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मध्य प्रदेश

कहीं भाग तो नहीं जाएगी चित्रांश कंपनी?

सिवनी में इन दिनों चित्रांश टेक्नोलॉजी कंपनी की चर्चा हर जगह चल रही है। कंपनी का दावा है कि उसका दिया हुआ टीवी अपनी दुकान पर लगाइए और बदले में 7 से लेकर 10 हज़ार रुपये तक हर महीने पाइए। पैसा कमाने का इससे आसान तरीका शायद ही आपने पहले कभी सुना होगा।  महज़ तीन सालों में दस गुना रिटर्न, इसी दावे की वजह से ये कंपनी सवालों के घेरे में आती दिख रही है। सबसे बड़ा सवाल ये कि कंपनी इतना रिटर्न लोगों को दे कैसे रही है? सिवनी जैसे छोटे शहर में अपने प्रॉडक्ट का विज्ञापन करने से कंपनियों को ऐसा क्या फायदा होने जा रहा है जो वो लोगों के 7 हज़ार हर महीने देने का वादा कर रही है और फिर इस बात की क्या गॉरंटी है कि कपंनी तीन सालों तक भुगतान करते रहेगी।

सिवनी में इन दिनों चित्रांश टेक्नोलॉजी कंपनी की चर्चा हर जगह चल रही है। कंपनी का दावा है कि उसका दिया हुआ टीवी अपनी दुकान पर लगाइए और बदले में 7 से लेकर 10 हज़ार रुपये तक हर महीने पाइए। पैसा कमाने का इससे आसान तरीका शायद ही आपने पहले कभी सुना होगा।  महज़ तीन सालों में दस गुना रिटर्न, इसी दावे की वजह से ये कंपनी सवालों के घेरे में आती दिख रही है। सबसे बड़ा सवाल ये कि कंपनी इतना रिटर्न लोगों को दे कैसे रही है? सिवनी जैसे छोटे शहर में अपने प्रॉडक्ट का विज्ञापन करने से कंपनियों को ऐसा क्या फायदा होने जा रहा है जो वो लोगों के 7 हज़ार हर महीने देने का वादा कर रही है और फिर इस बात की क्या गॉरंटी है कि कपंनी तीन सालों तक भुगतान करते रहेगी।

नाम ना छापने की शर्त पर टीवी लगवाने वाले एक दुकानदार ने कहा कि अगर कंपनी भाग भी गई तो क्या हुआ हमें टीवी तो देकर गई, वहीं एक दूसरे दुकानदार ने कहा वो चिंत्रांश कंपनी को पैसे देकर फंस गए हैं। राष्ट्र चण्डिका की टीम ने जब उनसे ऐसा बोलने की वजह पूछी तो बोले, श्;35,000 लेकर ये जो टीवी दिया है ये दस-बारह हज़ार से ज़्यादा का नहीं लगता, पेन ड्राइव में 3-4 कंपनियों के विज्ञापन हैं ओर मोदी जी का भाषण है, बस वही दिनभर चलाना होता है। बस इसी काम का 7 हज़ार देने का बोले हैं, पैसा कमाना इतना आसान कब से हो गया, हमें तो पांच महीने में हमारे 35,000 मिल जाएं तो शुक्र मनाएंश्;। राष्ट्र चण्डिका की टीम ने जब इस कंपनी के बारे में इंटरनेट में पड़ताल की तो पता चला कि नागपुर की ये कंपनी उत्तर प्रदेश के आगरा में रजिस्टर्ड है। 2 मई 2013 से रजिस्टर्ड ये कंपनी छोटे-छोटे शहरों में ही अपना कामकाज फैला रही है। जानकारों की राय में इस कंपनी की वेबसाइट को देखकर ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कंपनी लंबे समय तक काम नहीं करने वाली। जानकारों का तो ये भी कहना है कि स्पीक एशिया और श्रीराम सर्वे के बाद लोगों ठगने का ये एक बिल्कुल नया तरीका हो सकता है। पुलिस और ज़िला प्रशासन को चाहिए कि इस तरह की कंपनियों की जांच कराकर जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करें।

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