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भास्कर कोटा के निष्कासित कर्मियों ने आधी लड़ाई जीती, प्रबंधन भत्ता देने को मजबूर हुआ

कोटा (राजस्थान) : बुधवार को दैनिक भास्कर कोटा के संघर्षरत कर्मचारियों की लेबर कार्यालय में तीसरी बार समझौता वार्ता हुई। भास्कर कोटा के एडमिन हेड रामगोपाल सिंह चौहान और लीगल ऐडवाइजर नीतिन अग्रवाल की उपस्थिति में वार्ता सुबह 11.30 बजे शुरू हुई। बातचीत प्रारंभ होते ही भास्कर के अधिकारियों को लिखित में जवाब न लाने के कारण अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ा। काफी मिन्नत के बाद लिखित में जवाब प्रस्तुत करने के लिए समझौता अधिकारी ने लंच के बाद का टाइम दिया। अखबार प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने धमकी भरे अंदाज में एक सप्ताह के अन्दर सस्पेंशन अलाउंस देने का मौखिक आश्वासन देते हुए कहा कि अब इनको हम परेशान करेंगे। 

समझौता वार्ता में शामिल हुए भास्कर कोटा के टर्मिनेट एवं सस्पेंड कर्मचारी

कोटा (राजस्थान) : बुधवार को दैनिक भास्कर कोटा के संघर्षरत कर्मचारियों की लेबर कार्यालय में तीसरी बार समझौता वार्ता हुई। भास्कर कोटा के एडमिन हेड रामगोपाल सिंह चौहान और लीगल ऐडवाइजर नीतिन अग्रवाल की उपस्थिति में वार्ता सुबह 11.30 बजे शुरू हुई। बातचीत प्रारंभ होते ही भास्कर के अधिकारियों को लिखित में जवाब न लाने के कारण अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ा। काफी मिन्नत के बाद लिखित में जवाब प्रस्तुत करने के लिए समझौता अधिकारी ने लंच के बाद का टाइम दिया। अखबार प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने धमकी भरे अंदाज में एक सप्ताह के अन्दर सस्पेंशन अलाउंस देने का मौखिक आश्वासन देते हुए कहा कि अब इनको हम परेशान करेंगे। 

समझौता वार्ता में शामिल हुए भास्कर कोटा के टर्मिनेट एवं सस्पेंड कर्मचारी

उल्लेखनीय है कि भास्कर कोटा ने अपने सात कर्मचारियों को मुअत्तल करने के साथ ही लेबर ऑफिस को लिखित में अवगत कराया है कि आरोपी कर्मचारियों के टर्मिनेशन का कारण लॉस आफ कॉफिंडेंस है। अखबार प्रबंधन ने अपने अन्य कर्मचारियों को सस्पेंड बताकर एक झूठा लेटर लेबर ऑफिस को दिया है। भास्कर मैनेजमेंट दंडित कर्मचारियों को वापस न लेने की अपनी बात पर अड़ा रहा है। इसके साथ ही उसका कहना है कि इन कर्मियों से प्रबंधन का कोई विवाद भी नहीं है। इनको मौखिक रूप से सस्पेंड किया किया गया है। 

बुधवार को लेबर ऑफिस में समझौता वार्ता के दौरान श्रम विभाग के अधिकारी ने अखबार प्रबंधन के प्रतिनिधियों से कहा कि आपको डिस्प्यूट का मतलब पता है क्या? इसका जवाब नितिन अग्रवाल नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि अगर आपने सस्पेंड किया है तो इनको सस्पेंशन अलाउन्स दीजिए। इस पर नितिन अग्रवाल का कहना था कि अगर इनका कोई देय बनता है तो कानून के हिसाब से दे देंगे। यहां की कार्यवाही से इनको कोई पैसा नहीं मिलेगा। 

समझौता अधिकारी ने कहा कि जब आप इन लोगों को 10 फरवरी के बाद से अन्दर आने नहीं दे रहे हैं, इनकी उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे हैं तो कैसे सस्पेंशन अलाउन्स दे सकते हैं। आप लोग हवा में बाते करते हैं। कोई ठोस बात नहीं है। नितिन अग्रवाल ने कहा कि नियम को तो एक तरफ रखिए, हम सब कर देंगे और एक सप्ताह के अन्दर सस्पेंशन अलाउंस भी दे देंगे। उन्होंने अन्त में ये कहा कि अभी तो परेशान किया कहां है, इनको परेशान तो अब करेंगे। इससे कुछ क्षण के लिए बैठक में अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो गई लेकिन कर्मचारियों ने धैर्य और विवेक से काम लिया। 

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1 Comment

1 Comment

  1. susheel kumar tripat

    April 2, 2015 at 1:41 pm

    ap logo ki misal kabile taref hai maliko prabndhan ke khelaf mil ke ladna apko mere taraf se salam apko chaye ki mapke mitra bandhu akhbar me kam kar rahe hai unka saport karna chaye jise ek naye kranti ki suruat ho sake

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