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सुख-दुख

कैंसर की चपेट में आकर एक और पत्रकार की जीवन लीला समाप्त

अनिल जैन-

भी-अभी दुखद सूचना मिली कि पत्रकार साथी तरुण तरुण कुमार नहीं रहे. वे पिछले दो साल से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे. अभी उनके बेटे की फेसबुक पोस्ट से उनके निधन की सूचना मिली कि कल उनका निधन हो गया और आज सुबह गाजियाबाद में हिंडन घाट पर अंतिम संस्कार हुआ.

बिहार के रहने वाले तरुण कुमार ने बिहार और दिल्ली में कई मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने और मैंने 2007 से 2009 तक इंडो-एशियन न्यूज़ सर्विस (IANS) में साथ-साथ बतौर न्यूज एडिटर काम किया.

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मैं तो उस संस्थान का अंबानीकरण होने और प्रबंधन के सूत्र दुर्दांत दलालों व मूर्खों के हाथ में आने पर वहां से निकल कर ‘अमर उजाला’ चला गया था और कुछ समय बाद तरुण जी भी वहां से मुक्त होकर एक कारपोरेट संस्थान में पीआरओ हो गए थे.

तरुण वैचारिक रूप से आरएसएस से जुड़े थे लेकिन घोर वैचारिक असहमति के बावजूद कुछेक मौकों को छोड़ कर हमारे बीच हमेशा आत्मीयता बनी रही. उनके साथ मेरी कई यादें जुड़ी हैं.

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तरुण जी के परिवार के लिए यह बेहद मुश्किल समय है. मैं उनके परिजनों के दुख में अपने को शामिल करते हुए तरुण जी की स्मृति को प्रणाम करता हूं.

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