
आज के अखबारों में टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड को छोड़कर लिखने के लिए कुछ खास नहीं था। पर इंडियन एक्सप्रेस में शिन्दे के हवाले प्रधानमंत्री की सलाह के बाद मुझे हिन्दुस्तान टाइम्स में उनके इंटरव्यू का शीर्षक याद आया। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक था कि उन्हें (भाजपा को) चुनाव जीतने के लिए वोट बटोरू कुछ करने की जरूरत ही नहीं है। अगर ऐसा है तो प्रधानमंत्री हिन्दू मुसलमान और कांग्रेस की अनुचित आलोचना, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का झूठा दावा क्यों कर रहे हैं। ठीक है कि आम लोग नहीं समझेंगे पर संपादक और पत्रकार तो समझ ही रहे हैं कि उनके कहने का मतलब यह है कि अंबानी-अडानी के पास कालाधन है, उसे बोरियों में टेम्पो पर ढोया जाता है और राहुल गांधी की मांग के बावजूद जांच नहीं हो रही है। यही नहीं, नकद बरामद होने पर उनका कहना कि नोटों के पहाड़ मिल रहे हैं – सवाल उठाता है कि ये बने कैसे? दस साल तो उन्हीं की सरकार थी और ना खाऊंगा ना खाने दूंगा का वादा था। क्या एक दिन में नोटों का पहाड़ बन सकता है और अगर नहीं तो नोट इकट्ठा कैसे हुआ, सूचना क्यों नहीं मिली?
संजय कुमार सिंह
आज टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, मतदान का प्रतिशत कम होने से परेशानी विपक्ष को होनी चाहिये, एनडीए 400 पार करेगा : (अमित) शाह। मोटी समझ यही है कि जिसे कुछ करना होगा वह वोट डालेगा – सरकार बदले या जो है उसी को रहने दे। जो वोट नहीं डाल रहा है उसकी दिलचस्पी इसमें नहीं है कि सरकार रहे या जाये। वोट का प्रतिशत कम होने का मतलब है जो नहीं आये वो यही मानते हैं कि सरकार रहे या जाए, उन्हें फर्क नहीं पड़ता है। जो आये वो सरकार बदलना चाहते हैं या चाहते हैं कि वही रहे। दोनों ही स्थितियों में खतरा सरकार के लिए है। उसे बनाये रखने वाले आ नहीं रहे हैं और जो आये हैं वो हटाना चाहते हैं। फिर भी अगर किसी को पता है कि वोट उसे ही मिला है तो उसकी पहुंच ईवीएम तक होगी। जो संभव नहीं है। इसलिये झूठ है।
इसका पता इंडियन एक्सप्रेस के एक शीर्षक से लगता है। शीर्षक है, “मोदी जी ने कहा बहुत निश्चित मत रहिये, उठिये और पहले वोट कीजिये : (एकनाथ शिन्दे)”। समझना मुश्किल नहीं है कि चार सौ पार का यकीन हो तो ऐसा कहने की जरूरत नहीं है और चार सौ पार ही लक्ष्य है तो – कारण क्या वही है जो भाजपा ने कहा है, जो शंका जताई गई है और जिसपर सफाई दी जा रही है। जाहिर है वह नहीं है और इसलिए एक-एक सीट जीतने की कोशिशें नजर आ रही हैं। दिल्ली की सीटें उसका उदाहरण है। मनोज तिवारी सबसे सुरक्षित माने गये थे। इंडिया गठबंधन ने उनके मुकाबले कन्हैया को उतारकर फंसा दिया है।
इसलिए चार सौ पार का दावा हवा हवाई है। यह भी कि मतदान कम होने से फर्क नहीं पड़ता है। इसका पता दूसरे अखबारों के आज के शीर्षक से लगता है। आज द टेलीग्राफ छोड़कर सभी अखबारों में मतदान का प्रतिशत ही लीड है। आइये उसे भी देख लें। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक हिन्दी में इस प्रकार होगा – “(मतदान में) कमी जारी : 2019 के 69.6% के मुकाबले चौथे चरण में 67.3% मतदान। श्रीनगर में मतदान सिर्फ 38%, पर 1996 से सर्वश्रेष्ठ। अमर उजाला ने मु्ख्य शीर्षक का भाग है, 370 हटने के बाद श्रीनगर में हुआ रिकार्ड मतदान। उपशीर्षक है, “चौथा चरण : सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में 78.44 फीसदी – सबसे कम : श्रीनगर में 37.98 फीसदी। इस तरह, ऊपर लिखा है श्रीनगर में रिकार्ड मतदान और अगली ही लाइन में लिखा है सबके कम श्रीनगर में 37.98 फीसदी। स्पष्टीकरण खबर के मैटर में सबसे छोटे फौन्ट में सामान्य खबर की तरह है।
यह कम को ज्यादा बताने का अजर अमर तरीका है। पत्रकारीय दृष्टि से इसकी कोई जरूरत नहीं है लेकिन क्रिकेट का मैच दिखाते हुए विज्ञापन के किसी होर्डिंग या बैनर पर कैमरा रुक ही सकता है। अमर उजाला का मुख्य शीर्षक है, आंध्र, बंगाल में हिंसा के बीच 67.55% वोटिंग, 370 हटने के बाद श्रीनगर में हुआ रिकार्ड मतदान। इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है, “चौथे चरण में भी मतदान कम हुआ, पर अंतर घटा है : 67.25% मतदान”। फ्लैग शीर्षक है, “10 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों में 96 लोकसभा क्षेत्र।” इस खबर का इंट्रो है, जम्मू और कश्मीर के अलावा उड़ीशा और तेलंगाना में मतदान थोड़ा बढ़ा। द हिन्दू का शीर्षक है, “लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में 67.7% मतदान दर्ज”। उपशीर्षक है, अब 379 सीटों के लिए मतदान पूरा हुआ; 78.44 प्रतिशत का सबसे ज्यादा मतदान पश्चिम बंगाल में दर्ज किया गया, सबसे कम 37.98 प्रतिशत जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर में, हिंसा और ईवीएम में गड़बड़ी की रिपोर्ट कुछ राज्यों में रिपोर्ट की गई।
हिन्दुस्तान टाइम्स में सीधा सपाट शीर्षक है। ना कोई फ्लैग शीर्षक, ना उपशीर्षक और ना कोई इंट्रो। चार कॉलम में दो लाइन का शीर्षक है, “चौथे चरण में मतदान 67.3% :379 सीटों की किस्मत सील”। इसके साथ तीन सिंगल कॉलम की लगभग बराबर खबरें हैं जो क्रम से तीन जानकारी देती हैं। 1) मतदाताओं को परेशान करने के लिए हैदराबाद में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ मामला दर्ज 2) श्रीनगर में तीन दशक में सबसे ज्यादा लोग मतदान के लिए निकले और 3) पश्चिम बंगाल चुनाव में मामूली हिन्सा। नवोदय टाइम्स में मुख्य शीर्षक है, 67.71 प्रतिशत मतदान। फ्लैग शीर्षक है, “लोकसभा चुनाव : चौथा चरण”। उपशीर्षक है, “पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 78.44 फीसदी मतदान।” इसके साथ की एक खबर का शीर्षक है, बंगाल में हिंसा, दिलीप घोष के काफिले पर हमला। कहने की जरूरत नहीं है कि कम मतदान का मामला पर्याप्त गंभीर है। और इसीलिए लीड के शीर्षक में है। पश्चिम बंगाल में मतदान ज्यादा है और हम देख रहे हैं कि वहां भाजपा सी टक्कर दे रही है और संदेशखाली का उदाहरण है। ऐसे में मतदान कम होने का मतलब अगर यह लगाया जाये कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने मतदान नहीं किया है तो भाजपा की हार तय है। लेकिन तब अमित शाह 400 पार का दावा नहीं करते। कार्यकर्ता कम मतदान कर रहे हैं इसकी जानकारी तो उन्हें होगी ही, हमें नहीं हो सकती है। वोट देने वालों ने किसे वोट दिया यह तो 4 जून को ही पता चलेगा उससे पहले का दावा ईवीएम पर भरोसा तो हो ही सकता है, कार्यकर्ताओं और डरने वालों को डराने के लिए भी हो सकता है ताकि लोग भाजपा हार रही है मानकर काम करना न शुरू कर दें। लेकिन एक बात तो स्पष्ट है हिसाब एक-एक सीट का हो रहा है और दावा 400 पार का है जो परस्पर विरोधी है।
बहुत सारे सवाल हैं, जवाब नहीं है और सरकार अपना काम बताने की बजाय विपक्ष की निराधार आलोचना कर रहे हैं। प्रधान प्रचारक जो बोल रहे हैं, जैसा प्रचार कर रहे हैं उसका स्तर प्रधानमंत्री तो छोड़िये, स्टार प्रचारक के स्तर का नहीं है। रही-सही कसर गोदी मीडिया पूरी कर दे रहा है। जो आरोप तो लगा रहा है सवाल नहीं कर रहा है। यही नहीं, विपक्ष को स्थान नहीं दे रहा है। ऐसी खबरों में आज एक हिन्दुस्तान टाइम्स में है। इसका शीर्षक है, इस खबर के अनुसार राहुल गांधी ने रैली में लोगों से कहा कि उनका वेतन 2.5 लाख है और रोज लाख रुपये का सूट पहनते हैं। एक दिन में तीन बार सूट बदलते हैं। एक सूट 50 हजार से लाख रुपये का आता है और कैसे वे रोज एक लाख रुपये का सूट पहनते हैं। चुनाव आयोग ने पूरी आजादी दे रखी है। और हो सकता है इस आरोप के लिए कांग्रेस को नोटिस जारी हो जाये।


