आईआईटी छात्र फैजान मर्डर केस : हाई कोर्ट ने निदेशक से पूछा- आपके अपने बच्चे हैं?

भाष्कर गुहा नियोगी

कोलकाता। आपके अपने बच्चे हैं कि नहीं… अगर आपने उन्हें खोया होता तो आप उस पिता के दर्द को समझते जिसने अपने इकलौते बेटे को खो दिया है।

कोलकाता हाई कोर्ट ने यह तल्ख़ टिप्पणी बीते शुक्रवार को आईआईटी खड़गपुर के छात्र फैजान अहमद के संदिग्ध हालात में मौत पर निदेशक वीके तिवारी पर किया।

मामले की सुनवाई कर रहे कोर्ट ने निदेशक को आदेश जारी कर अदालत में पेश होकर बताने को कहा था कि इस मामले में आईआईटी खड़गपुर ने रैंगिग के दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं। संस्थान की ओर से इस मामले में पहले दाखिल किए गए रिपोर्ट पर अदालत ने कहा संस्थान ने गलत तथ्य पेश कर अदालत को गुमराह किया है।

फैजान के माता-पिता द्वारा बेटे के संदिग्ध हालात मौत के मामले में जस्टिस राजशेखर महंता कोलकाता हाई कोर्ट में दाखिल मामले की सुनवाई कर रहे थे। 

बताते चलें कि आईआईटी खड़गपुर के तीसरे वर्ष के 23 वर्षीय छात्र फैजान का शव कैंपस में मिला था। उस दौरान संस्थान की ओर से इसे आत्महत्या का मामला बताया गया था।

तिनसुकिया आसाम के रहने वाले फैजान के माता-पिता सलीम और रेहान ने बीते अक्टूबर माह में बेटे के संदिग्ध हालात मौत के बाद संस्थान और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कोलकाता हाई कोर्ट का रुख किया था। उनका कहना है कि उनके बेटे की मौत के मामले की गंभीरता को दरकिनार किया गया। हत्या के पहले फैजान दो दिनों से लापता था। बाद में लाला लाजपत राय हाल के बंद कमरे से आती दुर्गंध के बाद कमरे से उसका शव बरामद हुआ था।

फैजान की मौत उसके माता-पिता के लिए अबूझ पहेली थी। बाद में इस पहेली का एक छोर फेसबुक पर आईआईटी खड़गपुर के छात्रों द्वारा लिखे उस पोस्ट से जुड़ा जिसमें फैजान ने आर पी हाल में रहने वाले अपने सीनियर छात्रों का रैगिंग के मामले को लेकर विरोध किया था। फैजान ने एसिमिलेशन प्रोगाम के विरोध में आवाज उठाई थी जिसका सीधा संबंध रैगिंग से था।

फैजान के माता-पिता द्वारा दाखिल वाद में पी आर हाल में उसके रहने से लेकर एल एल आर हाल के कमरे में उसकी लाश पाए जाने पर अपने बेटे की रैगिंग से हुई संदिग्ध हालात में मौत पर सवाल उठाया गया। 

आईआईटी खड़गपुर ने इस पूरे मामले को लेकर हाई कोर्ट में बीते 22 नवंबर को जो रिपोर्ट दाखिल किया था उसमें अदालत ने कई खामियां पाईं।

अदालत ने शुक्रवार को निदेशक से पूछा आप को अदालत में सही और तथ्यपरक रिपोर्ट पेश करने से किसने रोका? आपकी पहली रिपोर्ट में इस मामले में उठाए गए कदमों का जिक्र क्यों नहीं है? क्या यह आपकी जिम्मेदारी नहीं थी कि आप पहले अदालत आते?

आने वाले 13 फरवरी को अदालत इस मामले में फिर से सुनवाई करेगी। खड़गपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में हुई मौत इस ओर इशारा करती है कि नामी- गिरामी संस्थानों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

कोलकाता से वरिष्ठ पत्रकार भाष्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट.



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