दैनिक जागरण में जो मार खाया, उसे ही अपराधी मान नोटिस थमाया!

दैनिक जागरण का अपना खुद का क़ानून है, अंधा क़ानून! वरिष्ठ पदों पर बैठे मठाधीशों की गलती माफ़। जो पिट जाए, मार खाए, वही नोटिस पाए! देखें-

पढ़ें पीड़ित मनीष द्वारा संपादक को घटना के बाबत भेजा गया पत्र-

सेवा में,
आदरणीय संपादक जी
दैनिक जागरण, कानपुर

विषय: संस्थान में काम के दौरान मेरे साथ ही हुई हिंसक मारपीट की घटना के संबंध में सूचनार्थ।

महोदय,
निवेदन है कि दिनांक 04-07-2021 दिन रविवार शाम 4-5 के मध्य कार्यालय में कार्य करने के दौरान मेरे प्रादेशिक डेस्क इंचार्ज श्री यशांश त्रिपाठी जी मेरी सीट पर आकर एक खबर का जिस्ट मांगने पहुंचे। हालांकि मैं पहले ही इनपुट डेस्क पर जिस्ट भेज चुका था।

तभी जिस्ट बड़ा होने को लेकर वह अकारण ही हिंसक अभद्रता करने के साथ गाली-गलौज करने लगे, ऐसे में मैंने भी उनकी अभद्रता का विरोध किया।

इसी बात को लेकर वह तैश में आ गए और हिंसक हाथापाई करने लगे। अभद्रता व हाथापाई के दौरान उन्होंने अन्य साथियों श्री मौरिश शैमुअल जी, श्री कुलदीप जी और श्री आकाश जी के समक्ष कई थप्पड़ मारे और उन्होंने अपनी पूरी ताकत से मेरे हाथ को मोड़ दिया।

इससे मेरे हाथ व उंगलियों में गहरी चोट आ गई। इसके चलते हमनें भी अपना बचाव किया। इस घटना के तत्काल बाद हमने फोन पर इसकी जानकारी संपादक श्री जितेंद्र शुक्ल जी व आउटपुट हेड श्री दिवाकर मिश्र जी को दी।

ऐसे में मेरे हाथ व उंगलियों की दर्दनाक दशा देखकर आउटपुट हेड श्री दिवाकर मिश्र जी ने मुझे घर जाने की सलाह दी, क्योंकि मैं कार्यालय में अपनी सेवा देने में असमर्थ था। वहीं, कार्यालय में मेरे साथ रविवार को हुई घटना अकस्मिक नहीं है। मेरा अनुमान है कि यह घटना पूरी तरह से सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।

बता दूं कि मुझे पिछले करीब एक साल से अकारण ही प्रताडि़त किया जा रहा है। इसी के तहत मुझे लोकल डेस्क से प्रादेशिक डेस्क भेजा गया था। और फिर ऐसे कमरे में बैठाया गया जहां सीसीटीवी कैमरा भी नहीं लगा है। इन्हीं सब कारणों के चलते संस्थान की सेवा करने के दौरान असुरक्षित महसूस करता था।

एक उंगली में असहनीय दर्द व कोई मूवमेंट न होने के चलते अगले दिन सोमवार सुबह वरिष्ठ हडडी रोग विशेषज्ञ डा एएन सारस्वत के पास उपचार के लिए गया, तो डाक्टर ने उंगलियों में फ्रैक्चर होने के चलते एक सप्ताह में आपरेशन कराने की सलाह दी है। मेरा एक्सरे कराकर मुझे एक सप्ताह रेस्ट करने के लिए कहा है।

अतः आपसे अनुरोध है कि घटना के संबंध में उचित त्वरित कार्रवाई करने की कृपा करें। क्योंकि भविष्य मेरे साथ कार्य के दौरान कोई अशोभनीय घटना न हो। इसका ध्यान रखते हुए आपके सहयोग एवं मार्ग दर्शन का आकांक्षी।

प्रार्थी
मनीष श्रीवास्तव
वरिष्ठ उपसंपादक
प्रादेशिक डेस्क, दैनिक जागरण कानपुर


सूत्रों का कहना है कि कानपुर दैनिक जागरण में संपादक जितेंद्र शुक्ल के चेले इतने हावी हैं कि मैनेजमेंट भी आंख मूंदे बैठा है। प्रादेशिक प्रभारी यशांश त्रिपाठी ने अपने जूनियर मनीष श्रीवास्तव को पीटा। उसकी उंगली में फ्रेक्चर आया है। मनीष ने संपादक और मैनेजमेंट से इसकी शिकायत की तो मनीष को ही दोषी ठहरा दिया गया है।

दैनिक जागरण के यूनिट हेड ने मनीष श्रीवास्तव को ही नोटिस जारी कर दिया और यशांश से अभद्रता का आरोप लगाकर 24 घण्टे में स्पष्टीकरण मांगा है।

ये सब संपादक जितेंद्र शुक्ल और उनके चहते दीवाकर मिश्र के इशारे पर हो रहा है। स्टेट हेड आशुतोष शुक्ल के जिले के निवासी होने के कारण ये लोग मनमानी कर रहे और यशांश त्रिपाठी भी इन्हीं के साथ है।

सूत्रों के मुताबिक़ कानपुर यूनिट के डायरेक्टर संदीप गुप्ता जी को ये सब गुमराह किये हैं। कोई भी शिकायत उन तक पहुंचाने पर कर्मचारी को प्रताड़ित करते है और खुद डायरेक्टर को गुमराह कर मनमानी कर रहे हैं।

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Comments on “दैनिक जागरण में जो मार खाया, उसे ही अपराधी मान नोटिस थमाया!

  • Jyotsana singh says:

    दुर्गत है,,, उन पत्रकारों की जिन्हें तलवे चाटने का हुनर नहीं मालूम,,,,कुटिल और घिनौनी राजनीति का शिकार होरहेे

    Reply

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