नोडल अधिकारियों से मदद ली और जरूरत की चीजें लोगों तक पहुंचाई.

भारत में महामारी आने से पहले राहुल गांधी, मनमोहन सिंह, मेडिकल एसोसिएशन और तमाम एक्सपर्ट ने समय समय पर अपनी ओर से सही सलाह दी थी और अब भी दे रहे हैं. लेकिन अहंकार में डूबी सरकार ने न तब किसी की सुनी, न अब किसी की सुन रही है. परंपरा रही है कि संकट के समय सभी पार्टियां और सरकारें एकजुट हो जाती हैं, लेकिन इस बार वह परंपरा टूट गई है.

संकट के समय ही नेतृत्व की परीक्षा होती है. 56 इंच का अहंकार त्यागना होता है. कुशल सेनापति वह नहीं होता जो ये प्रचार करे कि वह 18 घंटे काम करता है. कुशल नेतृत्व वह होता है जो अपनी शक्ति को सही ढंग से संगठित करे, सही नेतृत्व करे और कम से कम नुकसान में बाजी जीत ले!
बात राहुल गांधी या किसी दूसरे नेता की नहीं है. बात उस नेतृत्व और जिम्मेदारी की है कि आप सही समय पर सही निर्णय लेते हैं या सत्तालोभ में अंधे होकर साल के 365 दिन रैलियां करते रहते हैं?

श्रीनिवास आगे चलकर अच्छे नेता बनेंगे, देश का भला करेंगे या दिन भर झूठ बोल-बोलकर देश को चूना लगाएंगे, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. लेकिन इस समय जब लोग सड़कों पर मर रहे हैं और सरकार गायब है, जब सत्ताधारी पार्टी सिर्फ सत्ता विस्तार करने में जुटी है, तब बिना किसी अहम पद और सीमित संसाधनों में हजारों लोगों की जान बचाकर श्रीनिवास ने एक उदाहरण पेश किया है.
बाद में इस काम के लिए और भी तमाम लोग सामने आए. मानवता की सेवा कर रहे ये सभी भले लोग सम्मान के पात्र हैं.

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