Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

खेल पत्रकारिता का जाना माना नाम हरपाल सिंह बेदी नहीं रहे!

उमाकांत लखेड़ा-

देश में खेल पत्रकारिता का जाना पहचाना नाम हरपाल सिंह बेदी नहीं रहे। उनके साथ करीब तीन दशक पहले परिचय हुआ और फिर आत्मीयता के रिश्ते बने रहे। उनके साथ कभी कोई बोर नही हो सकता था। हर वक्त मित्रों और साथियों का मनोरंजन कर बात-बात पर उन्हें लोट पोट करना उनकी फितरत थी। दिल्ली और खेल जगत की पत्रकारिता में उनकी अनुपस्थिति हमेशा खलेगी। भावभीनी श्रद्धांजलि!


राजशेखर व्यास-

बगैर शराब पिए प्रेस क्लब में सब पीने वालों के सबसे प्यारे दोस्त थे हरपाल सिंह बेदी. तमाम चैनल उन्हें बिशन सिंह बेदी समझ कर अपनी स्पोर्ट्स डिबेट में बुला लेते थे. फिर वे हंस-हंसकर उनकी मूर्खताओं के किस्से रस ले कर सुनाते थे. सुनने वाले हंसी खुशी की बौधार में नहाते, हरपाल सिंह जी केवल खेल पत्रकार ही नहीं गहरी राजनैतिक समझ रखने वाले बेहद पढ़े लिखे गंभीर पत्रकार थे. उनका जाना सदैव खलेगा, अश्रुपूरित श्रद्धा सुमन!


सुशील मोहापात्रा-

हरपाल सिंह बेदी नहीं रहें। आज सुबह अंतिम सांस ली। हरपाल सिंह बेदी एक शानदार खेल पत्रकार के साथ साथ एक बेहतरीन इंसान भी थे। जब मैं दूरदर्शन में काम करता था तब बेदी जी से संपर्क बना था। बेदी जी खेल समाचार के लिए आते थे। बेदी जी ने आठ ओलंपिक्स और सात एशियन गेम्स कवर किए हैं। शायद ही भारत के कोई दूसरा खेल पत्रकार इतना ज्यादा ओलंपिक्स और एशियन गेम्स कवर किया हो। मुझे याद है जब भी वो बाहर कवर करने जाते थे तो मेरे लिए कुछ न कुछ गिफ्ट लेकर आते थे। एक शानदार इंसान थे। प्यार से बात करते थे कभी गुस्सा करते हुए नहीं देखा। अगर गुस्सा कर भी जाते थे तो अगले एक मिनट में शांत हो जाते थे। उनके गुस्से में भी प्यार झलकता था। जब भी मिलते थे तो पूछते थे कि मेरे ‘प्यारे’ कैसे हो। बेदी जी के अंदर कभी अहंकार नहीं देखा। इतने बड़े पत्रकार होने के बावजूद भी ज्यादातर समय बस में सफर करते थे। मुझे याद है बेदी जी जेएनयू में रहते थे तो 615 पकड़कर ऑफिस पहुंच जाते थे। बेदी जी खूब walking करते थे। भगवान बेदी जी के आत्मा को शांति प्रदान करें।


प्रदीप श्रीवास्तव-

बहुत दिन से नहीं दिख रहे थे Harpal Singh Bedi , डर बना था जो आज मनहूस खबर बन कर सामने आया. खुल के मज़ाक, खुल के ठहाके, एक से एक किस्से, बेदी जैसी personality अपने अभी तक के जीवन में कम ही देखी l एक अलग ही character थे l मैंने एक बार बहुत पहले बहस में कह दिया कि जमीनी सच्चाई तो आप लोग को मालूम नहीं रहती, तब से उन्होंने मेरा नाम’ ‘धरती पुत्तर’ रख दिया और लंबे अर्से से यही कह कर बुलाते थे l मुझे मालूम है मेरी तरह बहुतों को उनसे जुड़ी बहुत सी यादें होगी, किस्से होंगे l बेदी आप हमेशा याद रहेंगे l ईश्वर आपको शांति दे।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन