NEET परीक्षा केस इन दिनों देश में सबसे अधिक शोहरत बटोर रहा है. मामले में वो चेहरा सामने नहीं आया जिसकी शह पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया गया. बशर्ते फिजिक्स वाला के संचालक अलख पांडेय को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा हड़काए जाने की बात जरूर सामने आई है. नीचे पढ़िए पत्रकार समीरात्मज मिश्रा और खुशदीप सहगल इस पूरे मसले पर क्या कुछ कह लिख रहे हैं….
समीरात्मज मिश्रा-
NEET मामले में कोचिंग इंडस्ट्री के एक दिग्गज काफ़ी मुखर दिख रहे थे। अपने YT चैनल के अलावा TV पर भी खूब छाए थे।
सुना है, शिक्षा मंत्री ने ऐसा हउंका है कि सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई है। ‘प्रहार’ करने वाले लगभग सारे वीडियो डिलीट कर दिए हैं! किसी चैनल में भी नहीं दिख रहे हैं!
खुशदीप सहगल-
NEET पर संसद में FIGHT तय है. देश में MBBS, BDS डॉक्टर बनने का ख़्वाब NEET के ज़रिए ही पूरा हो सकता है. लेकिन NEET 2024 लेने वाली संस्था NTA (National Testing Agency) ने इस परीक्षा के 24 लाख अभ्यर्थियों से जो भद्दा मज़ाक किया है वो अक्षम्य है.
हरियाणा में 720/720 अंक लाने वाले 6 स्टूडेंट्स का सीटिंग सीक्वेंस एक जैसा है, इन सभी ने हरियाणा के फरीदाबाद के एक सेंटर से परीक्षा दी थी. गुजरात में एक छात्रा ने 720 में से 705 अंक हासिल कर NEET में भारत में 1321वीं रैंक और अपनी कैटेगरी में 424वीं रैंक प्राप्त की. लेकिन गुजरात सेकेंड्री एंड हायर सेकेंड्री बोर्ड (GSEB) की 12वीं का रिज़ल्ट आया तो इस छात्रा को फिजिक्स और कैमिस्ट्री में फेल पाया गया.
परीक्षा में कुछ स्टूडेंट्स को 718,719 अंक भी मिले हैं, जो संभव ही नहीं है..क्योंकि इस परीक्षा में एक सवाल का सही जवाब देने पर 4 और गलत जवाब देने पर 1 नंबर कट जाता है. अब मानों किसी का एक सवाल गलत हुआ तो उसे अधिकतम 720 में से 715 ही नंबर मिल सकते हैं. लेकिन इस बार के नतीजे में दो छात्रों को 719 (68वीं रैंक) और 718 (69वीं रैंक) भी मिले हैं.
NTA का कहना है कि इस बार कुछ सेंटर्स पर छात्रों को गलत पर्चा बंटने पर, टाइम खराब होने की वजह से 1563 छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए गए. इन ग्रेस मार्क्स को ही सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है.
क्या किसी एंट्रेस एग्ज़ाम में आज तक ऐसा हुआ है कि एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, इकट्ठे 67 बच्चे 720 में से 720 पर्सेन्टाइल लाकर टॉपर बन जाएं. इनमें से 44 बच्चे ऐसे हैं जिन्हें ग्रेस मार्क मिले हैं. इनके समेत 1563 ग्रेस मार्क वाले बच्चों के ग्रेस मार्क सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिए हैं. ये 1563 बच्चे चाहें तो 23 जून को दोबारा परीक्षा दे सकते हैं या बिना ग्रेस मार्क वाले अपने पर्सेन्टाइल को बरकरार रख सकते हैं. पिछले साल इस परीक्षा में सिर्फ़ दो बच्चों को ही पूरे में से पूरे अंक मिले थे. इस बार 44 बच्चों को हटा भी दिया जाए तो 23 बच्चों ने इस परीक्षा में शत प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. हालत ये है कि देश के टॉप मेडिकल कॉलेज एम्स में 720 में से 720 अंक हासिल करने वाले का एडमिशन भी सुनिश्चित नहीं हैं. पिछले साल एम्स में ओपन कैटेगरी में 57 रैंकिंग पर एडमिशन बंद हो गए थे.
पेपर लीक होने के आरोपों को नए नवेले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बेशक नकार दिया है, लेकिन इस बार की NEET परीक्षा में व्यापक स्तर पर अनिमियतताओं के जो आरोप सामने आ रहे हैं, उसने एक बार फिर मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले या उत्तर प्रदेश में हाल में पुलिस भर्ती परीक्षा रद्द होने की याद दिला दी.
ऐसा नहीं कि पहले कभी पेपर लीक होने के आरोप ही सामने नहीं आए. मेडिकल एंट्रेस परीक्षा के पेपर लीक होने या अन्य घोटालों के आरोप बरसों से सामने आ रहे हैं. इसमें कुछ कोचिंग सेंटर्स की खास तौर पर साठगांठ होती है. जो मोटे पैसे लेकर परीक्षा में ऊंचा रैंक दिलाने की गारंटी लेते हैं. जिस तरह से देश में कोचिंग का बिजनेस फला फूला है और जितना मुनाफ़ा इस धंधे में हैं और किसी में नहीं हैं.
जो कोचिंग सेंटर्स घोटाले में लिप्त नहीं हैं, वो भी परीक्षा की तैयारी कराने की इतनी मोटी फीस लेते हैं कि गरीब घर का बच्चा पढ़ाई में अच्छा होने के बावजूद इनका रुख़ नहीं कर सकता. अगर स्कूलों में टीचर्स ही बच्चों की पढ़ाई पर समुचित ध्यान दें तो ये कोचिंग सेंटर्स खुद ब खुद बंद हो जाएं.
लेकिन नहीं इन कोचिंग सेंटर्स की मनमानी पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं, उलटे इन्हें पैसे के दम पर हर तरह का संरक्षण प्राप्त है.
सरकार चाहे तो इस समस्या का जड़ से इलाज कर सकती है. लेकिन इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए. सरकार डिजिटल डिजिटल इतना करती है तो क्यों नहीं ऐसे नेशनल सेंटर बनाती जहां आला दर्ज़े के टीचर पूरे देश के छात्रों को इंटरनेट के माध्यम से कोचिंग दें.
जैसे कभी देश में प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज कुकुरमुत्तों की तरह खुले थे और अब उनमें से अधिकतर बंद हो गए क्योंकि उनमें एडमिशन के लिए कोई झांकने भी नहीं आता था. यही स्थिति अब बड़ी संख्या में खुले प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के सामने भी आ सकती है. धन्ना सेठों और नेताओं ने मेडिकल शिक्षा के लिए क्रेज और भारी मुनाफ़े को देखते हुए ये मेडिकल कॉलेज खोल तो लिए लेकिन वहां शिक्षा की गुणवत्ता कैसी है किसी से छुपी नहीं है. ऐसे भी केस अतीत में सामने आ चुके हैं कि इन्होंने नकली मरीज, नकली बेड दिखा कर कैसे मान्यता हासिल की.
ये सब उन योग्य बच्चों से खिलवाड़ है जो वाकई दिन रात कड़ी मेहनत के दम पर ही मेडिकल एंट्रेस एग्ज़ाम की तैयारी करते हैं. क्या भ्रष्टाचार के दम पर अयोग्य बच्चों को मेडिकल सीट दिए जाना हम सब की जान से खिलवाड़ नहीं है?
केंद्र में नई नवेली 3.0 सरकार की संसद में पहली अग्नि परीक्षा NEET के मुद्दे पर होनी तय है. इस बार एनडीए के 292 सांसद ही हैं. इनके अलावा लोकसभा में करीब ढाई सौ सांसद ऐसे भी हैं जो एनडीए के नहीं है. यानि इस बार सरकार के लिए संसद में खेला आसान नहीं होगा.


