
संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों में कल के शपथग्रहण की खबर तो लीड होनी ही थी पर कल जब शपथग्रहण चल रहा था तभी जम्मू में तीर्थयात्रियों की एक बस पर आतंकी हमला हुआ। इसमें 10 लोगों के मारे जाने की खबर है। 33 घायल हैं। शपथग्रहण के दौरान आतंकवादी हमला मायने रखता है। लेकिन आज सभी अखबारों में यह खबर एक सामान्य आतंकवादी हमले की तरह है। अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर है ही नहीं। अखबार के दो पन्ने पूरी तरह मोदी मय हैं। आतीं हमले की खबर, खबरों के तीसरे पन्ने पर है। आज अखबारों में एक और बड़ी घटना की खबर है। मुंबई एयरपोर्ट के रनवे पर दो विमान काफी करीब आ गये थे। एक विमान लैंड करने वाला था और पहले को टेक ऑफ करना था। सोशल मीडिया पर वीडियो घूम रहा था कि दोनों लगभग साथ ही हुआ और खतरा हो सकता था। आज यह खबर इंडियन एक्सप्रेस तथा हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर है। आतंकी हमले के बारे में किसी ने यह नहीं लिखा है कि मोदी सरकार ने आतंकवाद नियंत्रण के लंबे-चौड़े दावे किये हैं और पिछली सरकारों पर आतंकवाद से नहीं निपट पाने का आरोप भी लगाती रही है। यही नहीं कश्मीर से अनुच्छेद 370 भी हटाया है। लेकिन उसका फायदा नहीं बताया है। ऐसे में यह महत्पूर्ण है कि मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल आतंकवादी हमले के बाद शुरू हुआ है। पर खबरें ताली थाली बजाने जैसी हैं।
यहां यह भी दिलचस्प है कि नरेन्द्र मोदी ने पहली बार स्मृति ईरानी को हारने पर भी सीधे कैबिनेट मंत्री बनाया था। इस बार स्मृति तो नहीं ही हैं, मनोज तिवारी को जीतने पर भी छोड़ दिया गया है। यही नहीं, दिल्ली से पहली बार जीतने वाले हर्ष मल्होत्रा को मंत्री बनाया गया है। आज के अखबारों में यह सब एक साथ एक खबर के रूप में बताने की जगह सारा जोर नरेन्द्र मोदी के लगातार तीसरी बार शपथ लेने पर है। कल ही आतंकी घटना नहीं होती तो यह चलता। लेकिन मोदी सरकार ने 30 मई 2019 को दूसरी बार शपथ ली थी। इससे पहले 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हुआ था। 02 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर सरकार के गृह विभाग की ओर से सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर तीर्थयात्रियों से कहा गया था कि अपनी यात्रा को तुरंत खत्म कर जितनी जल्दी हो सके घाटी को छोड़ दें। तब इसे खुफिया सूचना पर आधारित कार्रवाई बताया गया था। और तीरथयात्रियों की चिन्ता करने वील सरकार की छवि बनाने का कार्यक्रम चला। 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाने का आदेश जारी हुआ था। वह आदेश जो था, जैसा था उसके बारे में सच्चाई यह भी है कि उसमें टाइपिंग, हिज्जे और व्याकरण की 50 से ज्यादा गलतियां थी और शुद्धि पत्र निकालकर उन्हें ठीक करना पड़ा था।
इससे उस आदेश को जारी करने की गंभीरता का अंदाजा लग सकता है। उससे संबंधित मुकदमे सुप्रीम कोर्ट में वर्षों नहीं सुने गये। कई नेताओं को जेल में रखा गया, अभी तक विधानसभा चुनाव नहीं कराये जा सके हैं और घाटी में भाजपा ने लोकसभा का चुनाव लड़ा ही नहीं। तीर्थयात्रियों को घाटी छोड़ने का आदेश पुलवामा के बाद प्रचार ही थी। राज्य में कानून व्यवस्था और विकास की हालत चाहे जो हो, पांच सीटों के लिए के लिए पांच चरणों में चुनाव कराये गये। मतदान सामान्य से ज्यादा हुआ तो भाजपा और सरकार ने दावा किया कि 370 हटाने से खुश लोगों ने मतदान किया है। साथ ही यह भी कहा गया कि नाराजगी के कारण ज्यादा मतदान हुआ था। जो भी हो, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती दोनों हार गये। जम्मू और उधमपुर की सीटें भले भाजपा को मिल गईं लेकिन जनसत्ता की एक खबर के अनुसार कश्मीर के हिंदू प्रत्याशियों में कोई जमानत नहीं बचा पाया। जम्मू-कश्मीर की श्रीनगर लोकसभा सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने जीत दर्ज की। कश्मीर संभाग की बरामूला लोकसभा सीट पर जेल में बंद निर्दलीय प्रत्याशी अब्दुल रशीद शेख ने दो लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। अनंतनाग–राजौरी लोकसभा सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के मियां अल्ताफ अहमद को जीत हासिल हुई।
अनंतनाग – राजौरी लोकसभा सीट पर चार हिंदू और एक सिख प्रत्याशी ने भी चुनाव लड़ा था। इनमें से चार निर्दलीय और नेशनल आवामी यूनाइटेड पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़े। इनमें सबसे ज्यादा वोट सुशील कुमार शर्मा (9228 वोट – 0.9%) को मिला। यहां बलदेव शर्मा को 6189 वोट (0.6%), दिलीप कुमार पंडिता को 3722 वोट (0.36%) और सिख समुदाय से आने वाले रविंदर सिंह को 2962 वोट (0.29%) प्राप्त हुए। इसके अलावा नेशनल आवामी यूनाइटेड पार्टी के सुदर्शन सिंह को 2382 वोट (0.23%) मिले। आप जानते हैं कि चुनाव से पहले पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में मिलाने का शिगूफा छोड़ा गया था। मीडिया ने यह नहीं पूछा (या बताया) कि यह कैसे संभव होगा या इससे देश को क्या फायदा होगा या 370 हटाने से कोई फायदा नहीं हुआ या सरकार उसपर कुछ नहीं बोल रही है, चुनाव तो नहीं ही लड़ रही थी। चिन्ता और परशानी यह है अयोध्या (फैजाबाद सीट) में भाजपा हार गई जबकि जो जीता है वह हिन्दू ही है और अभियान हिन्दू के खिलाफ हिन्दू ही चला रहे हैं। मीडिया के बड़े वर्ग को को इसकी चिन्ता भी नहीं है और वह ताली थाली बजाने वाली सरकार का प्रचारक बन कर रह गया है।
दूसरी ओर, नवोदय टाइम्स ने आज तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर मोदी को नेहरू से बराबर कर दिया है। यहां सवाल है कि क्या नेहरू की तीसरी सरकार भी इसी तरह दो बैसाखियों पर थी? कहने की जरूरत नहीं है कि गठबंधन की राजनीति चलाने के लिए 71 मंत्री बनाने पड़े हैं। इनमें पिछले साल के पांच भारत रत्नों के लाभार्थी भी हैं उसकी चर्चा सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर है। इस खबर के अनुसार तीसरी सरकार की बैसाखियों में एक, जेडीयू के प्रतिनिधि राम नाथ ठाकुर भी मंत्रिमंडल में हैं। आप कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं जिन्हें उनकी मृत्यु के 35 साल बाद नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में भारत रत्न दिया था। अभी तक एक साल में अधिकतम तीन भारत रत्न देने का रिवाज रहा है पर पिछले साल पांच लोगों को दिया गया जिनमें लाल कृष्ण आडवाणी भी हैं। जाहिर है इससे भी भाजपा की सीटें बढ़ी होंगी पर दिल्ली के एक अधिवक्ता ने कांग्रेस पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है और कहा है कि कांग्रेस के 99 सांसदों को खटाखट योजना के कारण अयोग्य ठहराना चाहिये। कर्पूरी ठाकुर 1977-79 में (इमरजेंसी के बाद) बिहार में मुख्यमंत्री थे और उन्हें अंग्रेजी के बिना स्कूल की परीक्षा पास करने की सुविधा देने के लिए जाना जाता है। इसे कर्पूरी डिविजन कहा जाता है। उनके पुत्र रामनाथ ठाकुर 2014 से राज्यसभा सदस्य हैं। और कहते हैं कि जो भी हैं अपने पिता के कारण हैं जबि नीतिश कुमार उनके पिता के मानस पुत्र है। आज भारत रत्न के अन्य लाभार्थियों पर भी खबर हो सकती थी पर दिखी नहीं। मंत्री तो और भी बने हैं। पर मीडिया में किसी का भारत रत्न से संबंध जोड़ा नहीं गया है।
नेहरू से बराबरी की जगह पुराने समय में, ‘तीसरी बार बैसाखी वाली सरकार’ जैसा शीर्षक हो सकता था पर अब नहीं दिखता।
आइये अब आज के अखबारों की खबरें और शीर्षक देख लें। कुछ सामान्य खबरें एक से ज्यादा अखबारों में भी हैं। अगर उनसे संबंधित कोई खास बात नहीं हुई तो उनका जिक्र एक ही बार है। इससे यह भी पता चल जायेगा कि दूसरों ने क्या कैसे छापा या छिपाया है। बेशक, यह संपादकीय स्वतंत्रता और विवेक का मामला है पर रेखांकित करने लायक तो है ही। वैसे भी, इसे समझने के लिए आपको एक से ज्यादा अखबारों को देखना होगा। सबके लिए यह संभव नहीं है और हिन्दी के पाठकों लिए यह जानना तो मुश्किल ही है कि अंग्रेजी में क्या छपा है।
1. इंडियन एक्सप्रेस
मोदी का तीसरा कार्यकाल शुरू। छह कॉलम का शीर्षक है। बाकी दो कॉलम में बस पर आतंकी हमले की खबर है। मुख्य शीर्षक से ऊपर बताया गया है – राजनाथ सिंह, अमित शाह औऱ नितिन गडरी मंत्रिमंडल में बनाये रखे गये हैं। टीडीपी, जेडी(यू), जेडी(एस), एलजेपी, एचएएम जैसे सहयोगियों को प्रतिनिधित्व मिला। आस-पास के नेता शपथग्रहण समारोह में शामिल हुए। आतंकी हमले वाली खबर का शीर्षक है,
– आतंकी हमले से तीर्थयात्रियों की बस जम्मू के गड्डे में गिरी, 9 मरे, 33 घायल।
– शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, शिवराज पाटील और जेपी नड्डा मंत्रिमंडल के नए भाजपाई चेहरों में
– विभागों का बंटवारा आज होने की उम्मीद, मंत्रिमंडल की पहली बैठक आज शाम में
– गठजोड़ का मंत्रिपरिषद 72 को शपथ दिललाई गई, 2014 से अब तक सबसे ज्यादा, सहयोगियों ने अपना हिस्सा लिया
– तेलुगू देशम पार्टी के राम मोहन नायडू और डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी सरकार में नायडू के आदमी हैं।
2. टाइम्स ऑफ इंडिया
बैनर शीर्षक है, मोदी ने तीसरा कार्यकाल शुरू किया, अपनी शर्तों पर। उपशीर्षक है, सहयोगियों को 15 प्रतिशत जगह मिली, ऊंची जाति के लोगों की संख्या कम है। मंत्रिमंडल की खास बातें बताने वाली खबरों के बॉक्स का शीर्षक है, बड़ा, समृद्ध और कुछ युवा। एक और बॉक्स में चुने गये लोगों के पीछे की राजनीति भी बताई गई है। इसमें बीजेपी ही बॉस है से लेकर चुनावों पर नजर, मुस्लिम गैरहाजिर तक सब कुछ है। लेकिन उसी के लिए जो पूरी खबर पढ़ेगा। और ऐसे लोगों को यह भी बताया गया है कि शपथग्रहण समारोह में मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी दोनों थे। अखबार ने लिखा है, इससे पता चलता है कि विपक्ष ने क्रोनी कैपिटलिज्म को भले चुनावी मुद्दा बनाया था मोदी इनसे दूरी नहीं बना रहे हैं।
आप जानते हैं कि एक चुनावी भाषण में मोदी ने अंबानी अदाणी से कांग्रेस को बोरे में नकदी मिलने औऱ टेम्पो पर ले जाने का आरोप लगाया था। मुझे लगता है कि शपथग्रहण में बुलाकार मोदी ने उनसे अपनी करीबी की पुष्टि की है और यह संदेश देने का प्रयास किया है कि मेरी खबर या मेरा आरोप सही था। अंग्रेजी में इसे फ्रॉम द हॉर्सेज माउथ कहा जाता है और यह साबित करने का प्रयास हो सकता है। जनता की नजर में भले यह संदेश जाये कि मोदी ने उसे मुद्दा नहीं बनाया क्योंकि नुकसान क्रोनी पूंजीवाद का भी होता या जो हुआ था उसकी भरपाई कर दी गई। आज आधे पन्ने का विज्ञापन है जो अन्य शीर्षक है वे इस प्रकार हैं –
– आंध्रप्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद डी पुरन्देश्वरी लोकसभा अध्यक्ष होंगी। खबर है कि चंद्रबाबू नायडू भी इसे पसंद करेंगे।
– चौकाने वाले सदस्यों में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केरल भाजपा के महासचिव जॉर्ज कुरियन शामिल हैं।
– एनसीपी ने राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की पेशकश टुकरा दी, इसे ‘पदावनति’ कहा
– खरगे शपथग्रहण में शामिल हुए, बाकी विपक्ष ने बायाकट किया
– 8000 से ज्यादा लोग शामिल हुए। इनमें शाहरुख खान, रजनीकांत, रवीना टंडन आदि शामिल हैं
टाइम्स ऑफ इंडिया में आज आतंकवादी हमले की खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर है और पहला पन्ना साफ-सुथरा प्यारी-प्यारी खुश्बू फैलाने वाली मीठी-मीठी खबरों का है। भविष्य में इस पन्ने को देखकर किसी को पता नहीं चलेगा कि तीसरे कार्यकाल की शुरुआत आतंकवादी हमले से हुई थी। आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी की सरकार 10 साल के अपने कार्यकाल में विधायक खरीदकर और वाशिंग मशीन में धोकर सरकारें गिराती और अपनी बनाती रही है। इसमें कई छोटी और क्षेत्रीय पार्टियां लगभग नष्ट हो गई हैं या होने के कगार पर हैं। अगर यही राजनीति चलती रही तो यह देश के लिए तो नुकसानदेह है ही इस पेशे में अच्छे लोगों के आने की संभावना कम होती जायेगी।
3. हिन्दुस्तान टाइम्स
बैनर हेडलाइन है, मोदी 3.0 : एनडीए के नये युग की शरुआत हुई। मुख्य खबर का इंट्रो है, नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक शपथ ली और पुराने का नए से मेल कराने की एक नाजुक बैलेंसिंग कार्रवाई में 71 लोगों के मंत्रि परिषद को शपथ दिलाई गई। साथ में दो कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, खास बातें जस की तस, बड़े सहयोगियों के लिए गंजाइश। आतंकवादी हमले की खबर चार कॉलम में है। इसका शीर्षक है, आतंकियों के गोली चलाने से बस गड्ढे में गिरी, नौ मरे। बस ‘दुर्घटना।
4. द हिन्दू
छह कॉलम में लीड का शीर्षक है, 72 सदस्यों के एनडीए मंत्रिमंडल ने कार्यभार संभाला। दो कॉलम में अंदर की खबरों की सूचना है। दो-दो कॉलम के तीन बुलेट प्वाइंट हैं। आतंकी हमले की खबर के शीर्षक में आतंकी नहीं है। जम्मू में बस पर गोलियां चलीं, आठ तीर्थयात्री मारे गये, 33 जख्मी। इसके बराबर में एक खबर का शीर्षक है, अजीत पवार के नेतृत्व एनसीपी ने राज्यमंत्री के पद का प्रस्ताव स्वीकारने से इनकार किया। एक और खबर का शीर्षक है, मणिपुर के मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने जिरीबाम में हिंसा पर पुलिस रिपोर्ट मांगी। पांच कॉलम में उड़ीशा की यह खबर दूसरे अखबारों में भी है पर यहां यह सबसे बड़ी और सबसे बड़े शीर्षक के साथ प्रकाशित है। शीर्षक है, उड़ीशा के बीजद सरकार में एक समय शक्तिशाली हस्ती रहे वीके पांडियन सक्रिय राजनीति से अलग हुए।
5. द टेलीग्राफ
पांच कॉलम का शीर्षक है – ज्यादा सहयोगियों को जगह देने के लिए मजबूर मोदी ने कोर टीम को कायम रखा। इसके साथ दो कॉलम में तीन लाइन का शीर्षक है, जम्मू और कश्मीर के आतंकवादी हमले में 9 तीर्थ यात्री मारे गये। अखबार का आज का कोट जयराम रमेश का है। उन्होंने कहा है, “नरेन्द्र डिस्ट्रक्टिव अलायंस (एनडीए) के नेता के रूप में बेहद कमजोर एक तिहाई प्रधानमंत्री …. ने खुद को शपथ दिलाये जाने का प्रबंध कर लिया है“।
6. नवोदय टाइम्स
छह कॉलम में लीड है, मोदी लगातार। एक कॉलम में फौन्ट को ऊंचाई में आधा-आधा किया गया है। फौन्ट साइज के आधे में ऊपर नेहरू और नीचे मोदी लिखकर मोदी को नेहरू की बराबरी में करने की कोशिश की गई है और बताया गया है कि नेहरू का पहला कार्यकार्य 1952 में शुरू हुआ था, दूसरा 1997 में और तीसरा 1962 में। और इनके नीचे 2014, 2019 तथा 2024 लिखा है।
आतंकी हमले की खबर दो कॉलम में है जिसका शीर्षक है, आतंकियों की गोलीबारी के बाद खाई में गिरी बस, 9 की मौत 33 घायल। यहां शीर्षक में तीर्थयात्री नहीं है जो खबर का महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए होना चाहिये था और संपादकीय योग्यता या प्रतिभा तो छोड़िये जरूरत यही है। यहां जो खास शीर्षक हैं उनमें शामिल हैं
– सात महिला मंत्री शामिल
– 30 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार, 36 राज्य मंत्री
– मंत्रिमंडल में 33 नये चेहरे
– दिल्ली से हर्षवर्धन की जगह हर्ष मल्होत्रा
– लोक सभा को 10 साल बाद मिलेगा नेता प्रतिपक्ष
– नजरें अब भाजपा अध्यक्ष के नाम पर
– अकु श्रीवास्तव का विश्लेषण, मोदी 3.0 : संतुलन के बीच पिछड़ों पर प्यार
– उड़ीशा में पहली भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण 12 को
7. अमर उजाला
पहला पन्ना पूरी तरह मोदीमय है, दूसरा भी। तीन फोटो के साथ मुख्य शीर्षक है, नई उम्मीदों की शपथ जिसे नई उम्मीदों का पथ बनाने की भी कोशिश की गई है। भगवा स्याही में तीसरी बार प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी का फ्लैग शीर्षक और एक उपशीर्षक है, नेहरू के बाद मोदी …. दो कार्यकाल पूरे कर लगातार फिर प्रधानमंत्री उपशीर्षक के नीचे हल्की काली स्याही में लिखा है, दो बार बहुमत के बाद अब गठबंन सरकार, सहयोगी दलों के इस बार सर्वाधिक 11 मंत्री। कुल सात महिला मत्रियों में तीन नये चेहरे हैं।
कहने की जरूरत नहीं है कि चार सौ पार का नारा देने वाले प्रधानमंत्री ने अपना तीसरा कार्यकाल सुनिश्चित करने के लिए भारत रत्न बांटकर पांच वोटर वर्ग को साधना शुरू कर दिया था। जयंत चौधरी मंत्री बनाये गये भारत रत्न के दूसरे लाभार्थी हैं और दूसरे वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। पांच भारत रत्नों से पांच वोटर वर्ग को प्रभावित या प्रसन्न किया गया था। गठबंधन के दूसरे दलों को प्रभावी बनाने के उपाय किये गये थे और सब का लाभ मिला। सीटें कम आईं तो उन्हें मंत्रीपरिषद का ईनाम देना पड़ा। 40 से भी कम सदस्यों के लिए 11 मंत्री पद दिये गये हैं। नीतिशकुमार बिहार के विकास में पूरे सहयोग की उम्मीद जता रहे हैं। यह उम्मीद अब क्यों है और सहयोग पहले क्यों नहीं मिला – नरेन्द्र मोदी की राजनीति के बारे में बहुत कुछ कहता है। ऐसे ही उन्होंने ईवीएम का विरोध करने वालों का मजाक उड़ाते हुए कहा है, …. ईवीएम जिन्दा है या मर गया। बेशक, ऐसा कहना गैर जरूरी था लेकिन कहकर वे बाकी लोगों को संदेश देते हैं। अंग्रेजी में इसे डॉग विसिल करना कहा जाता है। दूसरी ओर, उनके ऐसा कहने से साबित होता है कि ईवीएम की गड़बड़ी को गंभीरता से नहीं लेते हैं और शंकाओं को दूर करने के लिए कुछ नहीं किया गया है। गड़बड़ी की खबरें तो आती रहती हैं।



