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उत्तर प्रदेश

ग्रेटर नोएडा के डीसीपी ने ली चौकी इंचार्ज की क्लास, बोले- ऐसी घटनाएं विभाग के लिए शर्मनाक हैं!

Yashwant Singh-

ईविवि के छात्र रहे राजेश कुमार सिंह इन दिनों डीसीपी ग्रेटर noida हैं। एक मित्र को क़ानूनी मदद दिलाने के मक़सद से राजेश जी के यहाँ जाना हुआ। चेम्बर में घुसते ही देखा कि राजेश जी एक चौकी इंचार्ज की क्लास ले रहे हैं। उसके इलाक़े के एक शख़्स पर चार बार हमला हुआ और हर बार हमलावर सेम थे। हमलावरों का आज क़ायदे से इलाज किए जाने का खाँटी बलियाटिक अन्दाज़ में फ़रमान सुनाकर डीसीपी ने चौकी इंचार्ज को काम पर लग जाने का निर्देश दिया और फिर अपन सब की तरफ़ मुख़ातिब हुए।

मैंने उत्सुकतावश इस केस के बारे में जानना चाहा. पता चला कि एक प्राइवेट कंपनी में दो लाख रुपये महीने की सेलरी पर काम करने वाले एक शख्स पर चार बार जानलेवा हमला हुआ. हर बार हमला करने वाले एक ही नाम पहचान के थे. इस बार तो काफी बुरी तरह से मारा पीटा. बगल के कमरे में उस शख्स से एफआईआर के लिए कंप्लेन लिखवाया जा रहा था. डीसीपी ने चौकी इंचार्ज से कहा कि ऐसी घटनाएं ही पुलिस विभाग की इज्जत खराब करती हैं. ये हम लोगों की नाक कटाने वाली घटना है. ये केस हम लोगों के लिए डूब मरने वाली बात है. कानून का कोई भय ही नहीं है. हमलावर बेधड़क एक आदमी को चार चार बार मारपीट रहे हैं. ये पीड़िता शख्स नोएडा ही छोड़कर जाने की तैयारी कर चुका था.

चौकी इंचार्ज को निर्देशित करते हुए डीसीपी ने कहा कि जाइए उस पीड़ित शख्स के चोट देखिए, उसका मेडिकल कराइए, उससे पूरी बात सुनिए समझिए और सभी हमलावरों को शाम तक टांग लाइए. जब उन्हें पकड़ लीजिए तो मुझे भी सूचित कीजिए. इन सबका इलाज जरूरी है ताकि आगे से इनकी हिम्मत न पड़े.

मुझे इस पुलिस अफसर का ये जज्बा और ये साफगोई पसंद आई.

डीसीपी राजेश से परिचय और बातचीत में अतीत के पन्ने खुलते चले गए। राजेश जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1988 में पीजी का एग्ज़ाम दिया। रिज़ल्ट आया 1991 में।

पहली नौकरी मध्यप्रदेश में आबकारी विभाग में की। दूसरी नौकरी में बीडीओ सेलेक्ट हुए पर इसका परित्याग कर दिया। pcs में dsp पद पर सेलेक्शन रास आया।

हिंदी और हिस्ट्री के छात्र रहे राजेश जी को आज भी फ़ेलोशिप के पैसों के सदुपयोग दुरुपयोग की यादें रोमांचित करती हैं। पुलिस अधिकारी की थका देने वाली ज़िम्मेदारी के बीच राजेश जी को अब लगता है कि अकेडमिक फ़ील्ड में वो ज़्यादा सहज रहते।

कमल कृष्ण रॉय, लाल बहादुर सिंह की चर्चाओं के बीच ब्लैक टी ने प्रवेश लिया। एक डाक्टरनी अपने पारिवारिक विवाद को लेकर रोती हुई प्रकट हुई।

जिसका दर्द सुना, उसके लिए सक्रिय हो गये।

अधीनस्थ अफ़सरों को पूरे प्रकरण की परतें समझाकर न्याय के लिए प्रेरित आदेशित करते रहे।

राजेश जी बलिया के हैं। रसड़ा के। भृगु बाबा इलाक़े के।

आज ईविवि दीक्षित दो पूर्व छात्रों, एक बलियाटिक एक ग़ाज़ीपुरिया, का स्नेहिल मिलन यादगार रहा।

जै जै

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

ये पोस्ट मूलत: फेसबुक पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पचास हजार से ज्यादा पूर्व छात्रों के बने एक प्राइवेट ग्रुप में प्रकाशित किया गया है. देखें स्क्रीनशॉट-

बाद में इस पोस्ट को भड़ास एडिटर यशवंत ने अपने निजी एफबी वॉल पर भी प्रकाशित कर दिया, देखें-

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