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उत्तर प्रदेश

कानपुर की इन महिलाओं ने नाली-गंदगी के विवाद में एक पत्रकार की जिंदगी नरक कर दी है!

कानपुर की महाराजपुर पुलिस ने एक पत्रकार पर मुकदमा दर्ज किया है. पीड़ित का कहना है कि उसपर ये मुकदमा इलाके के लोकल नेता और थाने में बैठने वाले कुछ कथित पत्रकारों ने जाल बिछाकर, फर्जी तरीके से लिखवाया है.

पीड़ित पत्रकार अविनाश द्विवेदी महाराजपुर थाना क्षेत्र के भेवली गांव के रहने वाले हैं. अविनाश एक बड़े हिंदी दैनिक अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत हैं. आरोप है कि उनका पड़ोसियों से नाली और गंदगी इत्यादि को लेकर कुछ पुराना विवाद था. इसके चलते उनपर पड़ोसियों ने साल 2023 में स्थानीय नेताओं व पुलिस द्वारा बनाए गए कथित पत्रकारों ने सांठगांठ कर मुकदमा संख्या- 0404/2023 के तहत धारा 352, 504, 506, 354(ख) तथा 323 दर्ज कराया था. पीड़ित कहता है कि महिलाओं ने अपने पति व अन्य दबंग लोगों के इशारे पर मनगढ़ंत व फर्जी मुकदमें लिखाए थे.

पीड़ित को इस मामले में जमानत करवानी पड़ी थी. जमानत के छह माह बीत जाने के बाद पिछले मुकदमें में शामिल अर्चना शुक्ला नाम की महिला ने अपनी एक और पड़ोसी साधना दुबे को तैयार कर 15 मई 2024 को एक ही दिन में तीन-तीन तहरीर थाने में जाकर दिलाई. इसके बाद साधना दुबे को आगे कर 19 मई को एक वीडियो बनवाई गई, जिसमें साधना दुबे ने जबरिया इच्छा मृत्यु मांगी थी.

इस तरह का वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने पीड़ित पत्रकार अविनाश द्विवेदी पर बिना जांच किए फर्जी मुकदमा संख्या- 0181/2024 धारा 323, 504, 506, 427, 341, में दर्ज कर दिया. इसके साथ 107/116 कि भी कार्यवाही कर डाली, जबकि पीड़ित पत्रकार ऐसे किसी विवाद में था ही नहीं. वह अपने एक साथी के साथ खबर कवरेज पर गया हुआ था.

इन सब विवादों से तंग आकर पत्रकार ने अपने घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवाए. जिसे लेकर पड़ोसी अर्चना शुक्ला व साधना दुबे ने आपत्ति की. उक्त दोनों महिलाओं ने फर्जी घटना मनगढ़ंत कहानी बनाकर कैमरे हटवाने का प्रयास किया और फर्जी मुकदमा लिखवा दिया. इसमें उक्त महिलाओं का साथ देने वाले महाराजपुर थाना क्षेत्र की पुलिस द्वारा बनाए कथित पत्रकार जो फर्जी एक्स अकाउंट बनाकर सोशल मीडिया में फेक वीडियो डालकर फर्जी मुकदमा लिखाने का कार्य करते हैं, जिसके पीछे स्थानीय नेताओं का बड़ा हाथ रहता है.

जबकि, 13 मई कि रात में अर्चना शुक्ला के पति और साधना दुबे के पति ने मिलकर पत्रकार के खेत में बैठकर शराब पी और फिर खेत के किनारे लगे सीमेंट के खंभे तोड़ दिए थे. जिसे लेकर पत्रकार कि मां ने सुबह दोनों के घर शिकायत कि तो उक्त दोनों महिलाओं ने अपने पतियों का पक्ष लेकर पत्रकार के घर चढ़कर गाली गलौज कर दी और मारपीट की तहरीर महाराजपुर थाने में जाकर दी गई थी. परन्तु महाराजपुर पुलिस ने क्षेत्रीय राजनीतिक नेताओं और कथित पत्रकारों के दबाव में आकर उल्टा पत्रकार पर ही फर्जी मुकदमा लिख डाला. जिसका कई प्रमाण साक्ष्य तक हैं.

पीड़ित पत्रकार ने पुलिस पर भी आरोप लगाया है. उसने कहा कि, “महाराजपुर पुलिस के खिलाफ अवैध खनन और मानक विहीन डंफर कि खबरें चलाने से पुलिस ने खुन्नस में पत्रकार के खिलाफ अपनी कलम का पॉवर दिखा डाला और नैतिकता को दबाने का काम कर डाला. महाराजपुर थाना क्षेत्र में हो रहे बड़े सट्टा, जुआ, मिट्टी खनन, सरकारी जमीनों में अधिग्रहण, चोरी, अवैध शराब बिक्री, जैसे तमाम जरायम कि खबरें चलाने से बौखलाई पुलिस सच्ची पत्रकारिता को मुकदमे लगाकर देश के चौथे स्तंभ को गिराने का भरसक प्रयास कर रही है.”

देखें 2023 और उसके नीचे 2024 की एफआईआर कॉपी…


पीड़ित पत्रकार की मां रेनू द्विवेदी की तरफ से दी गई पुलिस कंप्लेन…

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