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सुख-दुख

फिरंगियों के पैसे से बने नए वेंचर ‘कलेक्टिव न्यूज़रुम’ में सिर्फ सवर्ण ही सवर्ण भरे हैं!

जीतेंद्र कुमार-

अंततः सवर्ण मीडिया का नया वेंचर आ ही गया- ‘कलेक्टिव न्यूजरुम’. फिरंगियों के पैसे से बने इस ‘न्यूज वेंचर’ में सिर्फ सवर्ण ही सवर्ण हैंः झा, शर्मा, मजूमदार और हसन!

वैसे अंग्रेजों की यह अघोषित नीति रही थी कि निर्णय लेने के सारे अधिकार खुद अपने पास रखेंगे और अगर इसे दूसरों को देना मजबूरी हो तो वह सिर्फ ब्राह्मणों को सौंपा जाएगा. हां, इसमें मुसलमान भी होंगे. वैसे मुसलमानों में भी उनकी अपनी पसंद थी कि वे अशरफ ही होने चाहिए, पसमांदा नहीं. मतलब सवर्ण ही! और अंग्रेजों के पैसे से एक नयी कंपनी बन गयी है जिसकी सीईओ झा है और तीन डायरेक्टर्स शर्मा, मजूमदार व हसन हैं.

जब लोग कहते हैं कि समाज कितना बदल गया है, तब मुझे इससे आंतरिक खुशी होती है, मन गदगद हो जाता है! नया वेंचर इसी बदले हुए समाज का जीता-जागता प्रमाण है!

और हां, परंपरा के अनुसार, इस न्यूज वेंचर में न किसी दलित-बहुजन को रोजगार मिलेगा (क्योंकि जब मालिकाना हक अंग्रेजों के पास था, तब भी नहीं था तो इन सवर्णों के हाथ में आने के बाद कैसे होगा?) न 90 फीसदी बहुसंख्य आबादी वाली जनता की वहां कोई खबर होगी!

यह दलित-बहुजन को जलील करने, चरित्रहनन करने का अभियान निश्चित रुप से वहां से चलाया जाएगा. अब ‘भारतीय बीबीसी’ खुलकर ब्राह्मणवादी भारतीय जनता पार्टी-बीजेपी व नरेन्द्र मोदी के पक्ष में अभियान शुरु करेगा!

एक बार फिर से मुझे भारत का सबसे बड़ा जातिवादी, कुंठित, कुंद प्रतिभा का व्यक्ति साबित किया जाएगा! और कई लोग फेसबुक के आभासी मित्रता से हटा देगा.

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