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बिना जांच DBT खातों में पहुंचे हज़ारों करोड़ रुपये: CAG रिपोर्ट में खुलासा

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम का सबसे बड़ा दावा बताया गया, लेकिन अब उसी सिस्टम पर देश की सर्वोच्च ऑडिट संस्था CAG ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, बिना समुचित सत्यापन और जांच के हजारों करोड़ रुपये सीधे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए, जिनका न तो स्पष्ट हिसाब है और न ही ठोस निगरानी व्यवस्था। वोट बैंक की राजनीति के बीच योजनाओं की रकम बांटने की होड़ में वेरिफिकेशन को दरकिनार कर देना सरकार की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े करता है—और चौंकाने वाली बात यह है कि यह आरोप किसी विपक्षी दल या अखबार का नहीं, बल्कि खुद CAG की आधिकारिक रिपोर्ट का है।


इस प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार पांडेय का ट्वीट-

डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर में हजारों करोड़ रुपये बिना किसी verification के पहुँच गए हैं, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। यह किसी अखबार ने नहीं, सीधे CAG ने कहा है।

साफ़ है, वोटों के लिए हजारो करोड़ लुटाते समय verification तक नहीं किया जा रहा। 2014 के पहले मीडिया इस पर बवाल कर देता, अब तो सब मास्टरस्ट्रोक है।


द क्रेडिबल न्यूज का पोस्ट-

बिना जांच के डीबीटी खातों में पहुंचे हज़ारों करोड़ रुपये: CAG रिपोर्ट।

CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि DBT योजना के तहत बिना उचित जांच-पड़ताल और आवश्यक सत्यापन के हजारों करोड़ रुपये खातों में ट्रांसफर किए जा रहे हैं।

CAG ने इसकी वजह डेटा इंटीग्रेशन की कमी, विभागों के बीच तालमेल का अभाव और कमजोर वेरिफिकेशन सिस्टम को बताया है।

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