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उत्तर प्रदेश

इंडिया ब्लॉक के यूपी से जीते छह सासंदों की सदस्यता जाएगी!

रंगनाथ सिंह-

लोकतंत्र की हत्या के रोने-धोने पर विराम अस्थायी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इंडिया ब्लॉक के यूपी से जीते छह सासंदों पर गम्भीर धाराओं में मुकदमे चल रहे हैं। एक सांसद को चार साल की जेल पहले ही हो चुकी है, जिसपर हाईकोर्ट ने स्टे दिया हुआ है। दो साल से ज्यादा की सजा होने पर संसद सदस्यता जाने का प्रावधान है। एक अन्य सांसद निर्दलीय जीते हैं लेकिन उनपर भी ऐसी धाराओं में मुकदमे चल रहे हैं कि उन्हें दो साल से ज्यादा की सजा हो सकती है।

दो साल या उससे ज्यादा की सजा होने पर संसद या विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो जाती है। एक राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रचार के लिए अस्थायी रिहाई के दौरान जनता से कहा था कि अगर चार जून को नतीजे उनके हिसाब से रहे तो उन्हें जेल नहीं जाना होगा। जाहिर है कि पुलिस और सरकारी वकील सरकार का मुँह देखकर ही मामले की पैरवी करते हैं। लोग नाहक अदालतों को दोष देते हैं। ज्यादातर मामलों में अदालत के हाथ बंधे होते हैं। पुलिस और सरकारी वकील की चुस्ती या सुस्ती से ही मुकदमों का भविष्य तय होता है। इस समय यूपी की सरकार ऐसे मामलों में जोरदार पैरवी कर रही है इसलिए वीआईपी समझे जाने वालों को सजा मिलने की दर काफी बढ़ गयी है।

चार साल की सजा पाकर स्थगन आदेश पर चुनाव लड़ रहे अफजाल अंसारी ने चुनाव जीतने के बाद कहा है कि यूपी में भाजपा को जो भी सीटें मिली हैं वह योगी आदित्यनाथ की वजह से मिली हैं वरना ये भी नहीं आतीं। जाहिर है कि अंसारी परिवार योगी जी के संग हार्डलाइन नहीं लेना चाह रहा है।

इन सात सासंदों के मामलों में अदालत के फैसले जब-जब आएंगे तब-तब इलीट रुदालियाँ लोकतंत्र की मृत्यु की दुहाई देते हुए चूड़ियाँ तोड़ना शुरू कर देंगी। ईवीएम को लेकर देश-दुनिया में अब किसी को कोई शिकायत नहीं बची है। इसलिए पेशेवर रुदालियों को रोने-धोने के लिए कोई नया मुर्दा चाहिए होगा। बाकी वक्त बताएगा कि आगे क्या होगा।

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