
संजय कुमार सिंह
अमर उजाला ने आज प्रधानमंत्री की सेवा, भक्ति और प्रशंसा का रिकार्ड बनाया है। पहले पन्ने पर प्रकाशित इस फोटो के जरिये ‘पीएम से लगाव’ का यह प्रदर्शन न तो असामान्य है और न खबर। अव्वल तो रक्षा बंधन भाई-बहन का त्यौहार है और भाई बहन में उम्र का इतना अंतर नहीं होता है। सामान्यतया 75 साल के मनुष्य के नाती पोते भी कॉलेज में होते हैं। इतने बड़े नहीं होते हैं। जिन्हें न हो, उनके नहीं होंगे और वह चाहे तो दूध पीते बच्चे को गोद ले, पर वह उसका भाई-बहन नहीं होगा। रक्षा बंधन पर स्कूली बच्चों से राखी बंधवाना और किसी बच्चे का इस तरह चूम लेना खबर नहीं है। वैसे भी, स्नेह देखकर यह लगाव बहुत सामान्य है और इतनी बड़ी खबर नहीं। खासकर तब जब 26 जनवरी 2013 को स्टारडस्ट अवार्ड्स समारोह में अमिताभ बच्चन को स्टार ऑफ द सेन्चुरी पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था तो मंच पर अमिताभ बच्चन को उनके गाये ‘जुम्मा चुम्मा दे दे’ (फिल्म हम, 1991) की चर्चा चली तब उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में पूछा, “किसको चुम्मा देना है?” सामने बैठी बॉलीवुड की कई अग्रणी अभिनेत्रियाँ लगभग दौड़कर मंच पर आ गईं और लाइन लग गई। सबने एक-एक कर उनसे गाल पर चुम्मा लिया। मुझे याद नहीं है कि वह घटना पहले पन्ने की खबर बनी थी। अगर यह मामला उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है या अलग है तो मैं जानकारी चाहूंगा या यही कहूंगा कि यह किसी बच्चे के लिए तो बड़ी खबर हो सकती है लेकिन जो दुनिया जानता है, देख चुका है उसे इसमें कुछ खास नजर नहीं आता। संपादक जी विचार करें।
आज जब ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान छह पाकिस्तानी विमान गिराने की विचित्र घोषणा पहले पन्ने पर छाई हुई है तब यह खबर दब गई है कि दिल्ली में बारिश से 300 उड़ानें प्रभावित हुईं। सात लोग मर गये। कुछ अखबारों में यह संख्या 180 ही है। उड़ान में औसत देरी 17 मिनट की रही। कुछ उड़ानें रद्द भी हुई। यह देरी बारिश के कारण किसी तकनीकी खराबी या कमी के कारण नहीं हुई पर जिन कारणों से हुई उनमें रनवे या टैक्सीवे पर पानी भर जाना शामिल है। उड़ान प्रभावित होने का कारण बारिश की वजह से संचालन की दिक्कतें ही रहीं। यहां यह उल्लेखनीय है कि, 21 मई 2025 को दिल्ली से श्रीनगर जा रहे इंडिगो की फ्लाइट (संख्या 6E‑2142) को मुश्किल स्थिति में भी पाकिस्तान के वायु क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी। हालांकि, अंततः विमान ने श्रीनगर में सुरक्षित पर इमरजेंसी लैंडिंग की। यूट्यूबर और पायलट गौरव तनेजा (फ्लाइंग बीस्ट) ने बताया कि पायलट ने कम गंभीर आपातस्थिति की स्थिति की सूचना देने के लिए “पैन पैन” (PAN PAN) की घोषणा की थी। इससे गंभीर स्थिति की सूचना “मेडे” (MAYDAY) से होती। समझा जाता है कि “मेडे” कहने से पाकिस्तान शायद अपने एयरस्पेस में प्रवेश की की अस्थायी अनुमति देता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ या इसकी जरूरत नहीं पड़ी। चूंकि अब उन्हीं दिनों पाकिस्तानी विमान मार गिराने और उसे सार्वजनिक नहीं करने का मामला है तो मैं पहले बताता हूं कि उस दिन क्या हुआ था, पाकिस्तानी विमान कब मार गिराने का दावा किया गया है और फिर देखूंगा कि आज अखबारों में क्या छपा है और उसमें क्या नहीं है या इस खबर अथवा सूचना से कौन से सवाल पैदा होते हैं या यह घोषणा अब क्यों की गई होगी।
पहले 21 मई 2025 की कहानी। जब फ्लाइट पठानकोट क्षेत्र से गुजर रही थी, तो अचानक ओलावृष्टि के कारण विमान भयंकर टर्बुलेंस (मुश्किल) में घिर गया। इस स्थिति में पायलट ने वैकल्पिक मार्ग के लिए अनुरोध किया। पायलट ने सबसे पहले भारतीय वायु सेना के नॉर्दर्न कंट्रोल से संपर्क कर अनुरोध किया कि उन्हें ओला वृष्टि या टर्बुलेंस से बचने के लिए रूट में बदलाव की अनुमति दी जाए ताकि वह पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र की ओर जा सके। तबकी खबरों के अनुसार यह अनुमति नहीं मिली थी। इसके बाद पायलट ने लाहौर एटीसी से संपर्क कर पाकिस्तानी वायु क्षेत्र से गुज़रने की अस्थायी अनुमति मांगी, ताकि वह तूफान से बच सके। इस अनुरोध को नहीं माना गया। यह भारत में पंजीकृत विमानों को पाकिस्तानी वायु क्षेत्र में प्रवेश से रोकने के किसी नियम या कारण से किया गया था। परिणामत: पायलट ने दिल्ली लौटने के बजाय सबसे सुरक्षित रूट पर उड़ान जारी रखी। लिहाजा विमान को अत्यंत खतरनाक टर्बुलेंस से गुजरना पड़ा। इसमें ऑटोपायलट डिसएंगेज हुआ, गति में भारी उतार-चढ़ाव आया और कई सिस्टम अलर्ट्स ट्रिगर हुए। डीजीसीए ने मामले की जांच की और कहा कि भारतीय वायु सेना ने और पाकिस्तान – दोनों ने रूट बदलने की अनुमति नहीं दी जबकि आईएएफ ने विमान को रडार वेक्टर्स और ग्राउंड स्पीड निर्देश देकर सुरक्षित लैंडिंग में मदद की।
अब आज की खबर – ज्यादातर अखबारों की खबर, ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान मार गिराये छह विमान तो गिड़गिड़ाया पाकिस्तान (अमर उजाला) या भारतीय वायुसेना के प्रमुख का बयान, हमने पाकिस्तान के पांच जेट और एक अवाक्स विमान गिराये थे (दैनिक भास्कर) जैसे हैं। शुरू में मुझे लगा था कि यह हेडलाइन मैनेजमेंट का हिस्सा है और मुख्य खबर, राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस, दावे मतदाता सूची और वोट चोरी के साथ वोट चोरी से सरकार बनाने का आरोप तथा डिजिटल डाटा देने पर यह साबित करने की चुनौती कि सरकार वोट चोरी से बनी है, से ध्यान हटाने के लिए है। कल यह खुलासा होने के बाद से सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चा भी है। इतने समय बाद अब इस खुलासे या दावे का मतलब हेडलाइन मैनेजमेंट ही लगता है। लेकिन आज खबर से पता चला कि 9 अगस्त 2025 यानी बीते कल भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की प्रेस कांफ्रेंस में बताया गया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान और एक बड़ा सैनिक विमान गिराया गया था। यह जानकारी इसी दिन बेंगलुरु में दिए गए एलएम कात्रे स्मारक व्याख्यान के समय सार्वजनिक की गई थी। मुझे नहीं लगता कि ऐसी जानकारी किसी व्याख्यान में सार्वजनिक करने के बाद प्रेस कांफ्रेंस करना उचित है। कायदे से यह जानकारी इतने समय बाद सार्वजनिक करना ही रहस्यमयी है और अगर अब तक सार्वजनिक नहीं की गई तो अब करने का मकसद हमेशा संदेह में रहेगा भले युद्ध या ऑपरशन सिन्दूर के समय यह खुलासा नहीं किये जाने का कारण यह तर्क हो कि, सैन्य अभियान से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ अक्सर सुरक्षित रखी जाती हैं ताकि दुश्मन को ऑपरेशन की रणनीति या ताकत का पता न चले। खासकर तब जब मिसाइलों या हथियारों की क्षमताओं का खुलासा हो — इससे विरोधी देश अपनी रणनीति बदल सकते हैं। कभी-कभी ऐसी घटनाओं को राजनीतिक तौर पर नियंत्रित तरीके से सार्वजनिक किया जाता है ताकि तनाव कम रहे, शांति प्रक्रिया बनी रहे, या अंतरराष्ट्रीय दबाव न बढ़े। पर अब इस घोषणा का समय निश्चित रूप से संदिग्ध है।
यह दिलचस्प है कि अभी भी यह नहीं बताया गया है कि ये विमान कब (किस तारीख को) गिराये गये थे और प्रेस कांफ्रेंस तथा सवाल पूछने के मौके से वंचित देश की मीडिया ने जो कहा गया उसे जस का तस परोस दिया है। मैंने चैट जीपीटी से पूछा, आज के अखबारों में ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान पाकिस्तान के विमान मार गिराने की जो खबर छपी है वह किस तारीख की बताई गई है अथवा हो सकती है। मुझे जो जवाब मिला वह इस प्रकार है, ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान पाकिस्तान का विमान मार गिराने की खबर की तारीख 9 अगस्त 2025 को दी गई थी। उस दिन भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने ऑपरेशन सिन्दूर के तहत पाकिस्तान के छह विमान मार गिराए जाने की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी थी। यह कार्रवाई एस‑400 मिसाइल सिस्टम द्वारा लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से की गई — जो भारत का अब तक का सबसे लंबा सतह-से- हवा में मार गिराने वाला रिकॉर्ड है। एयर मार्शल एपी सिंह ने कहा और टाइम्स ऑफ इंडिया में हाइलाइट किया गया है, (पाकिस्तान का जो नुकसान हुआ) वह एक बड़ा विमान था जो या तो एलिन्ट (इलेक्ट्रॉनिक इंटेल) एयरक्राफ्ट या कोई एईडब्ल्यूएंडसी (एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल) विमान हो सकता है। इसी में आगे लिखा है, ….. यहां (जकोबाबाद में) एफ 16 विमानों का हैंगर है। इसका आधा नष्ट किया जा चुका है। मुझे यकीन है कि वहां कुछ विमान थे जो क्षतिग्रस्त हुए होंगे। आगे कहा गया है, बहुत स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति थी ….. हम पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया…हम, सेना ने, तय किया कि हम क्या करना चाहते हैं।
मुझे नहीं लगता कि यह भारत के वायुसेना प्रमुख का बयान है जो उन्होंने अपनी इच्छा से किसी स्मारक व्याख्यान में जो कुछ कहा उसका भाग है या किसी तरह उससे संबंधित है। इसीलिये टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे हाईलाइट भी किया है। खबरों से वाकिफ रहने वाला कोई भी आदमी समझ जायेगा कि यह पूर्व में इससे संबंधित या ऐसी खबरों से हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिये कहा-कहलवाया गया हो सकता है। जो भी हो यह पहले के बयानों की ही तरह है और मुझे याद नहीं है कि यह बयान सरकारी था या राजनीतिक। स्थिति यह लगती है ये पाकिस्तानी विमान हवा में मारकर नहीं गिराये गये हैं बल्कि किसी हैंगर पर कथित सफल हमले में हुए नुकसान का अनुमान है और यह वैसा ही है जैसा बालाकोट हमले के समय किया गया था। आपको याद होगा कि पुलवामा आतंकी हमले (14 फरवरी 2019) के जवाब में 26 फरवरी 2019 को बालाकोट हवाई हमला हुआ था जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घुसकर मारूंगा का प्रचार किया था। भारत ने दावा किया कि इस एयरस्ट्राइक का उद्देश्य जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाना था। भारत के अनुसार, बालाकोट (जो पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख्वा प्रांत में स्थित है) में जैश-ए-मोहम्मद का एक बड़ा आतंकी प्रशिक्षण शिविर था। भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार करके बालाकोट में बमबारी की। लगभग 1000 किलो वजन वाले बम (जैसे कि स्पाइस 2000) का इस्तेमाल किया गया था। यह हमला आधी रात के बाद किया गया और कुछ ही मिनटों में मिशन पूरा कर लिया गया था।
भारत सरकार के दावे और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में 300 आतंकवादी मारे गए। उस समय भी कहा गया था कि यह “गैर-सैन्य” हमला था। यानी इसका लक्ष्य आम नागरिक या पाकिस्तानी सेना नहीं, बल्कि आतंकी संगठन थे। पाकिस्तान ने भारतीय हमले को स्वीकार किया था लेकिन दावा किया कि इसमें कोई नुकसान नहीं हुआ और बम एक खुले मैदान में गिरे। अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को घटनास्थल के दौरे पर ले जाया गया था और कहा गया था कि वहां कोई “कैंप” नहीं था और कोई “कैजुअल्टी” नहीं हुई। किसी भी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था ने 300 आतंकियों के मारे जाने के भारत के दावे की पुष्टि नहीं की। वैसे भी ये दावे वहां उस समय चार्ज किये जा रहे फोन की संख्या के आधार पर किये गये थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सैटेलाइट इमेज विश्लेषकों ने संकेत दिये थे कि इमारतें क्षतिग्रस्त नहीं हुई थीं। इससे हताहतों की संख्या पर सवाल खड़े हुए। पर सब ऐसे ही रह गया। लोग भूल गये। अब फिर वैसे ही नये दावे कर दिये गये। वह भी इसलिये कि इस बार तथाकथित ऑपरेशन सिन्दूर और लगभग वैसे ही दिखावटी हमले के बाद ज्यादा नुकसान की खबरें थीं। पिछली बार एक कौव्वा मारकर तीन सौ आतंकी मारने का दावा था इस बार युद्ध में भारत के विमान गिराये जाने की खबरों के बाद पाकिस्तान के विमान गिराने का दावा किया गया है। आप जानते हैं कि भारत में पाकिस्तानी टीवी चैनल्स वैसे नहीं देखे जा सकते हैं और उन दिनों पाकिस्तानी यू ट्यूब चैनल भी प्रतिबंधित कर दिये गये थे। अब वे फिर से चलने लगे हैं। समाचार चैनलों पर पहले स प्रतिबंध है जो अब भी जारी है। आम दर्शकों के पास इन दावों की पुष्टि या खंडन के लिए कोई दूसरा स्रोत लगभग नहीं है।
हालत यह है कि कल के दावे के बाद मैंने यह जानने की कोशिश की कि क्या विमान गिराने की कार्रवाई तब हुई थी जब भारतीय यात्री विमान ओलावृष्टि में फंसा था? अब पता चल रहा है कि गिराये गये पाकिस्तान के विमान हवा में नहीं थे और अनुमान है कि वे एक हैंगर में थे जिसपर भारत का सफल हमला होना बताया जा रहा है। और आज इतनी बड़ी खबर इतनी प्रमुखता से छपी है। वह भी तब जब महीनों बाद यह नहीं बताया गया है कि सभी विमान एक साथ या अलग-अलग किस तारीख को गिराये (या नष्ट किये) गये। आप जानते कि ऑपरेशन सिन्दूर की शुरुआत 7 मई 2025 की आधी रात के बाद भारतीय समय से 01:05 से 01:30 तक आतंकी ठिकानों पर हमले से हुई थी। ‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट में 8 से 10 मई के बीच पाकिस्तान की वायु सेना के कुछ विमान खोने की खबर है, हालांकि तारीख नहीं दी गई है। भारतीय सेना ने 12 मई 2025 को एक मिराज विमान का मलबा सार्वजनिक रूप से दिखाया था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ कि वह विमान कब गिराया गया था। वैसे, यह ऑपरेशन के दौरान ही हुआ माना जाता है। जो भी हो, अखबारों ने विमान गिराने की खबर पहले नहीं दी, अब तारीख नहीं बताई है, यह नहीं बताया है कि सभी विमान हैंगर में ही नष्ट हुए या कुछ हवा में भी मारकर गिराये गये। उनके पायलट कहां गये या थे कि नहीं और यह तो नहीं ही बताया गया है कि भारत के कितने विमान गिराये गये या एक भी नहीं गिराये जा सके। आप जानते हैं कि ट्रम्प ने चार-छह विमानों के नुकसान का दावा कर चुके हैं। इनमें भारत के कुछ विमान होंगे ही पर अखबार अभी खुलासा नहीं कर पाये हैं।
खबरों से प्रचार और राजनीति तथा सरकार चलाने की व्यवस्था के दौर में इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक गौरतलब है, रूस के एस400 को श्रेय देते हुए भारतीय वायु सेना के प्रमुख ने कहा पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमान और एक बड़ा विमान गिराया गया। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, ऑपरेशन सिन्दूर के तीन महीने बाद खुलासा। आप जानते हैं कि अबकी बार ट्रम्प सरकार के बावजूद ट्रम्प भारत पर टैरिफ लगाने के लिये परेशान हैं। मामला रूस से तेल खरीदने का भी है और भारत सरकार ट्रम्प का नाम लेकर भले कुछ ठोस न बोल पाई हो अब रूस की ओर मुंह करके खड़ी है। ऐसे समय में भारत सरकार की ओर से उसके वायु सेना प्रमुख अगर छह विमान गिराने का दावा कर रहे हैं तो वे भारत सरकार का ही काम कर रहे हैं और इंडियन एक्सप्रेस ने अपने पाठकों को (शीर्षक से) बताया है कि यह रूस को खुश करने के लिए भी हो सकता है। जहां तक रूस को खुश करने की बात है उसकी जरूरत और उसका कारण सबको मालूम है। वैसे, हिन्दुस्तान टाइम्स की एक खबर के अनुसार, यूक्रेन के मुद्दे पर ट्रम्प और पुतिन की मुलाकात 15 अगस्त को होने वाली है। विमान गिराने की खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में लीड के रूप में है और शीर्षक वही है जो प्रचार भारतीय वायु सेना प्रमुख कर रहे हैं। लगभग यही स्थिति दि एशियन एज में है। अखबार में कोलकाता की एक खबर भी पहले पन्ने पर प्रमुखता से छपी है जो द टेलीग्राफ की लीड है। सात कॉलम की इस खबर का शीर्षक है, जख्मों पर मलहम लगाने के लिए आयोजित मार्च के निशान। यह मार्च आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर की मौत का एक साल पूरा होने पर आयोजित किया गया था। बाद में कुछ लोग धरने पर बैठ गये जिनकी भिड़ंत पुलिस से हो गई। पुलिस के लाठी चार्ज के कारण मामला गड़बड़ा गया। वैसे भी जिस मौत को साजिश बताया गया। जिसके लिए राज्य सरकार को फंसाने और बदनाम करने की कोशिश की गई। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान भी लिया उसे फिर अभारने की कोशिश का पुलिस ने जोरदार विरोध किया हो और मार्च में आये लोगों पर गुस्सा निकाल निकाल लिया हो तो यह राजनीति और उसका खामियाजा है। मृत डॉक्टर की मां ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी पिटाई की।
भारतीय वायु सेना प्रमुख का खुलासा द टेलीग्राफ में भी वैसे ही प्रचार वाले अंदाज में है जैसे ज्यादातर अखबारों में है। गनीमत सिर्फ यह है कि खबर में लिखा है, भारतीय वायु सेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान रूस निर्मित एस-400 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल का उपयोग करके कम से कम पांच पाकिस्तानी लड़ाकू जेट और एक बड़े सैन्य विमान को मार गिराया था। उन्होंने भारत को हुए किसी नुकसान का जिक्र नहीं किया, लेकिन कहा कि 7-10 मई के सैन्य अभियान की सफलता के पीछे मुख्य कारण “राजनीतिक इच्छाशक्ति की उपस्थिति” थी। भारतीय रक्षा अधिकारियों ने पहले स्वीकार किया था कि भारत ने विमान खोए हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि कितने विमान खोए हैं। एयर चीफ मार्शल सिंह की टिप्पणियों ने संख्या का पहला आधिकारिक खुलासा किया। खबर के अनुसार, भारतीय वायु सेना प्रमुख का यह बयान तब आया है जब राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि “राजनीतिक इच्छाशक्ति” दिखाने में नरेंद्र मोदी सरकार की विफलता के कारण युद्ध के दौरान भारत को विमान खोना पड़ा। नवोदय टाइम्स की लीड दिल्ली की स्थानीय खबर है। शीर्षक है, शीर्षक है दीवार गिरी, सात की मौत। दिल्ली में भारी बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त है। हवाई अड्डे की स्थिति पहले बताई है और अब ये दीवार गिरने से सात की मौत। इस लिहाज से दिल्ली की हालत गंभीर खबर है और बड़ी खबर है। लेकिन हेडलाइन मैनेजमेंट के लिये ऑपरेशन सिन्दूर की पुरानी खबर आज ज्यादा प्रमुखता से छपी है। यहां भी पहले पन्ने पर है। इसका कारण यह भी है कि दिल्ली में अब डबल इंजन की सरकार है और आम आदमी पार्टी की नहीं है। मीडिया, सरकार और सुप्रीम कोर्ट की मेहरबानी से उसे भ्रष्ट साबित करके सत्ता से बेदखल किया जा चुका है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का भी अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


