दिल्ली में चल रही एआई इंपैक्ट समिट से ताजा खबर है कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी को उसके फर्जीवाड़े के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। गलगोटिया को अपना बोरिया बिस्तर समेटकर समिट छोड़ने का फरमान सुनाया गया है। ताज्जुब की बात तो ये है कि एक तरफ गलगोटिया को AI समिट एक्सपो का पवेलियन खाली करने को कहने के बावजूद भी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर खुद को किस तरह जस्टिफाई कर रही है। देखें-पढ़ें…
सौमित्र राय-
सोशल मीडिया की एक और बड़ी जीत। गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI समिट एक्सपो का पवेलियन खाली करने को कह दिया गया है।
नोएडा की इस चोर, मक्कार यूनिवर्सिटी को फौरन अपना सामान उठाकर जाने को बोला गया है। फिर भी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह खुद को बेशर्मी से जस्टिफाई कर रही है।
झूठ, मक्कारी और ठगी के खिलाफ हमारा अभियान जारी रहेगा। सतर्क रहें, सजग रहें, सावधान रहें।
याद रहे– ये वही गलगोटिया है, जिसने कोविड काल में रिसर्च की थी कि ताली–थाली, पुंगी, घंटी, घंटा, शंख बजाने से कोरोना वायरस खत्म होते हैं।
उसके बाद ही नरेंद्र मोदी, शिवराज सिंह चौहान और रामदास आठवले जैसे मूर्ख सामने आए थे। हम आपको भूलने नहीं देंगे।

एस प्रमोद-
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का सपना, चीन का रोबोट अपना! लेकिन इसमें दिक्कत भी क्या है चीन वाले भी तो हमारा बहुत कुछ ले रहे हैं। हम बदले में एक रोबोट भी नहीं ले सकते।
गोदी मीडिया ऐसे पीछे पड़ गया हैं जैसे कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के छात्रों, चिंता मत करो, क्यों कि ये चाइना की बात है इसलिये जनता तुम्हारे साथ हैं। जय सिया राम!
राष्ट्रीय जनता दल का ट्वीट-
AI Submit में भारत की वैश्विक बेइज्जती करवाने वाले लोगों पर देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए। 2 लाख के चीनी रोबोट को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपना बता कर उसे 350 करोड़ का बता दिया। सरकारी चैनल डीडी न्यूज़ पर इंटरव्यू भी दे दिया।
यूनिवर्सिटी के मालिक, इंटरव्यू देने वाली महिला, झूठा इंटरव्यू करने वाले पत्रकार तथा उन्हें अनुमति देने वाले भारत सरकार के IT मंत्री की पृष्ठभूमि की जांच करने पर झूठ फरेब व साँठगाँठ का पर्दाफाश होगा। इन सभी में कोई ना कोई बात ज़रूर सामान्य होगी। लाखों में फीस लेने वाली गलगोटिया जैसी निजी यूनिवर्सिटीज बच्चों का जीवन बर्बाद करती है।
राकेश कायस्थ-
माननीय प्रधानमंत्री जी के हवाले आज के अख़बारों ने खबर छापी है कि भारत आनेवाली दिनों में एआई की तीन महाशक्तियों में शामिल होगा। यह सपना किस तरह पूरा किया जाएगा इसका नमूना मोदीजी को आदर्श मानने गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने दिल्ली के एआई इंपैक्ट समिट में पेश कर दिया।
यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन बिकने वाले एक चाइनीज़ रोबोट को समिट में यह कहते हुए पेश किया कि ये उनका इन हाउस डेवलपमेंट है। बाद में गलगोटिया ने खंडन किया कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था।
हिंदुस्तान टाइम्स खंडन वाली खबर के साथ वो वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें यूनिवर्सिटी की एक प्रोफसर रोबोट का परिचय इन हाउस प्रोडक्ट के तौर पर दे रही हैं। इतना ही नहीं मैडम ये दावा भी कर रही है कि यूनिवर्सिटी ने 350 करोड़ रुपये की लागत से एआई लैब स्थापित करने की योजना बनाई है। वीडियो देखने के लिेए हिंदुस्तान टाइम्स का लिंक क्लिक कीजिये।
यह बताना भी दिलचस्प होगा पिछले वित्त वर्ष में भारत का एआई बजट 173 करोड़ (स्रोत- ग्रोक) रुपये था। गलगोटिया वही यूनिवर्सिटी है, जिसके छात्रों ने पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान सरकार के समर्थन और कांग्रेस के विरोध में मोर्चा निकाला था। कांग्रेस का विरोध किस बात पर था और प्रदर्शन में क्या हुआ था, ये जानने के लिए कमेंट बॉक्स में साझा किया गया क्लिप देखिये।
2047 में भारत विकसित देश इसी फॉर्मूले से बनेगा। जय हो
भारत समाचार ने अपने एफबी पेज पर क्या लिखा है- पढ़िए
नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी के फर्जीवाड़े ने देश भर को अचरज में डाल दिया। विश्वस्तरीय AI समिट में गलगोटिया की इस हरकत से दुनिया भर में भारत की छवि को आघात पहुंचाया। फिलहाल इस यूनिवर्सिटी को भारत मंडपम से भगा दिया गया लेकिन इनके कारनामों की करतूत से पूरा सोशल मीडिया भरा पड़ा है।
चाइनीज रोबोटिक कुत्ते को अपना आविष्कार और उस पर 350 करोड़ का निवेश का गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने दावा किया था। लेकिन ये चाइनीज रोबोटिक कुत्ता ऑनलाइन वेबसाइट्स पर ढाई लाख में मिलता है। इसका गलगोटिया यूनिवर्सिटी से कोई लेना देना नहीं। लेकिन यूनिवर्सिटी ने AI सम्मिट मे इसको अपने प्रोडक्ट के तौर पर पेश किया।
ऑनलाइन फैक्ट चेक के जमाने में इस फ्रॉड की पोल तत्काल खुल गई और उसके बाद सोशल मीडिया पर बाढ़ आ गई गलगोटिया यूनिवर्सिटी के इस फ्रॉड के खिलाफ। सरकार ने गलगोटिया को फौरन दफा हो जाने का हुक्म दिया। लेकिन यूनिवर्सिटी की ढिठाई ये थी इस फ्रॉड का चेहरा बनी नेहा सिंह और उसके साथी आज भी समिट स्थल पर घूम घूम कर अपने कारनामों को नया रूप दे रहे हैं।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर पेटेंट शुल्क में मिलने वाली सब्सिडी में गोलमाल करने के आरोप भी लग रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी को ऐसे आयोजनों में प्रतिबंधित किया जाएगा या नहीं?
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