चेन्नई | मद्रास हाई कोर्ट द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अन्ना विश्वविद्यालय में एक छात्रा के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले से जुड़ी एफआईआर में पीड़िता की पहचान उजागर होने की जांच के तहत चार पत्रकारों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए और कई अन्य को पूछताछ के लिए समन भेजा है।
क्या है पूरा मामला?
दिसंबर 2024 में अन्ना विश्वविद्यालय की एक छात्रा के साथ हुए यौन शोषण के मामले की एफआईआर सरकारी वेबसाइट पर अपलोड की गई, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण पीड़िता की पहचान छिपाने की प्रक्रिया फेल हो गई। यह एक स्वचालित प्रणाली होती है, जो संवेदनशील जानकारी को ब्लॉक कर देती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इसके चलते कई पत्रकारों ने सरकारी साइट से एफआईआर डाउनलोड कर ली, जिसमें पीड़िता की पहचान उजागर हो रही थी।
द इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जब यह गलती सामने आई, तो राज्य पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगा और इसके बाद SIT ने कार्रवाई करते हुए उन पत्रकारों को समन भेजा, जिन्होंने यह एफआईआर डाउनलोड की थी। चेन्नई के एग्मोर स्थित प्रिज़न्स विभाग में पत्रकारों से पूछताछ की गई और उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए।
पत्रकारों का क्या कहना है?
एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया, “हमने केवल सरकारी वेबसाइट से एफआईआर डाउनलोड की थी, जिसे आम जनता भी देख सकती थी। अगर कुछ चैनलों या अखबारों ने पीड़िता की पहचान उजागर की है, तो उनके संपादकों और रिपोर्टरों को जिम्मेदार ठहराना चाहिए। लेकिन सभी पत्रकारों को निशाना बनाना गलत है।”
एक अन्य रिपोर्टर ने कहा, “हमसे पूछताछ के दौरान निजी जानकारियां मांगी गईं, जैसे संपत्ति का विवरण और वैवाहिक स्थिति। इसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना के हमारा मोबाइल जब्त कर लिया गया। हमें कहा गया कि इसे कोर्ट से याचिका दायर करने के बाद ही वापस लिया जा सकता है।”
क्या कह रहे हैं पुलिस अधिकारी?
चेन्नई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारा उद्देश्य मामले की निष्पक्ष जांच करना है। हालांकि, पत्रकारों के फोन जब्त करने का निर्णय शायद टाला जा सकता था।”
SIT का कहना है कि पत्रकारों से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 179 और 94 के तहत पूछताछ की गई, जो मामले की जानकारी रखने वालों को समन भेजने की अनुमति देती है।
प्रेस क्लब और भाजपा का कड़ा विरोध
चेन्नई प्रेस क्लब ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। प्रेस क्लब के बयान में कहा गया, “यह कदम पत्रकारों को डराने-धमकाने और उनकी स्वतंत्रता को कुचलने के लिए उठाया गया है। इससे रिपोर्टर्स के संपर्कों और सूचनाओं के स्रोतों को भी खतरा है। हम सभी जब्त किए गए उपकरणों की तुरंत वापसी की मांग करते हैं।”
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भी इस कार्रवाई को “मूर्खतापूर्ण” बताते हुए डीएमके सरकार पर मीडिया के खिलाफ दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पत्रकारों का काम जनता तक जानकारी पहुंचाना है। भारत में हम रिपोर्टर्स से उनके सूत्र नहीं पूछते, लेकिन यहां तो पत्रकारों को अपराधी जैसा ट्रीट किया जा रहा है।”
हाईकोर्ट ने किया दखल से इनकार
मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करें। न्यायमूर्ति एस. एम. सुब्रमण्यम ने कहा, “अगर पत्रकारों ने कुछ भी गलत नहीं किया है, तो वे पुलिस के सामने पेश होकर अपनी बात रखें।”
इस प्रकरण को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने भी आज आपत्ति दर्ज कराई है। गिल्ड ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन बताया है और तत्काल पत्रकारों के मोबाइल उपकरणों को लौटाने की मांग की है। साथ ही गिल्ड ने पत्रकारों को व्हाट्सएप के जरिए समन भेजने पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
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Rohit MH Gupta
February 2, 2025 at 5:08 pm
चेन्नई में भाजपा मीडिया की स्वतंत्रता की बात कर रही है वहीं प्रयागराज संगम महाकुंभ 2025 भगदड़ में पत्रकारों को मारापीटा जा रहा है उन्हें कवरेज़ करने से रोका जा रहा है उत्तर प्रदेश में क्या अलग नियम कानून है,दोहरी राजनीति दोहरा चरित्र, क्या सही क्या गलत, बाकी सब रब राखा।।