चंद्रशेखर पर रासुका लगाकर प्रदेश सरकार ने अपना सवर्ण-सामंती चेहरा उजागर किया

लखनऊ : रिहाई मंच ने भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर पर योगी सरकार द्वारा रासुका लगाने को लोकतान्त्रिक आवाज़ों का गला घोटना करार दिया है. मंच ने कहा है कि पूरे देश में भाजपा के शासन काल में दलितों पर उत्पीडन बढ़ा है और अब तो सरकार अपने शासन-प्रशासन के जरिये खुद दलितों की आवाज़ उठाने वालों के खिलाफ खुलकर सामने आ गयी है. मंच ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सवर्ण- सामंती सरकार का दलित विरोधी चेहरा अब खुलकर सामने आ गया है.

रिहाई मंच नेता और भीम आर्मी डिफेन्स कमेटी सदस्य अनिल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगातार सांप्रदायिक तनाव और हिंसा हो रही है जिसमे भाजपा और संघ परिवार के लोग शामिल है, उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश की पुलिस एफआईआर तक दर्ज नही कर रही है. वहीँ दूसरी तरफ दलितों के लिए इन्साफ की आवाज़ उठाने वाले चंद्रशेखर पर रासुका लगाकर प्रदेश की सवर्ण-सामंती सरकार इंसाफ का गला घोटने का काम किया है. उन्होंने कहा कि शब्बिरपुर में मुख्यमंत्री की जाति से ताल्लुक रखने वाले दलितों का घर जलाने वालों पर उत्तर प्रदेश की पुलिस ने कोई कड़ी कार्यवाही तक नही की और दूसरी तरफ दलित जाति के लोगों की जाति पूछ –पूछकर मुकदमा किया गया और अब भीम आर्मी के नेता पर रासुका लगाया जा रहा है जिससे साफ़ हो गया है कि प्रदेश की सवर्ण सामन्ती सरकार चंद्रशेखर को लम्बे समय तक जेल में फर्जी ढंग से फंसाकर रखना चाहती है. जिसको प्रदेश की अमन और इंसाफ पसंद आवाम बर्दाश्त नही करेगी.

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