विवादास्पद ‘पत्रकार भवन’ का यही होना था अंजाम!

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की प्राइम लोकेशन पर बरसों से बेजान और निष्क्रिय से खड़े पत्रकार भवन को ढहाने की तस्वीर आज के अख़बारों में शोभायमान है.

जिन वरिष्ठ पत्रकारों ने बड़े जतन से इसे खड़ा करने में दौड़धूप कर पसीना बहाया था उनमें शायद मान्यवर लज्जाशंकर हरदेनिया जी ही जीवित हैं. उन्होंने और स्वर्गीय धन्नालाल शाह, लेले साहब, प्रेमचंद मोदी और राज भारद्वाज आदि ने इसके इस अंजाम की शायद ही कल्पना की होगी.

वैसे यह विवादास्पद भवन जिस प्रकार कुछ लोगों की बपौती बनता जा रहा था, उस लिहाज से इस अंजाम पर इने गिने को छोड़ शायद ही कोई आंसू बहाए.

इत्तेफाक से चार बरस पहले आज के ही दिन मैंने मीडिया संस्थानों को मिट्टी के मोल मिली सरकारी जमीनों के दुरूपयोग पर एक पोस्ट चस्पा की थी.

पत्रकार भवन के अंजाम को लेकर पत्रिका अखबार में आज छपी फोटो देखें-

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार श्रीप्रकाश दीक्षित की रिपोर्ट.

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